देवी के दुर्गा नाम का क्या है महत्व जानते हैं?

हम सब एक अदृश्य जगमगाती ब्रह्मांडीय शक्ति के ओज में तैर रहे हैं जिसे ‘देवी‘ कहा गया है। देवी या देवी माँ इस सम्पूर्ण सृष्टि का गर्भ स्थान है। वह गतिशीलता, ओज, सुंदरता, धैर्य, शांति और पोषण की बीज हैं। वह जीवन ऊर्जा शक्ति हैं। एक मां को अपने बच्चे के लिये पूरा प्रेम होता है। देवी मां को भी अपने बच्चों के लिये हर हाल में असीम प्रेम है जिसमें इस सम्पूर्ण जगत के सभी जीव शामिल हैं।

नवरात्रि के नौ रातों में देवी के सभी नाम रुपों की आराधना की जाती है। नामों का अपना एक महत्व होता है। हम चंदन के वृक्ष को उसके सुगंध की स्मृति द्वारा याद करते हैं। देवी का हरेक नाम और रुप दिव्य शक्ति के एक विलक्षण गुण या स्वरुप का प्रतीक है। हम उस रूप को याद करके या देवी के उन नामों का उच्चारण करके हम उन दिव्य गुणों को अपनी चेतना में जगाते हैं जो कि आवश्यकता पड़ने पर हमारे अंदर प्रकट हो जाते हैं।

नाम रूप वाले बाहरी स्थूल जगत से ऊर्जा के सूक्ष्म जगत की ओर की यात्रा ही नवरात्रि है, जिसका आह्वान विभिन्न यज्ञों द्वारा किया जाता है और जो कि हमें अन्तःकरण की गहराईयों में ले जाकर आत्मसाक्षात्कार कराती है। पहले तीन दिनों तक देवी के दुर्गा स्वरुप की आराधना करते है। दुर्गा का एक अर्थ पहाड़ी होता है। बहुत कठिन कार्य के लिये प्रायः दुर्गम कार्य कहा जाता है।

दुर्गा की उपस्थिति में नकारात्मक तत्व कमजोर पड़तें हैं। दुर्गा को ‘‘जय दुर्गा‘‘भी कहते हैं या जो विजेता बनाती है। वे दुर्गति परिहारिणी हैं – वे जो विघ्नों को हरण कर लेती हैं। वे नकारात्मकता को सकारात्मकता में परिवर्तित करती है। कठिनाइयों को भी उनके समक्ष खड़े होने में कठिनता अनुभव होती है।

देवी को शेर या चीते पर सवारी करते हुये दिखाया गया है, जो कि साहस और वीरता का प्रतीक है – यही दुर्गा देवी का मूल सार है। नवदुर्गा दुर्गा शक्ति के नौ स्वरूप हैं जो कि नकारात्मकता के प्रति एक ढाल का काम करती हैं। जब आपके सामने कोई बाधा हो या कोई मानसिक रुकावट तो उनके ये गुण याद करने से उन रुकावटों को दूर कर सकते हैं।

विशेषकर जब मनुष्य चिंता, आत्मसंशय या स्वयं की योग्यता पर शंका, अभाव की भावना, शत्रु का भय और नकारात्मकता से भरा हो तो देवी के इन नामों का उच्चारण करना चाहिये, इन मंत्रों से हमारी चेतना का उत्थान होता है और हम अधिक केंद्रित, साहसी और अविचलित होने लगते हैं। देवी के दुर्गा स्वरूप का यही महत्व है।