Archive for April, 2016

श्री बड़े गणपतिजी का मंदिर, उज्जैन

श्री बड़े गणपतिजी का मंदिर
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे तथा प्रवचन हॉल के सामने श्री गणेशजी की विशालकाल एवं अत्यंत आकर्षक मूर्ति प्रतिस्थापित है। इस मंदिर का निर्माण 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में महर्षि सांदीपनि के वंशज एवं विख्यात ज्योतिषविद् स्व. पं. नारायणजी व्यास द्वारा करवाया गया था। यह स्थान स्व. व्यासजी का उपासना स्थल भी रह चुका है। इस मंदिर में पंचमुखी हनुमानजी की अत्यंत आकर्षक मूर्ति प्रतिष्ठित है। इसके अतिरिक्त भीतरी भाग में, पश्चिम दिशा की ओर नवग्रहों की मूर्तियां हैं।





ज्योतिष एवं संस्कृत के विख्यात केंद्र के रूप में विकस‍ित यह स्थान हजारों छात्रों को अब तक शिक्षा प्रदान कर चुका है। श्री नारायण विजय पंचांग का प्रकाशन भी यहां से होता है। स्व. पं. नारायणजी व्यास के पुत्र प्रकांड विद्वान स्व. पं. सूर्यनारायण जी व्यास ने ज्योतिष, साहित्य और इतिहास के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दिया है। 

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 14, 2016 at 9:51 am

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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
आकाशे तारकं लिंगं, पाताले हाटकेश्वरम्।
मृत्युलोके च महाकालौ: लिंगत्रय नमोस्तुते।।





अर्थात् ब्रह्मांड में सर्वपूज्य माने गए तीनों लिंगों में भूलोक में स्‍थित भगवान महाकाल प्रधान हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों में इनकी गणना होती है। उज्जैन के प्रथम और शाश्वत शासक भी महाराजाधिराज श्री महाकाल ही हैं, तभी तो उज्जैन को महाकाल की नगरी कहा जाता है। दक्षिणमुखी होने से इनका विशेष तांत्रिक महत्व भी है। ये कालचक्र के प्रवर्तक हैं तथा भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले बाबा महाकालेश्वर के दर्शन मात्र से ही प्राणिमात्र की काल मृत्यु से रक्षा होती है, ऐसी शास्त्रों की मान्यता है। 
भारत के नाभिस्थल में, कर्क रेखा पर स्थित श्री महाकाल का वर्णन रामायण, महाभारत आदि पुराणों एवं संस्कृत साहित्य के अनेक काव्य ग्रंथों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। कहा जाता है कि इस अतिप्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार राजा भोज के पु‍त्र उदयादित्य ने करवाया था। उसके पश्चात पुन: जीर्ण होने पर 1734 में तत्कालीन दीवान रामचन्द्रराव शेणवी ने इसका फिर से जीर्णोद्धार करवाया। मंदिर के तल मंजिल पर महाकाल का विशाल लिंग स्थित है जिसकी जलाधारी का मुख पूर्व की ओर है। साथ ही पहली मंजिल पर ओंकारेश्वर तथा दूसरी मंजिल पर नागचन्द्रेश्वर की प्रतिमाएं स्थित हैं। 
स्मरण रहे कि भगवान नागचन्द्रेश्वर के दर्शन वर्ष में केवल 1 ही बार, अर्थात नागपंचमी पर होते हैं। महाकाल के दक्षिण में वृद्धकालेश्वर, अनादि कल्पेश्वर तथा सप्तऋषियों के मंदिर स्‍थित हैं, जबकि इसके उत्तर में चन्द्रादित्येश्वर, देवी अवन्तिका, बृहस्पतेश्वर, स्वप्नेश्वर तथा समर्थ रामदास द्वारा स्था‍पित श्री हनुमानजी का मंदिर है। इसके पश्चिम में कौटितीर्थ नामक कुंड है एवं समीप ही रुद्र-सरोवर भी स्थित है।
पूरे भारतवर्ष में यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, जहां ताजी चिताभस्म से प्रात: 4 बजे भस्म आरती होती है। उस समय पूरा वातावरण अत्यंत मनोहारी एवं शिवमय हो जाता है। 





श्रावण मास तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां पर विशेष उत्सव होते हैं। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को महाराजाधिराज महाकालेश्वर की सवारी निकाली जाती है। पूरे शहर को इस अवसर पर वंदनवारों एवं विद्युत बल्बों से सजाया जाता है। यह सवारी मंदिर प्रांगण से निकलकर शिप्रा तट तक जाती है। देश के कोने-कोने से लोग महाकाल के दर्शन हेतु उज्जैन आते रहते हैं। महापर्वों एवं विशेष अवसरों पर भीड़ अधिक होती है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि मुस्लिम समुदाय के बैंड-बाजे वाले भी श्री महाकाल की सवारी में अपना नि:शुल्क योगदान देते हैं। यह हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द का अनूठा उदाहरण है। 



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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 9:48 am

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ईको बाबा ने डेढ़ सौ किलोमीटर लंबी काली बीन नदी को नया जीवन दिया

सड़ चुकी नदी के लिए मसीहा बना ये शख्स, बिना सरकारी मदद किया कमाल

लगन और जज्बा हो तो इंसान पहाड़ का सीना चीर डालता है और नदियों का रुख मोड़ डालता है। कुछ ऐसा ही जज्बा है ईको बाबा के भीतर जिन्होने बिना सरकारी मदद के डेढ़ सौ किलोमीटर लंबी काली बीन नदी को नया जीवन दिया।स्वार्थी जमाने के ठीक उलट निःस्वार्थ भाव से समाज सेवा का बीड़ा उठाने वाले पंजाब के बलबीर सिंह एक ऐसे शख्स हैं जिन्होंने नदी साफ करने की कसम को हर हाल में पूरा कर डाला। बलबीर सिंह बिना किसी सरकारी मदद के ही 160 किमी लंबी नदी की सफाई कर चर्चा और प्रेरणा का विषय बन चुके हैं।बलबीर सिंह के काम लिए अब उन्हें इको बाबा के नाम से भी जाना जाता है। स्वयं सेवकों के जरिए उन्होंने जिस तरह पूरी नदी की सफाई की वह ध्यान देने योग्य है।

बाबा के रूप में निकली आशा की किरण

पंजाब के चर्चित पर्यावरणविद और समाजसेवी बलबीर सिंह ने सन 2000 में निर्णय लिया था कि वह गांवों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी को स्‍थानीय काली बीन नदी में जाने से रोकेंगे जो नदी को समाप्त कर रहा था।द बेटर इंडिया के अनुसार, उस वक्त यह नदी पूरे प्रदेश में गंदगी की वजह से उपेक्षा का शिकार बनी हुई थी। कुछ इलाको में तो नदी सूख भी चुकी थी और कूड़े कचरे का मुख्य स्थल बन चुकी थी।नदी की इस दुर्दशा के कारण स्‍थानीय किसानों को पानी की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा था। तभी ईको बाबा बलबीर सिंह के रूप में एक आशा की किरण सामने आई।

बाबा के कहने पर तैयार हुए 24 गांव के लोग

बाबा ने नदी की गंदगी और जल संकट को देखते हुए गांव-गांव जाकर नदी की सफाई के बारे में लोगों को जागरूक किया और नदी की सफाई में सहयोग करने के लिए लोगों को तैयार किया।ईको बाबा को सरकारी मदद की न तो उम्मीद थी और न ही सरकारी मदद मिली। उन्होंने ये काम चंदे और श्रमदान के बल पर किया। 24 गांव के लोगों ने बाबा के साथ मिलकर नदी की सफाई का काम शुरू किया।बाबा बलबीर सिंह और उनके स्वयं सेवकों ने मिलकर अपने हाथ से नदी की सफाई की और नदी में गंदा पानी छोड़ने पर भी पाबंदी लगाई। ग्रामीणों ने नदी में जमा गोंद और खरपतवार को जड़ से साफ किया।

मेहनत को देखकर सरकार भी झुकी

कई महीनों तक चले सफाई अभियान के बाद जब बरसात आई तो नदी फिर पहले की तरह ही पानी से भर गई और अपनी निश्चल जल धारा को वापस पाने में कामयाब हो गई।सरकार ने इको बाबा के इस काम को सराहा और नदी से दूर भूमिगत नाला बनवाने की उनकी मांग स्वीकार की। इस नाले के बनने से सीवर का पानी नदी में गिरना बंद हो गया।बताया जा रहा है कि बाबा बलबीर सिंह अब तक कई स्कूल कॉलेज बनवाने जैसे काम भी कर चुके हैं। इनके मार्गदर्शन पर अब योगधारी टेक्निकल रिचर्स सेंटर भी स्‍थापित हुआ है।

2 comments - What do you think?  Posted by admin - April 12, 2016 at 8:23 am

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Ramkund replenished, 1.25L pilgrims take holy dip

Amid all the grievances of environment activists and local citizens against the civic administration, pilgrims offered prayers and took a holy dip in Ramkund on the auspicious occasions of Kumbh Parva and Gudi Padwa on Friday .Ramkund, the sacred bathing ghat on the Godavari, was filled with water from Gandhi Talav, wells and bore wells.

Moreover, around 50 tankers of private operators as well as the Nashik Municipal Corporation (NMC) also supp lied water on the occasion till Friday afternoon.

Officials said the process of filling water in Ramkund through multiple sources was on till late in the evening.

Around 1.25 lakh pilgrims from different parts of the country turned up to take a holy dip in Ramkund.

1 comment - What do you think?  Posted by admin - April 9, 2016 at 6:55 am

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मां सरस्वती के ये 11 नाम परीक्षा में दिलाएंगे सफलता

 

मां शारदा की स्‍तुति करने से खत्‍म होगा परीक्षा का तनाव

विद्या और बुद्धि की देवी मां शारदा की कृपा जिस पर हो जाए उसका भविष्‍य उज्‍जवल होने से कोई रोक ही नहीं सकता. परीक्षाएं सिर पर हैं और अशांत दिमाग पढ़ाई में मन लगने नहीं दे रहा हैं तो मां सरस्‍वती की आराधना करने से आपकी यह समस्‍या आसानी से सुलझ सकती है.

अगर आप मां सरस्वती के मंत्र और श्लोक नहीं जानते हैं तो इन 11 नामों को 11 बार जपें. बुद्धि की देवी के ये नाम आपको परीक्षा की चिंता से और असफलता के भय को दूर करने में आपकी मदद करेंगे. पढ़ाई के साथ ही सरस्‍वती मां के ये नाम आपकी तरक्‍की, अच्‍छी नौकरी, पदोन्‍नति और अन्‍य कई तरह की बाधाओं से पार लगाने में भी लाभदायक हैं.

मां सरस्‍वती के 11 नाम
जय मां शारदा
जय मां सरस्वती
जय मां भारती
जय मां वीणावादिनी
जय मां बुद्धिदायिनी
जय मां हंससुवाहिनी
जय मां वा‍गीश्वरी
जय मां कौमुदी प्रयुक्ता
जय मां जगत ख्यात्वा
जय मां नमो चंद्रकांता
जय मां भुवनेश्वरी

इस उपाय के अलावा आप परीक्षा का तनाव कम करने के लिए देवी के एक आसान से मंत्र का जाप भी कर सकते हैं. यह मंत्र यूं आसानी से याद हो जाता है लेकिन अगर आप याद ना कर सकें तो इसे लाल स्याही से लिखकर स्टडी टेबल या दीवार पर पर लगा लें. इससे इसे याद करने और पढ़ने में आसानी रहेगी.

आइए पढ़ें यह विशेष मंत्र…..
शारदायै नमस्तुभ्यं, मम ह्रदय प्रवेशिनी,
परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।।

 

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 8, 2016 at 10:57 am

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भगवान गणेश को पत्ते चढाएं और हर परेशानी को दूर करें

 

श्री गणेश पूजन

प्रथम पूज्य गणेश को खुश करने के लिए विशेष रूप से दूब, फूल, लड्डू और मोदक चढ़ाने का विधान है. लेकिन भोलेनाथ के पुत्र की कृपा केवल पत्ते अर्पित करके भी पाई जा सकती है. आइए जानें कि गणपति की उपासना में पत्तों का क्या महत्व है….

भगवान गणेश की उपासना का महत्व :
– भगवान गणेश को मंगलमूर्ति कहा जाता है.
– इनकी उपासना से सारे विघ्न और बाधाएं दूर हो जाती हैं.
– संतान, शिक्षा और भाग्य के लिए भगवान गणेश की उपासना सबसे उत्तम है.
गणपति की उपासना से कुंडली के अशुभ योग भी नष्ट हो जाते हैं.

पत्तों से की गई विघ्नहर्ता की उपासना के लाभ :
– हर पत्ते का अलग रंग और अलग खुशबू होती है.
– इनके रंग और गंध अलग-अलग ग्रहों से जुड़े होते हैं.
– यही पत्ते अलग-अलग मंत्रों के साथ श्री गणेश को चढ़ाए जाते हैं.
– खास तरीके से गणपति को अलग-अलग पत्ते अर्पित करने से मनवांछित फल मिलता है.

गणपति को कैसे चढ़ाएं पत्ते :
– बुधवार या चतुर्थी को श्री गणेश को पत्ते अर्पित करें.
– सुबह नहाकर गणपति के सामने घी का दीपक जलाएं.
– फिर उन्हें मोदक का भोग लगाएं.
– अपनी मनोकामना के अनुसार मंत्रों के साथ अलग-अलग पत्ते गणपति को अर्पित करें.
– एक बार में कम से नौ पत्ते चढ़ाएं, 108 पत्ते भी अर्पित कर सकते हैं.

कौन से मंत्र के साथ कौन सा पत्ता अर्पित करें :
– उच्च पद प्राप्ति के लिए – ‘गणाधीशाय नमः’ कहकर भंगरैया का पत्ता अर्पित करें.
– संतान प्राप्ति के लिए – ‘उमापुत्राय नमः’ कहकर बेलपत्र चढ़ाएं.
– अच्छे स्वास्थ्य के लिए – ‘लम्बोदराय नमः’ कहकर बेर का पत्ता अर्पित करें.
– कार्य की बाधा दूर करने के लिए – ‘वक्रतुण्डाय नमः’ कहकर सेम का पत्ता अर्पित करें.
– मान-सम्मान, यश की प्राप्ति के लिए – ‘चतुर्होत्रे नमः’ कहकर तेजपत्ता चढ़ाएं.
– नौकरी के लिए – ‘विकटाय नमः’ कहकर कनेर का पत्ता चढ़ाएं.
– व्यवसाय में लाभ के लिए – ‘सिद्धिविनायकाय नमः’ कहकर केतकी का पत्ता अर्पित करें.
– आर्थिक लाभ के लिए – ‘विनायकाय नमः’ कहकर आक का पत्ता चढ़ाएं.
– ह्रदय रोग में लाभ के लिए – ‘कपिलाय नमः’ कहकर अर्जुन का पत्ता अर्पित करें.
– शनि की पीड़ा को शांत करने के लिए – ‘सुमुखाय नमः’ कहकर शमी का पत्ता अर्पित करें.

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जानें क्‍या है पवित्र 51 शक्तिपीठ की कथा

 

शक्ति पीठ पूरे भारत के अलग-अलग स्‍थानों पर स्थापित हैं

मां दुर्गा के नौ स्‍वरूपों के बारे में हर कोई जानता है और नवरात्रि में मां के इन्‍हीं रूपों की आराधना की जाती है. हिंदू धर्म में नवदुर्गा पूजन के समय ही मां के मंदिरों में भी भक्‍तों का तांता लगता है और उनमें भी मां के शक्तिपीठों का महत्‍व अलग ही माना जाता है.

पवित्र शक्ति पीठ पूरे भारत के अलग-अलग स्‍थानों पर स्थापित हैं. देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है तो देवी भागवत में 108 और देवी गीता में 72 शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है, वहीं तन्त्र चूड़ामणि में 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं. देवी पुराण के मुताबिक 51 शक्तिपीठ में से कुछ विदेश में भी स्थापित हैं. भारत में 42, पाकिस्तान में 1, बांग्लादेश में 4, श्रीलंका में 1, तिब्बत में 1 तथा नेपाल में 2 शक्तिपीठ हैं.

शक्तिपीठ की पौराणिक कथा
मां के 51 शक्तिपीठों की एक पौराणिक कथा के अनुसार राजा प्रजापति दक्ष की पुत्री के रूप में माता दुर्गा ने सती के रूप में जन्म लिया था और भगवान शिव से उनका विवाह हुआ था. एक बार मुनियों के एक समूह ने यज्ञ आयोजित किया. यज्ञ में सभी देवताओं को बुलाया गया था. जब राजा दक्ष आए तो सभी लोग खड़े हो गए लेकिन भगवान शिव खड़े नहीं हुए. भगवान शिव दक्ष के दामाद थे.

यह देख कर राजा दक्ष बेहद क्रोधित हुए. अपने इस अपमान का बदला लेने के लिए सती के पिता राजा प्रजापति दक्ष ने भी एक यज्ञ का आयोजन किया. उस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन उन्होंने जान-बूझकर अपने जमाता भगवान शिव को इस यज्ञ का निमंत्रण नहीं भेजा.

भगवान शिव इस यज्ञ में शामिल नहीं हुए और जब नारद जी से सती को पता चला कि उनके पिता के यहां यज्ञ हो रहा है लेकिन उन्हें निमंत्रित नहीं किया गया है. यह जानकर वे क्रोधित हो उठीं. नारद ने उन्हें सलाह दी कि पिता के यहां जाने के लिए बुलावे की जरूरत नहीं होती है. जब सती अपने पिता के घर जाने लगीं तब भगवान शिव ने उन्हें समझाया लेकिन वह नहीं मानी तो प्रभु ने स्वयं जाने से इंकार कर दिया.

शंकर जी के रोकने पर भी जिद कर सती यज्ञ में शामिल होने चली गईं. यज्ञ-स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित न करने का कारण पूछा और पिता से उग्र विरोध प्रकट किया. इस पर दक्ष, भगवान शंकर के बारे में सती के सामने ही अपमानजनक बातें करने लगे. इस अपमान से पीड़ित सती ने यज्ञ-कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी.

भगवान शंकर को जब यह पता चला तो क्रोध से उनका तीसरा नेत्र खुल गया. ब्रम्हाण्ड में प्रलय व हाहाकार मच गया. शिव जी के आदेश पर वीरभद्र ने दक्ष का सिर काट दिया और अन्य देवताओं को शिव निंदा सुनने की भी सजा दी. भगवान शंकर ने यज्ञकुंड से सती के पार्थिव शरीर को निकाल कंधे पर उठा लिया और दुःखी होकर सारे भूमंडल में घूमने लगे.

भगवती सती ने शिवजी को दर्शन दिए और कहा कि जिस-जिस स्थान पर उनके शरीर के अंग अलग होकर गिरेंगे, वहां महाशक्तिपीठ का उदय होगा. सती का शव लेकर शिव पृथ्वी पर घूमते हुए तांडव भी करने लगे, जिससे पृथ्वी पर प्रलय की स्थिति उत्पन्न होने लगी. पृथ्वी समेत तीनों लोकों को व्याकुल देखकर भगवान विष्णु अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर धरती पर गिराते गए. जब-जब शिव नृत्य मुद्रा में पैर पटकते, विष्णु अपने चक्र से माता के शरीर का कोई अंग काटकर उसके टुकड़े पृथ्वी पर गिरा देते.

शास्‍त्रों के अनुसार इस प्रकार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, उनके वस्त्र या आभूषण गिरे , वहां-वहां शक्तिपीठ का उदय हुआ. इस तरह कुल 51 स्थानों में माता के शक्तिपीठों का निर्माण हुआ. अगले जन्म में सती ने राजा हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया और घोर तपस्या कर शिव को पुन: पति रूप में प्राप्त किया.

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 10:36 am

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ज्योतिष : सात दिन के सात लकी कलर

सात दिन के सात लकी कलर

रंग व्यक्तित्व को निखारते हैं। खुशी का अहसास कराते हैं। रंगों का अपना एक विशेष महत्व है। मन की भावनाएं भी दर्शाते हैं तो क्या रंग हमारे भाग्य को तय करने में भी कोई भूमिका निभाते हैं? कुछ रंगों से हमारा अच्छा तालमेल होता है, जो हमें ‘पॉजीटिव एनर्जी’ देते हैं। इसलिए कुछ खास रंग हमें ज्यादा आकर्षित करते हैं। लेकिन ज्योतिष पर यकीन करने वाले भी दिन के लिहाज से रंगों का चयन करने लगे हैं।

रविवार –इस दिन गुलाबी, सुनहरे और संतरी रंग का विशेष महत्व है। लेकिन खिले-खिले रंगों के पुराने परिधानों को रविवार के दिन पहनने से सप्ताह भर की थकान दूर हो जाती है।

इस दिन नए कपड़े नहीं पहनने की सलाह दी जाती है।

सोमवार – सोमवार यानी चंद्रमा का दिन । इसलिए इस दिन का रंग है सफेद, चमकीला या सिल्वर कलर। इस दिन क्रीम, आसमानी और हल्का पीला भी पहना जा सकता है। लेकिन निर्विवाद रूप से सफेद पहनना शुभ होता है। दिन को खुशनुमा व शांतिपूर्ण चाहते हैं तो सफेद के सिवा कोई दूसरा रंग मत सोचिए।

मंगलवार – मंगलवार हनुमान जी का दिन है। इसलिए इस दिन का विशेष रंग है भगवा, जिसे ऑरेंज कलर कहते हैं। इस दिन के ग्रह ‘मंगल’ के हिसाब से चैरी रेड या लाल के मिलते-जुलते शेड्स भी सौभाग्य के द्वार खोल सकते हैं।

बुधवार – बुधवार देव गणपति का, जिन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है दूर्वा। इसलिए इस दिन हरे कलर का महत्व है। बुध ग्रह स्वयं भी हरे रंग का होता है। अत: जिन लोगों की वाणी में अवरोध हो या जिनकी वाणी कर्कश हो उन्हें हल्का हरा रंग सूट करेगा। लेकिन जो लोग उग्र वाणी के हैं उन्हें श्वेत रंग पहनना चाहिए।

गुरुवार – बृहस्पति देव और साईं बाबा का है। बृहस्पति देव स्वयं पीले हैं, तो इस दिन का रंग है पीला।इस दिन पीले के अलावा सुनहरा, गुलाबी, नारंगी और पर्पल भी ट्राय कर सकते हैं। लेकिन पीले के सभी शेड उत्तम है। दिन विजयी होगा।

शुक्रवार – मां का दिन होता है, जो सर्वव्यापी जगत जननी हैं।। इस दिन हमेशा साफ-सुथरे उजले कपड़े पहनना चाहिए। इसलिए यह दिन सभी रंगों का मिक्स या प्रिंटेड कपड़ों का होता है। इस दिन विशेष रूप से गुलाबी के सारे शेड्स और रंगबिरंगे फ्लोरल प्रिंटेड परिधान पहने जा सकते हैं। लंबी धारी वाले, चैक्स और छोटी प्रिंट के कपड़े इस दिन पहनिए और सफलता हासिल कीजिए

शनिवार – इस दिन नीला कलर पहना जाता है। यह रंग मन के उतार-चढ़ाव का होता है। आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए जामुनी, बैंगनी, गहरा नीला और व्यवस्थित दिनचर्या के लिए नेवी ब्लू, स्काय ब्लू उचित रहेंगे। शनि अगर अनुकूल हो तो स्थिरता देते हैं। अत: इस दिन नीले के सारे शेड आपको सफलता देंगे।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 7, 2016 at 11:56 am

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हनुमान चालीसा की 5 चमत्कारी चौपाइयां, कर सकती हैं आपकी हर इच्छा पूरी

धार्मिक ग्रंथ

धार्मिक उपदेशों, ग्रंथों में वह ताकत है जो हमारे दुखों का निवारण करती है, इस बात में कोई संदेह नहीं है। जब भी हम परेशान होते हैं तो अपनी समस्या का हल पाने के लिए शास्त्रीय उपायों का इस्तेमाल जरूर करते हैं। इसे आप चमत्कार ही कह लीजिए, लेकिन शास्त्रों में हमारी हर समस्या का समाधान है।

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हनुमान चालीसा

यदि हम निर्देशों के अनुसार उपाय करते चले जाएं, तो सफल जरूर होते हैं। इसलिए आज हम आपको हनुमान चालीसा के माध्यम से कुछ ऐसे उपाय बताएंगे जो आपके जीवन को सुखी बना देने में सक्षम सिद्ध होंगे।
भगवान हनुमान को समर्पित

भगवान हनुमान को समर्पित हनुमान चालीसा के बारे में कौन नहीं जानता, गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रची गई हनुमान चालीसा में वह चमत्कारी शक्ति है जो हमारे दुखों को हर लेती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस चमत्कार का रहस्य क्या है?
एक पौराणिक कथा

चलिए इसका जवाब हम आपको एक पौराणिक कथा के द्वारा देते हैं…. यदि आप हनुमान जी के बाल अवतार से परिचित हैं तो शायद आपने यह कहानी सुन रखी होगी कि बचपन में जब हनुमानजी को काफी भूख लगी थी तो उन्होंने आसमान में चमकते हुए सूरज को एक फल समझ लिया था।
बाल हनुमान

उनके पास तब ऐसी शक्तियां थीं जिसके द्वारा वे उड़कर सूरज को निगलने के लिए आगे बढ़े, लेकिन तभी देवराज इन्द्र ने हनुमानजी पर शस्त्र से प्रहार कर दिया जिसके कारण वे मूर्छित हो गए।
जब हनुमान हुए मूर्छित

हनुमानजी के मूर्छित होने की बात जब वायु देव को पता चली तो वे काफी नाराज हुए। लेकिन जब सभी देवताओं को पता चला कि हनुमानजी भगवान शिव के रुद्र अवतार हैं, तब सभी देवताओं ने हनुमानजी को कई शक्तियां दीं।
देवतागण ने दिया आशीर्वाद

कहते हैं कि सभी देवतागण ने जिन मंत्रों और हनुमानजी की विशेषताओं को बताते हुए उन्हें शक्ति प्रदान की थी, उन्हीं मंत्रों के सार को गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में वर्णित किया है। इसलिए हनुमान चालीसा पाठ को चमत्कारी माना गया है।
हनुमान चालीसा की शक्ति

परंतु हनुमान चालीसा में तो कोई मंत्र है ही नहीं, फिर मंत्रों के बिना भी वह चमत्कारी प्रभाव देने में सक्षम कैसे है? दरअसल हनुमान चालीसा में मंत्र ना होकर हनुमानजी की पराक्रम की विशेषताएं बताई गईं हैं। कहते हैं इन्हीं का जाप करने से व्यक्ति सुख प्राप्त करता है।
पांच चौपाइयां

चलिए आपको बताते हैं हनुमान चालीसा की उन 5 चौपाइयों के बारे में, जिनका यदि नियमित सच्चे मन से वाचन किया जाए तो यह परम फलदायी सिद्ध होती हैं।
इस दिन करें जप

हनुमान चालीसा का वाचन मंगलवार या शनिवार को करना परम शुभ होता है। ध्यान रखें हनुमान चालीसा की इन चौपाइयों को पढ़ते समय उच्चारण में कोई गलती ना हो।

पहली चौपाइ

भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे।।
लाभ

इस चौपाइ का निरंतर जाप उस व्यक्ति को करना चाहिए जिसे किसी का भय सताता हो। इस चौपाइ का नित्य रोज प्रातः और सायंकाल में 108 बार जाप किया जाए तो सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
दूसरी चौपाइ

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
लाभ

यदि कोई व्यक्ति बीमारियों से घिरा रहता है, अनेक इलाज कराने के बाद भी वह सुख नही पा रहा, तो उसे इस चौपाइ का जाप करना चाहिए। इस चौपाइ का जाप निरंतर सुबह-शाम 108 बार करना चाहिए। इसके अलावा मंगलवार को हनुमान जी की मूर्ति के सामने बैठकर पूरी हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, इससे जल्द ही व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है।
तीसरी चौपाइ

अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
लाभ

यह चौपाइ व्यक्ति को समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। यदि किसी को भी जीवन में शक्तियों की प्राप्ति करनी हो, ताकि वह कठिन समय में खुद को कमजोर ना पाए तो नित्य रोज, ब्रह्म मुहूर्त में आधा घंटा इन पंक्तियों का जप करे, लाभ प्राप्त हो जाएगा।
चौथी चौपाइ

विद्यावान गुनी अति चातुर। रामकाज करिबे को आतुर।।
लाभ

यदि किसी व्यक्ति को विद्या और धन चाहिए तो इन पंक्तियों के जप से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। प्रतिदिन 108 बार ध्यानपूर्वक जप करने से व्यक्ति के धन सम्बंधित दुःख दूर हो जाते हैं।
पांचवीं चौपाइ

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।
लाभ

जीवन में ऐसा कई बार होता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद कार्य में विघ्न प्रकट होते हैं। यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है तो उपरोक्त दी गई चौपाइ का कम से कम 108 बार जप करें, लाभ होगा।

हनुमान चालीसा का महत्व

किंतु हनुमान चालीसा का महत्व केवल इन पांच चौपाइयों तक सीमित नहीं है। पूर्ण हनुमान चालीसा का भी अपना एक महत्व एवं इस पाठ को पढ़ने का लाभ है, जिससे आम लोग अनजान हैं।
हनुमान चालीसा का पाठ

बहुत कम लोग जानते हैं कि हिन्दू धर्म में हनुमान जी की आराधना हेतु ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ सर्वमान्य साधन है। इसका पाठ सनातन जगत में जितना प्रचलित है, उतना किसी और वंदना या पूजन आदि में नहीं दिखाई देता।
फलदायी

‘श्री हनुमान चालीसा’ के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी माने जाते हैं। इसीलिए ‘रामचरितमानस’ की भाँति यह हनुमान गुणगाथा फलदायी मानी गई है।
भक्तों का अनुभव

यह बात केवल कहने योग्य नहीं है, अपित्य भक्तों का अनुभव है कि हनुमान चालीसा पढ़ने से परेशानियों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है।
वंदना

तो यदि आप भी दिल से, पवनपुत्र हनुमान जी की भावपूर्ण वंदना करते हैं, तो आपको ना केवल बजरंग बलि का अपितु साथ ही श्रीराम का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।

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Sankantmochan Hanuman Ashtak

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Sankantmochan Hanuman Ashtak

Hanuman Ashtak

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