Chalisa

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - November 30, 2016 at 2:01 pm

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - August 25, 2016 at 4:28 pm

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 4:24 pm

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हनुमान चालीसा की 5 चमत्कारी चौपाइयां, कर सकती हैं आपकी हर इच्छा पूरी

धार्मिक ग्रंथ

धार्मिक उपदेशों, ग्रंथों में वह ताकत है जो हमारे दुखों का निवारण करती है, इस बात में कोई संदेह नहीं है। जब भी हम परेशान होते हैं तो अपनी समस्या का हल पाने के लिए शास्त्रीय उपायों का इस्तेमाल जरूर करते हैं। इसे आप चमत्कार ही कह लीजिए, लेकिन शास्त्रों में हमारी हर समस्या का समाधान है।

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हनुमान चालीसा

यदि हम निर्देशों के अनुसार उपाय करते चले जाएं, तो सफल जरूर होते हैं। इसलिए आज हम आपको हनुमान चालीसा के माध्यम से कुछ ऐसे उपाय बताएंगे जो आपके जीवन को सुखी बना देने में सक्षम सिद्ध होंगे।
भगवान हनुमान को समर्पित

भगवान हनुमान को समर्पित हनुमान चालीसा के बारे में कौन नहीं जानता, गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रची गई हनुमान चालीसा में वह चमत्कारी शक्ति है जो हमारे दुखों को हर लेती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस चमत्कार का रहस्य क्या है?
एक पौराणिक कथा

चलिए इसका जवाब हम आपको एक पौराणिक कथा के द्वारा देते हैं…. यदि आप हनुमान जी के बाल अवतार से परिचित हैं तो शायद आपने यह कहानी सुन रखी होगी कि बचपन में जब हनुमानजी को काफी भूख लगी थी तो उन्होंने आसमान में चमकते हुए सूरज को एक फल समझ लिया था।
बाल हनुमान

उनके पास तब ऐसी शक्तियां थीं जिसके द्वारा वे उड़कर सूरज को निगलने के लिए आगे बढ़े, लेकिन तभी देवराज इन्द्र ने हनुमानजी पर शस्त्र से प्रहार कर दिया जिसके कारण वे मूर्छित हो गए।
जब हनुमान हुए मूर्छित

हनुमानजी के मूर्छित होने की बात जब वायु देव को पता चली तो वे काफी नाराज हुए। लेकिन जब सभी देवताओं को पता चला कि हनुमानजी भगवान शिव के रुद्र अवतार हैं, तब सभी देवताओं ने हनुमानजी को कई शक्तियां दीं।
देवतागण ने दिया आशीर्वाद

कहते हैं कि सभी देवतागण ने जिन मंत्रों और हनुमानजी की विशेषताओं को बताते हुए उन्हें शक्ति प्रदान की थी, उन्हीं मंत्रों के सार को गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में वर्णित किया है। इसलिए हनुमान चालीसा पाठ को चमत्कारी माना गया है।
हनुमान चालीसा की शक्ति

परंतु हनुमान चालीसा में तो कोई मंत्र है ही नहीं, फिर मंत्रों के बिना भी वह चमत्कारी प्रभाव देने में सक्षम कैसे है? दरअसल हनुमान चालीसा में मंत्र ना होकर हनुमानजी की पराक्रम की विशेषताएं बताई गईं हैं। कहते हैं इन्हीं का जाप करने से व्यक्ति सुख प्राप्त करता है।
पांच चौपाइयां

चलिए आपको बताते हैं हनुमान चालीसा की उन 5 चौपाइयों के बारे में, जिनका यदि नियमित सच्चे मन से वाचन किया जाए तो यह परम फलदायी सिद्ध होती हैं।
इस दिन करें जप

हनुमान चालीसा का वाचन मंगलवार या शनिवार को करना परम शुभ होता है। ध्यान रखें हनुमान चालीसा की इन चौपाइयों को पढ़ते समय उच्चारण में कोई गलती ना हो।

पहली चौपाइ

भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे।।
लाभ

इस चौपाइ का निरंतर जाप उस व्यक्ति को करना चाहिए जिसे किसी का भय सताता हो। इस चौपाइ का नित्य रोज प्रातः और सायंकाल में 108 बार जाप किया जाए तो सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
दूसरी चौपाइ

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
लाभ

यदि कोई व्यक्ति बीमारियों से घिरा रहता है, अनेक इलाज कराने के बाद भी वह सुख नही पा रहा, तो उसे इस चौपाइ का जाप करना चाहिए। इस चौपाइ का जाप निरंतर सुबह-शाम 108 बार करना चाहिए। इसके अलावा मंगलवार को हनुमान जी की मूर्ति के सामने बैठकर पूरी हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, इससे जल्द ही व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है।
तीसरी चौपाइ

अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
लाभ

यह चौपाइ व्यक्ति को समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। यदि किसी को भी जीवन में शक्तियों की प्राप्ति करनी हो, ताकि वह कठिन समय में खुद को कमजोर ना पाए तो नित्य रोज, ब्रह्म मुहूर्त में आधा घंटा इन पंक्तियों का जप करे, लाभ प्राप्त हो जाएगा।
चौथी चौपाइ

विद्यावान गुनी अति चातुर। रामकाज करिबे को आतुर।।
लाभ

यदि किसी व्यक्ति को विद्या और धन चाहिए तो इन पंक्तियों के जप से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। प्रतिदिन 108 बार ध्यानपूर्वक जप करने से व्यक्ति के धन सम्बंधित दुःख दूर हो जाते हैं।
पांचवीं चौपाइ

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।
लाभ

जीवन में ऐसा कई बार होता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद कार्य में विघ्न प्रकट होते हैं। यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है तो उपरोक्त दी गई चौपाइ का कम से कम 108 बार जप करें, लाभ होगा।

हनुमान चालीसा का महत्व

किंतु हनुमान चालीसा का महत्व केवल इन पांच चौपाइयों तक सीमित नहीं है। पूर्ण हनुमान चालीसा का भी अपना एक महत्व एवं इस पाठ को पढ़ने का लाभ है, जिससे आम लोग अनजान हैं।
हनुमान चालीसा का पाठ

बहुत कम लोग जानते हैं कि हिन्दू धर्म में हनुमान जी की आराधना हेतु ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ सर्वमान्य साधन है। इसका पाठ सनातन जगत में जितना प्रचलित है, उतना किसी और वंदना या पूजन आदि में नहीं दिखाई देता।
फलदायी

‘श्री हनुमान चालीसा’ के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी माने जाते हैं। इसीलिए ‘रामचरितमानस’ की भाँति यह हनुमान गुणगाथा फलदायी मानी गई है।
भक्तों का अनुभव

यह बात केवल कहने योग्य नहीं है, अपित्य भक्तों का अनुभव है कि हनुमान चालीसा पढ़ने से परेशानियों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है।
वंदना

तो यदि आप भी दिल से, पवनपुत्र हनुमान जी की भावपूर्ण वंदना करते हैं, तो आपको ना केवल बजरंग बलि का अपितु साथ ही श्रीराम का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 7, 2016 at 11:23 am

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Bhagwan Mahavir Swami Chalisa

श्री महावीर चालीसा
‪‎Bhagwan_Mahavir_Swami‬
दोहाः-

सिद्ध समूह नमौं सदा, अरु सुमरुं अरहन्त |
निर आकुल निर्वाच्छ हो, गए लोक के अन्त |1|
मंगल मय मंगल करन, वर्धमान महावीर |
तुम चिंतत चिंता मिटे, हरो सकल भव पीर |2|
जय महावीर दया के सागर, जय श्री सन्मति ज्ञान उजागर |
शांत छवि मूरत अति प्यारी, वेष दिगम्बर के तुम धारी |3|
कोटि भानु से अति छवि छाजे, देखत तिमिर पाप सब भाजे |
महाबली अरि कर्म विदारे, जोधा मोह सुभट से मारे |4|
काम क्रोध तजि छोड़ी माया, क्षण में मान कषाय भगाया |
रागी नहीं, नहीं तू द्वेषी, वीतराग तू हित उपदेशी |5|
प्रभु तुम नाम जगत में सांचा, सुमिरत भागत भूत पिशाचा |
राक्षस यक्ष डाकिनी भागे, तुम चिंतत भय कोई न लागे |6|
महा शूल को जो तन धारे, होवे रोग असाध्य निवारे |
व्याल कराल होय फणधारी, विष को उगल क्रोध कर भारी |7|
महाकाल सम करै डसन्ता, निर्विष करो आप भगवन्ता |
महामत्त मद गज को झारे, भगे तुरत जब तुझे पुकारे |8|
फाड़ दाढ़ सिंहादिक आवे, ताको हे प्रभु तूही भगावे |
होकर प्रबल अग्नि जो जारे, तुम प्रताप शीतलता धारे |9|
शस्त्र धार अरि युद्ध लड़न्ता, तुम प्रसाद हो विजय तुरन्ता |
पवन प्रचण्ड चले झकझोरा, प्रभु तुम हरो होय भय चोरा |10|
झार खण्ड गिरि अटवी मांही, तुम बिनशरण तहां कोउ नांही |
वज्रपात करि घन गरजावे, मूसलधार होय तड़काव |11|
होय अपुत्र दरिद्र संताना, सुमिरत होत कुबेर समाना |
बन्दीगृह में बँधी जंजीरा, कठ सुई अनि में सकल शरीरा |12|
राजदण्ड करि शूल धरावै, ताहि सिंहासन तू ही बिठावे |
न्यायाधीश राजदरबारी, विजय करे होय कृपा तुम्हारी |13|
जहर हलाहल दुष्ट पियन्ता, अमृत सम प्रभु करो तुरन्ता |
चढ़े जहर, जीवादि डसन्ता, निर्विष क्षण में आप करन्ता |14|
एक सहस वसु तुमरे नामा, जन्म लियो कुण्डलपुर धामा |
सिद्धारथ नृप सुत कहलाये, त्रिशला मात उदर प्रगटाये |15|
तुम जनमत भयो लोक अशोका, अनहद शब्द भयो तिहुंलोका |
इन्द्र ने नेत्र सहस्र करि देखा, गिरि सुमेर कियो अभिषेका |16|
कामादिक तृष्णा संसारी, तज तुम भए बाल ब्रह्मचारी |
अथिर जान जग अनित बिसारी, बालपने प्रभु दीक्षा धारी |17|
शांत भाव धर कर्म विनाशे, तुरतहि केवल ज्ञान प्रकाशे |
जड़-चेतन त्रय जग के सारे, हस्त रेखवत् सम तू निहारे |18|
लोक-अलोक द्रव्य षट जाना, द्वादशांग का रहस्य बखाना |
पशु यज्ञों का मिटा कलेशा, दया धर्म देकर उपदेशा |19|
अनेकान्त अपरिग्रह द्वारा, सर्वप्राणि समभाव प्रचारा |
पंचम काल विषै जिनराई, चांदनपुर प्रभुता प्रगटाई |20|
क्षण में तोपनि बाढ़ि-हटाई, भक्तन के तुम सदा सहाई |
मुरख नर नहिं अक्षर ज्ञाता, सुमिरत पंडित होय विख्याता|
सोरठाः-

करे पाठ चालीस दिन नित चालीसहिं बार |
खेवै धूप सुगन्ध पढ़, श्रीमहावीर अगार ||
जनम दरिद्री होय, अरु जिसके नहिं सन्तान |
नाम वंश जग में चले, होय कुबेर समान ||
पूरनमल रचकर चालीसा, हे प्रभु तोहि नवावत शीशा |

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - March 15, 2016 at 8:45 am

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - March 7, 2016 at 10:51 am

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सासू चालीसा Sasoo Chalisa in Hindi

जय जय जय सासू महरानी हरदम बोलो मीठी वाणी
तुम्हरी हरदम करवय सेवा फल पकवान खिलाउब मेवा

हम पर ज्यादा करो न रोष हम तुमका देवय न दोष
तुम्हरी बेटी जैसी लागी तुम्हारी सेवा म हम जागी

रूखा-सूखा मिल के खाबय करय सिकायत कहू न जावय
पति देव खुश रहे हमेशा उनके तन न रहे क्लेशा

इतना वादा कय लिया माई फिर केथऊ कय चिंता नाही
जीवन अपना चम-चम चमके फूल हमरे आंगन म गमके

जैसी करनी वैसी भरनी तुम जानत हो मेरी जननी
संस्कार कय रूप अनोखा कभौ न होय हमसे धोखा

हसी खुशी जिनगी बीत जाये सुख दुख तो हरदम आये
दोहाः रोग दोष न लगे ई तन मा.जाता रहे कलेश

सासू मॉ की सेवा जो करे खुशी रहे महेश..
बोलो सासू माता की जै,,

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - November 21, 2015 at 7:14 am

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हर दिन पढ़ें हनुमान चालीसा, पढ़ने के यह हैं सात फायदे

ऐसी मान्यता है कि, कलियुग में एक मात्र हनुमान जी ही जीवित देवता हैं। यह अपने भक्तों और आराधकों पर सदैव कृपालु रहते हैं और उनकी हर इच्छा पूरी करते हैं।

हनुमान जी की कृपा से ही तुलसीदास जी को भगवान राम के दर्शन हुए थे। शिवाजी महाराज के गुरू समर्थ रामदास के बारे में भी कहा जाता है कि उन्हें हनुमान जी ने दर्शन दिए थे।

हनुमान जी के बारे में यह भी कहा जाता है कि जहां कहीं भी रामकथा होती है हनुमान जी वहां किसी न किसी रूप में जरूर मौजूद रहते हैं।

हनुमान जी की महिमा और भक्तहितकारी स्वभाव को देखते हुए तुलसीदास जी ने हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा लिखा है। इस चालीसा का नियमित पाठ बहुत ही सरल और आसान है, लेकिन इसके लाभ हैं चमत्कारी।

हनुमान चालीसा में कहा गया है कि हनुमान जी अष्टसिद्घि और नवनिधि के दाता कहा गया। जो व्यक्ति नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है। उसकी हर मनोकामना हनुमान जी पूरी करते हैं चाहे वह धन संबंधी इच्छा ही क्यों न हो।

जब कभी भी आपको आर्थिक संकट का सामना करना पड़े मन में हनुमान जी का ध्यान करके हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दीजिए।

कुछ ही हफ्तों में आपको समस्या का समाधान मिल जाएगा और आर्थिक चिंताएं दूर हो जाएगी। इस बात का ध्यान रखें कि पाठ किसी दिन छोड़ें नहीं। अगर यह क्रम मंगलवार से शुरू करें तो बेहतर रहेगा।

हनुमान चालीसा का एक दोहा है ‘भूत पिशाच निकट नहीं आए, महावीर जब नाम सुनावे। इस दोहे से बताया गया है कि जो व्यक्ति नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करता है उसके आस-पास भूत-पिशाच और दूसरी नकारात्मक शक्तियां नहीं आती हैं।

हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने वाले व्यक्ति का मनोबल बढ़ जाता है और उसे किसी भी तरह का भय नहीं रहता है।

अगर किसी को कोई अनजाना भय डरा रहा हो तो उसे हर रात सोने से पहले हाथ पैर धोकर पवित्र मन से हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर देना चाहिए।

अगर आप सोने के लिए बिस्तर पर जाते हैं लेकिन मन बेचैन रहता है, ठीक से नींद नहीं आती है तो आप नियमित हनुमान चालीसा पाठ करना शुरू कर दीजिए।

नींद अच्छी तरह नहीं आने का एक बड़ा कारण मानसिक अशांति है। हनुमान चालीसा के पाठ से मानसिक शांति मिलती है और मन में चल रही उधेड़ बुन से मुक्ति मिलती है जिससे व्यक्ति को अच्छी नींद आती है और जीवन में उन्नति का मौका मिलता है।

हनुमान जी परम पराक्रमी और महावीर हैं इस बात का उल्लेख रामचरित मानस से लेकर हनुमान चालीसा तक में किया गया है।

इनके ध्यान से पुरूष बलवान और वीर्यवान होता है। जो लोग अक्सर बीमार रहते हैं या काफी उपचार के बाद भी जिनका रोग दूर नहीं होता उन्हें नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

हनुमान चालीसा में लिखा भी गया है” नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।”

आपने देखा होगा कि मंगलवार के दिन छात्र बड़ी संख्या में हनुमान जी के मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। इसका कारण यह है कि हनुमान जी की जिनपर कृपा होती है वह बुद्घिमान, गुणी और चातुर यानी अक्लमंद हो जाते हैं।

हनुमान जी की कृपा पाने के लिए छात्रों को नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। छात्र जीवन में चालीसा का पाठ करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है और शिक्षा के क्षेत्र में कामयाबी मिलती है।

इसका कारण यह है कि हनुमान जी स्वयं हैं ‘विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।’ जो इनकी भक्ति सहित हनुमान चालीसा का पाठ करता है उनमें भी हनुमान जी यह गुण भर देते हैं।

मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य माना गया है मुक्ति यानी शरीर त्याग के बाद परमधाम में स्थान। हनुमान चालीसा में बताया गया है ‘अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि–भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत् सेई सर्व सुख करई।।

यानी जो व्यक्ति हनुमान जी का ध्यान करता है उनकी पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ नियमित करता है उसके परम धाम जाने का मार्ग सरल हो जाता है।

।। दोहा।।
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन–कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

।। चौपाई।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मुँज जनेऊ साजै।।
शंकर सुवन केसरी नन्दन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे।।

लाय संजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हरी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु सन्त के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दु:ख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि–भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई। हनुमत् सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जय जय जय हनुमान गौसाईं। वृपा करहु गुरुदेव की नाईं।
जो त बार पाठ कर कोई। छुटहि बंदि महासुख होई।

जो यह पढ़ै हनुमान् चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

।।। दोहा।।
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

 

 

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 7:11 am

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Shri Shiv Chalisa in Hindi

श्री शिव चालीसा (Shri Shiv Chalisa in Hindi)

।।दोहा।।

श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥1॥

मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥2॥

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥3॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥4॥

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥5॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥6॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥7॥

धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥8॥

नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥9॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥10॥

कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥दोहा॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
Shri Shiva Chalisa with English Translation

Jai Ganesh Girija Suvan Mangal Mul Sujan Kahat Ayodhya Das Tum Dev Abhaya Varadan
Glory to Lord Ganesh, the Divine Son of Goddess Girija, the cause of all auspiciousness and intelligence. Ayodha Dass (the composer of these verses) humbly requests that every one be blessed with the boon of being fearless.

Jai Girija Pati Dinadayala Sada Karat Santan Pratipala Bhala Chandrama Sohat Nike Kanan Kundal Nagaphani Ke
O Glorious Lord, consort of Parvati You are most merciful . You always bless the poor and pious devotees. Your beautiful form is adorned with the moon on Your forehead and on your ears are earrings of snakes’ hood.

Anga Gaur Shira Ganga Bahaye Mundamala Tan Chhara Lagaye Vastra Khala Baghambar Sohain Chhavi Ko Dekha Naga Muni Mohain
The holy Ganges flows from your matted hair. The saints and sages are attracted by Your splendid appearance. Around Your neck is a garland of skulls. White ash beautifies Your Divine form and clothing of lion’s skin adorns Your body.

Maina Matu Ki Havai Dulari Vama Anga Sohat Chhavi Nyari Kara Trishul Sohat Chhavi Bhari Karat Sada Shatrun Chhayakari
O Lord, the beloved daughter of Maina on Your left adds to Your splendid appearance. O Wearer of the lion’s skin, the trishul in Your hand destroys all enemies.

Nandi Ganesh Sohain Tahan Kaise Sagar Madhya Kamal Hain Jaise Kartik Shyam Aur Ganara-U Ya Chhavi Ko Kahi Jata Na Ka-U
Nandi and Shri Ganesh along with Lord Shiva appear as beautiful as two lotuses in the middle of an ocean.Poets and philosophers cannot describe the wonderful appearance of Lord Kartikeya and the dark complexioned Ganas (attendants).

Devan Jabahi Jaya Pukara Tabahi Dukha Prabhu Apa Nivara Kiya Upadrav Tarak Bhari Devan Sab Mili Tumahi Juhari
O Lord, whenever the Deities humbly sought Your assistance, You kindly and graciously uprooted all their problems. You blessed the Deities with Your generous help when the demon Tarak outraged them and You destroyed him.

Turata Shadanana Apa Pathayau Lava-Ni-Mesh Mahan Mari Girayau Apa Jalandhara Asura Sanhara Suyash Tumhara Vidit Sansara
O Lord, You sent Shadanan without delay and thus destroyed the evil ones Lava and Nimesh. You also destroyed the demon Jalandhara. Your renown is known throughout the world.

Tripurasur Sana Yudha Macha-I Sabhi Kripakar Lina Bacha-I Kiya Tapahin Bhagiratha Bhari Purva Pratigya Tasu Purari
O Lord, Purari, You saved all Deities and mankind by defeating and destroying the demons Tripurasura. You blessed Your devotee Bhagirath and he was able to accomplish his vow after rigorous penance.

Danin Mahan Tum Sama Kou Nahin Sevak Astuti Karat Sadahin Veda Nam Mahima Tab Ga-I Akatha Anandi Bhed Nahin Pa-I
O Gracious One, devotees always sing Your glory. Even the Vedas are unable to describe Your greatness. No one is as generous as You.

Pragate Udadhi Mantan Men Jvala Jarat Sura-Sur Bhaye Vihala Kinha Daya Tahan Kari Sara-I Nilakantha Tab Nam Kaha-I
Lord, when the ocean was churned and the deadly poison emerged, out of Your deep compassion for all, You drank the poison and saved the world from destruction. Your throat became blue, thus You are known as Nilakantha.

Pujan Ramchandra Jab Kinha Jiti Ke Lanka Vibhishan Dinhi Sahas Kamal Men Ho Rahe Dhari Kinha Pariksha Tabahin Purari
When Lord Rama worshipped You, He became victorious over the king of demons, Ravan. When Lord Rama wished to worship Thee with one thousand lotus flowers, the Divine Mother, to test the devotion of ShriRam, hid all the flowers at Your request.

Ek Kamal Prabhu Rakheu Joi Kushal-Nain Pujan Chaha Soi Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar Bhaye Prasanna Diye-Ichchhit Var
O Lord, You kept on looking at Shri Ram, who wished to offer His lotus-like eyes to worship Thee. When You observed such intense devotion, You were delighted and blessed Him. You granted His heart’s desire.

Jai Jai Jai Anant Avinashi Karat Kripa Sabake Ghat Vasi Dushta Sakal Nit Mohin Satavai Bhramat Rahe Mohin Chain Na Avai
Glory be unto You O Gracious, Infinite, Immortal, All-pervading Lord. Evil thoughts torture me and I keep on travelling aimlessly in this world of mundane existence. No relief seems to be coming my way.

Trahi-Trahi Main Nath Pukaro Yahi Avasar Mohi Ana Ubaro Lai Trishul Shatrun Ko Maro Sankat Se Mohin Ana Ubaro
O Lord! I beseech Your help and seel your divine blessing at this very moment. Save and protect me. Destroy my enemies with Your Trishul. Release me from the torture of evil thoughts.

Mata Pita Bhrata Sab Hoi Sankat Men Puchhat Nahin Koi Svami Ek Hai Asha Tumhari Ava Harahu Aba Sankat Bhari
O Lord, when I am in distress, neither my parents, brothers, sisters nor loved ones can relieve my suffering. I depend only on You. You are my hpe. Eliminate the cause of this tremendous torture and bless me with Your compassion.

Dhan Nirdhan Ko Deta Sadahin Jo Koi Janche So Phal Pahin Astuti Kehi Vidhi Karai Tumhari Kshamahu Nath Aba Chuka Hamari
O Lord, You bless the down-trodden with prosperity and grant wisdom to the ignorant. Lord, due to my limited knowledge, I omitted to worship Thee. Please forgive me and shower Your grace upon me.

Shankar Ho Sankat Ke Nishan Vighna Vinashan Mangal Karan
O Lord Sankar, You are the destroyer of all miseries. You remove the cause

Yogi Yati Muni Dhyan Lagavan Sharad Narad Shisha Navavain
of all obstacles and grant Your devotees eternal bliss. The saints ans sages meditate upon Thy most beautiful form. Even celestial beings like Sharad and Narad bow in reverence to You.

Namo Namo Jai Namah Shivaya Sura Brahmadik Par Na Paya Jo Yah Patha Karai Man Lai Tapar Hota Hai Shambhu Saha-I
O Lord, prostrations to You. Even Brahma is unable to describe Thy greatness. Whosoever recites these verses with faith and devotion receives Your infinite blessings.

Riniyan Jo Koi Ho Adhikari Patha Karai So Pavan Hari Putra-hin Ichchha Kar Koi Nischaya Shiva Prasad Tehin Hoi
Devotees who chant these verses with intense love become prosperous by the grace of Lord Shiva. Even the childless wishing to have children, have their desires fulfilled after partaking of Shiva-prasad with faith and devotion.

Pandit Trayodashi Ko Lavai Dhyan-Purvak Homa Karavai Trayodashi Vrat Kare Hamesha Tan Nahin Take Rahe Kalesha
On Trayodashi (13th day of the dark and bright fortnights) one should invite a pandit and devotely make offerings to Lord Shiva. Those who fast and pray to Lord Shiva on Trayodashi are always healthy and prosperous.

Dhupa Dipa Naivedya Charhavai Anta Vasa Shivapur Men Pavai Kahai Ayodhya Asha Tumhari Jani Sakal Dukha Harahu Hamari
Whosoever offers incense, prasad and performs arti to Lord Shiva, with love and devotion, enjoys material happiness and spiritual bliss in this world and hereafter ascends to the abode of Lord Shiva. The poet prays that Lord Shiva removed the suffering of all and grants them eternal bliss.

Nitya Nema kari Pratahi Patha karau Chalis
O Universal Lord, every morning as a rule I recite this Chalisa with

Tum Meri Man Kamana Purna Karahu Jagadish
devotion. Please bless me so that I may be able to accomplish my material and spiritual desires.

ll Doha ll
Nit Nem Kar Praatha Hee ,Paath Karo Chaalis l Tum Meri Manokaamna, Puran Karo Jagdeesh ll
Magsar Chhati Hemant Ritu, Sanvat Chausadh Jaan l Astuti Chaalisa Shivhi, Puran Keen Kalyaan ll

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - November 1, 2015 at 5:56 pm

Categories: Chalisa   Tags:

SHRI VISHNU CHALISA with English Meaning

SHRI VISHNU CHALISA

!! DHOHA !!

VISHNU SUNIYE VINAY SAVAK KI CHITLAYA |

KIRAT KUCH VARNAN KARU DIJE GYAN BATAYA ||

Namo Vishnu bhagwan kharari |

Kashat nashavan akhil vihari ||1

Prabal jagat mai Shakti tumhari |

Tribhuvan fal rahi ujiyari ||2

Sundar roop manohar surat |

Saral swabhav mohini murat ||3

Tan par pitambar ati sohat |

Bejanti mala maan mohat ||4

Shankh chakr  kar gada viraje |

Dekhat detaye asur dal bhaje ||5

Satay dharam mad lobh na gaje |

Kam krodh mad lobh na chaje ||6

Santbhakt sajan manranjan |

Danuj asur dushtan dal ganjan ||7

Such upjaye kashat sab bhanjan |

Dhosh mitaye karat jan sannjan ||8

Pap kat bhav sindu utaran |

Kasht nashkar bakat ubharn ||9

Karat anek roop prabhu dharan |

Kaval aap bhagati ke karan ||10

Dharani dhenu ban tumhi pukara |

Tab tum roop ram ka dhara ||11

Bhar uthar asur dal maar |

Ravan aadik ko sanhara ||12

Aap varah roop banaya |

Hiranyash ko maar giraya ||13

Dhar matyas tan sindu banaya |

Chodah ratann ko nikalaya ||14

Amilakh aasur dundu machaya |

Roop mohini aap dikhaya ||15

Devan ko amarat pan karaya |

Asuran ko chabi se bahalaya ||16

Kurm roop dhar sindu mathaya |

Mandrachal giri turan uthaya ||17

Shankar ka tum fand chudaya |

Bhasmasur ka roop dekhaya ||18

Vedan ko jab asur dubaya |

Kar prabanda unhee tuntalaya ||19

Mohit banker khalahi nachaya |

Ushi kar se bahasam karaya ||20

Asur jalandar ati baldai |

Sankar se un kinhi ladayi ||21

Har par shi sakal banaye |

Kin sati se chal khal jayi ||23

Sumiran kin tumhe shivrani |

Batlai sab vipat kahani ||24

Tab tum bane muneshwar gyani |

Varnda ki sab surti bhulani ||25

Ho shaparsh dharm sharati mani |

Hani asur uur shiv sanatni ||26

Tumne dhur prahlad ubhare |

Hirnakush aadik khal mare ||27

Ganika aur ajamil tare |

Bhahut bhakt bhav sindu utare ||28

Harhu sakal santap hamare |

Krapa karhu kari sirjan hare ||29

Dekhhu mai nit darsh tumhare |

Din bandu bhaktan hitkare ||30

Chahat apka sevak darshan |

Karhu daya apni madhusudan ||31

Janu nahi yogay jap poojan |

Hoye yagy shistuti anumotan ||32

Shildaya santosh shishan |

Vidhit nahi vatrbhodh vilshan ||33

Karhu apka kis vidhi poojan |

Kumati vilok hote dukh bhishan ||34

Karhu pradam kon vidisumiran |

Kon bhati mai karhu samarpan ||35

Sur munni karat sada sivkai |

Harshit rahat param gati paye ||36

Din dukhin par sada sahai |

Nij jan jan lave apnayi ||37

Pap dosh santap nashao |

Bhav bandan se mukat karayo ||38

Sut sampati de such upjao |

Nij charan ka das banao ||39

Nigam sada se vanay sunao |

Patte sune so jan such pave ||40

=========================

Shri Vishnu Chalisa

JAI JAI SHRII JAGATA PATI,JAGADAADHAARA ANANTA
VISHVESHVARA AKHILESHA AJA,SARVESHVARA BHAGAVANTA

Glory, glory, all glories to you, O sovereign and support of the world! You are the lord of all, most perfect, infinite, unborn, immanent, and the very God of the universe.

JAI JAI DHARANIIDHARA SHRUTI SAAGARA,JAYATI GADAADHARA SADGUNA AAGARA
SHRI VASUDEVA DEVAKII NANDANA,VAASUDEVA NAASHANA BHAVA PHADANA

Glory to you, O support of the earth and ocean of Vedic knowledge! Glory to you, O wielder of a club and treasure house of all noble virtues! O Krishna, you are the delight of Vasudeva and Devaki and destroyer of the noose of birth and death.

NAMO NAMO SACHARAACHARA SVAAMII,PARAMBRAHMA PRABHU NAMO NAMO NAMAAMI
NAMO NAMO TRIBHUVANA PATI IISHA,KAMALAAPATI KESHAVA YOGIISHA

I revere you again and again, O Lord of every animate and inanimate creature; I do obeisance to you, O Lord, attributeless and impersonal and glorify you as the Lord of the three spheres, as the beloved consort of Kamalaa (Lakshmi) as Keshava and as supreme among the yogis.

GARURADHVAJA AJA BHAVA HAARII,MURALIIDHARA HARI MADANA MURAARII
NAARAAYANA SHRIIPATI PURUSHOTTAMA,PADMANAABHI NARAHARI SARVOTTAMA

Your banner, O Lord, is emblazoned with the figure of Garura you; you are unborn, the dispeller of all worldly dread (of birth and death), Krishna the flute-player, the destroyer of Love and the enemy of Mura, Narayana, the beloved consort of Lakshmi, the best among the humans Vishnu when he assumed the form of half-lion and half-man and the most exquisite of all.

JAI MAADHAVA MUKUNDA,VANAMAALII KHALA DALA MARDANA DAMANA KUCHAALII
JAI AGANITA INDRIYA SAARANGADHARA,VISHVA RUUPA VAAMANA AANANDA KARA

Salutations to you, O Mahadeva, Mukunda and Vanamali! You destroy the wicked and subdue the ill bred. Glory to you, the possessor of an infinite number of senses and the bearer of the bow called Shaaranga! You are verily the world itself, Vamana and the bestower of all happiness. (These names relate to the incarnations of Vishnu as well as Krishna where the scriptures describe Krishna to be one of Vishnu’s incarnations)

JAI JAI LOKAADHYAKSHA DHANANJAYA,SAHASRAGYA JAGANNAATHA JAYATI JAI
JAI MADHUSUUDANA ANUPAMA AANANA,JAYATI VAAYU-VAAHANA VAJRA KAANANA

Glory, glory to you, O Dhananjaya (Vishnu), the sovereign ruler of the three spheres! Glory; glory to you, the Lord of the world who has myriad of names! Glory to you O Madhusudhana whose features are matchless, who ride the wind and who are like thunderbolt to the trees of the forest.

JAI GOVINDA JANAARDANA DEVAA,SHUBHA PHALA LAHATA GAHATA TAVA SEVAA
SHYAAMA SARORUHA SAMA TANA SOHATA,DARSHANA KARATA SURA NARA MUNI MOHE

Glory to you, O supreme Lord Krishna and Vishnu. He who attends on you is rewarded with all the propitious fruits of his service. Your touching charm matches the beauty of the dark lotus and enchants all the gods, men, ascetics and adepts who behold you.

BHAALA VISHAALA MUKUTA SIRA SAAJATA,URA VAIJANTII MAALA VIRAAJATA
TIRACHII BHRIKUTI CHAAPA JANU DHAARE,TINA TARA NAINA KAMALA ARUNAARE

Your forehead is broad and your head is bedecked with a resplendent crown; on your bosom lies the famous garland called Vaijayanti (the mythological garland of Vishnu), your arched eyebrows look like a drawn bow and the eyes underneath them are ruddy like red lotuses.

NAASAA CHIBUKA KAPOLA MANOHARA,NRIDU MUSKAANA KUNJA ADHARANA PARA
JANU MANI PANKTI DASHANA MANA BHAAVANA,BASANA PIITA TANA PARAMA SUHAAVANA

Your nose, chin and cheeks, O Lord, are exceedingly lovely, as are the corners of your lips when you smile; your teeth so alluringly set look like a row of gems, while your body dresses in yellow is supremely charming.

RUUPA CHATURBHUJA BHUUSHITA BHUUSHANA,VARADA HASTA, MOCHANA BHAVA DUUSHANA
KANJAARUNA SAMA KARATALA SUNDARA,SUKHA SAMUUHA GUNA MADHURA SAMUNDARA

You are four-armed, in guise most beautiful and decked with ornaments. The position of your hands looks as if you are purging the world of its impurities. Your palms, which are red as lotus, are winsome and your virtues deep and inexhaustible as the ocean of tenderness and beauty. You are verily the treasure house of bliss.

KARA MAHAN LASITA SHANKHA ATI PYAARAA,SUBHAGA SHABDA JAI DENE HAARAA
RAVI SAMA CHAKRA DVITIIYA KARA DHAARE,KHALA DALA DAANAVA SAINYA SANHAARE

There is a conch-shell in your hand all bright and beautiful, an instrument whose musical sound is auspicious to the ears and ensures victory (to the suppliant). In your second hand lies a missile, the disc, as shining a the sun, which destroyed the host of wicked demons.

TRITIIYA HASTA MAHAN GADAA PRAKAASHANA,SADAA TAAPA TRAYA PAAPA VINAASHANA
PADMA CHATURTHA HAATHA MAHAN DHAARE,CHARI PADAARATHA DENE HAARE

In your third hand lies an ever-shining club, which unfailingly destroys all the physical, material, and supernatural sufferings and evils. Your fourth hand holds a lotus, which grants all the four boons of life-wealth, religious merit, virility and liberation (from the cycle of birth and death, moksha)

VAAHANA GARURAA MANOGATIVAANAA,TIHUN TYAAGATA JANA HITA BHAGAVAANAA
PAHUNCHI TAHAAN PATA RAKHATA SVAAMII,HO HARI SAMA BHAKTANA ANURAAGII

Your conveyance is Garura who is swift as mind and whom you, Lord, forsake for the well being of your votaries. Reaching there you protect their honor, for you are matchless, O Hari, in following your devotees.

DHANI DHANI MAHIMAA AGAMA ANANTAA,DHYANA BHAKTAVATSALA BHAGVANTAA
JABA JABA SURAHIN ASURA DUKHA DIINHAA,TABA TABA PRAKATI KASHTA HARI LIINHAA

Blessed, all blessed is your glory, O Lord, which transcends all comprehension by the senses and is infinite! And blessed are you who love your devotees as your own children! Whenever the demons afflicted the celestials, you made your appearance and relieved them of their distress.

SURA NARA MUNI BRHAMAADI MAHESHUU,SAHI NA SAKYO ATI KATHINA KALESHUU
TABA TAHAN DHARI BAHURUUPA NIRANTARA,MARDYO DALA DAANAVAHI BHAYANKARA

When the assembly of gods like Brahma and Mahesh and all the company of hermits found their affliction beyond endurance you always appeared there in different forms and destroyed all the dreadful herd of demons.

SHAYYAA SHESHA SINDHU BICHA SAAJITA,SANGA LAKSHMII SADAA VIRAAJITA
PUURANA SHAKTI DHAANYA-DHANA KHAANII,AANANDA BHAKTI BHARANII SUKHA DAANII

The serpent Shesha is your couch, fully bedecked, in the midst of the ocean; in your company are the ever-resplendent goddess of wealth Lakshmi, who is power supreme and an inexhaustible mine of riches. Blessed is she who bestows happiness, sustains devotion and causes bliss.

JAASU VIARDA NIGAMAAGAMA GAAVATA,SHAARADA SHESHA PAARA NAHIN PAAVATA
RAMAA RAADHIKAA SIYA SUKHA DHAAMAA,SOHI VISHNU KRISHNA ARU RAAMAA

O Vishnu, though your majesty is hymned by the Vedas and the Shastras, it is so measureless that even Saraswati, the originator of letters and their meaning, and Shesha, for all his thousand-tongues cannot fathom it. You are the abode of all bliss to Lakshmi, Radhika and Sita as Vishnu, Krishna and Rama all of whom are the same.

AGANITA RUUPA ANUUPA APAARAA,NIRGUNA SAGUNA SVARUUPA TUMHAARAA
NAHIN KACHU BHEDA VEDA ASA BHAASATA,BHAKTANA SE NAHIN ANTARA RAAKHATA

Your forms are countless, incomparable and infinite; you are both personal and impersonal. To the Vedas there is no distinction between them, nor is there any difference between you and your votaries.

SHRI PRAYAAGA DURVAASAA DHAAMAA,SUNDARDAASA TIVAARII GRAAMAA
JAGA HITA LAAGI TUMAHIN JAGADIISHAA,NIJA MATI RACHYO VISHNU-CHAALIISAA

O Lord of the universe, Sundardaasa, an inhabitant of the village Tiwari, composed this hymn Vishnuchalisa as well as he could for your devotees and dedicated it to you while still dwelling in the hermitage of the seer Durvasa at Allahabad.

JO CHITTA DAI NITA PARHATA PARHAAVATA,PUURANA BHAKTI SHAKTI SARASAAVATA
ATI SUKHA VASATA, RUUJA RINA NAASHATA,VAIBHAVA VIKAASATA, SUMATI PRAKASHATA

He who chants and induces others to chant, this hymn regularly with all attention is filled with the delight of both might and devotion; he abides in supreme happiness, recovers from disease and debt, and becomes increasingly prosperous, his wit growing sharper and sharper everyday.

AAVATA SUKHA GAAVATA SHRUTI SHAARADABHAASHATA VYAASA-VACHANA RISHI NAARADA
MILATA SUBHAGA PHALA SHOKA NASAAVATA ANTA SAMAYA JANA HARI PADA PAAVATA

The four Vedas, Saraswati, Vyasa and the seer Narada all recite it and declare that such a recital of the Vishnuchalisa brings happiness and besides yielding all the delicious fruits of life, it also destroys all griefs and helps attain the supreme state in the end.

DOHA

PREMA SAHITA GAHI MAHAN HRIDAYA BIICHA JAGADIISHA
ARPITA SHAALIGRAAMA KAHAN KARI TULASII NITA SHISHA
KSHANABHANGURA TANU JAANI KARI AHANKAARA PARIHAARA
SAARA RUUPA IISHVARA LAKHAI, TAJI ASAARA SANSAARA
SATYA SHODHA KARI URA GAHAI, EKA BRAHMA OMKAARA
AATMABODHA HOVAI TABAI, MILAI MUKTI KE DVAARA
SHANTI AURA SADBHAAVA KAHAN, JABA URA PHUULAHIN PHUULA
CHAALISAA PHALA LAHALAHIN JAHAN RAHAHIN IISHA ANUKUULA
EKA PAATHA JANA NITA KARAI, VISHNU DEVA CHAALIISA
CHARA PADAARATHA NAVAHUN NIDHI, DEYA DVAARIKAADHIISHA

May the devout enshrine the lord of the worlds in their hearts and with profound devotion fix their minds on him with bowed head; may they offer basil leaves to the image of Vishnu and considering that the body is transient, abandon all pride. They should regard the Supreme Lord as the only reality and the world as insubstantial. Having discovered the truth may the devout hold the mystical syllable Om, which symbolizes Brahma, in their hearts, for that would lead to self-realization and salvation. When the flowers of peace and goodwill bloom in the heart, the devotees are blessed with the fruit of these forty verses and the Lord becomes favourable to them. To him who reads VishnuChalisa once everyday the lord of Dwarka (Krishna) provides all the four rewards ( Dharma (ethical perfection), artha (wealth), Kama (sensual delights) and Moksha (final release) and the nine divine treasures.

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http://www.omjai.org/omjai-docs/130-devotional/310-vishnu&bhajans/3010-vishnu-chalisa.pdf

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