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Ganesha story

ganesha story

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - August 6, 2017 at 3:53 pm

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Importance of Ganesh Chaturthi

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Ganpati story in marathi

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Short essay on ganesh chaturthi

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Eco friendly Ganpati information

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My favourite festival Ganesh Chaturthi essay

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10 lines on Ganesh Chaturthi

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Snake Catcher Vava Suresh

वावा सुरेश खतरनाक सांपों खासकर जानलेवा कोबरा को इंसानी बसाहट वाले इलाकों से रेस्क्यू किए जाने को लेकर जाने जाते हैं। जहरीले-से-जहरीले कोबरा जैसे सांपों से भी सुरेश आंख-से-आंख मिलाते नजर आते हैं। वे अब तक करीब 113 किंग कोबरा को रेस्क्यू कर चुके हैं। जो दुनिया के सबसे खतरनाक किस्म के सांपों में शामिल हैं। 42 साल के सुरेश इस काम को अपना मिशन मानते हैं। जबकि, वे जानते हैं कि इसमें उनकी जान को खतरा है।कई जहरीले सांपों ने उन्हें काटा भी, लेकिन नहीं हुआ कोई असर…

snake catcher vava suresh

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– किंग कोबरा को दुनिया के सबसे खतरनाक सांपों में शुमार किया जाता है। इसे सामने देखकर किसी की भी हालत खराब हो सकती है, लेकिन केरल के रहने वाले ‘स्नेक मैन’ वावा सुरेश ने कई जहरीले सांपों को पकड़ा है।
– इस दौरान कई जहरीले सांपों ने उन्हें काटा भी है, लेकिन उनपर इन सांपों के जहर का कोई खास असर नहीं हुआ। अब तक पकड़े सांपों में ऐसे किंग कोबरा भी शामिल हैं। जिनके जहर की एक बूंद कई लोगों की जान ले सकती है।
12 की उम्र में पकड़ा था पहला सांप
– सुरेश जब 12 साल के थे, तब उन्होंने एक छोटा कोबरा सांप पकड़ा था। वह उन्हीं के घर में घुसा था। उन्होंने सांपों के नेचर को काफी बारीकी से समझा और इस तरह उन्होंने समझा कि कैसे बिना किसी नुकसान के सांपों को काबू में किया जाता है।
– सबसे ताज्जुब की बात यह है कि इतने खतरनाक सांपों को पकड़ने के लिए सुरेश किसी खास तरह के औजार का इस्तेमाल नहीं करते बल्कि, वे अपने हाथों से ही उनपर काबू पा लेते हैं।
– वे लोगों को सांपों की नेचर के बैलेंस को मेंटेन करने की अहमियत और सांपों की इको सिस्टम में कॉन्ट्रीब्यूशन को लेकर अवेयर करना चाहते हैं।
ठुकरा दिया सरकारी जॉब
– वाइल्ड लाइफ कंजर्वेटर सुरेश को सांपों के पकड़ने की महारत की वजह से पूरी दुनिया में पहचान मिली। ऐसे में केरल सरकार ने उन्हें सरकारी जॉब का ऑफर दिया था, लेकिन सुरेश ने इसे ठुकरा दिया। सुरेश कहते हैं कि अगर वे नौकरी करने लग जाएंगे तो समाज के लोगों की मदद करने में मुश्किलें आ सकती हैं।
– सुरेश का जॉब काफी रिस्की है। एक बार कोबरा के काटने के चलते उन्हें अपनी उंगली तक सर्जरी से कटवानी पड़ी थी। 2012 में एक और सांप के काटने से उनकी हथेली की स्किन तक खराब हो चुकी है। अब उनके शरीर ने सांप के जहर का एंटीडोज खुद ही तैयार कर लिया है।

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - August 3, 2017 at 10:10 am

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God Vishwakarma – Vishwakarma God History

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Shree Vishwakarma Chalisa in Hindi

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 8, 2017 at 3:55 pm

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प्रभु श्रीराम के वंशज कौन हैं, जानिए चौंकाने वाला रहस्य

जल प्रलय के बाद वैवस्वत और कुछ ऋषियों के कुल का ही धरती पर विस्तार हुआ। वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध। राम का जन्म इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था। जैन धर्म के तीर्थंकर निमि भी इसी कुल के थे।
मनु के दूसरे पुत्र इक्ष्वाकु से विकुक्षि, निमि और दण्डक पुत्र उत्पन्न हुए। इस तरह से यह वंश परम्परा चलते-चलते हरिश्चन्द्र रोहित, वृष, बाहु और सगर तक पहुँची। इक्ष्वाकु प्राचीन कौशल देश के राजा थे और इनकी राजधानी अयोध्या थी।
रामायण के बालकांड में गुरु वशिष्ठजी द्वारा राम के कुल का वर्णन किया गया है जो इस प्रकार है:- ब्रह्माजी से मरीचि का जन्म हुआ। मरीचि के पुत्र कश्यप हुए। कश्यप के विवस्वान और विवस्वान के वैवस्वतमनु हुए। वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था। वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था। इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुल की स्थापना की।
इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए। कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था। विकुक्षि के पुत्र बाण और बाण के पुत्र अनरण्य हुए। अनरण्य से पृथु और पृथु और पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ। त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए। धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था। युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए और मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ। सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित। ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए।
भरत के पुत्र असित हुए और असित के पुत्र सगर हुए। सगर अयोध्या के बहुत प्रतापी राजा थे। सगर के पुत्र का नाम असमंज था। असमंज के पुत्र अंशुमान तथा अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए। दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए। भगीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतार था। भगीरथ के पुत्र ककुत्स्थ और ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए। रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया। तब राम के कुल को रघुकुल भी कहा जाता है।
रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए। प्रवृद्ध के पुत्र शंखण और शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए। सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था। अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग और शीघ्रग के पुत्र मरु हुए। मरु के पुत्र प्रशुश्रुक और प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए। अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था। नहुष के पुत्र ययाति और ययाति के पुत्र नाभाग हुए। नाभाग के पुत्र का नाम अज था। अज के पुत्र दशरथ हुए और दशरथ के ये चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हैं। वा‍ल्मीकि रामायण- ॥1-59 से 72।।
लव और कुश : भरत के दो पुत्र थे- तार्क्ष और पुष्कर। लक्ष्मण के पुत्र- चित्रांगद और चन्द्रकेतु और शत्रुघ्न के पुत्र सुबाहु और शूरसेन थे। मथुरा का नाम पहले शूरसेन था। लव और कुश राम तथा सीता के जुड़वां बेटे थे। जब राम ने वानप्रस्थ लेने का निश्चय कर भरत का राज्याभिषेक करना चाहा तो भरत नहीं माने। अत: दक्षिण कोसल प्रदेश (छत्तीसगढ़) में कुश और उत्तर कोसल में लव का अभिषेक किया गया।

राम के काल में भी कोशल राज्य उत्तर कोशल और दक्षिण कोशल में विभाजित था। कालिदास के रघुवंश अनुसार राम ने अपने पुत्र लव को शरावती का और कुश को कुशावती का राज्य दिया था। शरावती को श्रावस्ती मानें तो निश्चय ही लव का राज्य उत्तर भारत में था और कुश का राज्य दक्षिण कोसल में। कुश की राजधानी कुशावती आज के बिलासपुर जिले में थी। कोसला को राम की माता कौशल्या की जन्मभूमि माना जाता है। रघुवंश के अनुसार कुश को अयोध्या जाने के लिए विंध्याचल को पार करना पड़ता था इससे भी सिद्ध होता है कि उनका राज्य दक्षिण कोसल में ही था।

राजा लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ जिनमें बर्गुजर, जयास और सिकरवारों का वंश चला। इसकी दूसरी शाखा थी सिसोदिया राजपूत वंश की जिनमें बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) वंश के राजा हुए। कुश से कुशवाह (कछवाह) राजपूतों का वंश चला।
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार लव ने लवपुरी नगर की स्थापना की थी, जो वर्तमान में पाकिस्तान स्थित शहर लाहौर है। यहां के एक किले में लव का एक मंदिर भी बना हुआ है। लवपुरी को बाद में लौहपुरी कहा जाने लगा। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश लाओस, थाई नगर लोबपुरी, दोनों ही उनके नाम पर रखे गए स्थान हैं।
राम के दोनों पुत्रों में कुश का वंश आगे बढ़ा तो कुश से अतिथि और अतिथि से, निषधन से, नभ से, पुण्डरीक से, क्षेमन्धवा से, देवानीक से, अहीनक से, रुरु से, पारियात्र से, दल से, छल से, उक्थ से, वज्रनाभ से, गण से, व्युषिताश्व से, विश्वसह से, हिरण्यनाभ से, पुष्य से, ध्रुवसंधि से, सुदर्शन से, अग्रिवर्ण से, पद्मवर्ण से, शीघ्र से, मरु से, प्रयुश्रुत से, उदावसु से, नंदिवर्धन से, सकेतु से, देवरात से, बृहदुक्थ से, महावीर्य से, सुधृति से, धृष्टकेतु से, हर्यव से, मरु से, प्रतीन्धक से, कुतिरथ से, देवमीढ़ से, विबुध से, महाधृति से, कीर्तिरात से, महारोमा से, स्वर्णरोमा से और ह्रस्वरोमा से सीरध्वज का जन्म हुआ।
कुश वंश के राजा सीरध्वज को सीता नाम की एक पुत्री हुई। सूर्यवंश इसके आगे भी बढ़ा जिसमें कृति नामक राजा का पुत्र जनक हुआ जिसने योग मार्ग का रास्ता अपनाया था। कुश वंश से ही कुशवाह, मौर्य, सैनी, शाक्य संप्रदाय की स्थापना मानी जाती है।
एक शोधानुसार लव और कुश की 50वीं पीढ़ी में शल्य हुए, ‍जो महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे। यह इसकी गणना की जाए तो लव और कुश महाभारतकाल के 2500 वर्ष पूर्व से 3000 वर्ष पूर्व हुए थे अर्थात आज से 6,500 से 7,000 वर्ष पूर्व।
इसके अलावा शल्य के बाद बहत्क्षय, ऊरुक्षय, बत्सद्रोह, प्रतिव्योम, दिवाकर, सहदेव, ध्रुवाश्च, भानुरथ, प्रतीताश्व, सुप्रतीप, मरुदेव, सुनक्षत्र, किन्नराश्रव, अन्तरिक्ष, सुषेण, सुमित्र, बृहद्रज, धर्म, कृतज्जय, व्रात, रणज्जय, संजय, शाक्य, शुद्धोधन, सिद्धार्थ, राहुल, प्रसेनजित, क्षुद्रक, कुलक, सुरथ, सुमित्र हुए। माना जाता है कि जो लोग खुद को शाक्यवंशी कहते हैं वे भी श्रीराम के वंशज हैं।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 14, 2016 at 10:07 am

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