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Kamdhenu Cow story in Hindi

kamdhenu cow

गाय

हिन्दू धर्म में हमेशा से ही ‘गाय’ को एक पवित्र पशु माना गया है, ना केवल एक जीव, वरन् हिन्दू मान्यताओं ने गाय को ‘मां’ की उपाधि दी है। गाय को मनुष्य का पालनहार माना गया और इससे मिलने वाले दूध को अमृत के समान माना जाता है। लेकिन यह मान्यता कुछ महीनों, वर्षों या दशकों की नहीं….

पूजनीय पशु

युगों से ही गाय को पूजनीय माना गया है। यदि आप हिन्दू धर्म को समझते हैं या फिर हिन्दू मान्यताओं की जानकारी रखते हैं तो शायद आपने कामधेनु गाय के बारे में भी सुना होगा। हिन्दू धर्म के अनेक धार्मिक ग्रंथों में कामधेनु गाय का जिक्र किया गया है। कहते हैं कामधेनु गाय में दैवीय शक्तियां थीं, जिसके बल पर वह अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती थी।

 

कामधेनु

यह गाय जिसके भी पास होती थी उसे हर तरह से चमत्कारिक लाभ होता था। लेकिन इस गाय के दर्शन मात्र से भी मनुष्य के हर कार्य सफल हो जाते थे। दैवीय शक्तियां प्राप्त कर चुकी कामधेनु गाय का दूध भी अमृत एवं चमत्कारी शक्तियों से भरपूर माना जाता था।

पौराणिक कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय देवता और दैत्यों को समुद्र में से कई वस्तुएं प्राप्त हुईं। जैसे कि मूल्यवान रत्न, अप्सराएं, शंख, पवित्र वृक्ष, चंद्रमा, पवित्र अमृत, कुछ अन्य देवी-देवता और हलाहल नामक अत्यंत घातक विष भी। इसी समुद्र मंथन के दौरान क्षीर सागर में से कामधेनु गाय की उत्पत्ति भी हुई थी।

samudra manthan

समुद्र मंथन

पुराणों में कामधेनु गाय को नंदा, सुनंदा, सुरभी, सुशीला और सुमन भी कहा गया है। कामधेनु गाय से संबंधित पुराणों में कई सारी कथाएं प्रचलित हैं… कृष्ण कथा में अंकित सभी पात्र किसी न किसी कारणवश शापग्रस्त होकर जन्में थे। कश्यप ने वरुण से कामधेनु मांगी थी, लेकिन बाद में लौटाई नहीं। अत: वरुण के शाप से वे ग्वाले हुए।

भगवान परशुराम

कामधेनु गाय से संबंधित एक और कथा विष्णु के मानवरूपी अवतार भगवान परशुराम से जुड़ी है जिसके अनुसार एक बार सहस्त्रार्जुन अपनी पूरी सेना के साथ जंगलों को पार करता हुआ जमदग्नि ऋषि (भगवान परशुराम के पिता) के आश्रम में विश्राम करने के लिए पहुंचा।

जमदग्नि ऋषि

महर्षि ने राजा को अपने आश्रम का मेहमान समझकर स्वागत सत्कार किया और उन्हें आसरा दिया। उन्होंने सहस्त्रार्जुन की सेवा में किसी भी प्रकार की कोई कसर नहीं छोड़ी। यह तब की बात है जब ऋषि जमदग्रि के पास देवराज इन्द्र से प्राप्त दिव्य गुणों वाली कामधेनु नामक अद्भुत गाय थी।

दैवीय गुणों वाली कामधेनु

राजा नहीं जानते थे कि यह गाय कोई साधारण पशु नहीं, वरन् दैवीय गुणों वाली कामधेनु गाय है, लेकिन कुछ समय के पश्चात जब राजा ने गाय के चमत्कार देखे तो वे दंग रह गए। महर्षि का आश्रम काफी साधारण था, ना अधिक सुविधाएं थीं और ना ही काम में हाथ बंटाने लायक कोई सेवक।

राजा ने देखे चमत्कार

लेकिन महर्षि ने कामधेनु गाय की मदद से कुछ ही पलों में देखते ही देखते राजा और उनकी पूरी सेना के लिए भोजन का प्रबंध कर दिया। कामधेनु के ऐसे विलक्षण गुणों को देखकर सहस्त्रार्जुन को ऋषि के आगे अपना राजसी सुख कम लगने लगा।

ऋषि से मांगी कामधेनु

अब उनके मन में महर्षि के प्रति ईर्ष्या उत्पन्न होने लगी और साथ ही वे महर्षि से उस गाय को ले जाने की तरकीब भी बनाने लगे। लेकिन सबसे पहले राजा ने सीधे ही ऋषि जमदग्नि से कामधेनु को मांगा। किंतु जब ऋषि जमदग्नि ने कामधेनु को आश्रम के प्रबंधन और जीवन के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया बताकर उसे देने से इंकार कर दिया, तो राजा ने बुराई का मार्ग चुनना सही समझा।

जबरन ले ली

राजा ने क्रोधित होकर ऋषि जमदग्नि के आश्रम को उजाड़ दिया, सब तहस-नहस हो गया। लेकिन यह सब करने के बाद जैसे ही राजा सहस्त्रार्जुन अपने साथ कामधेनु को ले जाने लगा तो तभी वह गाय उसके हाथों से छूट कर स्वर्ग की ओर चली गई। और आखिरकार दुष्ट राजा को वह गाय नसीब नहीं हुई, लेकिन वहीं दूसरी ओर महर्षि जमदग्नि दोहरे नुकसान को झेल रहे थे।

स्वर्ग की ओर चली गई कामधेनु

एक ओर वे अपनी कामधेनु गाय को खो चुके थे और दूसरी ओर आश्रम भी ना रहा। कुछ समय के पश्चात महर्षि के पुत्र भगवान परशुराम आश्रम लौटे और जब उन्होंने यह दृश्य देखा तो हैरान रह गए। इस हालात का कारण पूछने पर उनकी माता रेणुका ने उन्हें सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई।

परशुराम हुए क्रोधित

परशुराम माता-पिता के अपमान और आश्रम को तहस नहस देखकर आवेश में आ गए। पराक्रमी परशुराम ने उसी वक्त दुराचारी सहस्त्रार्जुन और उसकी सेना का नाश करने का संकल्प लिया। परशुराम अपने परशु अस्त्र को साथ लेकर सहस्त्रार्जुन के नगर महिष्मतिपुरी पहुंचे।

लिया पिता के अपमान का बदला

यहां पहुंचने पर राजा सहस्त्रार्जुन और उनके बीच भीषण युद्ध हुआ। किंतु परशुराम के प्रचण्ड बल के आगे सहस्त्रार्जुन बौना साबित हुआ। भगवान परशुराम ने दुष्ट सहस्त्रार्जुन की हजारों भुजाएं और धड़, परशु से काटकर कर उसका वध कर दिया।

फिर गए तीर्थ

कहते हैं सहस्त्रार्जुन के वध के बाद जैसे ही परशुराम अपने पिता के पास वापस आश्रम पहुंचे तो उनके पिता ने उन्हें आदेश दिया के वे इस वध का प्रायश्चित करने के लिए तीर्थ यात्रा पर जाएं, तभी उनके ऊपर से राजा की हत्या का पाप खत्म होगा। लेकिन ना जाने कहां से परशुराम के तीर्थ पर जाने की खबर सहस्त्रार्जुन के पुत्रों को मिल गई।

1 comment - What do you think?  Posted by admin - March 28, 2016 at 11:04 am

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AMEER KAISE BANE? Hindi edition of ‘How to be Rich’

Method-to-become-rich

बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में प्रसिद्ध पत्रकार नेपोलियन हिल ने एक शोध किया है। यह शोध दुनिया भर में मौजूद अमीर लोगों पर किया गया है जिसमें बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल हैं। इन हस्तियों में एंड्र्यू कार्नेज, हेनरी फॉर्ड जैसे अरबों-खरबों के मालिक भी शामिल हैं।

 

इस शोध को करने का हिल का केवल एक ही मकसद था और वह था यह जानना कि आखिरकार अमीर लोगों में वह क्या कॉमन यानि कि वह क्या सामान्य गुण होता है जो उन्हें अमीर बनाता है।

 

क्या वह उनके रहन-सहन का तरीका है, क्या उनके बात करने का सलीका है, क्या उनके दिमाग की तेज़ी है या फिर कोई ऐसा अन्य गुण जो उन्हें गरीब ना होकर अमीर बनाता है। उनमें ऐसा क्या खास है जो उन्हें सफलता की सीढ़ियों से नीचे  नहीं आने देता।

 

कम से कम 500 दिग्गजों का इंटरव्यू करने के बाद हिल ने अपनी रिपोर्ट पर एक ऐसा परिणाम शामिल किया है जिसे जानकर आप विश्वास नहीं कर पाएंगे। चलिए पहले आप ही बताएं कि अमीरों में ऐसा क्या खास गुण है जो उन्हें अमीर बनाता है?

 

हमारा दावा है कि आपका जवाब हिल की रिपोर्ट से मेल नहीं खाएगा…. दरअसल हिल के इस बड़े शोध की रिपोर्ट ने यह साबित किया है कि एक व्यक्ति का सलीका, उसकी आदतें, उसके बात करने का ढंग या कोई भी सामान्य गुण उसे अमीर नहीं बनाता। यदि उसका कोई गुण उसे अमीर बनने में सहयोग देता है तो वह है उसकी तीव्रता से फैसला लेने की क्षमता।

 

विषय चाहे कोई भी हो, चाहे आर्थिक हो या कोई भी सामान्य बात… जल्द से जल्द फैसला लेना और उससे भी तीव्र गति से उस फैसले के परिणाम को जानना ही एक व्यक्ति को अमीर बनाता है।

 

काफी हैरान करने वाला है नेपोलियन हिल के इस शोध का परिणाम, इस नतीजे को जानने के बाद क्या आप भी यही मानते हैं कि जल्द से जल्द फैसला लेना ही सही होता है? जरूर शेयर करें अपनी राय….

 

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - December 25, 2015 at 7:17 am

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Free hindi best pdf e books download

Hindi and Sanskrit books online

Code 6
Shrimad Bhagwat Gita Sadhak Sanjivani –
PDF File (All Pages) updated 10/09/2014

Chapter Wise PDF (Code 6 Shrimad Bhagwat Gita Sadhak Sanjivani ) updated 21/11/2014

English

Code 1528
Hanuman Chalisa (Roman) –  PDF File (All Pages) updated 10/09/2014

Code 455
Srimad Bhagvadgita  – 
PDF File (All Pages) updated 10/09/20
14

Code 1318
Ramcharitamanas (the Ramayana of Goswami Tulasidas) – 
PDF File (All Pages) updated 29/12/2014

Chapter Wise PDF (Code 1318 Ramcharitmanas ) updated 29/12/2014

 Gujarati books online

Code 948
Sunderkand –
PDF File (All Pages) updated 23/09/2014

Code 1198
Hanuman Chalisa –
PDF File (All Pages) updated 23/09/2014

Code 1941
Shiv Sahastranaam Strotam  – 
PDF File (All Pages) updated 23/09/2014

 

 Marathi books online

Code 855
Haripath –
PDF File (All Pages) updated 08/10/2014

Code 859
Sri Gyaneshwari  –
PDF File (All Pages) updated 08/10/2014

Code 1640
Sarth Manache Shlok –
PDF File (All Pages) updated 08/10/2014

 

Telugu books online

Code 973
Sri Shivstotravawali – PDF File (All Pages) updated 11/10/2014

Code 1026
Panchsuktmoolam  – PDF File (All Pages) updated 18/10/2014

Code 1502
Hanuman chalisa  – PDF File (All Pages) updated 18/10/2014

Code  1806
Sri Vendeteshwar Stotrawali – PDF File (All Pages) updated 11/10/2014

 

 Tamil books online

Code 1788
Sri Murugan Tadimaale – PDF File (All Pages) updated 18/10/2014

Code 1789
Tiruppavai Vilkakam- PDF File (All Pages) updated 18/10/2014

 

 Kannada books online

Code 736
Nityastuti and Adityahardya Stotram – PDF File (All Pages) updated 25/10/2014

Code 738
Hanumat Stotrawali – PDF File (All Pages) updated 25/10/2014

Code 842
Sri Lalitashastramaam – PDF File (All Pages) updated 25/10/2014

Download Malyalam Publications books online

Code 1916
Srimad Bhagwatgita – PDF File (All Pages) updated 25/10/2014

 

Bangala books online

Code 1659
Sri Sri Krishner..-
PDF File (All Pages) updated 14/11/2014

Code 1797
Stavmala-
PDF File (All Pages) updated 14/11/2014

Code 1881
Hanuman Chalisa-
PDF File (All Pages) updated 14/11/2014

 

 Oriya books online

Code 856
Hanuman Chalisa –
PDF File (All Pages) updated 15/11/2014

Code 1750
Srimad Bhagwat.. –
PDF File (All Pages) updated 15/11/2014

 

 

विश्व प्रसिद्ध गीताप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस, हनुमान चालीसा सहित दजर्नों पुस्तकें अब कोई भी ऑनलाइन पढ़ सकता है। गीताप्रेस ने हिन्दी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तमिल, मलयालम, उड़िया, बंग्ला और तेलगू भाषा की दो दजर्न पुस्तकों का ई-संस्करण ऑनलाइन कर दिया है। अधिकृत वेबसाइट पर बस एक क्लिक करते ही पूरी पुस्तक सामने होगी। वह भी नि:शुल्क।
1926 से लगातार प्रतिमाह हिन्दी में प्रकाशित होने वाली ‘कल्याण’ और 1934 से अंग्रेजी प्रकाशित होने वाली ‘कल्याण कल्पतरु’ भी वेबाइट पर उपलब्ध हैं। इन दोनों पुस्तकों को पढ़ने के लिए अलग-अलग वेबसाइट पर लॉग ऑन करना होगा। जानकर खुशी होगी कि गीताप्रेस ने अपना एक फेसबुक अकाउण्ट भी बना दिया है। इस अकाउण्ट पर कोई भी पाठक अपना संदेश या विचार दे सकता है।

इन्हें पढ़ सकते हैं ऑनलाइन
अंग्रेजी – हनुमान चालीसा, गीता, श्रीरामचरित मानस और कल्याण।
हिन्दी – गीता साधक संजीवनी, गीता, गजेन्द्र मोक्ष, श्रीविष्णु सहस्रनाम, श्रीनारायण कवच, श्रीरामरक्षास्तोत्र, श्रीशिवमहिम्न: स्त्रोत, सुन्दरकाण्ड।
गुजराती – सुन्दरकाण्ड, हनुमान चालीसा और श्रीशिव सहस्रनामस्तोत्र।
मराठी – श्रहरिपाठ, ज्ञानेश्वरी और सार्थ मनाचे श्लोक।
तेलगू – शिव स्तोत्रवली, स्तोत्र कदम्बम, श्रीनामरामायणम् एवं हनुमान चालीसा, पंचसूक्तमुलु रुद्रमु सस्वरमु और श्रीवेंकटेश्वर स्तोत्रवली।
कन्नड़ – हनुमत् स्तोत्रवली, नित्यस्तुति एवं आदित्य हृदय स्तोत्रम् और श्रीललिता सहस्रनामस्तोत्रम।
तमिल – श्री मुरुगतन तुदिमालै और तिरुप्पावै विलक्कम्।
मलयालम – श्रीमद्भगवद्गीता।
उड़िया – श्रीहनुमान चालीसा और संत जगन्नाथ दास कृत श्रीमद्भगवदगीता-एकादश स्कन्ध।
बंग्ला – हनुमान चालीसा, श्री श्रीकृष्णेर अष्टोत्तर शतनाम और स्तवमाला।

रोचक जानकारी
– गीताप्रेस गोरखपुर से स्थापना काल 1923 से प्रकाशित हो रही हैं पुस्तकें
– कल्याण 1926 और कल्याण कल्पतरु 1934 से हो रही प्रकाशित
– पन्द्रह विभिन्न भाषाओं में हो रहा है प्रकाशन
– स्थापना काल से 31 मार्च 2014 तक कुल 58.25 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं
– सर्वाधिक भक्त चरित्र एवं भजनमाला की 12.44 करोड़ और 11.42 करोड़ प्रति श्रीमद्भगवदगीता की प्रकाशित हो चुकी हैं

अब विश्व के किसी भी कोने में कोई भी आसानी से गीताप्रेस की पुस्तकें अधिकृत वेबसाइट पर क्लिक करते ही आसानी से पढ़ सकता है। चुनिंदा पुस्तकों को ऑनलाइन किया गया है। जल्द ही कुछ और पुस्तकों को वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
डॉ. लालमणि तिवारी, प्रोडक्शन मैनेजर, गीताप्रेस

 

Published by world famous Gita Press Gorakhpur Bhagwad Gita, Ramcharitmanas, including Hanuman Chalisa Djrnon books no longer be read online. Gita Press the English, Hindi, Gujarati, Marathi, Kannada, Tamil, Malayalam, Oriya, Bangla and Telugu language has two Djrn books online eedition. Just one click on the official website, the book will be out. She also free.

1926 will be published in Hindi consecutive month welfare’ and published in English in 1934, Welfare Kalpataru are also available on Vebait. To read these two books must log on different websites. Be pleased to know that the Gita Press has made her a Facebook account. On this account, any reader can enter your message or idea.

You can read them online
English Hanuman Chalisa, Gita, Sriramcrit psyche and welfare.
Hindi Gita seeker lifesaving, Gita, Gajendra Moksha, Srivishnu sahasranAma, Srinarayan armor, Sriramrcshastotr, Srishivmahimn: source, Sundarakanda.
Gujarati Sundara Kanda, Hanuman Chalisa and Shsranamstotr Srishiv.
Marathi Srhripat, gyaneshwari and staff Mnache Sarthe.
Telugu Shiva Stotrvli, Ode Kdmbm, Srinamramayanm and Hanuman Chalisa, Pancsuktmulu Rudramu and Srivenkteshwar Stotrvli Sswrmu.
Kannada Hanumt Stotrvli, Nityshuti and Aditya Stotrm and Srilalita Shsranamstotram heart.
Tamil Mr. Murugtn Tudimala and Vilkkm Tiruppava.
Malayalam Bhagwad Gita.
Oriya Srihanuman Chalisa Jagannath Das and Sant integrated trunk SrimdbgvdgeetaXI.
Bungalow Hanuman Chalisa, Mr. Srikrishner Ashtottr and Stwmala Stnam.

Interesting Information
Gita Press, Gorakhpur inception in 1923 has been published books
Welfare in 1926 and 1934 are being published Kalpataru
Is published in fifteen different languages
March 31, 2014 inception, a total of 58.25 million books have been published
12.44 million and 11.42 million of the most devout character and Psalter have been published in the Srimdbgvdgeeta

Anyone in any corner of the world official website simply click on Gita Press books to be read easily. Has selected books online. And books will be uploaded on the website soon.
DR. Ruby Tiwari, Production Manager, Gita Press

 

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - February 1, 2015 at 12:52 pm

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Hanuman Chalisa in devnagari Hindi Marathi text Lyrics

Hanuman Meaning (2)
हनुमान चालीसा
तुलसीदास
श्री गुरू चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि,
बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार,
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेस बिकार ॥
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जय हनुमान ज्ञान गुन सागर,
जय कपीस तिहुं लोक उजागर ॥1॥
राम दूत अतुलित बल धामा,
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥2॥
महावीर बिक्रम बजरंगी,
कुमति निवार सुमति के संगी ॥3॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुँचित केसा ॥4॥
हाथ बज्र और ध्वजा बिराजे,
काँधे मूंज जनेऊ साजे ॥5॥
शंकर सुवन केसरी नंदन,
तेज प्रताप महा जगवंदन ॥6॥
विद्यावान गुनि अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर ॥7॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मन बसिया ॥8॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा,
विकट रूप धरि लंक जरावा ॥9॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे,
रामचंद्र के काज सवाँरे ॥10॥
लाय संजीवन लखन जियाए,
श्री रघुबीर हरषि उर लाए ॥11॥
रघुपति किन्ही बहुत बड़ाई,
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥12॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं,
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥13॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा,
नारद सारद सहित अहीसा ॥14॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते,
कवि कोविद कहि सकें कहाँ ते ॥15॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं किन्हा,
राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥16॥
तुम्हरो मंत्र विभीषन माना,
लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥17॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू,
लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू ॥18॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं,
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं ॥19॥
दुर्गम काज जगत के जेते,
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥20॥
राम दुआरे तुम रखवारे,
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे ॥21॥
सब सुख लहै तुम्हारी शरना,
तुम रक्षक काहु को डरना ॥22॥
आपन तेज सम्हारो आपै,
तीनों लोक हाँक तै कांपै ॥23॥
भूत पिशाच निकट नहि आवै,
महाबीर जब नाम सुनावै ॥24॥
नासै रोग हरे सब पीरा,
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥25॥
संकट तै हनुमान छुडावै,
मन करम वचन ध्यान जो लावै ॥26॥
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सब पर राम तपस्वी राजा,
तिन के काज सकल तुम साजा ॥27॥
और मनोरथ जो कोई लावै,
सोइ अमित जीवन फ़ल पावै ॥28॥
चारों जुग परताप तुम्हारा,
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥29॥
साधु संत के तुम रखवारे,
असुर निकंदन राम दुलारे ॥30॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता,
अस वर दीन्ह जानकी माता ॥31॥
राम रसायन तुम्हरे पासा,
सदा रहो रघुपति के दासा ॥32॥
तुम्हरे भजन राम को पावै,
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥33॥
अंतकाल रघुवरपूर जाई,
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥34॥
और देवता चित्त ना धरई,
हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥35॥
संकट कटै मिटै सब पीरा,
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥36॥
जै जै जै हनुमान गुसाईँ,
कृपा करहु गुरु देव की नाईं ॥37॥
जो सत बार पाठ कर कोई,
छूटइ बंदि महा सुख होई ॥38॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा,
होय सिद्ध साखी गौरीसा॥39॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा,
कीजै नाथ ह्रदय महं डेरा॥40॥
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ॥
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥
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Modi chalisa full in hindi – NaMo Chalisa

Modi chalisa full in hindi

Modi chalisa full in hindi

Modi chalisa full in hindi – NaMo Chalisa

 

Allahabad. Narendra Modi is now being worshiped as God.

We are talking here of a village in Uttar Pradesh, where Modi is being worshiped as God.

Bhagwanpur UP village dubbed Modi Modi owner is a fan of them.

Modi’s fan BIJENDRA Narayan Mishra village has a temple priest.

The ancient temple of Lord Shiva, he Mishra same priest statue is a statue of Narendra Modi.

जय नरेन्द्र ग्यान गुन सागर |
जय मोदी तिहुँ लोक उजागर ||
राष्ट्रदूत अतुलित बलधामा |
दामोदर पुत्र नरेन्दर नामा ||
तुम उपकार राष्ट्र पर कीन्हा |
कच्छ संवारि स्वर्ग सम कीन्हा ||
माया, मुलायम थर थर काँपैं |
काँग्रेस को चिंता व्यापै ||
नासहि सपा मिटैं बसपाई |
खिलै कमल फूलैं भजपाई ||
साधु संत के तुम रखबारे |
असुर निकंदन राष्ट्रदुलारे ||
संत रसायन तुम्हरे पासा |
सदा रहहु भारत के दासा ||
भारत विश्वगुरु बन जावै |
जब मोदी दिल्ली मैं आवै ||
चीन पाक दोउ निकट न आवै |
जब मोदी को नाम सुनावै ||
नासहिं दुष्ट और अपराधा |
भ्रष्टाचार मिटावहिं बाधा ||
करहि विकास स्वर्ग सम सुंदर |
बनहि राम को सुंदर मंदिर ||
असुर निवारि सुरन्ह कौ थापैं |
राहुल सोनिया कबहुँ न व्यापै ||
मोदी मंत्र एक सम जाना |
करहि विकास राष्ट्र सनमाना ||
भारत राष्ट्र पराक्रमशाली |
होहि सिद्ध यह शंशय नाही ||
जय मोदी ||

He is not to promote him to the temple of Modi, but Modi is designed for prayer to become PM. Namo Namotemple, the temple known as the Village People are calling.

Worship in the temple with Modi Modi Modi Chalisa devotee is also read. Modi to the Prime Minister of India has been lit in the temple is an everlasting light. The lamp will be lit continuously for 125 days.

Modi said the man BIJENDRA Narayan Mishra even if by doing so they are forced to listen to people’s criticisms but the best results will come in the future for the country. Mishra said that Modi is the only country in which such person stability, security and prosperity can bring.

He is something for everyone in the country, so I thought that the country needs a leader like Modi, we strive to provide for them, why not divine. Namo Namotemple slowly gaining popularity among people. For a glimpse of the village people are coming around.

Mishra Modi particular thing as dress like their beards. Shiva statue in the temple next to Modi is engaged in four feet. It’s believed that Lord Shiva Modi villagers will live long. Modi’s longevity for which the villagers do Mahmritunjaya chant.

 

MODI CHALISA IN GUJARATI

 

MODI CHALISA IN GUJARATI

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - December 6, 2014 at 12:49 pm

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Narendra Modi chalisa full in hindi

Modi chalisa full in hindi – NaMo Chalisa

 

Modi chalisa in hindi

Modi chalisa in hindi


नमो नमो ज्ञान गुन सागर।
कमलदूत तिहुं लोक उजागर।।

राम दूत अतुलित बल धामा।
“हिरा बा‘सुत नरेंदर नामा।।

महाबीर बलि गुर्जरसेरा।
खमणप्रताप बहु अतुलित वीरा।।

केसरी बरन बिराज सुबेसा।
उग्र मूंछदढी सुभ्रति केसा।।

मुखपर ऐनक सदा बिराजै।
गुर्जर भासा जनेउ साजे।।

संकर सुवन कमलिनिनंदन।
तेजप्रताप बीजेपी बंदन।।

बहुबलवान गुनि अति चातुर।
राजकाज करिबे को आतुर।।

नमो चरित्र सुनिबे को रसिया।
मन में तिहुं सिंघासन बसिया।।

सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रुप धरी गोध्रा जरावा।।

“अटल‘ सुमिरे कहै मित बानी।
“मम गुरुदेव लाल अडवानी‘।।

गुरुवर जबहुं शिष्यसे हारे।
लंबैं से नित कुर्सी निहारे।।

साधु संत के तुम रखवारे।
कांग्रेसनिकंदन “लाल‘ दुलारे।।

उग्ररुप धरि “हाथ‘ संहारे।
राजनीति के काज संवारे।।

लाय संजीवन “राज‘नाथ जियाये। ”
नमोनमो‘ हरषि उर लाये।।

राजनाथ कीहनी बहुत बडाई।
“तुम मम प्रिय नितीश नहीं भाई‘।।

लालक्रिश्‍न, मुरलीदि मुनीसा।
जेटली, सुसमा सहित अहीसा।।

राहुल हूल उठा परि राखा।।
तुम लहरौ जग कमल पताका।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सकै कहां ते।।

तुम उपकार गुजरातहि कीहना।
बिजली सडक विकासहि दिहना।।

तुमरो मंत्र भाजपाहि माना।
दिल्लीस्वर अब भये कोई अपना।।

इंटरनेट मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघी गये अचरज नाहीं।।

ट्‌विटर फेसबुक सोसल नेटवर्का।
शहा अमितवा हीरा परखा।।

पहुंच्यो ठेठ भासनकौ बिदेसा।
जबहु अमरिका नकरै व्हीसा।।

बीजनेस के तुम रखवारे।
आम आदमी बहु मतवारे।।

उद्योगजगत तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डरना।।

“हाथ‘ कहे उंगलिया उठाए।
प्रजा रोएं हैं धांए धांए।।

“हाथ‘ उठै गरीबोंकी पीरा।
“कमल‘ पक्ष तो भक्‍त अमीरा।।

पूरी रोटी खईके जइबे।
अबकै बार “हाथ‘ही लईबे।।

असुर कहत दढियल औ‘ फेकू।
तुम गरजै “आओ तो देखूं‘।।

“इ गरीबोंका का दुख जाने।
शहजादे के न होश ठिकाने‘।।

जबहुं वीर पटने में पधारा।
जलन लगै तब नितीश कुमारा।।

अब तो वीरकी निकली सवारी।
परचार की झडी, खर्च भी भारी।।

भूत पिसाच निकट नहीं आवें।
नमोमंत्र जब नाम सुनावें।।

नमोनामही हरै सब पीरा।
जपत निरंतर वीर नरेंद्रा।।

संकट तें अब “नमो‘ छुडावें।
मनमोहन की नींद उडावें।।

राम रसायन तुमरे पासा।
सदा रहो सत्ता के दासा।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदी महा सुख होई।।

जो यह पढै नमोचालिसा।
उसका मुख हो तब राहुलसा।।

हमरा क्‍या हम तो मतदाता।
जो आए, सो ताली बजाता
नंदीदास कहे गुर्जरबीरा।
कीजै मतदाता मनमहॅं डेरा।।

 

The residents of a remote village in neighbouring Kaushambi district, it seems, have gone a bit too far in their adulation of Narendra Modi. In fact, they have dedicated a temple to him — complete with a statue and ‘Modi Chalisa’.

Villagers from Bhagwanpur have begun to worship the BJP prime ministerial candidate as a deity and address him as ‘Swami’ Narendra Modi. The ancient Shiva temple where Modi’s statue is installed is now called ‘NaMo NaMo Mandir’.

The ‘devotees’ offer daily prayers to the deity and also recite a ‘Modi Chalisa’ besides lighting a lamp which they say will be lit continuously for 125 days with the wish that Modi becomes the prime minister of the country.

Not surprisingly, the move, led by the temple priest, has its share of critics, with some considering it as a stunt by those affiliated to the BJP. However, unfazed by what others say, 49-year-old priest Brijendra Narayan Mishra believes “worshipping Modi will result in a better future for the country”.

“Modi alone has the potential to bring stability, security and prosperity to the nation and worshipping his statute is my style of patriotism,” he said.

“Har koi desh ke liye kuch na kuch kar raha hai to hamne socha ki desh ko Modiji jaise neta ki zarurat hai, to hum unke liye ishwariye shakti pradan karne ka prayas kyun na karen (Everyone is contributing on his part for the betterment of the country and we need a leader like Modi. So I thought I would do this and others followed),” said Mishra while talking to TOI.

“We are not doing this for personal propaganda as we are of the view that if Modi becomes the prime minister, we will have a better future,” he said.

The ‘NaMo, NaMo Mandir’ is becoming popular among the masses and people from nearby villages are coming here to catch a glimpse of it.

Interestingly, Mishra dresses like Modi in a kurta and half-jacket and has styled his hair and beard like the BJP leader. In the temple, Modi’s about 4-foot tall statue sits beside the Shiva Linga, as the villagers believe “Lord Shiva would give a long life to Modi”. For this, they are also reciting the ‘Mahamritunjaya’ mantra.

Apart from offering garlands and performing a daily ‘aarti’ in front of the idol, the villagers assemble and sing the ‘Modi Chalisa’ and bhajans in his support.

However, not everyone is a blind follower of Mishra’s idea. Some consider this act a stunt and meaningless in the present context. “The priest wants cheap popularity and installing a Modi statue will not work,” said a villager.

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ह्या आरत्या आमच्या घरी गणपती येतो तेव्हा म्हणतात

आरत्या

  1. सुखकर्ता दुःखहर्ता –
  2. लवथवती विक्राळा
  3. दुर्गे दुर्घट भारी
  4. त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त
  5. युगें अठ्ठावीस विटेवरी उभा
  6. येई हो विठ्ठले
  7. आरती ज्ञानराजा
  8. सत्राणे उड्डाणे हुंकार वदनीं
  1. घालीन लोटांगण
  2. सदा सर्वदा
  3. कैलासराणा शिव चंद्रामौळी
  4. ज्या ज्या ठिकाणी मन जाय माझे
  5. मोरया मोरया मी बाळ तान्हे
  6. अलंकापुरी पुण्यभुमी पवित्र
  7. शुकासारिखे पूर्ण वैराग्य ज्याचे
मंत्रपुष्पांजली

  1. ओम यज्ञेन यज्ञमयजन्त

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Aarthi Ma Sharadhaji ki Aarthi Ma Sharadhaji ki – in Hindi
Aarthi Sri Tulsiji ki Aarthi Sri Tulsiji ki – in Hindi
Aarti Batuknath Bhairavji Ki Aarti Batuknath Bhairavji Ki – in Hindi
Aarti Bhagavan Sri Chandraji ki Aarti Bhagavan Sri Chandraji ki – in Hindi
Aarti Bhagwan Shivji Ki Aarti Bhagwan Shivji Ki – in Hindi
Aarti Bhudvar ki Aarti Bhudvar ki – in Hindi
Aarti Bruhaspativar ki Aarti Bruhaspativar ki – in Hindi
Aarti Chintapoorni Deviji ki Aarti Chintapoorni Deviji ki – in Hindi
Aarti Durgaji Ki Aarti Durgaji Ki – in Hindi
Aarti Gajbadan Vinayakji Ki Aarti Gajbadan Vinayakji Ki – in Hindi
Aarti Gomataji ki Aarti Gomataji ki – in Hindi
Aarti JaharVeerji ki Aarti JaharVeerji ki – in Hindi
Aarti Jai Santhoshi Ma ki Aarti Jai Santhoshi Ma ki – in Hindi
Aarti Janakinathji Ki Aarti Janakinathji Ki – in Hindi
Aarti Kailashwasi Shivji Ki Aarti Kailashwasi Shivji Ki – in Hindi
Aarti Krishna Kaniayaji Ki Aarti Krishna Kaniayaji Ki – in Hindi
Aarti Mahadevji Ki Aarti Mahadevji Ki – in Hindi
Aarti Manasa Deviji ki Aarti Manasa Deviji ki – in Hindi
Aarti Mangalvar ki Aarti Mangalvar ki – in Hindi
Aarti Maryada Purushotam Ram Ki Aarti Maryada Purushotam Ram Ki – in Hindi
Aarti Naina Deviji ki Aarti Naina Deviji ki – in Hindi
Aarti Nand Kishorji Ki Aarti Nand Kishorji Ki – in Hindi
Aarti Nav Durgaji Ki Aarti Nav Durgaji Ki – in Hindi
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Aarti Pretraj Sarkar (Sankathari) Ji Ki Aarti Pretraj Sarkar (Sankathari) Ji Ki – in Hindi
Aarti Pretraj Sarkarji Ki Aarti Pretraj Sarkarji Ki – in Hindi
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आरत्या शुद्ध म्हटल्या पाहिजेत

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4 comments - What do you think?  Posted by admin - October 13, 2014 at 4:10 pm

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