Archive for April, 2021

Gangaur Vrat, Puja Vidhi, Muhurat, Katha

गणगौर पूजा महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। महिलाएं अपने पति से गणगौर व्रत छिपाकर करती हैं। यहां तक क‍ि पूजा में चढ़ाए जाने वाला प्रसाद भी वह अपने पति को नहीं खिलाती हैं।

गणगौर व्रत कैसे करें, जानिए क्या है पूजा विधि, नियम, व्रत कथा और आरती
गण (शिव) तथा गौर(पार्वती) के इस पर्व को विवाहित महिलाओं के साथ कुंवारी लड़कियां भी मनपसंद वर पाने की कामना से करती हैं। विवाहित महिलायें इस व्रत को अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए करती हैं।

गणगौर त्योहार चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। मुख्य रूप से इस पर्व को राजस्थान के लोग मनाते हैं। इसी के साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात में भी कुछ इलाकों में गणगौर व्रत रखा जाता है। इस बार ये पूजा 15 अप्रैल को है। इस व्रत को पति से गुप्त रखकर किया जाता है। गणगौर पूजा होली के दिन से शुरू होकर 18 दिनों तक चलती है।

गणगौर पूजा सामग्री: साफ पटरा, कलश, काली मिट्टी, होलिका की राख, गोबर या फिर मिट्टी के उपले, सुहाग की चीज़ें (मेहँदी, बिंदी, सिन्दूर, काजल, इत्र), शुद्ध घी, दीपक, गमले, कुमकुम, अक्षत, ताजे फूल, आम की पत्ती, नारियल, सुपारी, पानी से भरा हुआ कलश, गणगौर के कपड़े, गेंहू, बांस की टोकरी, चुनरी, हलवा, सुहाग का सामान, कौड़ी, सिक्के, घेवर, चांदी की अंगुठी, पूड़ी आदि।

गणगौर  शुभ मुहूर्त: गणगौर पूजा 18 दिनों तक चलती है। कुछ लोग इसके आखिरी दिन पूजा अर्चना करते हैं। गणगौर व्रत को कई जगहों पर गौरी तीज या सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को ये व्रत रखा जाता है।

गणगौर पूजा विधि: सुहागिनें इस दिन दोपहर तक व्रत रखती हैं। पूजा के समय शिव-गौरी को सुंदर वस्त्र अर्पित करें। माता पार्वती को सम्पूर्ण सुहाग की वस्तुएं चढ़ाएं। चन्दन, अक्षत, धूप, दीप, दूब व पुष्प का इस्तेमाल करते हुए पूजा-अर्चना करें। इस दिन गणगौर माता को फल, पूड़ी, गेहूं चढ़ाये जाते हैं। एक बड़ी सी थाली लें उसमें चांदी का छल्ला और सुपारी रखें और उसमें जल, दूध, दही, हल्दी, कुमकुम घोलकर सुहागजल तैयार कर लें। दोनों हाथों में दूब लेकर इस जल से पहले गणगौर पर छीटें लगाएं फिर महिलाएं उस जल को अपने ऊपर सुहाग के प्रतीक के तौर पर छिड़क लें। अंत में माता को भोग लगाकर गणगौर माता की कथा सुनें। गणगौर पर चढ़ाया हुआ प्रसाद पुरुषों को नहीं दिया जाता है। जो सिन्दूर इस दिन माता पार्वती को चढ़ाया जाता है, उसे महिलाएं अपनी मांग में भरती हैं।

इस दिन गणगौर माता को सजा-धजा कर पालने में बैठाकर शोभायात्रा निकालते हुए विसर्जित किया जाता है। मान्यता है कि गौरीजी की स्थापना जहां होती है वह उनका मायका हो जाता है और जहां विसर्जन होता है वह ससुराल। शाम को शुभ मुहूर्त में गणगौर को पानी पिलाकर किसी पवित्र सरोवर या कुंड में इनका विसर्जन किया जाता है। इस दिन अविवाहित लड़कियां और विवाहत स्त्रियां दो बार पूजन करती हैं। दूसरी बार की पूजा में शादीशुदा महिलाएं चोलिया रखती हैं, जिसमें पपड़ी या गुने रखे जाते हैं। गणगौर विसर्जित करने के बाद घर आकर पांच बधावे के गीत गाये जाते हैं।

माता पार्वती की आरती:

जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता

जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा

देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता

हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता

सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता

नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

देवन अरज करत हम चित को लाता

गावत दे दे ताली मन में रंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता

सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।

जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

मुख्य बातें

  • गणगौर का पर्व राजस्थान समेत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात जैसे उत्तरीय पश्चिम इलाके में मनाया जाता है।
  • इस दिन गणगौर माता यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है तथा उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
  • पति की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को रखा जाता है, यह व्रत पत्नियां अपने पति से छुपा कर रखती हैं ‌

भारत विविधताओं का देश है और यहां कई ऐसे अनोखे त्यौहार और पर्व मनाए जाते हैं जो अपने आप में ही बहुत विशेष होते हैं। ऐसा ही एक पर्व है जो महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है जिसे भारत के उत्तरी प्रांतों में ज्यादातर मनाया जाता है। यह पर्व है गणगौर व्रत, ‌जिस दिन महिलाएं अपने पति से छुपकर व्रत करती हैं और गणगौर माता यानी माता पार्वती की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं। हर वर्ष यह तिथि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया पर पड़ती है। गणगौर पूजा के साथ अक्सर मत्स्य जयंती भी मनाई जाती है। जानकार बताते हैं कि, गणगौर का मतलब गण शिव और गौर माता पार्वती से है।

गणगौर पूजा का महत्व

गणगौर पूजा राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत भारत के उत्तरी प्रांतों का लोकप्रिय पर्व है। महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए यह पूजा बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार,‌इस‌ दिन को प्रेम का जीवंत उदाहरण माना जाता है क्योंकि भगवान शिव ने माता पार्वती को और माता पार्वती ने संपूर्ण स्त्रियों को सौभाग्यवती होने का वरदान दिया था। जो सुहागिन गणगौर व्रत करती हैं तथा भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं उनके पति की उम्र लंबी हो जाती है। वहीं, जो कुंवारी कन्याएं गणगौर व्रत करती हैं उन्हें मनपसंद जीवनसाथी का वरदान प्राप्त होता है। इस पर्व को 16 दिन तक लगातार मनाया जाता है और गौर का निर्माण करके पूजा की जाती है। ‌

गणगौर की कहानी, गणगौर की कथा 

गणगौर की व्रत कथा के मुताबिक, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती वन में गए। और चलते-चलते वे दोनों बहुत ही घने वन में पहुंच गए। तब माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि हे भगवान मुझे प्यास लगी है। इस पर भगवान शिव ने कहा कि देवी देखों उस ओर पक्षी उड़ रहे हैं उस स्थान पर अवश्य ही जल मौजूद होगा।

पार्वती जी वहां गई, उस जगह पर एक नदी बह रही थी। पार्वती जी ने पानी की अंजलि भरी तो उनके हाथ में दूब का गुच्छा आ गया। जब उन्होंने दूसरी बार अंजलि भरी तो टेसू के फूल उनके हाथ में आ गए। और तीसरी बार अंजलि भरने पर ढोकला नामक फल हाथ में आ गया।

इस बात से पार्वती जी के मन में कई तरह के विचार उठने लगे। परन्तु उनकी समझ में कुछ नहीं आया। उसके बाद भगवान शिव शंभू ने उन्हें बताया कि आज चैत्र शुक्ल तीज है। विवाहित महिलाएं आज के दिन अपने सुहाग के लिए गौरी उत्सव करती हैं। गौरी जी को चढ़ाएं गए दूब, फूल और अन्य सामग्री नदी में बहकर आ रहे थे।

इस पर पार्वती जी ने विनती की कि हे स्वामी दो दिन के लिए आप मेरे माता-पिता का नगर बनवा दें। जिससे सारी स्त्रियां वहीं आकर गणगौर के व्रत को करें। और मैं खुद ही उनके सुहाग की रक्षा का आशीर्वाद दूं।

भगवान शंकर ने ऐसा ही किया। थोड़ी देर में ही बहुत सी स्त्रियों का एक दल आया तो पार्वती जी को चिन्ता हुई और वो महादेव जी से कहने लगी कि हे प्रभु मैं तो पहले ही उन्हें वरदान दे चुकी हूं। अब आप अपनी ओर से सौभाग्य का वरदान दें।

पार्वती जी के कहने पर भगवान शिव ने उन सभी स्त्रियों को सौभाग्यवती रहने का वरदान दिया। भगवान शिव और माता पार्वती ने जैसे उन स्त्रियों की मनोकामना पूरी की, वैसे ही भगवान शिव और गौरी माता इस कथा को पढ़ने और सुनने वाली कन्याओं और महिलाओं की मनोकामना पूर्ण करें।

गणगौर की पूजा विधि-

गणगौर व्रत के लिए कृष्ण पक्ष की एकादशी को सुबह स्नान आदि करने के बाद लकड़ी की बनी टोकरी में जवारे बोना चाहिए। पढ़ें संपूर्ण पूजा विधि-

1. गणगौर व्रत में व्रती महिला को केवल एक समय में भोजन करना चाहिए।
2. मां गौरी को श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
3. इसके बाद चंदन, अक्षत, धूप-दीप आदि अर्पित करें।
4. इसके बाद मां गौरी को भोग लगाएं।
5. भोग लगाने के बाग गणगौर व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
6. भोग लगाने के बाद माता गौरी को चढ़ाए गए सिंदूर से सुहाग लें।
7. चैत्र शुक्ल द्वितीया को गौरी को किसी तालाब या नदी में ले जाकर स्नान कराएं।
8. इसके बाद चैत्र शुक्ल तृतीया को गौरी-शिव स्नान कराएं।
9. इस दिन शाम को गाजे-बाजे के साथ गौरी-शिव को नदी या तालाब में विसर्जित करें।
10. इसके बाद अपना उपवास खोलें।

गणगौर राजस्थान एवं सीमावर्ती मध्य प्रदेश का एक त्यौहार है जो चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तीज को आता है. इस दिन कुवांरी लड़कियां एवं विवाहित महिलायें शिवजी (इसर जी) और पार्वती जी (गौरी) की पूजा करती हैं. इस दिन पूजन के समय रेणुका की गौर बनाकर उस पर महावर, सिंदूर और चूड़ी चढ़ाने का विशेष प्रावधान है. चंदन, अक्षत, धूपबत्ती, दीप, नैवेद्य से पूजन करके भोग लगाया जाता है. गणगौर (Kab Hai Gangaur Vrat) राजस्थान में आस्था प्रेम और पारिवारिक सौहार्द का सबसे बड़ा उत्सव है. गण (शिव) तथा गौर(पार्वती) के इस पर्व में कुँवारी लड़कियां मनपसंद वर पाने की कामना करती हैं. विवाहित महिलायें चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं. इस साल गणगौर पूजा 15 अप्रैल 2021 को है.

गणगौर पूजा का समय

गणगौर पूजा बृहस्पतिवार, अप्रैल 15, 2021 को
तृतीया तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 14, 2021 को 12:47 पी एम बजे
तृतीया तिथि समाप्त – अप्रैल 15, 2021 को 03:27 पी एम बजे

गणगौर व्रत पूजन विधि

शिव-गौरी को सुंदर वस्त्र अर्पित करें. सम्पूर्ण सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें. चन्दन,अक्षत, धूप, दीप, दूब व पुष्प से उनकी पूजा-अर्चना करें. एक बड़ी थाली में चांदी का छल्ला और सुपारी रखकर उसमें जल, दूध-दही, हल्दी, कुमकुम घोलकर सुहागजल तैयार किया जाता है. दोनों हाथों में दूब लेकर इस जल से पहले गणगौर को छींटे लगाकर फिर महिलाएं अपने ऊपर सुहाग के प्रतीक के तौर पर इस जल को छिड़कती हैं. अंत में चूरमे का भोग लगाकर गणगौर माता की कहानी सुनी जाती है. गणगौर महिलाओं का त्यौहार माना जाता है इसलिए गणगौर पर चढ़ाया हुआ प्रसाद पुरुषों को नहीं दिया जाता. जो सिन्दूर माता पार्वती को चढ़ाया जाता है, महिलाएं उसे अपनी मांग में भरती हैं.

गणगौर व्रत कथा
क समय की बात है, भगवान शंकर, माता पार्वती एवं नारद जी के साथ भ्रमण हेतु चल दिए. वह चलते-चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गांव में पहुंचे. उनका आना सुनकर ग्राम कि निर्धन स्त्रियां उनके स्वागत के लिए थालियों में हल्दी व अक्षत लेकर पूजन हेतु तुरंत पहुंच गई . पार्वती जी ने उनके पूजा भाव को समझकर सारा सुहाग रस उन पर छिड़क दिया. वे अटल सुहाग प्राप्त कर लौटी.

थोड़ी देर बाद धनी वर्ग की स्त्रियां अनेक प्रकार के पकवान सोने चांदी के थालो में सजाकर सोलह श्रृंगार करके शिव और पार्वती के सामने पहुंची. इन स्त्रियों को देखकर भगवान शंकर ने पार्वती से कहा तुमने सारा सुहाग रस तो निर्धन वर्ग की स्त्रियों को ही दे दिया. अब इन्हें क्या दोगी? पार्वती जी बोली प्राणनाथ! उन स्त्रियों को ऊपरी पदार्थों से निर्मित रस दिया गया है .

इसलिए उनका सुहाग धोती से रहेगा. किंतु मैं इन धनी वर्ग की स्त्रियों को अपनी अंगुली चीरकर रक्त का सुहाग रख दूंगी, इससे वो मेरे सामान सौभाग्यवती हो जाएंगी. जब इन स्त्रियों ने शिव पार्वती पूजन समाप्त कर लिया तब पार्वती जी ने अपनी अंगुली चीर कर उसके रक्त को उनके ऊपर छिड़क दिया जिस पर जैसे छींटे पड़े उसने वैसा ही सुहाग पा लिया.

पार्वती जी ने कहा तुम सब वस्त्र आभूषणों का परित्याग कर, माया मोह से रहित होओ और तन, मन, धन से पति की सेवा करो . तुम्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी. इसके बाद पार्वती जी भगवान शंकर से आज्ञा लेकर नदी में स्नान करने चली गई . स्नान करने के पश्चात बालू की शिव जी की मूर्ति बनाकर उन्होंने पूजन किया.

भोग लगाया तथा प्रदक्षिणा करके दो कणों का प्रसाद ग्रहण कर मस्तक पर टीका लगाया. उसी समय उस पार्थिव लिंग से शिवजी प्रकट हुए तथा पार्वती को वरदान दिया आज के दिन जो स्त्री मेरा पूजन और तुम्हारा व्रत करेगी उसका पति चिरंजीवी रहेगा तथा मोक्ष को प्राप्त होगा. भगवान शिव यह वरदान देकर अंतर्धान हो गए . इतना सब करते-करते पार्वती जी को काफी समय लग गया. पार्वती जी नदी के तट से चलकर उस स्थान पर आई जहां पर भगवान शंकर व नारद जी को छोड़कर गई थी. शिवजी ने विलंब से आने का कारण पूछा तो इस पर पार्वती जी बोली मेरे भाई भावज नदी किनारे मिल गए थे. उन्होंने मुझसे दूध भात खाने तथा ठहरने का आग्रह किया.

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 15, 2021 at 5:04 pm

Categories: Aarati, Articles   Tags:

My First English Marathi Dictionary Pdf

Click to access My-First-English-Marathi-Dictionary-Pdf.pdf

Please download from the following link

My First English Marathi Dictionary Pdf

oxford 3000 pdf english to marathi download
oxford english english marathi dictionary pdf download
navneet english to marathi dictionary pdf
oxford english english marathi dictionary free download
english to marathi pdf
offline english to marathi dictionary pdf free download
english to marathi book pdf
marathi english dictionary book
english to marathi pdf
offline english to marathi dictionary pdf free download
english to marathi book pdf
marathi-english dictionary book
oxford 3000 pdf english to marathi download
oxford english english marathi dictionary pdf download

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 12, 2021 at 4:26 pm

Categories: Uncategorized   Tags:

20 High Demand, Low Supply Products in India – Ecommerce

 

20 best products and categories to sell products online

So you want to sell online! and are searching for such products that sell quickly. Today I will tell you 20 such products and niche categories that you can sell this year. How do I know all this? Based on my experience, and tracking data of these products. Search traffic for these products and niche categories has started increasing. So for sure, many products from these will stand out as winners this year. Out of these products, you will definitely be familiar with some of these products, but some products might also be such, that will completely surprise you.

Let’s learn something new today!

Product no. 1 Resistance Band, a lot of people have heard about this product. but if the market of this product was saturated, I would never suggest it. The reason why it is still a hot selling product? because people are still preferring to exercise at home. and the global pandemic is still not over. So this is the reason, why home gyming equipment is selling more and more. And resistance band is one such home gyming equipment, that is neither too expensive, nor too heavy, and with this, you can do a lot of exercises. 1 tip to increase the sales of this product. Sell resistance band bundled with a jump rope. This is one ultimate combination to get more and more sales.

Product no. 2: Beard Oil I told you some products might surprise you.  Thanks to celebrities like Ranveer Singh, and Virat Kohli These days, a lot of sellers have started keeping beards. And all those people want that their beard to stay silky and lush. That’s why you can explore this beard niche. I would recommend that you start your business with beard oil and when your business becomes a but stable, then invest in other beard products like beard wax, beard comb and many more

Product no. 3: Acupressure Mats No need to be surprised! For any product, this year, that is associated with health and well being, the probability of their selling is highest.  These mats may look pointed and scary to look at, But on exercising, they give a lot of relief to the user and profit to the seller.

Product no. 4: Laptop Skins Yes! I was also surprised to see this product. This product is stable for the last 5 years and is now growing. because people want to beautify all their things and also want to appear trendy. This product comes in various colours and designs. One special tip to sell this product – First of all, try if you can get customized designs made for this If you can not get customized designs made, then try to select only unique designs to sell. and above all, you can sell this through visual platforms like Facebook and Instagram.

Product no. 5: Infrared thermometer Yes, yes, yes. We all know that this product has sold a lot last year. but that does not mean that there is saturation Keeping the COVID scenario in consideration, this year also, the probability of selling of this product is very high. So you can explore this market also.

Product no. 6: Cat and Dog Beds Pet supplies have always been in trend. and their demand is growing day over day. Actually its exploding. So, you can invest in this category also. But for this, there is one advice – The traditional design that is available in the market or the design that most people are selling the same design that other people are selling, stay away from those. Try that you sell different design and that design is also ergonomic, Ok, the next product is going to really surprise you. and you would not have even dreamt about this product.

Product no. 7: Vintage Rugs are on a rise. I don’t know why! Might be because people are staying more at home, or they are moving towards the simple life. Whatever the reason But, these vintage rugs are selling like hotcakes! Now let’s go from inside to outside the house.

Product no. 8 Garden Tools Even now, due to the pandemic, travelling has not opened up. and most of the people stay at home and to keep themselves engaged, they are trying new hobbies and gardening is one of them. so because of this only, there is a boom in gardening tools and accessories. so you can try this niche also. Now many people must be thinking that it is winters, so who will buy gardening related product.

On the contrary, this is the perfect time to launch your store related to gardening products Why? Because if you launch your store or business related to gardening tools right now, then you can easily, For a store to get optimized, or a listing to rank and get optimized it easily takes about 1-2 months so when, after 2 months, when searches will increase, your product might be ranking in the top 10 pages or top 10 So, I would suggest this is the perfect time to launch your store or launch your Amazon business with gardening tools.

 

 Product no. 9: Jigsaw Puzzles. The reason is simple. Most of the people are spending time at home. and they want to do some activity which the whole house can do together and all members of the family can be involved in the activity. So, the jigsaw puzzle is one of the best product for this kind of activity. Why? Because, neither these are too expensive nor too heavy and the biggest thing there is no game rules in this so obviously no family fighting.

Product no. 10: Power Tools These days, people are spending time at home. And because of spending time at home, there are noticing the shortcomings of home too. and to fix these shortcomings, some tools are required. and if we consider the scenario of COVID, then people are still reluctant to call someone from outside to fix these things. and they are trying that they are able to do these small fixes themselves. So, a power tool is a good niche, in which you can invest this year.

but a tip for new sellers – if you want to invest in this category or want to do business in this category, then stay away from dangerous power tools.

you can do business in basic power tools like the magnetic bracelet in which the nuts bolts get stuck due to the magnet.

So, power tools that are dangerous, new sellers should stay away from them.

Product no. 11: Security Cameras This category is growing year over year for the last 3 years and if you are thinking to sell in this category then, deal in wifi security camera and mini security cameras only. Don’t deal in any other type of camera.

Product no. 12: Posture Correctors We all work too much in fact professionals not only work in an office but also at home. and now the culture of work from home is here.  that’s why posture issues have also increased a lot. This category is still unexplored and is growing day over day. So, this product is really good if you are starting a new business. Posture Corrector is very good products which can be worn inside the clothes so it is not even visible. so many people are using this to correct their posture. One big tip for this category – That is searches for ‘Posture corrector for men’ are really high on google. with respect to ‘Posture Correct for Women’. So, if you want to deal in this category or sell in this category then do remember these tips.

Product no. 13: Ladder Bookshelves This product has been performing steadily since 2011 And since the coming of the Zoom Meetings or Video Meetings culture, people have started focusing a lot on their background. And this is the reason sales of Ladder Bookshelves is going up up and up. So, if you want to start your business with the Home Decor category, then this is the right product.

Product no. 14: Baby Clothes have always been in demand.  but if you see the google search results, then searches month over month, since March, have been going up up and up! And this is being speculated, that after 9 months since the first lockdown, there will be a baby boom. and these babies will need clothes. So, The baby category or baby clothes category has already been in demand and it is expected to grow exponentially. So, if you are dealing in baby clothes, then this is a very good category. to start with or to expand your business in it.

 Product no. 15: Pendant Lights These lights have always been in demand and their trend is increasing day over day. Whether it is the dining area or kitchen area everybody like to use these lights. and the best part about this product is it is available in many designs and shapes. So, if you deal in lights or planning to, then this is a good product to start.

Product no. 16: Car Vacuum Cleaner Even though people are not travelling, one has to maintain the car, its cleaning is important.  and this product is selling like anything. 2 important tips – First try to sell small vacuum cleaners. whose size is small. And for the same, the second tip. SEO tip Use the word – Portable Car Vacuum Cleaner so that the rank of your listing can come in the top 10. and because of this, your sale can grow exponentially.

Product no. 17: Laser Hair Remover For some time now, searches for hair remover and laser hair remover in Google, have increased a lot. Hair Removal products are in demand. So, you can try this category also. In this category, look at those products which are quick and easy to use.

 Product no. 18: Teeth Whitening Strip These days, Social Media is so much at the boom, that everyone is uploading their smiling face on social media. And people get conscious in front of the camera if their teeth are yellow.

Product no. 19: Organic Skin Care Like a said during the pandemic people are paying a lot of attention to their health and well being, and skincare is one of them. The demand for organic skincare is increasing because it’s eco friendly. so you can explore this niche also.

Product no. 20: the last niche on our list is solar power products It is very easy to market these products. Just use the keyword eco friendly, last long, do not require any batteries. In this niche, solar panels, solar chargers and solar lights are performing really well. Just add Sun power to your business.

So these are the 20 products that you can sell and I am pretty sure many products from these will stand out as winners.

Now you tell me in comments, which product or niche you liked, that you will try to sell this year.

Till then, Keep Selling, Keep Smiling.

high demand low supply products in india
high demand consumer products in india
high demand products in india 2020
high demand food products in india
most profitable products to sell online
future demand products in india 2020
top selling products on amazon india
trending products to sell 2020

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 4:01 pm

Categories: Articles   Tags:

Simant Vidhi Invitation Card In Gujarati

shrimant vidhi in gujarati
shrimant invitation card format
gujarati language shrimant invitation card format in gujarati
shrimant invitation message
gujarati invitation card maker
shrimant card design
shrimant kankotri
baby shower invitations templates editable in gujarati

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 11, 2021 at 4:57 pm

Categories: Articles   Tags:

Amrut Mahotsav Invitation Card In Marathi

amrut mahotsav meaning
amrut mahotsav’ is the name given to what upcoming celebration
amrut mahotsav meaning in hindi
amrut mahotsav in marathi
amrut mahotsav shubhechha in marathi

प्रिय ती. सौ. आई,

आज आयुष्याच्या या अमृत महोत्सवी टप्प्यावर आम्ही तुझ्या बरोबर आहोत आणि या पुढेही राहणार आहोत. आम्हाला कल्पना नाही कि तुझ्या आयुष्यात आमच्यामुळे आजपर्यंत कितपत आनंद आला आहे पण या पुढे तो येईल याचा नक्की प्रयत्न करू.

या निमित्ताने तुला एक विनंती करावीशी वाटते –
इतरांसाठी खूप वेळ घालवलास आता थोडा वेळ स्वतःला देऊन बघ.
आज पर्यंत खूप कष्ट केलेस. आता अधून मधून थोडी विश्रांती घेऊन बघ.
इतरांच्या तब्येतीची खूप काळजी घेतेस, थोडे स्वतःच्या तब्येतीकडेही लक्ष दे.
इतके छान छान पदार्थ करतेस, कधीतरी एक प्लेट गरम गरम खाऊन बघ.
बघ तरी कसं वाटतं ते.

तुझे या पुढील आयुष्य सुखाचे, समाधानाचे, आरोग्यपूर्ण आणि विनाकटकटीचे जावो हीच ईश्वरचरणी प्रार्थना.

आनंदी दीर्घायुष्यासाठी मनःपूर्वक शुभेच्छा !!!

amrut mahotsav logo
amrut mahotsav in english
amrut mahotsav means how many years

मला या गोष्टीचा खूप खूप आनंद आहे की तुम्ही
आपला 75 वा वाढदिवस देखील तारुण्याच्या स्फूर्ती
आणि उत्साहाने साजरा केला.

जगातील सर्वात चांगल्या स्वभाव असणाऱ्या व्यक्तीला
75 व्या वाढदिवसाच्या अनेक शुभेच्छा.
परमेश्वराला प्रार्थना आहे की तुमचे आयुष्य
कायम असेच निरोगी व सुखी राहो..
वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा..

७५ व्या वाढदिवसाच्या शुभेच्छा संदेश मराठी
एक खरा मित्र तुमचा वाढदिवसाची आठवण
करीत आहे. पण तुमच्या वयाची नाही..
Happy 75th birthday 🎂🌹🎉

सूर्याची सोनेरी किरणे तेज देवो तुम्हास,
फुलणारी फुले सुगंध देवो तुम्हास..
आम्ही जे काही देऊ ते कमीच राहील,
म्हणून देणारा आयुष्याचे प्रत्येक सुख देवो तुम्हास..!
Happy 75th Birthday dear..

75th birthday wishes in marathi
तुमच्या प्रत्येक कामातील स्फूर्ती आणि उत्साहाने
आम्हाला कधीच लक्षात येऊ दिले नाही की,
तुमचे वय 75 ला पोचले आहे.
तुम्हाला वाढदिवसाच्या अनंत शुभेच्छा..

७५ व्या वाढदिवसाच्या शुभेच्छा संदेश मराठी
75 मेणबत्त्यांना फुंकणे हृदय आणि फुफ्फुसाच्या
आरोग्यासाठी फार चांगला व्यायाम आहे.
75 व्या वाढदिवसाच्या शुभेच्छा…

परमेश्वराला एकच प्रार्थना आहे की
मी जेव्हा तुमच्या वयात पोहचेल तेव्हा
मी देखील स्वभावाने तुमच्या प्रमाणेच दयाळू
आणि स्वाभिमानी राहो..
तुम्हाला आपल्या 75 व्या वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा..!

75th birthday wishes in marathi
मी प्रार्थना करतो की येणाऱ्या काळात
तुमच्या सर्व इच्छा पूर्ण होवो
व तुम्हाला आनंद सुख आणि शांती लाभो..
Happy Birthday..

७५ व्या वाढदिवसाच्या शुभेच्छा संदेश मराठी
वैकुंठातून विष्णु भगवान,
कैलाश मधून महादेव,
आणि पृथ्वीवरून तुमचे
प्रिय आम्ही, तुम्हाला वाढदिवसाच्या
शुभेच्छा देत आहोत.
75 व्या वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा 🎉🎂

चालतात वाकून
हळू आहे त्यांची चाल,
वय जरी वाढले आहे
तरी माझ्या आजी आहेत कमाल.
वडिलांना ७५ व्या वाढदिवसाच्या शुभेच्छा..
तुमच्या असण्यानेच आमचे आयुष्य आनंदी
आणि सुखी आहे. तुम्ही नेहमी निरोगी रहा
हीच प्रार्थना हॅपी बर्थडे पप्पा.

75th birthday wishes in marathi
बाबा तुम्ही माझे वडील असण्यासोबतच
एक चांगले मित्रही आहात…!
नेहमी माझ्या सोबत असण्याबद्दल
आपले फार फार आभार..
बाबांना वाढदिवसाच्या शुभेच्छा

तुमच्यासारखे वडील मिळाल्याबद्दल
मी स्वताला खूप भाग्यशाली मानतो.
माझ्यासाठी तुम्ही आकाशातील
एक चकाकते तारे आहात.
तुम्ही नेहमी असेच निरोगी रहा हीच प्रार्थना.
वाढदिवसाच्या अनेक शुभेच्छा पप्पा..!

७५ व्या वाढदिवसाच्या शुभेच्छा संदेश मराठी for father
ज्यांनी मला बोट धरून चालायला शिकवले.
अश्या माझ्या वडिलांना 75 व्या वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा..!

75th birthday wishes in marathi
मला वाटते आजचा दिवस
‘मी तुमचा आभारी आहे’ हे
बोलण्यासाठी सर्वोत्तम आहे.
हॅपी 75 बर्थडे पप्पा 🎉❤️

माझा सन्मान, माझी कीर्ती, माझी स्थिती
आणि माझा मान आहेत माझे पप्पा.
मला नेहमी हिम्मत देणारे
माझा अभिमान आहेत माझे पप्पा..!
पप्पांना 75 व्या वाढदिवसाच्या शुभेच्छा Happy Birthday Dear dad..!
वडिलांना ७५ व्या वाढदिवसाच्या शुभेच्छा संदेश मराठी
जेव्हाही मी तुम्हाला पाहिले आहे मला तुमच्यासारखे
बनण्याची इच्छा निर्माण झाली आहे.
तुम्ही माझ्यासाठी एक आदर्श आहात.
तुम्हाला 75 व्या वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा.

amrut mahotsav 2022
azadi ka amrut mahotsav
bharat ka amrut mahotsav
azadi ka amrut mahotsav essay
azadi ka amrut mahotsav meaning
azadi ka amrut mahotsav logo
azadi ka amrut mahotsav website
azadi ka amrut mahotsav wikipedia
azadi ka amrut mahotsav in hindi
azadi ka amrut mahotsav in english
azadi ka amrut mahotsav meaning in english

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 4:09 pm

Categories: Articles   Tags:

Invitation Card For Upnayan Sanskar In Marathi

Invitation Card For Upnayan Sanskar In Marathi

Invitation Card For Upnayan Sanskar In Marathi

invitation card for upnayan sanskar in marathi
upanayanam invitation card maker free
digital invitation card for upanayanam
upanayanam whatsapp invitation
upanayanam invitation images
upanayanam invitation video maker
thread ceremony invitation
upanayanam invitation cards

upanayanam invitation card maker free
digital invitation card for upanayanam
upanayanam whatsapp invitation
upanayanam invitation images
upanayanam invitation video maker
thread ceremony invitation

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 3:48 pm

Categories: Uncategorized   Tags:

Sarvatobhadra Mandal Pujan Vidhi

sarvatobhadra mandal pujan vidhi
sarvatobhadra mandal pujan

सर्वतोभद्र मण्डल पर निम्न मन्त्रों के साथ ३३ देवताओं का श्रद्धा -भक्तिपूर्वक आवाहन करना चाहिए। प्रत्येक देवता के आवाहन के साथ निर्धारित वर्ग पर अक्षत, पुष्प, सुपारी चढ़ाते रहना चाहिए।

नोट- पुस्तक के प्रारम्भ में लघुसर्वतोभद्र का चित्र दिया गया है, उसी के अनुसार निर्धारित नम्बरों पर पूजन करें।

(१) गणेश (विवेक) पीला
ॐ गणानां त्वा गणपति*
हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपति*
हवामहे निधीनां त्वा निधिपति*
हवामहे वसो मम। आहमजानि
गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्।
ॐ गणपतये नमः। आवाहयामि,
स्थापयामि ध्यायामि ।। -२३.१९

अर्थात्- जो अभीष्ट प्रयोजन की पूर्ति के लिए देवताओं- दैत्यों द्वारा पूजे गये हैं और सम्पूर्ण विघ्नों को समाप्त कर देने वाले हैं, उन गणाधिपति (प्रमथादि गणों के स्वामी) को नमस्कार है।

(२) गौरी (तपस्या) हरा
ॐ आयं गौः पृश्निरक्रमीदसदन्
मातरं पुरः। पितरञ्च प्रयन्त्स्वः॥
ॐ गौर्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३.६
अर्थात्- सभी का सब प्रकार से मङ्गल करने वाली शिवा (कल्याण- कारिणि)! सभी कार्यों को पूर्ण करने वाली, शरणदात्री, त्रिनेत्रधारिणी, गौरी, नारायणी देवि! (महादेवि) आपको नमस्कार है।

(३) ब्रह्मा (निर्माण) लाल
ॐ ब्रह्म जज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्वि
सीमतः सुरुचो वेनऽआवः।
स बुध्न्याऽ उपमाऽ अस्य विष्ठाःसतश्च योनिमसतश्च वि वः॥
ॐ ब्रह्मणे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१३.३

अर्थात्- सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्मरूप में परमात्म शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ, वही शक्ति समस्त ब्रह्माण्ड में व्यवस्था रूप में व्याप्त हुई। यही कान्तिमान् ब्रह्म (सूर्यादि) विविध रूपों में स्थित अन्तरिक्षादि विभिन्न लोकों को तथा व्यक्त जगत् एवं अव्यक्त जगत् को प्रकाशित करते हैं।

(४) विष्णु (ऐश्वर्य) सफेद
ॐ इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा नि दधे पदम्। समूढमस्य पा* सुरे स्वाहा।
ॐ विष्णवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ — ५.१५

अर्थात्- हे विष्णुदेव! आप अपना सर्वव्यापी प्रथम पद पृथ्वी में, द्वितीय पद अन्तरिक्ष में तथा तृतीय पद द्युलोक में स्थापित करते हैं। भू लोक आदि आपके पद- रज में अन्तर्निहित हैं। आप सर्वव्यापी विष्णुदेव को यह आहुति दी जाती है।

(५) रुद्र (दमन) लाल
ॐ नमस्ते रुद्र मन्यवऽ उतो तऽ इषवे नमः। बाहुभ्यामुत ते नमः॥
ॐ रुद्राय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१६.१

अर्थात्- हे रुद्रदेव (दुष्टों को रुलाने वाले)! आपके मन्यु (अनीति- दमन के लिए क्रोध) के प्रति हमारा नमस्कार है। आपके बाणों के लिए हमारा नमस्कार है। आपकी दोनों भुजाओं के लिए हमारा नमस्कार है।

(६) गायत्री (ऋतम्भरा प्रज्ञा) पीला
ॐ गायत्री त्रिष्टुब्जगत्यनुष्टुप् पङ्क्त्या सह। बृहत्युष्णिहा
ककुप्सूचीभिः शम्यन्तु त्वा॥ ॐ गायत्र्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥
– २३.३३

अर्थात्- (हे यज्ञाग्ने)! गायत्री छन्द, त्रिष्टुप् छन्द, जगती छन्द, अनुष्टुप् छन्द, पंक्ति छन्द सहित बृहती छन्द, उष्णिक् छन्द एवं ककुप् छन्द आदि सूचियों के माध्यम से आपको शान्त करें।

(७) सरस्वती बुद्धि (शिक्षा) लाल
ॐ पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती।
यज्ञं वष्टु धियावसुः।
ॐ सरस्वत्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥
– २०.८४

अर्थात्- सबको पवित्रता प्रदान करने वाली, अन्न के द्वारा यज्ञादि श्रेष्ठ कर्मों को सम्पादित करने वाली देवी सरस्वती हमारे यज्ञ को धारण करें तथा हमें अभीष्ट वैभव प्रदान करें।

(८) लक्ष्मी (समृद्धि) सफेद
ॐ श्रीश्च ते लक्ष्मीश्च पत्न्यावहो
रात्रे पार्श्वे नक्षत्राणि रूपमश्विनौ
व्यात्तम्। इष्णन्निषाणामुम्मऽ इषाण सर्वलोकं मऽ इषाण।
ॐ लक्ष्म्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३१.२२

अर्थात्- हे प्रकाश स्वरूप परमात्मन्! श्री (सम्पत्ति) और लक्ष्मी (शोभा) दोनों आपकी पत्नी स्वरूपा हैं, रात्रि और दिन दोनों भुजाएँ हैं एवं नक्षत्र आपके रूप हैं। द्युलोक एवं पृथ्वी आपके मुख सदृश हैं। अपनी इच्छा शक्ति से सबकी इच्छाओं को पूर्ण करने में समर्थ हे ईश्वर! हमारी उत्तम लोकों की प्राप्ति की इच्छा पूर्ति के लिए आप कृपा करें।

(९) दुर्गा शक्ति (संगठन) लाल
ॐ जातवेदसे सुनवाम सोमं
अरातीयतो नि दहाति वेदः।
स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥ ॐ दुर्गायै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -ऋग्वेद १.९९.१

अर्थात्- हम सर्वज्ञ अग्निदेव के लिए सोम- सवन करें। वे अग्निदेव हमारे शत्रुओं के सभी धनों को भस्मीभूत करें। नाव द्वारा नदी से पार कराने के समान वे अग्निदेव हमें सम्पूर्ण दुःखों से पार लगाएँ और पापों से रक्षित करें।

(१०) पृथ्वी (क्षमा) सफेद
ॐ मही द्यौः पृथिवी च नऽ इमं यज्ञं मिमिक्षताम्।
पिपृतां नो भरीमभिः।
ॐ पृथिव्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ — ८.३२

अर्थात्- महान् द्युलोक और पृथिविलोक, स्वर्ण- रत्नादि, धन- धान्यों से परिपूर्ण वैभव द्वारा हमारे इस श्रेष्ठ कर्मरूपी यज्ञ को सम्पन्न करें तथा उसे संरक्षित करें।

(११) अग्नि (तेजस्विता) पीला
ॐ त्वं नो अग्ने वरुणस्य विद्वान्
देवस्य हेडो अव यासिसीष्ठाः। यजिष्ठो वह्नितमः शोशुचानो विश्वा
द्वेषा * सि प्र मुमुग्ध्यस्मत्। ॐ अग्नये नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२१.३

अर्थात्- हे अग्निदेव! आप सर्वज्ञ, कान्तिमान्, पूजनीय और भली प्रकार आहुतियों को देवों तक पहुँचाने वाले हैं। आप हमारे लिए वरुण देवता को प्रसन्न करें और हमारे सब प्रकार के अनिष्टों को दूर करें।

(१२) वायु (गतिशीलता) सफेद
ॐ आ नो नियुद्भिः शतिनीभिरध्वर * सहस्रिणीभिरुप याहि यज्ञम्।
वायो अस्मिन्त्सवने मादयस्व यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः।
ॐ वायवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२७.२८

अर्थात्- हे वायो! आप सैकड़ों- हजारों अश्वों द्वारा खींचे जाते हुए वाहनों पर आरूढ़ होकर अर्थात् तीव्र गति से हमारे इस यज्ञ में पधारें और इसके सेवन से स्वयं तृप्त हों तथा हम सबको भी हर्षित करें। आप अपने कल्याणकारी साधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करें।

(१३) इन्द्र (व्यवस्था) लाल
ॐ त्रातारमिन्द्रमवितारमिन्द्र * हवे हवे सुहव*शूरमिन्द्रम्।
ह्वयामि शक्रं पुरुहूतमिन्द्र*
स्वस्ति नो मघवा धात्विन्द्रः॥ ॐ इन्द्राय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२०.५०

अर्थात्- हम रक्षा करने वाले इन्द्रदेव का आवाहन करते हैं। पालन करने वाले इन्द्रदेव का यज्ञ में बार- बार आवाहन करते हैं। पराक्रमी इन्द्रदेव का उत्तम रीति से आवाहन करते हैं। अत्यन्त समर्थ, अनेकों द्वारा स्तुति किये जाते हुए इन्द्रदेव का आवाहन करते हैं। वे ऐश्वर्यवान् इन्द्रदेव हमारा कल्याण करें।

(१४) यम (न्याय )) सफेद
ॐ सुगन्नुपन्थां प्रदिशन्नऽएहि ज्योतिष्मध्येह्यजरन्नऽआयुः।
अपैतु मृत्युममृतं मऽआगात्वैवस्वतोनो ऽ अभयं कृणोतु।
ॐ यमाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

अर्थात्- सुगम मार्ग में प्रवेश करते हुए हमारे समीप आइये। हमारी आयु क्षीण न हो। विवस्वान् के पुत्र वे यमाचार्य हमसे मृत्यु को दूर करें, अमृतत्व से हमें संयुक्त करते हुए निर्भय करने की कृपा करें।

(१५) कुबेर (मितव्ययिता) काला

ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे।
स मे कामान् कामकामाय मह्यम्। कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु। कुबेराय वैश्रवणाय महाराजाय नमः।
ॐ कुबेराय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥- तै.आ.१.३१

अर्थात्- विश्रवा-महर्षि के आत्मज, राजाधिराज कुबेर महाराज को हम नमस्कार करते हैं, जो बलपूर्वक जिसे चाहें, उसे अपने कोष की वर्षा से तृप्त करा सकते हैं। समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले वे हमारी श्रेष्ठ कामनाओं को पूर्ण करने की कृपा करें।

(१६) अश्विनीकुमार (आरोग्य) पीला

ॐ अश्विना तेजसा चक्षुः प्राणेन सरस्वती वीर्यम्।
वाचेन्द्रो बलेनेन्द्राय दधुरिन्द्रियम्। ॐ अश्विनीकुमाराभ्यां नमः।
आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२०.८०

अर्थात्- याजकों का कल्याण करने के लिए दोनों अश्विनीकुमारों ने स्वतेज से नेत्र ज्योति, देवी सरस्वती ने प्राण के साथ पराक्रम और इन्द्रदेव ने वाणी की सामर्थ्य के साथ इन्द्रिय- बल प्रदान किया।

(१७) सूर्य (प्रेरणा) काला

ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्त्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च।
हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्॥
ॐ सूर्याय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३३.४३, ३४.३१

अर्थात्- उषाकाल की रश्मियों रूपी स्वर्णिम रथ पर आरूढ़ सविता देव गहन तमिस्रा युक्त अन्तरिक्ष- पथ में भ्रमण करते हुए देवों और मनुष्यों को यज्ञादि श्रेष्ठ कर्मों में नियोजित करते हैं। वे समस्त लोकों का निरीक्षण करते हुए निकलते हैं अर्थात् उन्हें प्रकाशित करते हैं।

(१८) चन्द्रमा (शान्ति) लाल
ॐ इमं देवाऽ असपत्न * सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते
जानराज्याय इन्द्रस्येन्द्रियाय।
इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विशऽ एष वोमी राजा सोमोस्माकं
ब्राह्मणाना * राजा। ॐ चन्द्रमसे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -९.४०

अर्थात्- हे देवगण! महान् क्षात्रबल के सम्पादन के लिए, महान् राज्य पद के लिए, श्रेष्ठ जनराज्य के लिए, इन्द्रदेव के समान हर प्रकार से विभूतिवान् बनने के लिए, शत्रुओं से रहित अमुक पिता के पुत्र, अमुक माता के पुत्र को प्रजा- पालन के लिए अभिषिक्त करें। हे प्रजाजनो! आप सभी के लिए तथा हम ज्ञानी जनों के लिए भी यह राजा चन्द्र के समान आह्लादक है।

(१९) मङ्गल (कल्याण) सफेद

ॐ अग्निर्मूर्द्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्याऽ अयम्। अपा * रेता * सि जिन्वति।
ॐ भौमाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३.१२

अर्थात्- यह अग्निदेव! (आदित्य रूप में) द्युलोक के शीर्ष रूप सर्वोच्च भाग में विद्यमान होकर, जीवन का सञ्चार करके, धरती का पालन करते हुए, जल में जीवनी शक्ति का सञ्चार करते हैं।

(२०) बुध (सन्तुलन) हरा

ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते स * सृजेथामयं च।
अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यजमानश्च सीदत॥
ॐ बुधाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१५.५४

अर्थात्- हे अग्निदेव! आप जाग्रत् हों और प्रतिदिन यजमान को भी जागरूक करें। आप ‘इष्टापूर्त (यज्ञ- यागदिक पुण्य कार्य तथा कुआँ खोदना तालाब आदि बनाना) कार्यों के साथ यजमान से संयुक्त हों। आपकी कृपा से यजमान भी ‘इष्टापूर्त’ के कार्यों से युक्त हो। इस यज्ञ में यजमान के साथ सुसंगत हों। हे विश्वेदेवा! आपके सम्बन्ध से इष्टापूर्त्त कार्यों से निष्पाप हुआ यजमान देवताओं के योग्य सर्वश्रेष्ठ स्थान देवलोक में चिरकाल तक निवास करे।

(२१) बृहस्पति (अनुशासन) पीला
ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद्द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।
यद्दीदयच्छवसऽऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।
उपयामगृहीतोसि बृहस्पतये त्वैष ते योनिर्बृहस्पतये त्वा।
ॐ बृहस्पतये नमः। आवायमि,स्थाप्यालमि,ध्यायामि॥ -ऋ०२.२३.१५, २६.३

अर्थात्- हे बृहस्पते! जिस आत्मशक्ति से आप सबके स्वामी, पूज्य और सभी लोगों में आदित्य के समान तेजस्वी एवं सक्रिय होकर सर्वत्र सुशोभित होते हैं, जिस शक्ति से आप सबकी रक्षा करते हैं, उसी आत्मशक्ति से आप हम सब मनुष्यों को श्रेष्ठ धन प्रदान करें। आप राष्ट्र के निर्धारित नियमों द्वारा स्वीकार किये गये हैं। यह पद आपके योग्य है। अतः हम सब बृहस्पति पद के लिए आप को चुनते हैं।

(२२) शुक्र (संयम) हरा
ॐ अन्नात्परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पयः सोमं
प्रजापतिः। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपान* शुक्रमन्धसइन्द्रस्येन्द्रियमिदं
पयोऽमृतंमधु॥ ॐ शुक्राय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१९.७५

अर्थात्- वेदों के ज्ञाता ब्राह्मणों के साथ प्रजापति, परिस्रुुत हुए (निचोड़े हुए) अन्नों के रस में से सोमरसरूपी दुग्ध को पृथक् करके पान करते हैं और क्षात्रबल को धारण करते हैं। उक्त (ऋत) सत्य से ही (अगला) सत्य प्रकट होता है। यह अन्न रसरूप सोम, बल, अन्न, तेज (वीर्य), सामर्थ्य दुग्धादि पेय, अमृतोपम आनन्द और मधुर पदार्थ को उपलब्ध कराता है।

(२३) शनिश्चर (तितिक्षा) लाल
ॐ शन्नो देवीरभिष्टयऽ आपो भवन्तु पीतये। शं योरभिस्रवन्तु नः।
ॐ शनिश्चराय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३६.१२

अर्थात्- दिव्य जल हम सबके लिए अभीष्ट फलदायक तथा तृप्तिदायक बने। वह हमारे रोगों के शमन तथा अनिष्ट हटाने के लिए बरसता रहे। इस प्रकार हमारा सब प्रकार से कल्याण करे।

(२४) राहु (संघर्ष) पीला

ॐ कया नश्चित्रऽआ भुवदूती सदावृधः सखा। कया शचिष्ठया वृता।
ॐ राहवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२७.३९

अर्थात्- सर्वदा वृद्धि करने वाले, अद्भुत शक्ति सम्पन्न हे इन्द्रदेव! किस रक्षण तथा व्यवहार क्रिया से प्रसन्न होकर आप सदैव हमारे मित्र रूप में प्रस्तुत होते हैं।

(२५) केतु (साहस) लाल

ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्याऽ अपेशसे। समुषद्भिरजायथाः।
ॐ केतवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२९.३७

अर्थात्- अज्ञानी पुरुषों को सद्ज्ञान और रूपहीनों को सुन्दर स्वरूप प्रदान करने वाले हे अग्निदेव! आप उषा के साथ समान रूप से उत्पन्न होते हैं।

(२६) गङ्गा (पवित्रता) सफेद

ॐ पञ्च नद्यः सरस्वतीमपि यन्ति सस्रोतसः।
सरस्वती तु पञ्चधा सो देशेभवत्सरित्॥ ॐ गङ्गायै नमः।
आवाहयामि, स्थापयामि ध्यायामि॥ -३४.११

अर्थात्- समान स्रोत वाली (श्रेष्ठ प्रवाहशील) पाँच सरिताएँ (नदियाँ) जिस प्रकार महानदी सरस्वती में समाहित हो जाती हैं, उसी प्रकार वही सरस्वती देश में पाँच (नदियों के) रूप में (प्रसिद्ध) हुई (अर्थात् विद्या पाँच प्रकार की प्रतिभाओं- श्रमपरक, विचारपरक, अर्थपरक, कलापरक और भावपरक को संयुक्त करके उन्हें प्रगतिशील बनाती है)।

(२७) पितृ (दान) पीला

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
अक्षन् पितरोमीमदन्तपितरोतीतृपन्त पितरः पितरः शुन्धध्वम्॥
ॐ पितृभ्यो नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१९.३६

अर्थात्- स्वधा (अन्न) को धारण करने वाले पितरों को स्वधा संज्ञक अन्न प्राप्त हो। स्वधा को धारण करने वाले पितामह को स्वधा संज्ञक अन्न प्राप्त हो। स्वधा को धारण करने वाले प्रपितामह को स्वधा संज्ञक अन्न प्राप्त हो। पितरों ने हविष्यान्न के रूप में समर्पित आहार को ग्रहण करके तृप्ति को प्राप्त किया। पितर तृप्त होकर हमें भी तृप्त करते हैं। हे पितृगण ! आप लोग शुद्ध होकर हमें भी पवित्र जीवन की प्रेरणा प्रदान करें।

(२८) इन्द्राणी (श्रमशीलता) सफेद

ॐ अदित्यै रास्नासीन्द्राण्याऽ उष्णीषः। पूषासि घर्माय दीष्व।।
ॐ इन्द्राण्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३८.३

अर्थात्- हे यज्ञीय ऊर्जे! आप अदिति की मेखला रूप हैं, इन्द्राणी (संगठक शक्ति) की पगड़ी (प्रतिष्ठा का चिह्न) हैं। आप पोषण देने में समर्थ हैं, घर्म (हितकारी कार्यों- यज्ञों) के लिए अपनी शक्ति को नियोजित करें।

(२९) रुद्राणी (वीरता) काला

ॐ या ते रुद्र शिवा तनूः अघोराऽपापकाशिनी।
तया नस्तन्वा शन्तमया गिरिशन्ताभिचाकशीहि।
ॐ रुद्राण्यै नमः।
आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥- १६.२

अर्थात्- हे रुद्रदेव! आप (अति उच्च) पर्वत की सुरक्षित गुहा में रहते हैं। आपका कल्याणकारी शान्तरूप पापों के विनाशक होने के कारण सौम्य और बलशाली भी है। अपने उसी मंगलमय रूप से हमारे ऊपर कृपा दृष्टि डालें।

(३०) ब्रह्माणी (नियमितता) पीला

ॐ इन्द्रा याहि धियेषितो विप्रजूतः सुतावतः। उप ब्रह्माणि वाघतः।
ॐ ब्रह्माण्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥- २०.८८

अर्थात्- हे इन्द्रदेव! अपनी अन्तःप्रेरणा से प्रेरित होकर इस यज्ञ स्थल में आएँ। आपकी स्तुति करने वाले ऋत्विग्गण, सोम का शोधन संस्कार करने वाले हैं, सो आप समीप आकर इन हवियों को ग्रहण करें।

(३१) सर्प (धैर्य) काला

ॐ नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु।
ये अन्तरिक्षे ये दिवि, तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।
ॐ सर्पेभ्यो नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥, – १३.६

अर्थात्- जो भी सर्प (गमनशील स्वभाव वाले नक्षत्रलोक अथवा जीव) पृथिवी के प्रभाव क्षेत्र में हैं, अन्तरिक्ष द्युलोक में हैं, उन सभी सर्पों को हमारा नमन है।

(३२) वास्तु (कला) हरा

ॐ वास्तोष्पते प्रति जानीहि अस्मान् स्वावेशो अनमीवो भवा नः। यत्त्वेमहे प्रतितन्नो जुषस्व
शन्नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे॥ ॐवास्तुपुरुषाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥
-ऋ० ७.५४.१

अर्थात्- हे वास्तोष्पते (गृह पालक देव)! आप हमें जगाएँ। हमारे घर में पुत्र- पौत्र आदि द्विपदों, गौ, अश्व आदि चतुष्पदों को नीरोग एवं सुखी करें। जो धन हम आपसे माँगें, वह हमें प्रदान करें।

(३३) आकाश (विशालता) नीला
ॐ या वां कशा मधुमत्यश्विना सूनृतावती। तया यज्ञं मिमिक्षतम्।
उपयामगृहीतोस्यश्विभ्यां त्वैष ते योनिर्माध्वीभ्यां त्वा।
ॐ आकाशाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -७.११

अर्थात्- हे अश्विनीकुमारो! सत्य एवं मधुरता से युक्त अपनी उत्तम वाणी से हमारे इस यज्ञ को अभिषिञ्चित करें। हे उपांशु (पात्र)! मधुरता के लिए विख्यात अश्विनीकुमारों के निमित्त आपको नियमानुसार ग्रहण किया गया है। आप यज्ञशाला में अपने सुनिश्चित आसन पर बैठें- स्थापित हों।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 3:12 pm

Categories: Uncategorized   Tags:

Kalash Pujan Invitation

॥ कलशस्थापन॥

सूत्र सङ्केत- कलश की स्थापना और पूजा लगभग प्रत्येक कर्मकाण्ड में की जाती है। सामान्य रूप से कलश पहले से तैयार रखा रहता है और पूजन क्रम में उसका पूजन करा दिया जाता है। यदि कहीं इस प्रकरण का विस्तार करना आवश्यक लगे, तो स्थापना के लिए नीचे दिये गये पाँच उपचार कराये जाते हैं। यह उपचार पूर्ण होने पर कलश प्रार्थना करके आगे बढ़ा जाता है। यह विस्तृत कलश स्थापन, प्राण प्रतिष्ठा, गृह प्रवेश, गृह शान्ति, नवरात्र जैसे प्रकरणों में जोड़ा जा सकता है। बड़े यज्ञों में देव पूजन के पूर्व प्रधान कलश अथवा पञ्च वेदिकाओं के पाँचों कलशों पर एक साथ यह उपचार कराये जा सकते हैं।

स्थापना प्रसङ्ग के लिए रँगा हुआ कलश,उसके नीचे रखने का घेरा (ईडली), अलग पात्र में शुद्ध जल, कलावा, मङ्गल द्रव्य, नारियल पहले से तैयार रखने चाहिए।

शिक्षण एवं प्रेरणा- कलश को सभी देव शक्तियों, तीर्थों आदि का संयुक्त प्रतीक मानकर,उसे स्थापित- पूजित किया जाता है। कलश को यह गौरव मिला है, उसकी धारण करने की क्षमता- पात्रता से। घट स्थापन के साथ स्मरण रखा जाना चाहिए कि हर व्यक्ति,हर क्षेत्र, हर स्थान में धारण करने की अपनी क्षमता होती है। उसे सजाया- सँवारा जाना चाहिए। उसके लिए उपयुक्त आधार दिया जाना चाहिए।

पात्र में पवित्र जल भरते हैं। श्रद्धा और पवित्रता से भरी- पूरी पात्रता ही धन्य होती है। उसमें मङ्गल द्रव्य डालते हैं। पात्रता को मङ्गलमय गुणों से विभूषित किया जाना चाहिए। कलावा बाँधने का अर्थ है- पात्रता को आदर्शवादिता से अनुबन्धित करना। नारियल- श्रीफल, सुख- सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। उसकी स्थापना का तात्पर्य है कि ऐसी व्यवस्थित पात्रता पर ही सुख- सौभाग्य स्थिर रहते हैं।

क्रिया और भावना- पाँचों उपचार एक- एक करके मन्त्रों के साथ सम्पन्न करें, उनके अनुरूप भावना सभी लोग बनाये रखें।

१- घटस्थापन- मन्त्रोच्चार के साथ कलश को निर्धारित स्थान या चौकी आदि पर स्थापित करें। भावना करें कि अपने- अपने प्रभाव क्षेत्र की पात्रता प्रभु चरणों में स्थापित कर रहे हैं।

ॐ आजिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दवः। पुनरूर्जा निवर्त्तस्व
सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशताद्रयिः। -८.४२

अर्थात्- हे महिमामयी गौ! आप इस कलश (यज्ञ से उत्पन्न पोषण युक्त मण्डल) को सूँघे (वायु के माध्यम से ग्रहण करें), इसके सोमादि पोषक तत्त्व आपके अन्दर प्रविष्ट हों। उस ऊर्जा को पुनः सहस्रों पोषक धाराओं द्वारा हमें प्रदान करें। हमें पयस्वती (दुग्ध, गौओं के पोषक- प्रवाहों) एवं ऐश्वर्य आदि की पुनः- पुनः प्राप्ति हो।

२- जलपूरण- मन्त्रोच्चार के साथ सावधानी से शुद्ध जल कलश में भरें। भावना करें कि समर्पित पात्रता का खालीपन श्रद्धा- संवेदना से, तरलता- सरलता से लबालब भर रहा है।

ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्कम्भसर्जनीस्थो
वरुणस्यऽऋतसदन्यसि वरुणस्यऽऋ सदनमसि
वरुणस्यऽऋतसदनमासीद॥ -४.३६

अर्थात्- हे काष्ठ उपकरण! आप वरुण रूपी सोम की उन्नति करने वाले हों। हे शम्ये! आप वरुण देव की गति को स्थिर करें। (उदुम्बर काष्ठ निर्मित हे आसन्दे!) आप यज्ञ में वरुण (रूपी बँधे हुए सोम) के आसन स्वरूप हैं। आसन्दी पर बिछे हुए हे कृष्णाजिन्! आप वरुण रूपी सोम के यज्ञ- स्थान हैं। वस्त्र में बँधे हुए वरुण (रूपी सोम!) के आसन स्वरूप इस कृष्णाजिन् पर सुखपूर्वक आसन ग्रहण करें।

३- मङ्गलद्रव्यस्थापन- मन्त्र के साथ कलश में दूर्वा- कुश, पूगीफल- सुपारी, पुष्प और पल्लव डालें। भावना करें कि स्थान और व्यक्तित्व में छिपी पात्रता में दूर्वा जैसी जीवनी शक्ति, कुश जैसी प्रखरता, सुपारी जैसी गुणयुक्त स्थिरता, पुष्प जैसा उल्लास तथा पल्लवों जैसी सरलता, सादगी का सञ्चार किया जा रहा है।

ॐ त्वां गन्धर्वा ऽ अखनँस्त्वां इन्द्रस्त्वां बृहस्पतिः।
त्वामोषधे सोमो राजा विद्वान्यक्ष्मादमुच्यत॥ — १२.९८

अर्थात्- हे ओषधे! गन्धर्वों (ओषधि गुणों को पहचानने वाले) ने आपका खनन किया, इन्द्रदेव और बृहस्पतिदेव (परम वैभव सम्पन्न और वेदवेत्ता विद्वान्) ने आपका खनन किया, तब ओषधिपति सोम ने आपकी उपयोगिता को जानकर क्षय रोग को दूर किया।

४- सूत्रवेष्टन- मन्त्र के साथ कलश में कलावा लपेटें। भावना करें कि पात्रता को अवाञ्छनीयता से जुड़ने का अवसर न देकर उसे आदर्शवादिता के साथ अनुबन्धित कर रहे हैं, ईश अनुशासन में बाँध रहे हैं।

ॐ सुजातो ज्योतिषा सह शर्म वरूथमासदत्स्वः।
वासो अग्ने विश्वरूप * सं व्ययस्व विभावसो॥ -११.४०

अर्थात्- हे अग्निदेव! आप तेजयुक्त ज्वालाओं से विधिवत् प्रज्वलित होकर, श्रेष्ठ सुखप्रद यज्ञ वेदिका को सुशोभित करें। हे कान्तिमान् अग्ने! आप अपनी विशिष्ट आभा से वस्त्रों की भाँति जगत् को भली प्रकार धारण करें अर्थात् पृथिवी का आवरण बनकर उसकी सुरक्षा करें।

५- नारिकेल संस्थापन- मन्त्र के साथ कलश के ऊपर नारियल रखें। भावना करें कि इष्ट के चरणों में समर्पित पात्रता सुख- सौभाग्य की आधार बन रही है। यह दिव्य कलश जहाँ स्थापित हुआ है, वहाँ की जड़- चेतना सारी पात्रता इन्हीं संस्कारों से भर रही है।

ॐ याः फलिनीर्या ऽ अफलाऽ अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः।
बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व * हसः। -१२.८९

अर्थात्- फलों से युक्त, फलों से रहित, पुष्पयुक्त तथा पुष्परहित ऐसी ये सभी ओषधियाँ विशेषज्ञ, वैद्य द्वारा प्रयुक्त होती हुईं हमें रोगों से मुक्ति दिलाएँ। तत्पश्चात् ॐ मनोजूतिर्जुषताम् …( मन्त्र से पेज ४० (दोनों हाथ लगाकर) प्रतिष्ठा करें। बाद में तत्त्वायामि।।।( मन्त्र पेज ३९ से) मन्त्र का प्रयोग करते हुए पञ्चोपचार पूजन करें और कलशस्य मुखे विष्णुः( मन्त्र पेज ४१ से) इत्यादि मन्त्रों से प्रार्थना करें।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 3:06 pm

Categories: Uncategorized   Tags:

Mool Shanti Puja Vidhi in Hindi

 

mool shanti puja vidhi in hindi pdf
mool nakshatra shanti puja vidhi

मूल शांति पूजन सामग्री लिस्ट इन हिंदी
मूल शांति करने की विधि पीडीऍफ़
मूल शांति पुस्तक pdf
मूल नक्षत्र 2020
मूल नक्षत्र शान्ति के उपाय
अश्लेषा नक्षत्र पूजा विधि

 

मूल एवं शांति के उपाय
शास्त्रों की मान्यता है कि संधि क्षेत्र हमेशानाजुक और अशुभ होते हैं। जैसे मार्ग संधि (चौराहे-
तिराहे), दिन-रात का संधि काल, ऋतु, लग्न औरग्रह के संधि स्थल आदि को शुभ नहीं मानते हैं। इसीप्रकार गंड-मूल नक्षत्र भी संधि क्षेत्र में आने सेनाजुक और दुष्परिणाम देने वाले होते हैं। शास्त्रों केअनुसार इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले बच्चों केसुखमय भविष्य के लिए इन नक्षत्रों की शांतिजरूरी है। मूल शांति कराने से इनके कारण लगने वाले दोष शांत हो जाते हैं।

क्या हैं गंड मूल नक्षत्र

राशि चक्र में ऎसी तीन स्थितियां होती हैं, जबराशि और नक्षत्र दोनों एक साथ समाप्त होते हैं।
यह स्थिति “गंड नक्षत्र” कहलाती है। इन्हींसमाप्ति स्थल से नई राशि और नक्षत्र की शुरूआत
होती है। लिहाजा इन्हें “मूलनक्षत्र” कहते हैं।

इसतरह तीन नक्षत्र गंड और तीन नक्षत्र मूल कहलाते हैं।
गंड और मूल नक्षत्रों को इस प्रकार देखा जा सकताहै।

कर्क राशि व अश्लेषा नक्षत्र एक साथ समाप्त होतेहैं।
यहीं से मघा नक्षत्र और सिंह राशि का उद्गमहोता है।
लिहाजा अश्लेषा गंड और मघा मूलनक्षत्र है।

वृश्चिक राशि व ज्येष्ठा नक्षत्र एक साथ समाप्तहोते हैं, यहीं से मूल नक्षत्र और धनु राशि की शुरूआतहोने के कारण ज्येष्ठा “गंड” और “मूल” मूल कानक्षत्र होगा।
मीन राशि और रेवती नक्षत्र एक साथ समाप्तहोकर यहीं से मेष राशि व अश्विनी नक्षत्र की
शुरूआत होने से रेवती गंड तथा अश्विनी मूल नक्षत्रकहलाते हैं।

उक्त तीन गंड नक्षत्र अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवतीका स्वामी ग्रह बुध है
तथा तीन मूल नक्षत्र मघा,
मूल व अश्विनी का स्वामी ग्रह केतु है।
27 या 10वेंदिन जब गंड-मूल नक्षत्र दोबारा आए उस दिन
संबंधित नक्षत्र और नक्षत्र स्वामी के मंत्र जप, पूजाव शांति करा लेनी चाहिए। इनमें से जिस नक्षत्र मेंशिशु का जन्म हुआ उस नक्षत्र के निर्धारित संख्यामें जप-हवन करवाने चाहिए।
गंड मूल नक्षत्रों में जन्म का फल
मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न होने वाले शिशु(पुल्लिंग) के पिता को कष्ट, द्वितीय चरण मेंमाता को कष्ट और तृतीय चरण में धन ऎश्वर्य हानिहोती है। चतुर्थ चरण में जन्म हो तो शुभ होता है।

जन्म लेने वाला शिशु (स्त्रीलिंग) हो तो प्रथम चरणमे श्वसुर को, द्वितीय में सास को और तीसरे चरण मेंदोनों कुल के लिए नेष्ट होती है।चतुर्थ चरण में जन्म हो तो शुभ होता है।
अश्लेषाके प्रथम चरण में जन्मे जातक के लिए शुभ, द्वितीय
चरण में धन ऎश्वर्य हानि और तृतीय चरण में माताको कष्ट होता है।
चतुर्थ चरण में जन्म हो तो पिता
को कष्ट होता है। जन्म लेने वाला शिशु स्त्रीलिंगहो तो प्रथम चरण में सुख समृद्धि और अन्य चरणों मेंसास को कष्ट कारक होती है।

मघा के प्रथम चरणमें जन्मे जातक/जातिका की माता को कष्ट,
द्वितीय चरण में पिता को कष्टकारक, तृतीय चरण
में सुख समृद्धि और चतुर्थ चरण में जन्म हो तो धन
लाभ।
ज्येष्ठा के प्रथम चरण में बडे भाई को नेष्ट, द्वितीय
चरण में छोटे भाई को कष्ट, तीसरे में माता को
तथा चतुर्थ चरण में जन्म होने पर स्वयं के लिए
कष्टकारक होता है। स्त्री जातक का जन्म हो तो
प्रथम चरण में जेठ को, द्वितीय में छोटी बहिन/देवर
को तथा तृतीय में सास/माता के लिए कष्ट। चतुर्थ
चरण में जन्म हो तो देवर के लिए श्रेष्ठ। रेवती के
प्रथम तीन चरणों में स्त्री/पुरूष जातक का जन्म हो
तो अत्यन्त शुभ, राज कार्य से लाभ तथा धन ऎश्वर्य
में वृद्धि होती है। लेकिन चतुर्थ चरण में जन्म हो तो
स्वयं के लिए कष्टकारक होता है। अश्विनी के
प्रथम चरण में पिता को कष्ट शेष तीन चरणों में धन-
ऎश्वर्य वृद्धि, राज से लाभ तथा मान सम्मान
मिलता है।

गंड मूल नक्षत्र के शांति उपाय

मूल शांति की सामग्री
———————————
घडा एक, करवा एक, सरवा एक, पांच प्रकार के रंग, नारियल एक,५०सुपारी,दूब, कुशा, बतासे, इन्द्र जौ, भोजपत्र, धूप,कपूर आटा चावल २ गमछे, दो गज लाल कपडा चंदोवे के लिये, मेवा ५० ग्राम, पेडा ५० ग्राम, बूरा ५० ग्राम, केला चार,माला दो, २७ खेडों की लकडी, २७ वृक्षों के अलग अलग पत्ते,२७ कुंओ का पानी, गंगाजल यमुना जल, हरनन्द का जल, समुद्र का जल अथवा समुद्र फ़ेन, आम के पत्ते, पांच रत्न, पंच गव्य
वन्दनवार,हल,२ बांस की टोकरी,१०१ छेद वाला कच्चा घडा,१ घंटी २ टोकरी छायादान के लिये, १ मूल की मूर्ति स्वनिर्मित, बैल गाय २७ सेर सतनजा,७ प्रकार की मिट्टी, हाथी के नीचे की घोडे के नीचे की गाय के नीचे की तालाब की सांप की बांबी की नदी की और राजद्वार की वेदी के लिये पीली मिट्टी।

हवन सामग्री
——————-

चावल एक भाग,घी दो भाग बूरा दो भाग, जौ तीन
भाग, तिल चार भाग,इसके अतिरिक्त मेवा अष्टगंध
इन्द्र जौ,भोजपत्र मधु कपूर आदि। एक लाख मंत्र के
एक सेर हवन सामग्री की जरूरत होती है,यदि कम
मात्रा में जपना हो तो कम मात्रा में प्रयोग करना
चाहिये।

शांति मंत्र

अश्विनी नक्षत्र (स्वामित्व अश्विनी कुमार):

“ॐ
अश्विनातेजसाचक्षु: प्राणेन सरस्वतीवीर्यम।
वाचेन्द्रोबलेनेंद्राय दधुरिन्द्रियम्। ॐ अश्विनी
कुमाराभ्यां नम:।।” (जप संख्या 5,000)।

अश्लेषा (स्वामित्व सर्प):

“ॐ नमोस्तु सप्र्पेभ्यो ये के
च पृथिवी मनु: ये अन्तरिक्षे ये दिवितेभ्य:
सप्र्पेभ्यो नम:।। ॐ सप्र्पेभ्यो नम:।।’ (जप संख्या
10,000)

मघा (स्वामित्व पितर):

“ॐ पितृभ्य: स्वधायिभ्य:
स्वधानम: पितामहेभ्य स्वधायिभ्य: स्वधा नम:।
प्रपितामहेभ्य स्वधायिभ्य: स्वधा नम:
अक्षन्नापित्रोमीमदन्त पितरोùतीतृपन्तपितर:
पितर: शुन्धध्वम्।। ॐ पितृभ्यो नम:/पितराय नम:।।”
(जप संख्या 10,000)

ज्येष्ठा (इन्द्र):

“ॐ त्रातारमिन्द्रमवितारमिन्द्र
हवे हवे सुह्न शूरमिन्द्रम् ह्वयामि शक्रं पुरूहूंतमिन्द्र
स्वस्तिनो मधवा धात्विंद्र:।। ॐ शक्राय नम:।।”
(जप संख्या 5,000)

मूल (राक्षस):

“ॐ मातेव पुत्र पृथिवी पुरीष्यमणि
स्वेयोनावभारूषा। तां विश्वेदेवर्ऋतुभि: संवदान:
प्रजापतिविश्वकर्मा विमुच्चतु।। ॐ निर्ऋतये नम:।।”
(जप संख्या 5,000)

रेवती (पूषा):

“ॐ पूषन् तवव्रते वयं नरिष्येम कदाचन
स्तोतारस्त इहस्मसि।। ॐ पूष्णे नम:।” (जप संख्या 5,000)

गंड नक्षत्र स्वामी बुध के मंत्र-:

“ॐ उदबुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्ठापूर्ते
संसृजेथामयं च अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन्
विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत।।” ( नौ हजार जप
कराएं। दशमांश संख्या में हवन कराएं। हवन में
अपामार्ग (ओंगा) और पीपल की समिधा काम में
लें।)

मूल नक्षत्र स्वामी केतु के मंत्र

“ॐ केतुं कृण्वन्न केतवे पेशो मय्र्याअपेशसे
समुषाभ्दिजायथा:।।” (सत्रह हजार जप कराएं और
इसके दशमांश मंत्रों के साथ दूब और पीपल की
समिधा काम में ले)

मूल शांति के उपाय- ज्येष्ठा के अन्तिम दो चरण तथा मूल के प्रथम दो चरण अभुक्त मूल कहलाते हैं। इन नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक के लिये नीचे लिखे मंत्रों का २८००० जप करवाने चाहिये,और २८वें दिन जब वही नक्षत्र आये तो मूल शान्ति का प्रयोजन करना चाहिये,जिस मन्त्र का जाप किया जावे उसका दशांश हवन करवाना चाहिये,और २८ ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिये,बिना मूल शांति करवाये मूल नक्षत्रों का प्रभाव दूर नही होता है।

मंत्र- मूल नक्षत्र का बडा मंत्र यह है। ऊँ मातवे पुत्र पृथ्वी पुरीत्यमग्नि पूवेतो नावं मासवातां विश्वे र्देवेर ऋतुभिरू सं विद्वान प्रजापति विश्वकर्मा विमन्चतु॥ इसके बाद छोटा मंत्र इस प्रकार से है। ऊँ एष ते निऋते। भागस्तं जुषुस्व। ज्येष्ठा नक्षत्र का मंत्र इस प्रकार से है। ऊँ सं इषहस्तरू सनिषांगिर्भिर्क्वशीस सृष्टा सयुयऽइन्द्रोगणेन। सं सृष्टजित्सोमया शुद्धर्युध धन्वाप्रतिहिताभिरस्ता।

आश्लेषा मंत्र- ऊँ नमोऽर्स्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनु। ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यरू सर्पेभ्यो नमरू॥

मूल शांति की सामग्री- घड़ा एक,करवा चार,सरवा एक,पांच रंग,नारियल एक,11 सुपारी,पान के पत्ते 11,दूर्वा,कुशा,बतासे 500 ग्राम ,इन्द्र जौ, भोजपत्र, धूप, कपूर, आटा चावल, गमछे 2, दो मी लाल कपड़ा , मेवा 250 ग्राम, पेड़ा 250 ग्राम, बूरा 250 ग्राम,माला दो, 27 खेडों की लकडी, 27 वृक्षों के अलग अलग पत्ते,27 कुंओ का पानी,गंगाजल, समुद्र फेन,आम के पत्ते,पंच रत्न,पंच गव्य वन्दनवार,बांस की टोकरी,101 छेद वाला कच्चा घडा,1घंटी 2 टोकरी छायादान के लिये,1 मूल की मूर्ति स्वनिर्मित, 27 किलो सतनजा, सप्तमृतिका, 3 सुवर्ण प्रतिमा, गोले 5, ब्राहमणों हेतु वस्त्र, पीला कपड़ा सवा मी, सफेद कपड़ा सवा मी, फल फूल मिठाई आदि ।

हवन सामग्री- चावल एक भाग,घी दो भाग बूरा दो भाग, जौ तीन भाग, तिल चार भाग,इसके अतिरिक्त मेवा अष्टगंध इन्द्र जौ,भोजपत्र मधु कपूर आदि। जितने जप किए जाँए उतनी मात्रा में हवन सामग्री बनानी चाहिए। पूजन जितना अच्छा होगा उसका प्रभाव भी उतना ही अच्छा होगा।पूजा सामग्री यथाशक्ति लानी चाहिए।

यह त्रिआयामी, त्रिगुणात्मक सृष्टि है। नक्षत्र २७ हैं। इन्हें तीन समान वर्गों में बाँटें, तो
(१) १ से ९,
(२) १० से १८ तथा
(३) १९ से २७

यह वर्ग बनते हैं। इन तीनों वर्गों की सन्धि वाले नक्षत्रों को मूल संज्ञक नक्षत्र माना गया है। वे हैं २७वाँ रेवती एवं प्रथम अश्विनी ९वाँ श्लेषा एवं १०वाँमघा तथा १८वाँ ज्येष्ठा एवं १९वाँ मूल। यह तीन नक्षत्र युग्म ऐसे हैं, जहाँ दो संलग्न नक्षत्र अलग- अलग राशियों में हैं; किन्तु किसी का कोई चरण दूसरी राशि में नहीं जाता। इसलिए इन्हें नक्षत्र चक्र के ‘मूल’ अर्थात् प्रधान नक्षत्र माना गया है। ऐसे महत्त्वपूर्ण नक्षत्रों को अशुभ मानने की परम्परा न जाने कहाँ सं चल पड़ी? वस्तुतः तथ्य यह है कि नक्षत्रों का सम्बन्ध मानवी प्रवृत्तियों से है। नक्षत्र चक्र के तीन मूल बिन्दुओं पर स्थित नक्षत्रों में मानव की ‘मूल’ वृत्तियों को तीव्रता से उछालने की चिशेष क्षमता है। मूल वृत्तियों में शुभ- अशुभ दोनों ही प्रकार की वृत्तियों होती हैं। अस्तु, विचारकों ने सोचा कि हीनवृत्तियाँ विकास पाकर परेशानी का कारण भी बन सकती हैं। उन्हें निरस्त करने वाले, कुछ उपचार पहले ही किए जाएँ तो अच्छा है। इसलिए हीन, पाशविक संस्कारों को निरस्त करने वाले, श्रेष्ठ संस्कारों को उभारने में सहयोग कर सकने वाले कुछ जप- यज्ञादि उपचार किए जायें तो अच्छा है। जिन घरों में गायत्री उपासना, यज्ञ, बलिवैश्व आदि सुसंस्कार जनक क्रम सहज ही होते रहते हैं, वहाँ मूल शान्ति के निमित्त अलग से कुछ करना आवश्यक नहीं। जिन परिजनों में ऐसे कुछ नियमित क्रम नहीं हैं, उनमें मूल शान्ति के नाम पर कुछ उपचारों की लकीर पीटने मात्र से जातक की वृत्तियों पर कुछ उल्लेखनीय प्रभाव पड़ता नहीं है। इसीलिए शास्त्र मत है कि जिन परिवारों में ऋषि प्रणीत चर्चाएँ नियमित रूप से होती हों, उनमें मूलशान्ति की आवश्यकता नहीं पड़ती। मानवोचित गुणों के विकास के लिए जिन परिवारों में योजनाबद्ध प्रयास होते हों, वहाँ मूल युक्त जातक विशेष सौभाग्य के कारण बनते हैं।

नोट – मूल की शान्ति के लिए सुविधानुसार जन्म के ११ वें या २७वें दिन रुद्रार्चन, शिवाभिषेक व महामृत्युञ्जय की विधि सहित जप व गायत्री महामन्त्र का जप, हवन कराने से अभुक्त मूल शान्ति होती है। गायत्री महामन्त्र के २७,००० मन्त्र जप व महामृत्युञ्जय मन्त्र के ११०० मन्त्र जप करना अनिवार्य है।

गण्ड मूल के नक्षत्र व उनका फल

मूलवास- मनुष्य की योनि पाठशाला के छात्र जैसा है। चराचर जगत् पाठ्यपुस्तक है। नाना योनियाँ इस पाठ्यपुस्तक के नाना अध्याय अथवा पाठ्यक्रम है, जिन्हें जीवरूपी छात्र यथा योनि पढ़ता, परीक्षा (इम्तहान )) के लिये मानव योनि में प्रवेश पाता है। मानव योनि पूरक परीक्षा के क्षण हैं। जिस प्रकार परीक्षा स्थल पर परीक्षक ही प्रश्नपत्र तथा उत्तर पुस्तिका छात्र को प्रदान करता है, उसी प्रकार आत्मा रूपी परीक्षक भी परिस्थितियों का प्रश्नपत्र तथा जीवन उत्तरपुस्तिका स्वंय जीवरूपी छात्र को प्रदान करता है। मनुष्य की योनि परीक्षा के क्षण हैं। परीक्षा का समय जन्म से मृत्युपर्यन्त है। जिस प्रकार परीक्षाफल तीन प्रकार का होता है, यथा उत्तीर्ण (पास) होना, अनुत्तीर्ण होना अथवा कुछ थोड़ी कमी के कारण उसे थोड़े समय उपरान्त पुनः परीक्षा में फिर से परीक्षा में आना। इस जीवन परीक्षा में भी जीवरूपी छात्र को इन्हीं अवस्थाओं से होकर गुजरना पड़ेगा। उत्तीर्ण होने पर अनन्त की राह है। उसे अगली कक्षा में प्रवेश मिलेगा, यदि उत्तीर्ण नहीं हो पाया और फेल हो गया तो उसे पुनः सारा पाठ्यक्रम दुहराने के लिये यथा योनियों से गुजरना होगा। इसके उपरान्त ही पुनः परीक्षा के लिये मानव योनि में प्रवेश मिलेगा। अल्प त्रुटियों की अवस्था में उसे लगभग कतिपय योनियों के उपरान्त ही पुनःपरीक्षा हेतु मनुष्य की योनि प्रदान की जायेगी।

इसीलिये जब भी घर में शिशु का जन्म होता है, घर में सूतक (छूत) का वास होता है। मन्दिर,पूजा आदि बन्द कर दिये जाते हैं, बरहा मनाया जाता है इसका पृष्ठ रहस्य यही है कि जन्मने वाला शिशु हमारा ही पूर्वज है अल्प त्रुटियों से रह गया था,फिर अपने घर लौट आया। बरहा पूजन में प्रायश्चित पूजन भी करते है उसी में मूल शान्ति विधि भी पूरी कर लेते हैं। यद्यपि मूल का वास- माघ,आषाढ़,आश्विन, और भाद्रपद माह- आकाश में, कार्तिक, चैत, श्रावण और पौष माह- पृथ्वी में, फाल्गुन, ज्येष्ठ, मार्गशीर्ष और वैशाख माह- पाताल में होता है। ‘भूतले वर्तमाने तु ज्ञेयो दोषोऽन्यथा न हि।’ अर्थात् जब पृथ्वी में मूल का वास हो तभी मूलपूजन का क्रम करना चाहिये अन्यथा सामान्य यज्ञादि से भी बारह (बरहा) पूजन का क्रम पूरा कर लेना चाहिये।

प्रारम्भिक कर्मकाण्ड मंगलाचरण से रक्षाविधान तक पूर्ण करें। तत्पश्चात् संकल्प करें।

॥ सङ्कल्प॥

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य
विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्रीब्रह्मणो
द्वितीये परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे
भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्त्तैकदेशान्तर्गते……….क्षेत्रे……….मासानां मासोत्तमेमासे……….मासे……….पक्षे……….तिथौ……….वासरे
……….गोत्रोत्पन्नः………. नामाऽहं सत्प्रवृत्ति- संवर्द्धनाय,
दुष्प्रवृत्ति- उन्मूलनाय, लोककल्याणाय, आत्मकल्याणाय, वातावरण –
परिष्काराय, उज्ज्वलभविष्यकामनापूर्तये च प्रबलपुरुषार्थं करिष्ये,
अस्मै प्रयोजनाय च कलशादिआवाहितदेवता- पूजनपूर्वकम् गण्डान्त नक्षत्रजनित दोषोपसमानार्थं गण्डदोष मूलशान्ति कर्मसम्पादनार्थं सङ्कल्पं अहं करिष्ये।

पञ्चकलशों में पञ्चद्रव्यों के सहित पूजन करें।

मध्य कलश-
ॐ मही द्यौः पृथिवी च नऽ इमं यज्ञं मिमिक्षताम्।
पिपृतां नो भरिमभिः। -८.३२,१३.३२
पूर्व-
ॐ त्वं नोऽ अग्ने वरुणस्य विद्वान् देवस्य हेडो अव यासिसीष्ठाः।
यजिष्ठो वह्नितमः शोशुचानो विश्वा द्वेषा*सि प्र मुमुग्ध्यस्मत्। -२१.३
दक्षिण-
ॐ स त्वं नो अग्नेवमो भवोती
नेदिष्ठो अस्याऽ उषसो व्युष्टौ।
अव यक्ष्व नो वरुण*रराणो वीहि मृडीक*सुहवो नऽ एधि। -२१.४
उत्तर-
ॐ इमं मे वरुण श्रुधी हवमद्या च मृडय। त्वामवस्युरा चके।- २१.१
पश्चिम-
ॐ या वां कशा मधुमत्यश्विना सूनृतावती। तया यज्ञं मिमिक्षतम्।
उपयामगृहीतोस्यश्विभ्यां त्वैष ते योनिर्माध्वीभ्यां त्वा। -७.११
नमस्कार- दोनों हाथ जोड़ कर नमन- वन्दन करें।
ॐ नमस्ते सुरनाथाय, नमस्तुभ्यं शचीपते।
गृहाणं स्नानं मया दत्तं, गण्डदोषं प्रशान्तये॥

षोडशमातृका पूजन-
गौरी पद्मा शची मेधा, सावित्री विजया जया।
देवसेना स्वधा स्वाहा, मातरो लोकमातरः॥
धृतिः पुष्टिस्तथा तुष्टिः,आत्मनः कुलदेवता।
गणेशेनाधिका ह्येता, वृद्धौ पूज्याश्च षोडश॥
ॐ षोडशमातृकाभ्यो नमः। आ०स्था०,पू०

वास्तुपूजन- अनन्तं पुण्डरीकाक्षं, फणीशत विभूषितम्।
विद्युद्बन्धूक साकारं, कूर्मारूढं प्रपूजयेत्॥
नागपृष्ठं समारूढं, शूलहस्तं महाबलम् ।
पातालनायकम् देवं, वास्तुदेवं नमाम्यहम्॥
ॐ वास्तुपुरुषाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

नागपूजनम्-
ॐ नमोऽस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनु। ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।
वासुक्यादि अष्टकुल नागेभ्यो नमः॥आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

चौंसठयोगिनीपूजनम्-
दिव्यकुण्डलसंकाशा, दिव्यज्वाला त्रिलोचना।
मूर्तिमती ह्यमूर्ता चे,
उग्रा चैवोग्ररूपिणी॥
अनेकभावासंयुक्ता, संसारार्णवतारिणी।
यज्ञे कुर्वन्तु निर्विघ्नं, श्रेयो यच्छन्तु मातरः॥
दिव्ययोगी महायोगी, सिद्धयोगी गणेश्वरी।
प्रेताशी डाकिनी काली, कालरात्री निशाचरी॥
हुङ्कारी सिद्धवेताली, खर्परी भूतगामिनी।
ऊर्ध्वकेशी विरूपाक्षी, शुष्काङ्गी धान्यभोजनी॥
फूत्कारी वीरभद्राक्षी, धूम्राक्षी कलहप्रिया।
रक्ता च घोररक्ताक्षी, विरूपाक्षी भयङ्करी॥
चौरिका मारिका चण्डी, वाराही मुण्डधारिणी।
भैरव चक्रिणी क्रोधा, दुर्मुखी प्रेतवासिनी॥
कालाक्षी मोहिनी चक्री, कङ्काली भुवनेश्वरी।
कुण्डला तालकौमारी, यमूदूती करालिनी॥
कौशिकी यक्षिणी यक्षी, कौमारी यन्त्रवाहिनी।
दुर्घटे विकटे घोरे, कपाले विषलङ्घने॥
चतुष्षष्टि समाख्याता, योगिन्यो हि वरप्रदाः।
त्रैलोक्ये पूजिता नित्यं, देवामानुष्योगिभिः॥ १०॥
ॐ चतुःषष्टियोगिनीभ्यो नमः॥ आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

ब्रह्मापूजनम्-
ॐ ब्रह्म जज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्वि सीमतः सुरुचो वेनऽआवः।
सबुध्न्याऽउपमाअस्य विष्ठाःसतश्च योनिमसतश्च वि वः॥- १३.३
ॐ ब्रह्मणे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि।

विष्णुपूजनम्-
ॐ इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा नि दधे पदम्।
समूढमस्य पा * सुरे स्वाहा॥ ॐ विष्णवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि। -५.१५
शिव पूजनम्-
ॐ नमस्ते रुद्र मन्यवऽ, उतो त ऽ इषवे नमः। बाहुभ्यामुत ते नमः।
ॐ रुद्राय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥- १६.१

नवग्रहपूजनम्-
सूर्य- ॐ जपाकुसुमसंकाशं, काश्यपेयं महाद्युतिम ।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं, प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
ॐ आदित्याय विद्महे, दिवाकराय धीमहि।
तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्। ॐ सूर्याय नमः।

चन्द्र-
ॐ दधिशङ्खतुषाराभं, क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं, शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥
ॐ अत्रिपुत्राय विद्महे, सागरोद्भवाय धीमहि।
तन्नः चन्द्रः प्रचोदयात्। ॐ चन्द्राय नमः।

मङ्गल-
ॐ धरणीगर्भसम्भूतं, विद्युत्कान्तिसमप्रभम्॥
कुमारं शक्तिहस्तं च, मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ क्षितिपुत्राय विद्महे, लोहिताङ्गाय धीमहि।
तन्नो भौमः प्रचोदयात्। ॐ भौमाय नमः।

बुध-
ॐ प्रियङ्गु कलिकाश्यामं, रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं, तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे, रोहिणीप्रियाय धीमहि।
तन्नो बुधः प्रचोदयात्। ॐ बुधाय नमः।

गुरु- ॐ देवानां च ऋषीणां, च गुरुं काञ्चनसन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं, तं नमामि बृहस्पतिम्॥
ॐ अङ्गिरोजाताय विद्महे, वाचस्पतये धीमहि।
तन्नो गुरुः प्रचोदयात्। ॐ बृहस्पतये नमः।

शुक्र-
ॐ हिमकुन्द मृणालाभं, दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं, भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ भृगुवंशजाताय विद्महे,
श्वेतवाहनाय धीमहि।
तन्नः कविः प्रचोदयात्।
ॐ शुक्राय नमः।

शनि- ॐ नीलाञ्जन समाभासं, रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्त्तण्डसम्भूतं, तं नमामि शनैश्चरम्॥
ॐ कृष्णाङ्गाय विद्महे, रविपुत्राय धीमहि।
तन्नः शौरिः प्रचोदयात्। ॐ शनये नमः।

राहु- ॐ अर्धकायं महावीर्यं, चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसम्भूतं, तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ नीलवर्णाय विद्महे, सैंहिकेयाय धीमहि।
तन्नो राहुः प्रचोदयात्।
ॐ राहवे नमः।

केतु- ॐ पलाशपुष्पसङ्काशं, तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं, तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ अन्तर्वाताय विद्महे, कपोतवाहनाय धीमहि।
तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
ॐ केतवे नमः।

।। पञ्चगव्यपूजन एवं सवत्सगोपूजनम्।।
गोदुग्धं गोमयक्षीरं, दधि सर्पिः कुशोदकम्।
निर्दिष्टं पञ्चगव्यं, पवित्रं मुनिः पुङ्गवैः॥

॥ नक्षत्र पूजन॥
जातक जिस नक्षत्र में जन्मा हो, उसी नक्षत्र के मन्त्र के साथ नक्षत्र पूजन करें।
1 अश्विनी-
ॐ या वां कशा मधुमत्यश्विना सूनृतावती।
तया यज्ञं मिमिक्षितम्॥ ॐ अश्विनीभ्यां नमः॥- २०.८०
2 आश्लेषा-
ॐ नमोऽस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनुयेऽन्तरिक्षे ये दिवितेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।
ॐ सर्पेभ्यो नमः॥- १३.६
3 मघा-
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधानमः पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। अक्षन् पितरोऽ मीमदन्त पितरोऽतीतृपन्त पितरः पितरः सुन्धध्वम्।
ॐ पितृभ्यो नमः॥- १९.३६

4 ज्येष्ठा-
ॐ सजोषाऽ इन्द्र सगणो मरुद्भिः सोमं पिब वृत्रहा शूर विद्वान्। जहि शत्रूँ२ऽ रप मृधोनुदस्वाथाभयं कृणुहि विश्वतो नः।
ॐ इन्द्राय नमः- ७.३७
5 मूल-
ॐ मातेव पुुत्रं पृथिवी पुरुषमग्नि* स्वे योनावभारुखा। तां विश्वै- र्देवैऋतुभिः संविदानः
प्रजापतिर्विश्वकर्मा वि मुञ्चतु।
ॐ नैऋतये नमः॥- १२.६१

6 रेवती-
ॐ पूषन् तव व्रतेवयंन रिष्येम कदा चन।
स्तोतारस्तऽ इह स्मसि। ॐ पूष्णे नमः॥- ३४.४१

सप्तधान्य पूजन-
ॐ अन्नपतेन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः।
प्रप्र दातारं तारिषऽ ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे। -११.८३
तत्पश्चात् सभी आवाहित देवताओं का षोडशोपचार विधि से पूजन पुरुषसूक्त (पृ० १८६-१९८) से करें।

।। पञ्चकलशों से सिञ्चन।।
पञ्चकलशों को पाँच सम्भ्रान्त व्यक्ति (महिला- पुरुष) ले लें तथा निम्न मंत्र के साथ जातक और उनके माता- पिता का सिञ्चन अभिषेक करें।
ॐ आपो हि ष्ठा मयोभुवः तानऽ ऊर्जे दधातन। महे रणाय चक्षसे।
ॐ यो वः शिवतमो रसः तस्य भाजयतेह नः। उशतीरिव मातरः।
ॐ तस्माऽ अरंगमाम वो यस्यक्षयाय जिन्वथ। आपो जनयथा च नः।

तत्पश्चात् यज्ञ का क्रम पूर्ण करें। गायत्री मन्त्र की २४ आहुतियाँ एवंं महामृत्युञ्जय मन्त्र से ५ आहुति दें, फिर विशेष आहुतियाँ समर्पित करें।

विशेष आहुति
नक्षत्र मन्त्राहुति-
ॐ नमस्ते सुरनाथाय नमस्तुभ्यं शचीपते।
गृहाणामाहुति मया दत्तं गण्डदोषप्रशान्तये, स्वाहा॥
इदं इन्द्राय इदं न मम। (तीन बार)
नवग्रह मन्त्राहुति

१ सूर्य गायत्री-
ॐ आदित्याय विद्महे, दिवाकराय धीमहि।
तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं सूर्याय, इदं न मम।

२ चन्द गायत्री- ॐ अत्रिपुत्राय विद्महे सागरोद्भवाय धीमहि।
तन्नः चन्द्रः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं चन्द्राय, इदं न मम।

३ मङ्गल गायत्री-

ॐ क्षितिपुत्राय विद्महे लोहिताङ्गाय धीमहि।
तन्नो भौमः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं भौमाय, इदं न मम।

४ बुध गायत्री-

ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणीप्रियाय धीमहि।
तन्नो बुधः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं बुधाय, इदं न मम।

५ गुरु गायत्री-

ॐ अङ्गिरोजाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि।
तन्नो गुरुः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं बृहस्पतये, इदं न मम।

६ शुक्र गायत्री-

ॐ भृगुवंशजाताय विद्महे श्वेतवाहनाय धीमहि।
तन्नः कविः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं शुक्राय, इदं न मम।

७ शनि गायत्री-
ॐ कृष्णांगाय विद्महे रविपुत्राय धीमहि।
तन्नः शौरिः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं शनये, इदं न मम।

८ राहु गायत्री-
ॐ नीलवर्णाय विद्महे सैंहिकेयाय धीमहि।
तन्नो राहुः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं राहवे, इदं न मम।

९ केतु गायत्री- ॐ अन्तर्वाताय विद्महे
कपोतवाहनाय धीमहि।
तन्नः केतुः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं केतवे, इदं न मम।

तत्पश्चात् यज्ञ का शेष क्रम स्विष्टकृत्, पूर्णाहुति आदि सम्पन्न करें। उपस्थित सभी परिजन अभिषेक मन्त्र के साथ जातक और उनके माता- पिता को आशीर्वाद दें। कार्यक्रम समाप्त।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 7:44 am

Categories: Articles   Tags:

Rituals of Chautha & Tehravin – रसम पगड़ी – Rasam Pagri Ad Sampes of Newspaper

 

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army
















 

 

रस्म पगड़ी – रस्म पगड़ी उत्तर भारत और पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों की एक सामाजिक रीति है, जिसका पालन हिन्दू, सिख और सभी धार्मिक समुदाय करते हैं। इस रिवाज में किसी परिवार के सब से अधिक उम्र वाले पुरुष की मृत्यु होने पर अगले सब से अधिक आयु वाले जीवित पुरुष के सर पर रस्मी तरीके से पगड़ी (जिसे दस्तार भी कहते हैं) बाँधी जाती है। क्योंकि पगड़ी इस क्षेत्र के समाज में इज़्जत का प्रतीक है, इसलिए इस रस्म से दर्शाया जाता है। परिवार के मान- सम्मान और कल्याण की जिम्मेदारी अब इस पुरुष के कन्धों पर है। साथ ही जो लोग पगड़ी पहनाते हैं, वे आश्वासन देते हैं कि भले ही घर के सबसे मह्त्वपूर्ण व्यक्ति का सहारा घर से छूट गया हो, अब इस घर के दुःख में, आवश्यकता में हम लोग साथ खड़े होंगे। इससे घर के जिम्मेदार व्यक्ति को खोने का शोक कम होता है। रस्म पगड़ी का संस्कार या तो अन्तिम संस्कार के तीसरे, चौथे दिन या फिर तेहरवीं को आयोजित किया जाता है। वैसे समयाभाव के कारण रस्म पगड़ी से पूर्व घर में तर्पण यज्ञादि का क्रम भी पूरा कर लेना चाहिए। पुरातन शास्त्रों में भी तीसरे- चौथे दिन आशौच शुद्धि हो जाती है। आने- जाने वाले परिजनों- परिवारीजनों को भी इस सामाजिक बन्धन से मुक्ति मिल जाती है। समय और परिस्थिति के अनुसार भी यही अनुकूल रहता है।
(यज्ञ- कर्मकाण्ड प्रकरण में दिये गये मन्त्रों का उपयोग करेंं)

मङ्गलाचरण, षट्कर्म, पृथ्वीपूजन, तिलक, कलावा, कलश व दीपपूजन, गुरु- गायत्री का आवाहन एवं स्वस्तिवाचन करें-
यम आवाहन-
ॐ सुगन्नुपन्थां प्रदिशन्नऽएहि ज्योतिष्मध्येह्यजरन्नऽआयुः।
अपैतु मृत्युममृतं मऽआगाद् वैवस्वतो नोऽ अभयं कृणोतु।
ॐ यमाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

पितृ आवाहन- (दिवङ्गत आत्मा का चित्र)
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
पिता महेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः अक्षन्न पितरो मीमदन्तपितरो
तीतृपन्त पितरः पितरः सुन्धध्वम्।
ॐ पितृभ्यो नमः॥

सर्वदेव नमस्कारः, पञ्चोपचार / षोडशोपचारपूजनम्, स्वस्तिवाचनम् के बाद सामूहिक गायत्री मन्त्र का पाठ (१२ या २४ बार) करें।

प्रार्थना
मङ्गल मन्दिर खोलो
मङ्गल मन्दिर खोलो दयामय।
जीवन बीता बड़े वेग से,
द्वार खड़ा शिशु भोलो।
मिटा अँधेरा ज्योति प्रकाशित,
शिशु को गोद में ले लो।
नाम तुम्हारा रटा निरन्तर, बालक से प्रिय बोलो।
दिव्य आश से बालक आया, प्रेम अमिय रस घोलो ।।

परिजनों द्वारा कुल परम्परा के अनुसार तिलक, पगड़ी इत्यादि करें- तत्पश्चात् शान्तिपाठ कर पुष्पांजलि करते हुए सभी लोग परिवारजनों को आश्वस्त करते हुए बाहर होते हैं।


निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

rasam pagri matter in hindi for whatsapp
rasam pagri matter in english for whatsapp
rasam pagri matter in english
rasam pagri matter in punjabi
rasam pagri invitation matter in hindi
rasam pagri invitation matter in english

rasam pagri matter in english
rasam pagri format
rasam pagri quotes
rasam pagri pravachan
rasam pagri ceremony
speech on rasam pagri in hindi

rasam pagri matter in english
rasam pagri format
rasam pagri quotes
rasam pagri matter in english for whatsapp
rasam pagri pravachan
speech on rasam pagri in hindi
rasam pagri meaning
rasam pagri meaning in hindi

Rasam Pagri Ad Sampes of Newspaper

 

==================================================================

रस्म पगड़ी – शोक सन्देश

अत्यन्त दुःख के साथ सुचित करना पड़ है कि हमारे पूजनीय पिताजी श्रीनारायण लाल बापलावत (मेंबर) पुत्रस्व. श्री रोडूराम जी का स्वर्गवास दिनांक 20.10.2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक 22.10.2017 रविवार को 1:00 से 3:00 तक सीताराम जी के मंदिर के पास ग्राम गोल्यावास मानसरोवर, जयपुर पर रखी गयी है। शोकाकुल:- रामेश्वरलाल, सूरजमल, लालाराम, भगवान सहाय, गोपाल, बाबू, राजेश, खेमचंद, कमलेश, नरेश (पुत्र), ग्यारसीलाल, प्रकाश, बनवारी, ताराचंद, सुरेश, रोशन, दीपक, सुनील, मनीष, लोकेश, अनुराग, अंशु, आशु (पौत्र), निखिल, प्रियांशु, प्रतीक (प्रपोत्र) एवं समस्त बापलावत परिवार। 9782363819, श्रीराम नर्सरी पत्रकार रोड गोल्यावास।

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूज्यनीय माताजी श्रीमतीशकुन्तला देवी (धर्मप|ीस्व. श्री मोतीलाल जी टोडवाल) का स्वर्गवास शुक्रवार 20 अक्टूबर 2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार 22 अक्टूबर 2017 को सांयकाल 4 से 5 बजे तक बालाजी मेरिज गार्डन सिरसी रोड, भांकरोटा पर होगी। शोकाकुल:- भंवरलाल, राधेश्याम, मोहन, सत्यनारायण, रामबाबू, नरेन्द्र, घनश्याम, नरेन्द्र, रामशरण (देवा), रामस्वरूप, अनिल, विनोद, सन्दीप (पुत्र), गोविन्द, पुरूषोतम (भतीजे) एवं समस्त टोडवाल परिवार। मोबाइल 8890038404, पीहरपक्ष- सूर्यप्रकाश, दीपक कुमार भीलवाड़ा।

मेरी सुपुत्री इन्द्रादेवी प|ीश्री सीताराम जी टोडावाल (चावन्डिया वाले) का आकस्मिक निधन दिनांक 18.10.2017 को हो गया है जिसकी पीहर पक्ष की तीये की बैठक दिनांक 22.10.2017 को आदर्श विद्या मंदिर, मंगेज सिंह पेट्रोल पम्प के पीछे, झोटवाडा़ में सांयकाल 3 से 3.30 बजे तक होगी शोकाकुल- लादूलाल- राजल देवी (माता- पिता), गुलाब देवी (ताईजी) रामनारायण- ममता, गिरिराज- अर्चना, पुरूषोत्तम- अंजना (भाई- भाभी) अनिता- हरिमोहन, शारदा- सत्यनारायण, सन्तोष- ओमप्रकाश, शान्ति- विजय, सुमन- नन्दकिशोर, ममता- विष्णु (बहन -बहनोई) अनामिका, पायल, आर्यन, हनी, तनिष्क (भतिजा- भतीजी) एंव पाटीडिया परिवार (भासू वाले)- 9929383685

हमारे पूजनीय श्रीमोहनदास सबधानी पुत्रस्वर्गीय श्री राधाकिशन सबधानी का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 17 को हो गया। तीये की बैठक 22. 10. 17 को सायं 4.30 बजे झूलेलाल मंदिर सेक्टर 5 हाउसिंग बोर्ड, शास्त्री नगर होगी। शोकाकुल- चन्दा देवी (प|ी), दिलीप-लता, वासदेव- पूनम (पुत्र- पुत्रवधू), ईश्वरलाल- जया, लक्ष्मणदास- मीना (भाई- भाभी), किशोर- रिया, कमलेश- रिद्वी (भतीजा- बहू), जितेश, कपिल (भतीजे), मनोहर- भारती (दामाद- पुत्री), मनीष- रितु (दामाद- भतीजी), भाविका- रवि (पौत्री- दामाद), मनीष, नमन (पौत्र), रेनु, काजल, दिव्यांशी (पौत्री), पदम, लविश, भव्य (दोहिता), खुशबू (दोहिता) एवं समस्त सबधानी परिवार, 9351787644, 9351787645

हमारे बहनोई श्रीलक्ष्मीनारायण जी घीवालों का आकस्मिक निधन 20-10-2017 को हो गया है, ससुराल पक्ष की बैठक दिनांक 22-10-2017 को 1:00 से 1:45 तक झूलेलाल मन्दिर, कंवर नगर पर होगी तत्पश्चात‌ अग्रसेन बगीची जायेगी, शोकाकुल- ताराचन्द, मोहिनी देवी, डॉ0 सीताराम-पुष्पा, राधेश्याम-शांती, सत्यनारायण-संतोष (साले-सालाएली) , शांती डेरेवाला, कान्ता-सतपाल जी (साली-साढू), कृष्ण गोपाल, गोपालकृष्ण, रामअवतार, उमेश, दीपक, देवेन्द्र, सौरभ (चूडीवाला) (भतीजे) एवं समस्त सीपरिया परिवार मोबाईल-9829286797

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरी प|ी श्रीमतीभंवरी देवी कास्वर्गवास 20. 10. 2017 को हो गया। तीये की बैठक 22. 10. 2017 रविवार को 2.00 से 4.00 तक मेरे निवास कालवाड़ (तालामोड़) अचरोल पर होगी। शोकाकुल- रेबड़ मणकस (पति), सेडूराम, भैरूराम, हनुमान सहाय पूर्व सरपंच काट, (जेठ) गज्जूराम, फूलाराम (देवर), मदनलाल, कानाराम, बाबूलाल, शंकरलाल, हरिनारायण (प्रदेश महामंत्री श्री देवनारायण जन- कल्याण संस्थान), रामनारायण, गोपाल, जगदीश, अशोक, कन्हैयालाल, धोलूराम, पायलेट, धारासिंह, अमरसिंह (पुत्र) कैलाश, सीताराम, हेमराज, दीपक, मनीष. इन्द्रराज, आर्मी, संदीप (पौत्र) एवं समस्त मणकस परिवार 7737456807, पिहर- बाबूलालजी चांड, शास्त्री नगर, जयपुर।

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरी धर्मप|ी श्रीमतीगीता कश्यप प|ीश्री एल.के. कश्यप का आकस्मिक स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया जिसकी तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 2017 को सांय 4 से 5 बजे निवास स्थान देव अपार्टमेंट, गौतम मार्ग, जे.एन. मिश्रा अस्पताल के सामने, हनुमान नगर, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- बालकिशन- निर्मल (भ्राता- भ्रातावधु), अमित- गगनदीप (पुत्र- पुत्रवधू), बच्चुसिंह- डिम्पल सिंह, कारेश- सोनिया, विनित- सिम्पल (पुत्री- दामाद), रजनी (पुत्री) एवं समस्त परिवारजन मित्रगण, 9414041594, 9001057100

हमारी पूजनीया श्रीमतीविमला देवी (धर्मप|ीगिरधारी लाल भादरिया( (जांगिड़)तह. अध्यक्ष चौमू मोरीजा का देहावसान 20. 10. 2017 को हो गया। सो तीये की बैठक 22. 10. 2017 को सायं 4 से 5 बजे तक खातियों की पक्की ढाणी, मोरीजा में होगी। शोकाकुल- प्रभूदयाल जी (जेठ), सीताराम, महेश, मुकेश, मिन्टटू जोगिन्द्र पुत्र एवं गोपाललाल, साधुराम, ताराचन्द, तेजपाल, शंकर, लक्ष्मीनारायण, ओमप्रकाश, मूलचन्द, बजरंग, शिवनारायण, सुरेन्द्र, मुरारी एवं समस्त भांदरिया (जांगिड़) परिवार. पक्की ढाणी, मोरीजा 9352946043, 9829624993

हमारी छोटी बहन श्रीमतीरेणु सक्सेना धर्मप|ीस्व. जितेन्द्र कुमार सक्सेना का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार दिनांक 22. 10. 2017 को शाम 4 बजे से 5 बजे तक 101, भृगु नगर, अजमेर रोड, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- प्रांशु (पुत्र), सुरेन्द्र सक्सेना (भ्राता), योगेश सक्सेना (भ्राता), कमलेश सक्सेना (बहन), नीरू सक्सेना (जीजी), रिषिकान्त सक्सेना (जीजाजी), सोनू, बिटिया (भान्जा- भान्जी)

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीय माताजी श्रीमतीनर्बदा देवी प|ीस्व. ठा. जगदीश सिंह शेखावत का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार 22. 10. 2017 को सांय 4.30 से 5.30 बजे तक के.के. पैराडाइज, बाल्टी फैक्ट्री के पास, आगरा रोड, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- ठा. लक्षमण सिंह, कैलाश सिंह, रमेश सिंह, विजय सिंह (पुत्र), जितेन्द्र सिंह, सुल्तान सिंह, अमर सिंह, अजय सिंह, शुभम सिंह, तुषार सिंह (पौत्र) एवं समस्त शेखावत परिवार। 9950557219, 8561045304

मेरे पूजनीय पिताजी श्रीसुमेर सिंह तंवर पुत्रस्व. श्री गोपाल सिंह का स्वर्गवास दिनांक 19.10.17 को हो गया है। तीये की बैठक 22.10.17 रविवार को निवास स्थान 141, श्याम नगर विस्तार नाड़ी का फाटक जयपुर पर सायं 4.30-5.30 बजे तक होगी। शोकाकुल- जोन्टी सिंह (पुत्र), ठा. श्रवण सिंह, देवी सिंह, बाबूसिंह, केसर सिंह, सुरज्ञान सिंह (भाई) एवं समस्त तंवर परिवार, ठिकाना नीम का थाना वाले, 9024363499, 9079051173

हमारे पूजनीय पिताजी श्रीलक्ष्मीनारायण जी अग्रवाल (घीवाले) पुत्र स्वर्गीय श्री नाथूलाल जी अग्रवाल का स्वर्गवास दिनांक 20-10-2017 को हो गया है, तीये की बैठक दिनांक 22-10-2017 रविवार को 1 बजे से 2 बजे तक अग्रसेन बगीची, चांदी की टकसाल, जयपुर पर होगी शोकाकुल श्रीमती पुष्पा देवी (धर्मप|ी), सीता देवी (भाभी), हनुमानप्रसाद, महेन्द्र (भतीजे), धर्मेन्द्र, याेगेन्द्र, मनीष (पुत्र), शान्ति देवी-स्व0 लल्लूनारायणजी (मोरीजा वाले), सुशीला देवी-सीताराम जी (खटाई वाले) (बहन-बहनोई), बबीता- महावीर जी पोद‌दार, रूचिता-विश्वजीत जी (बरखडी वाले) (पुत्री-दामाद), समस्त घी वाला परिवार 9829006685

हमारे पूजनीय जीजाजी श्रीलक्ष्मीनारायण जी (मुन्नाजी) सुपुत्र स्व0 श्री नाथुलाल जी घी वाले का स्वर्गवास दिनांक 20-10-2017 को हो गया है, जिनकी ससुराल पक्ष की तीये की बैठक दिनांक 22-10-2017 को दोपहर 1:00 बजे से 1:45 तक झूलेलाल मंदिर, कंवर नगर जयपुर पर होगी। तत्पश्चात‌ मुख्य बैठक अग्रसेन बगीची मे शामिल होगी शोकाकुल- श्रीमती कौशल्या देवी (सास), निरंजन (बबलू), संजय (साले), मंजू-विशम्भर दयाल, निर्मला-चन्द्रमोहन, सुनीता-मुकेश जी, मनीषा (पिंकी)-मुकेश (साली-साढू),एवम समस्त संघी परिवार मनोहरपुर वाले मोबाईल- 9782940723

हमारे पूजनीय पिताजी श्रीशशिकांत जी बंसल कास्वर्गवास हो गया तीये की बैठक 22-10-2017 को 04:00 से 05:00 अग्रवाल भवन चर्च के पास शिप्रा पथ मानसरोवर जयपुर पर होगी। शोकाकुल:- गीता देवी (धर्मप|ी) रजनीकान्त, मुन्नी देवी (भाई- भाभी), राकेश (सुपुत्र), निलम- विष्णु जी, मधु- मनीष जी, कुसुम- गोविन्द जी (पुत्री- दामाद) 9509676354

श्रीमतीरणजीत मरवाह प|ीस्व. श्री बलबीरसिंह मरवाह का स्वर्गवास दि. 20.10.2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार दि. 22.10.2017 को सांय 4 से 5 बजे तक सामुदायिक भवन सेक्टर-5, SBI के पास गिरधर मार्ग, मालवीय नगर में होगी। शोकाकुल:- महेन्द्र सिंह, नरेन्द्र सिंह, अजीत सिंह मरवाह (पुत्र), आशा मरवाह (क्यूट पार्लर- पुत्रवधु), हरषित सिंह- निकिता, कर्ण सिंह (पौत्र) मीना- रमेश किनरा, दीप्ती- हेमन्त नारंग (पुत्रीयाँ- जवाई) एवं समस्त मरवाह परिवार। 9828125002

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीया माताजी श्रीमतीगीता देवी प|ीश्री बालचंदजी सवेदा ग्राम रूल्याना पट्टी (सीकर) का देवलोकगमन दिनांक 21. 10. 17 शनिवार को हो गया। शोकाकुल- महावीर प्रसाद, बनवारी, बिहारी (पुत्र), मदनलाल, गजानन्द (देवर), कैलाश (देवर पुत्र), पंकज, विवेक, सौरव, तरुण (पौत्र), किंशुक, हिरेन (पड़पौत्र) एवं समस्त सेवदा परिवार, 9829053808, 9414073608

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरे प्रिय पुत्र विकाससाहू पुत्ररामवतार साहू का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है जिसकी तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 2017 रविवार को सांय 3 से 4 बजे निवास स्थान- एफ-8-ए, किरण विहार पर होगी। शोकाकुल- मोतीलाल साहू (दादाजी), कमलेश साहू, किशन गोपाल (ताऊजी), मुकेश, उमाशंकर (चाचा), सत्यनारायण, राजेश, रवि, करण, हनी, कृष (भाई), वैभव, हर्षित (भतीजे) एवं समस्त कोरत्या परिवार। 9001524417, 9351762194

हमारी पूजनीया माताजी श्रीमतीलक्ष्मी देवी सोनी धर्मप|ीस्वर्गीय श्री भागीरथमल जी सोनी का देहावसान दिनांक 19/10/2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक दिना॑क 22/10/2017, रविवार को सायं 4 से 5 बजे तक रामेश्वरम महादेव मंदिर पार्क, जागृति विवाहस्थल के पीछे, श्रीरामनगर विस्तार, झोटवाड़ा जयपुर पर होगी। शोकाकुल: सत्यनारायण (देवर) मुरारीलाल- चन्दा देवी, महावीरप्रसाद- कोशल्या देवी (पुत्र- पुत्रवधु), चतरभुज, मोहनमुरारी, (भतीजे), सुनील कुमार- सुलोचना, अशोक- अरुणा (पौत्र- पौत्रवधु), मनोज, नवर|, सुरेन्द्र (पौत्र) मनीष, कार्तिक, कृष्णा(प्रपौत्र) भवानी (प्रपौत्री) एव॑ समस्त कुकरा परिवार, रामगढ़ शेखावाटी वाले।।मो. 9314836255,9829136255

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूजनीय पिताजी श्रीकिशनलाल सैनी कास्वर्गवास दिनांक 20. 10. 17 को हो गया है। तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 17 को 4.30 से 5.30 बजे हमारे निवास स्थान हसनपुरा-ए पर होगी। शोकाकुल- राजेन्द्र सैनी, बजरंग सैनी, रिंकू सैनी (भाई), करण (भतीजा)।

अत्यन्त दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरे प्रिय पुत्र विकाससक्सेना कास्वर्गवास 20-10-2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक 22-10-2017 रविवार को सांय 04:00 से 05:00 बजे तक हमारे निवास स्थान 92/171, पटेल मार्ग, मानसरोवर, जयपुर पर होगी। शोकाकुल:- कमलेन्द्र सक्सेना- ज्योति (माता- पिता), ममता (प|ी), अक्षित (पुत्र), नरेन्द्र, सुरेश, योगेन्द्र, सतीश (ताऊ), चंद्र प्रकाश (चाचा) एवं समस्त परिवार। 9587958420

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी आदरणीय बहन श्रीमतीसुशीला देवी प|ीश्री गजानन्द जी दुसाद का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक 22. 10. 2017 को सांय 4 से 4.45 तक आदर्श विद्या मंदिर, अम्बाबाड़ी, जयपुर रखी गई है। शोकाकुल- रामोतार (चाचा), कैलाश, शंकरलाल (भाई), विष्णु, विशाल (भतीजा) एवं समस्त कुलवार (बोहरा) परिवार नायला वाले, 8854833419

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि श्रीमतीसुशीला देवी धर्मप|ीगजानन्द दुसाद का स्वर्गवास 20. 10. 2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक 22. 10. 2017 को सांय 4 से 5 बजे तक स्थान आदर्श विद्या मंदिर स्कूल अम्बाबाड़ी, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- रामानन्द, चौथमल, राधाकिशन, रामकिशोर, श्रीनारायण (जेठ), बाबूलाल, मोहनलाल (देवर), गंगाशरण, गौरीशंकर, देवशरण, नीरज, विनय, संजय, शिवम (पुत्र), रेखा- सुनिल, नीतु- प्रवीण (पुत्री- दामाद), महित, भाविन (दोहिते) एवं समस्त दुसाद परिवार (खोरा श्यामदास वाले), 9929712300, 9529379863

हमारी पूजनीय माताजी श्रीमतीगीता देवी प|ीस्व. श्री प्रकाशचन्द नानकानी (सिंधी- पंजाबी) दिनांक 20.10.2017 को स्वर्गवास हो गया है। जिनकी तीये की बैठक दिनांक 22.10.17 रविवार को निवास स्थान 3/625, मालवीया नगर के पास पार्क में सांय 5 बजे रखी गई है। शोकाकुल- धर्मेन्द्र (पुत्र), धर्मेन्द्र- जयकिशन (भतीजे), वर्षा- जय, खुशबु- दीपक, हेमा- हेमन्त, हर्षा- देवा (पुत्री- दामाद), समस्त नानकानी परिवार, 9636989139, 7737708168

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पिताजी डॉ.सुरेश कुमार सक्सैना कानिधन दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 2017 को सांय 4.30 से 5.30 श्री गोपाल नगर, पालीवाल गार्डन, जेडीए पार्क (डॉ. यू.एस. अग्रवास के पास) पर रखी गई है। शोकाकुल- उषा (प|ी), राहुल- निशि, पुनीत- जयिता (पुत्र- पुत्रवधु), अतिष- मंजू (भाई- भाभी), नवीन- लक्ष्मी, अभिषेक- श्वेता, ओजस (भतीजे), सृष्टि, भव्य, वरिष्ठा, पूर्वीषा, लवांश (पौत्र- पौत्री), ननिहाल पक्ष- राजेन्द्र- शगुन, राकेश- स्वर्ण, मुकेश- साधना, दिनेश- राधिका, वंदना, संजय- आराधना (भाई- भाभी), निवास: 84, सुल्तान नगर, गुर्जर की थड़ी, जयपुर। 9829056625, 9314274769, 0141-2290632

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरी धर्मप|ि श्रीमतीइन्द्रा देवी गुप्ता कास्वगर्वास दिनांक 18/10/2017 को हो गया है जिनकी तीये की बैठक दिनांक 22/10/2017 को आदर्श िवद्या मंदिर, बोरिंग चौराहा, पेट्रोल पम्प के पीछे, झोटवाडा पर सांयकाल 3 से 4 बजे तक होगी शोकाकुल- सीताराम गुप्ता (पति) (पूर्व सरपंच चावन्डिया तहसील- मालपुरा, जिला टोंक) रामेश्वर प्रसाद (ससुर) जगदीश प्रसाद (जेठ) राजेश (देवर) नेहा- विकास जी (पुत्री- दामाद) नन्द किशोर, विकास, आशिष, विनोद, जानू (पुत्र) समर्थ (पौत्र) (टोेडारायसिंह वाले) Mobile- 7665333344, 9928482450

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूज्य पिताजी श्रीदिनेश सैन सुपुत्रस्व. श्री कैलाश सैन का निधन 17. 10. 2017 मंगलवार को हो गया। जिनकी बैठक 22. 10. 2017 रविवार को सांय 4 से 5 बजे तक ई-5/3, 36 क्वार्टस राजस्थान यूनिवर्सिटी कैम्पस, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- भगवती देवी (धर्मप|ी), संदीप, रवि, पूजा, सोनाली (पुत्र- पुत्री), राधेश्याम, सुरेश, अशोक (चाचा), सत्यनारायण, विनोद, नरेश, मनीष (भ्राता) एवं समस्त बादशाह परिवार (मण्डावर वाले) 9929236781, 9024640787

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीय माताजी श्रीमतीसोनी देवी धर्मप|ीस्व.श्री दामोदर बाछल का स्वर्गवास दिनांक 20.10.2017 को हो गया है, जिनकी तीये की बैठक दिनांक 22.10.2017 को सांय 4 से 5 बजे हमारे निवास स्थान -110 दीपनगर, दादी का फाटक, झोटवाड़ा, जयपुर पर होगी,शोकाकुल- गिरधारीलाल (देवर), पूरण (भतीजा) अशोक, रमेश (पुत्र) एवं समस्त बाछल (बन्धेवाले)परिवारमो.9929556774, 7877779988

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरी धर्मप|ी श्रीमतीचन्द्रकान्ता पाटोदिया कास्वर्गवास दिनांक 21 अक्टूबर को हो गया है। शवयात्रा दिनांक 22 अक्टूबर को सुबह 9 बजे मेरे निवास स्थान 4, पुष्पा पथ उनियारा गार्डन से आदर्श नगर मोक्षधाम जायेगी शोकाकुल : दामोदर दास पाटोदिया (पति) मदनलाल (भतीजा) उमेश, विकास (पौत्र) एवं समस्त पाटोदिया परिवार, शिवाड वाले

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूज्यनीय पिताजी श्रीश्रीराम गुप्ता कानिधन:17.10.2017 को हो गया है। जिनकी शोक सभा 22.10.2017 को सांय 4 से 5 बजे पिंकसिटी मैरिज गार्डन, आगरा रोड, जयपुर पर रखी है। शाेकाकुल- धापा देवी(धर्मप|ि), लक्ष्मीनारायण, शिम्भूदयाल, खेमराज, मुकेश अग्रवाल (पुत्र),पंकज, संजय, केके(CA), प्रदीप, गौरव, मयंक(पौत्र), वंश(प्रपौत्र) फर्म:- राज स्टील्स, रामा सैनेट्री, राज इलैक्ट्रीकल्स, रामाबुक डिपो। मो.9314407010, 9414200137

अत्यन्त दु:ख के साथ सुचित किया जाता है कि हमारे पूजनीय ठा.सा.श्री विक्रम सिंह जी शेखावत सुपुत्रस्व. श्री मदन सिंह जी शेखावत का स्वर्गवास दिनांक 19.10.2017 को हो गया है। हरि कीर्तन दिनांक 29.10. 2017 द्वादशा, पाग दस्तूर दिनांक 30.10.2017 का है। शोकाकुल- ठा.सा. पन्ने सिंह, भीम सिंह, शंकर सिंह, हनुमत सिंह, नरपत सिंह, शिवराज सिंह, श्योपाल सिंह, किशन सिंह (भ्राता), दीपेन्द्र सिंह (पुत्र), अतुल सिंह, जितेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, अचल सिंह, नरेन्द्र सिंह (भतीजे), निकूम्भ सिंह (पौत्र) एवं समस्त शेखावत परिवार हवेेली बुर्जहाला कोटड़ी मानपुरा माचैडी, जिला जयपुर (राज.) 09828561947

हमारे पूजनीय श्रीभरतलाल दुग्गल कास्वर्गवास 10.10.2017 को हो गया। तेरहवां 22.10.2017 (रविवार) को अखण्ड पाठ भोग प्रसाद, शीशी पूजन तथा पगड़ी रस्म सांय 3 बजे होगी। शोकाकुल : श्रीमती लीलाराणी (प|ी), प्रकाश दुग्गल- गुलशन, गुलशन दुग्गल- किरण, राजेश दुग्गल- उषा, कैलाश दुग्गल- अंजना, वनिता (भ्राता- भ्राताप|ी), नीलमराणी, नरगीस- कुलदीप, किरण (बहन- बहनोई), नरेश- हेमा, कमलेश- सोनिया, सुरेश (पुत्र- पुत्रवधु), वर्षा- नरेश, सीमा- नरेश (पुत्री- दामाद), साहिल, अक्षय, मोहित, महिमा, प्रशंसा (पौत्र- पौत्री) समस्त दुग्गल परिवार कांवट। 8107316611, 8441939700.

हमारे पूजनीय दादाजी श्री नरेन्द्र देव शुक्ला (सेवानिवृत्त उपजिलाधीश, जयपुर) का आकस्मिक निधन दिनांक 21.10.2017 को हो गया है। शवयात्रा सुबह 11:15 बजे हमारे निवास स्थान से चांदपोल मोक्षद्वार जाएगी। शोकाकुल : सरोजनी देवी (प|ी), अशोक, अरुण, विनोद कुमार शुक्ला (पुत्र), ओमप्रकाश, राजकुमार (भतीजे), नीरज, नवनीत, आनन्द, मनु, आशीष, शुभम, शिवम (पौत्र), जितेन्द्र तिवारी-मंजू (दामाद-पुत्री), कपिल दीक्षित-रुचि, राजेश तिवारी-कंचन (पौत्री दामाद-पौत्री) एवं समस्त शुक्ला परिवार। मो. : 9829394664.

==============================================================

Anil Gupta
Very sad to hear the news of demise of your loving dad. May God rest his soul in peace and provide you and family the strength to bear this irreparable loss. Heartfelt Condolences.
· 4w
Mona Bedi
Our heartfelt condolences to all of you ! May his soul rests in peace🙏🏻🙏🏻
· 4w
DrRituVishal Gupta
Heartfelt Condolences 🙏🏼 May God grant peace to the departed soul and strength to the family to bear this irreparable loss..
· 4w
Deepika Ghai Goel
Irreparable loss…may his soul rest in peace🙏
· 4w
Amit Gupta
God gave peace to departed soul and strength to all family members to bear this great lose
· 4w
Upasana Handa
Condolences to u and ur family
· 4w

rasam pagri matter in english
rasam pagri format
rasam pagri quotes
rasam pagri matter in english for whatsapp
rasam pagri pravachan
speech on rasam pagri in hindi
rasam pagri meaning
rasam pagri meaning in hindi

rasam pagri matter in english
rasam pagri format
rasam pagri quotes
rasam pagri matter in english for whatsapp
rasam pagri pravachan
speech on rasam pagri in hindi
rasam pagri meaning
rasam pagri meaning in hindi

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 6:52 am

Categories: Uncategorized   Tags:

Next Page »

© 2010 Chalisa and Aarti Sangrah in Hindi

Visits: 130 Today: 10 Total: 546418