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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 12, 2021 at 4:26 pm

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Invitation Card For Upnayan Sanskar In Marathi

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 11, 2021 at 3:48 pm

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Sarvatobhadra Mandal Pujan Vidhi

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सर्वतोभद्र मण्डल पर निम्न मन्त्रों के साथ ३३ देवताओं का श्रद्धा -भक्तिपूर्वक आवाहन करना चाहिए। प्रत्येक देवता के आवाहन के साथ निर्धारित वर्ग पर अक्षत, पुष्प, सुपारी चढ़ाते रहना चाहिए।

नोट- पुस्तक के प्रारम्भ में लघुसर्वतोभद्र का चित्र दिया गया है, उसी के अनुसार निर्धारित नम्बरों पर पूजन करें।

(१) गणेश (विवेक) पीला
ॐ गणानां त्वा गणपति*
हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपति*
हवामहे निधीनां त्वा निधिपति*
हवामहे वसो मम। आहमजानि
गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्।
ॐ गणपतये नमः। आवाहयामि,
स्थापयामि ध्यायामि ।। -२३.१९

अर्थात्- जो अभीष्ट प्रयोजन की पूर्ति के लिए देवताओं- दैत्यों द्वारा पूजे गये हैं और सम्पूर्ण विघ्नों को समाप्त कर देने वाले हैं, उन गणाधिपति (प्रमथादि गणों के स्वामी) को नमस्कार है।

(२) गौरी (तपस्या) हरा
ॐ आयं गौः पृश्निरक्रमीदसदन्
मातरं पुरः। पितरञ्च प्रयन्त्स्वः॥
ॐ गौर्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३.६
अर्थात्- सभी का सब प्रकार से मङ्गल करने वाली शिवा (कल्याण- कारिणि)! सभी कार्यों को पूर्ण करने वाली, शरणदात्री, त्रिनेत्रधारिणी, गौरी, नारायणी देवि! (महादेवि) आपको नमस्कार है।

(३) ब्रह्मा (निर्माण) लाल
ॐ ब्रह्म जज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्वि
सीमतः सुरुचो वेनऽआवः।
स बुध्न्याऽ उपमाऽ अस्य विष्ठाःसतश्च योनिमसतश्च वि वः॥
ॐ ब्रह्मणे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१३.३

अर्थात्- सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्मरूप में परमात्म शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ, वही शक्ति समस्त ब्रह्माण्ड में व्यवस्था रूप में व्याप्त हुई। यही कान्तिमान् ब्रह्म (सूर्यादि) विविध रूपों में स्थित अन्तरिक्षादि विभिन्न लोकों को तथा व्यक्त जगत् एवं अव्यक्त जगत् को प्रकाशित करते हैं।

(४) विष्णु (ऐश्वर्य) सफेद
ॐ इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा नि दधे पदम्। समूढमस्य पा* सुरे स्वाहा।
ॐ विष्णवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ — ५.१५

अर्थात्- हे विष्णुदेव! आप अपना सर्वव्यापी प्रथम पद पृथ्वी में, द्वितीय पद अन्तरिक्ष में तथा तृतीय पद द्युलोक में स्थापित करते हैं। भू लोक आदि आपके पद- रज में अन्तर्निहित हैं। आप सर्वव्यापी विष्णुदेव को यह आहुति दी जाती है।

(५) रुद्र (दमन) लाल
ॐ नमस्ते रुद्र मन्यवऽ उतो तऽ इषवे नमः। बाहुभ्यामुत ते नमः॥
ॐ रुद्राय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१६.१

अर्थात्- हे रुद्रदेव (दुष्टों को रुलाने वाले)! आपके मन्यु (अनीति- दमन के लिए क्रोध) के प्रति हमारा नमस्कार है। आपके बाणों के लिए हमारा नमस्कार है। आपकी दोनों भुजाओं के लिए हमारा नमस्कार है।

(६) गायत्री (ऋतम्भरा प्रज्ञा) पीला
ॐ गायत्री त्रिष्टुब्जगत्यनुष्टुप् पङ्क्त्या सह। बृहत्युष्णिहा
ककुप्सूचीभिः शम्यन्तु त्वा॥ ॐ गायत्र्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥
– २३.३३

अर्थात्- (हे यज्ञाग्ने)! गायत्री छन्द, त्रिष्टुप् छन्द, जगती छन्द, अनुष्टुप् छन्द, पंक्ति छन्द सहित बृहती छन्द, उष्णिक् छन्द एवं ककुप् छन्द आदि सूचियों के माध्यम से आपको शान्त करें।

(७) सरस्वती बुद्धि (शिक्षा) लाल
ॐ पावका नः सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती।
यज्ञं वष्टु धियावसुः।
ॐ सरस्वत्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥
– २०.८४

अर्थात्- सबको पवित्रता प्रदान करने वाली, अन्न के द्वारा यज्ञादि श्रेष्ठ कर्मों को सम्पादित करने वाली देवी सरस्वती हमारे यज्ञ को धारण करें तथा हमें अभीष्ट वैभव प्रदान करें।

(८) लक्ष्मी (समृद्धि) सफेद
ॐ श्रीश्च ते लक्ष्मीश्च पत्न्यावहो
रात्रे पार्श्वे नक्षत्राणि रूपमश्विनौ
व्यात्तम्। इष्णन्निषाणामुम्मऽ इषाण सर्वलोकं मऽ इषाण।
ॐ लक्ष्म्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३१.२२

अर्थात्- हे प्रकाश स्वरूप परमात्मन्! श्री (सम्पत्ति) और लक्ष्मी (शोभा) दोनों आपकी पत्नी स्वरूपा हैं, रात्रि और दिन दोनों भुजाएँ हैं एवं नक्षत्र आपके रूप हैं। द्युलोक एवं पृथ्वी आपके मुख सदृश हैं। अपनी इच्छा शक्ति से सबकी इच्छाओं को पूर्ण करने में समर्थ हे ईश्वर! हमारी उत्तम लोकों की प्राप्ति की इच्छा पूर्ति के लिए आप कृपा करें।

(९) दुर्गा शक्ति (संगठन) लाल
ॐ जातवेदसे सुनवाम सोमं
अरातीयतो नि दहाति वेदः।
स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥ ॐ दुर्गायै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -ऋग्वेद १.९९.१

अर्थात्- हम सर्वज्ञ अग्निदेव के लिए सोम- सवन करें। वे अग्निदेव हमारे शत्रुओं के सभी धनों को भस्मीभूत करें। नाव द्वारा नदी से पार कराने के समान वे अग्निदेव हमें सम्पूर्ण दुःखों से पार लगाएँ और पापों से रक्षित करें।

(१०) पृथ्वी (क्षमा) सफेद
ॐ मही द्यौः पृथिवी च नऽ इमं यज्ञं मिमिक्षताम्।
पिपृतां नो भरीमभिः।
ॐ पृथिव्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ — ८.३२

अर्थात्- महान् द्युलोक और पृथिविलोक, स्वर्ण- रत्नादि, धन- धान्यों से परिपूर्ण वैभव द्वारा हमारे इस श्रेष्ठ कर्मरूपी यज्ञ को सम्पन्न करें तथा उसे संरक्षित करें।

(११) अग्नि (तेजस्विता) पीला
ॐ त्वं नो अग्ने वरुणस्य विद्वान्
देवस्य हेडो अव यासिसीष्ठाः। यजिष्ठो वह्नितमः शोशुचानो विश्वा
द्वेषा * सि प्र मुमुग्ध्यस्मत्। ॐ अग्नये नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२१.३

अर्थात्- हे अग्निदेव! आप सर्वज्ञ, कान्तिमान्, पूजनीय और भली प्रकार आहुतियों को देवों तक पहुँचाने वाले हैं। आप हमारे लिए वरुण देवता को प्रसन्न करें और हमारे सब प्रकार के अनिष्टों को दूर करें।

(१२) वायु (गतिशीलता) सफेद
ॐ आ नो नियुद्भिः शतिनीभिरध्वर * सहस्रिणीभिरुप याहि यज्ञम्।
वायो अस्मिन्त्सवने मादयस्व यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः।
ॐ वायवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२७.२८

अर्थात्- हे वायो! आप सैकड़ों- हजारों अश्वों द्वारा खींचे जाते हुए वाहनों पर आरूढ़ होकर अर्थात् तीव्र गति से हमारे इस यज्ञ में पधारें और इसके सेवन से स्वयं तृप्त हों तथा हम सबको भी हर्षित करें। आप अपने कल्याणकारी साधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करें।

(१३) इन्द्र (व्यवस्था) लाल
ॐ त्रातारमिन्द्रमवितारमिन्द्र * हवे हवे सुहव*शूरमिन्द्रम्।
ह्वयामि शक्रं पुरुहूतमिन्द्र*
स्वस्ति नो मघवा धात्विन्द्रः॥ ॐ इन्द्राय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२०.५०

अर्थात्- हम रक्षा करने वाले इन्द्रदेव का आवाहन करते हैं। पालन करने वाले इन्द्रदेव का यज्ञ में बार- बार आवाहन करते हैं। पराक्रमी इन्द्रदेव का उत्तम रीति से आवाहन करते हैं। अत्यन्त समर्थ, अनेकों द्वारा स्तुति किये जाते हुए इन्द्रदेव का आवाहन करते हैं। वे ऐश्वर्यवान् इन्द्रदेव हमारा कल्याण करें।

(१४) यम (न्याय )) सफेद
ॐ सुगन्नुपन्थां प्रदिशन्नऽएहि ज्योतिष्मध्येह्यजरन्नऽआयुः।
अपैतु मृत्युममृतं मऽआगात्वैवस्वतोनो ऽ अभयं कृणोतु।
ॐ यमाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

अर्थात्- सुगम मार्ग में प्रवेश करते हुए हमारे समीप आइये। हमारी आयु क्षीण न हो। विवस्वान् के पुत्र वे यमाचार्य हमसे मृत्यु को दूर करें, अमृतत्व से हमें संयुक्त करते हुए निर्भय करने की कृपा करें।

(१५) कुबेर (मितव्ययिता) काला

ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे।
स मे कामान् कामकामाय मह्यम्। कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु। कुबेराय वैश्रवणाय महाराजाय नमः।
ॐ कुबेराय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥- तै.आ.१.३१

अर्थात्- विश्रवा-महर्षि के आत्मज, राजाधिराज कुबेर महाराज को हम नमस्कार करते हैं, जो बलपूर्वक जिसे चाहें, उसे अपने कोष की वर्षा से तृप्त करा सकते हैं। समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले वे हमारी श्रेष्ठ कामनाओं को पूर्ण करने की कृपा करें।

(१६) अश्विनीकुमार (आरोग्य) पीला

ॐ अश्विना तेजसा चक्षुः प्राणेन सरस्वती वीर्यम्।
वाचेन्द्रो बलेनेन्द्राय दधुरिन्द्रियम्। ॐ अश्विनीकुमाराभ्यां नमः।
आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२०.८०

अर्थात्- याजकों का कल्याण करने के लिए दोनों अश्विनीकुमारों ने स्वतेज से नेत्र ज्योति, देवी सरस्वती ने प्राण के साथ पराक्रम और इन्द्रदेव ने वाणी की सामर्थ्य के साथ इन्द्रिय- बल प्रदान किया।

(१७) सूर्य (प्रेरणा) काला

ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्त्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च।
हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्॥
ॐ सूर्याय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३३.४३, ३४.३१

अर्थात्- उषाकाल की रश्मियों रूपी स्वर्णिम रथ पर आरूढ़ सविता देव गहन तमिस्रा युक्त अन्तरिक्ष- पथ में भ्रमण करते हुए देवों और मनुष्यों को यज्ञादि श्रेष्ठ कर्मों में नियोजित करते हैं। वे समस्त लोकों का निरीक्षण करते हुए निकलते हैं अर्थात् उन्हें प्रकाशित करते हैं।

(१८) चन्द्रमा (शान्ति) लाल
ॐ इमं देवाऽ असपत्न * सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते
जानराज्याय इन्द्रस्येन्द्रियाय।
इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विशऽ एष वोमी राजा सोमोस्माकं
ब्राह्मणाना * राजा। ॐ चन्द्रमसे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -९.४०

अर्थात्- हे देवगण! महान् क्षात्रबल के सम्पादन के लिए, महान् राज्य पद के लिए, श्रेष्ठ जनराज्य के लिए, इन्द्रदेव के समान हर प्रकार से विभूतिवान् बनने के लिए, शत्रुओं से रहित अमुक पिता के पुत्र, अमुक माता के पुत्र को प्रजा- पालन के लिए अभिषिक्त करें। हे प्रजाजनो! आप सभी के लिए तथा हम ज्ञानी जनों के लिए भी यह राजा चन्द्र के समान आह्लादक है।

(१९) मङ्गल (कल्याण) सफेद

ॐ अग्निर्मूर्द्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्याऽ अयम्। अपा * रेता * सि जिन्वति।
ॐ भौमाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३.१२

अर्थात्- यह अग्निदेव! (आदित्य रूप में) द्युलोक के शीर्ष रूप सर्वोच्च भाग में विद्यमान होकर, जीवन का सञ्चार करके, धरती का पालन करते हुए, जल में जीवनी शक्ति का सञ्चार करते हैं।

(२०) बुध (सन्तुलन) हरा

ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते स * सृजेथामयं च।
अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यजमानश्च सीदत॥
ॐ बुधाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१५.५४

अर्थात्- हे अग्निदेव! आप जाग्रत् हों और प्रतिदिन यजमान को भी जागरूक करें। आप ‘इष्टापूर्त (यज्ञ- यागदिक पुण्य कार्य तथा कुआँ खोदना तालाब आदि बनाना) कार्यों के साथ यजमान से संयुक्त हों। आपकी कृपा से यजमान भी ‘इष्टापूर्त’ के कार्यों से युक्त हो। इस यज्ञ में यजमान के साथ सुसंगत हों। हे विश्वेदेवा! आपके सम्बन्ध से इष्टापूर्त्त कार्यों से निष्पाप हुआ यजमान देवताओं के योग्य सर्वश्रेष्ठ स्थान देवलोक में चिरकाल तक निवास करे।

(२१) बृहस्पति (अनुशासन) पीला
ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद्द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।
यद्दीदयच्छवसऽऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।
उपयामगृहीतोसि बृहस्पतये त्वैष ते योनिर्बृहस्पतये त्वा।
ॐ बृहस्पतये नमः। आवायमि,स्थाप्यालमि,ध्यायामि॥ -ऋ०२.२३.१५, २६.३

अर्थात्- हे बृहस्पते! जिस आत्मशक्ति से आप सबके स्वामी, पूज्य और सभी लोगों में आदित्य के समान तेजस्वी एवं सक्रिय होकर सर्वत्र सुशोभित होते हैं, जिस शक्ति से आप सबकी रक्षा करते हैं, उसी आत्मशक्ति से आप हम सब मनुष्यों को श्रेष्ठ धन प्रदान करें। आप राष्ट्र के निर्धारित नियमों द्वारा स्वीकार किये गये हैं। यह पद आपके योग्य है। अतः हम सब बृहस्पति पद के लिए आप को चुनते हैं।

(२२) शुक्र (संयम) हरा
ॐ अन्नात्परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पयः सोमं
प्रजापतिः। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपान* शुक्रमन्धसइन्द्रस्येन्द्रियमिदं
पयोऽमृतंमधु॥ ॐ शुक्राय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१९.७५

अर्थात्- वेदों के ज्ञाता ब्राह्मणों के साथ प्रजापति, परिस्रुुत हुए (निचोड़े हुए) अन्नों के रस में से सोमरसरूपी दुग्ध को पृथक् करके पान करते हैं और क्षात्रबल को धारण करते हैं। उक्त (ऋत) सत्य से ही (अगला) सत्य प्रकट होता है। यह अन्न रसरूप सोम, बल, अन्न, तेज (वीर्य), सामर्थ्य दुग्धादि पेय, अमृतोपम आनन्द और मधुर पदार्थ को उपलब्ध कराता है।

(२३) शनिश्चर (तितिक्षा) लाल
ॐ शन्नो देवीरभिष्टयऽ आपो भवन्तु पीतये। शं योरभिस्रवन्तु नः।
ॐ शनिश्चराय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३६.१२

अर्थात्- दिव्य जल हम सबके लिए अभीष्ट फलदायक तथा तृप्तिदायक बने। वह हमारे रोगों के शमन तथा अनिष्ट हटाने के लिए बरसता रहे। इस प्रकार हमारा सब प्रकार से कल्याण करे।

(२४) राहु (संघर्ष) पीला

ॐ कया नश्चित्रऽआ भुवदूती सदावृधः सखा। कया शचिष्ठया वृता।
ॐ राहवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२७.३९

अर्थात्- सर्वदा वृद्धि करने वाले, अद्भुत शक्ति सम्पन्न हे इन्द्रदेव! किस रक्षण तथा व्यवहार क्रिया से प्रसन्न होकर आप सदैव हमारे मित्र रूप में प्रस्तुत होते हैं।

(२५) केतु (साहस) लाल

ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्याऽ अपेशसे। समुषद्भिरजायथाः।
ॐ केतवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -२९.३७

अर्थात्- अज्ञानी पुरुषों को सद्ज्ञान और रूपहीनों को सुन्दर स्वरूप प्रदान करने वाले हे अग्निदेव! आप उषा के साथ समान रूप से उत्पन्न होते हैं।

(२६) गङ्गा (पवित्रता) सफेद

ॐ पञ्च नद्यः सरस्वतीमपि यन्ति सस्रोतसः।
सरस्वती तु पञ्चधा सो देशेभवत्सरित्॥ ॐ गङ्गायै नमः।
आवाहयामि, स्थापयामि ध्यायामि॥ -३४.११

अर्थात्- समान स्रोत वाली (श्रेष्ठ प्रवाहशील) पाँच सरिताएँ (नदियाँ) जिस प्रकार महानदी सरस्वती में समाहित हो जाती हैं, उसी प्रकार वही सरस्वती देश में पाँच (नदियों के) रूप में (प्रसिद्ध) हुई (अर्थात् विद्या पाँच प्रकार की प्रतिभाओं- श्रमपरक, विचारपरक, अर्थपरक, कलापरक और भावपरक को संयुक्त करके उन्हें प्रगतिशील बनाती है)।

(२७) पितृ (दान) पीला

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
अक्षन् पितरोमीमदन्तपितरोतीतृपन्त पितरः पितरः शुन्धध्वम्॥
ॐ पितृभ्यो नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -१९.३६

अर्थात्- स्वधा (अन्न) को धारण करने वाले पितरों को स्वधा संज्ञक अन्न प्राप्त हो। स्वधा को धारण करने वाले पितामह को स्वधा संज्ञक अन्न प्राप्त हो। स्वधा को धारण करने वाले प्रपितामह को स्वधा संज्ञक अन्न प्राप्त हो। पितरों ने हविष्यान्न के रूप में समर्पित आहार को ग्रहण करके तृप्ति को प्राप्त किया। पितर तृप्त होकर हमें भी तृप्त करते हैं। हे पितृगण ! आप लोग शुद्ध होकर हमें भी पवित्र जीवन की प्रेरणा प्रदान करें।

(२८) इन्द्राणी (श्रमशीलता) सफेद

ॐ अदित्यै रास्नासीन्द्राण्याऽ उष्णीषः। पूषासि घर्माय दीष्व।।
ॐ इन्द्राण्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -३८.३

अर्थात्- हे यज्ञीय ऊर्जे! आप अदिति की मेखला रूप हैं, इन्द्राणी (संगठक शक्ति) की पगड़ी (प्रतिष्ठा का चिह्न) हैं। आप पोषण देने में समर्थ हैं, घर्म (हितकारी कार्यों- यज्ञों) के लिए अपनी शक्ति को नियोजित करें।

(२९) रुद्राणी (वीरता) काला

ॐ या ते रुद्र शिवा तनूः अघोराऽपापकाशिनी।
तया नस्तन्वा शन्तमया गिरिशन्ताभिचाकशीहि।
ॐ रुद्राण्यै नमः।
आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥- १६.२

अर्थात्- हे रुद्रदेव! आप (अति उच्च) पर्वत की सुरक्षित गुहा में रहते हैं। आपका कल्याणकारी शान्तरूप पापों के विनाशक होने के कारण सौम्य और बलशाली भी है। अपने उसी मंगलमय रूप से हमारे ऊपर कृपा दृष्टि डालें।

(३०) ब्रह्माणी (नियमितता) पीला

ॐ इन्द्रा याहि धियेषितो विप्रजूतः सुतावतः। उप ब्रह्माणि वाघतः।
ॐ ब्रह्माण्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥- २०.८८

अर्थात्- हे इन्द्रदेव! अपनी अन्तःप्रेरणा से प्रेरित होकर इस यज्ञ स्थल में आएँ। आपकी स्तुति करने वाले ऋत्विग्गण, सोम का शोधन संस्कार करने वाले हैं, सो आप समीप आकर इन हवियों को ग्रहण करें।

(३१) सर्प (धैर्य) काला

ॐ नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु।
ये अन्तरिक्षे ये दिवि, तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।
ॐ सर्पेभ्यो नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥, – १३.६

अर्थात्- जो भी सर्प (गमनशील स्वभाव वाले नक्षत्रलोक अथवा जीव) पृथिवी के प्रभाव क्षेत्र में हैं, अन्तरिक्ष द्युलोक में हैं, उन सभी सर्पों को हमारा नमन है।

(३२) वास्तु (कला) हरा

ॐ वास्तोष्पते प्रति जानीहि अस्मान् स्वावेशो अनमीवो भवा नः। यत्त्वेमहे प्रतितन्नो जुषस्व
शन्नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे॥ ॐवास्तुपुरुषाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥
-ऋ० ७.५४.१

अर्थात्- हे वास्तोष्पते (गृह पालक देव)! आप हमें जगाएँ। हमारे घर में पुत्र- पौत्र आदि द्विपदों, गौ, अश्व आदि चतुष्पदों को नीरोग एवं सुखी करें। जो धन हम आपसे माँगें, वह हमें प्रदान करें।

(३३) आकाश (विशालता) नीला
ॐ या वां कशा मधुमत्यश्विना सूनृतावती। तया यज्ञं मिमिक्षतम्।
उपयामगृहीतोस्यश्विभ्यां त्वैष ते योनिर्माध्वीभ्यां त्वा।
ॐ आकाशाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥ -७.११

अर्थात्- हे अश्विनीकुमारो! सत्य एवं मधुरता से युक्त अपनी उत्तम वाणी से हमारे इस यज्ञ को अभिषिञ्चित करें। हे उपांशु (पात्र)! मधुरता के लिए विख्यात अश्विनीकुमारों के निमित्त आपको नियमानुसार ग्रहण किया गया है। आप यज्ञशाला में अपने सुनिश्चित आसन पर बैठें- स्थापित हों।

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Kalash Pujan Invitation

॥ कलशस्थापन॥

सूत्र सङ्केत- कलश की स्थापना और पूजा लगभग प्रत्येक कर्मकाण्ड में की जाती है। सामान्य रूप से कलश पहले से तैयार रखा रहता है और पूजन क्रम में उसका पूजन करा दिया जाता है। यदि कहीं इस प्रकरण का विस्तार करना आवश्यक लगे, तो स्थापना के लिए नीचे दिये गये पाँच उपचार कराये जाते हैं। यह उपचार पूर्ण होने पर कलश प्रार्थना करके आगे बढ़ा जाता है। यह विस्तृत कलश स्थापन, प्राण प्रतिष्ठा, गृह प्रवेश, गृह शान्ति, नवरात्र जैसे प्रकरणों में जोड़ा जा सकता है। बड़े यज्ञों में देव पूजन के पूर्व प्रधान कलश अथवा पञ्च वेदिकाओं के पाँचों कलशों पर एक साथ यह उपचार कराये जा सकते हैं।

स्थापना प्रसङ्ग के लिए रँगा हुआ कलश,उसके नीचे रखने का घेरा (ईडली), अलग पात्र में शुद्ध जल, कलावा, मङ्गल द्रव्य, नारियल पहले से तैयार रखने चाहिए।

शिक्षण एवं प्रेरणा- कलश को सभी देव शक्तियों, तीर्थों आदि का संयुक्त प्रतीक मानकर,उसे स्थापित- पूजित किया जाता है। कलश को यह गौरव मिला है, उसकी धारण करने की क्षमता- पात्रता से। घट स्थापन के साथ स्मरण रखा जाना चाहिए कि हर व्यक्ति,हर क्षेत्र, हर स्थान में धारण करने की अपनी क्षमता होती है। उसे सजाया- सँवारा जाना चाहिए। उसके लिए उपयुक्त आधार दिया जाना चाहिए।

पात्र में पवित्र जल भरते हैं। श्रद्धा और पवित्रता से भरी- पूरी पात्रता ही धन्य होती है। उसमें मङ्गल द्रव्य डालते हैं। पात्रता को मङ्गलमय गुणों से विभूषित किया जाना चाहिए। कलावा बाँधने का अर्थ है- पात्रता को आदर्शवादिता से अनुबन्धित करना। नारियल- श्रीफल, सुख- सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। उसकी स्थापना का तात्पर्य है कि ऐसी व्यवस्थित पात्रता पर ही सुख- सौभाग्य स्थिर रहते हैं।

क्रिया और भावना- पाँचों उपचार एक- एक करके मन्त्रों के साथ सम्पन्न करें, उनके अनुरूप भावना सभी लोग बनाये रखें।

१- घटस्थापन- मन्त्रोच्चार के साथ कलश को निर्धारित स्थान या चौकी आदि पर स्थापित करें। भावना करें कि अपने- अपने प्रभाव क्षेत्र की पात्रता प्रभु चरणों में स्थापित कर रहे हैं।

ॐ आजिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दवः। पुनरूर्जा निवर्त्तस्व
सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशताद्रयिः। -८.४२

अर्थात्- हे महिमामयी गौ! आप इस कलश (यज्ञ से उत्पन्न पोषण युक्त मण्डल) को सूँघे (वायु के माध्यम से ग्रहण करें), इसके सोमादि पोषक तत्त्व आपके अन्दर प्रविष्ट हों। उस ऊर्जा को पुनः सहस्रों पोषक धाराओं द्वारा हमें प्रदान करें। हमें पयस्वती (दुग्ध, गौओं के पोषक- प्रवाहों) एवं ऐश्वर्य आदि की पुनः- पुनः प्राप्ति हो।

२- जलपूरण- मन्त्रोच्चार के साथ सावधानी से शुद्ध जल कलश में भरें। भावना करें कि समर्पित पात्रता का खालीपन श्रद्धा- संवेदना से, तरलता- सरलता से लबालब भर रहा है।

ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्कम्भसर्जनीस्थो
वरुणस्यऽऋतसदन्यसि वरुणस्यऽऋ सदनमसि
वरुणस्यऽऋतसदनमासीद॥ -४.३६

अर्थात्- हे काष्ठ उपकरण! आप वरुण रूपी सोम की उन्नति करने वाले हों। हे शम्ये! आप वरुण देव की गति को स्थिर करें। (उदुम्बर काष्ठ निर्मित हे आसन्दे!) आप यज्ञ में वरुण (रूपी बँधे हुए सोम) के आसन स्वरूप हैं। आसन्दी पर बिछे हुए हे कृष्णाजिन्! आप वरुण रूपी सोम के यज्ञ- स्थान हैं। वस्त्र में बँधे हुए वरुण (रूपी सोम!) के आसन स्वरूप इस कृष्णाजिन् पर सुखपूर्वक आसन ग्रहण करें।

३- मङ्गलद्रव्यस्थापन- मन्त्र के साथ कलश में दूर्वा- कुश, पूगीफल- सुपारी, पुष्प और पल्लव डालें। भावना करें कि स्थान और व्यक्तित्व में छिपी पात्रता में दूर्वा जैसी जीवनी शक्ति, कुश जैसी प्रखरता, सुपारी जैसी गुणयुक्त स्थिरता, पुष्प जैसा उल्लास तथा पल्लवों जैसी सरलता, सादगी का सञ्चार किया जा रहा है।

ॐ त्वां गन्धर्वा ऽ अखनँस्त्वां इन्द्रस्त्वां बृहस्पतिः।
त्वामोषधे सोमो राजा विद्वान्यक्ष्मादमुच्यत॥ — १२.९८

अर्थात्- हे ओषधे! गन्धर्वों (ओषधि गुणों को पहचानने वाले) ने आपका खनन किया, इन्द्रदेव और बृहस्पतिदेव (परम वैभव सम्पन्न और वेदवेत्ता विद्वान्) ने आपका खनन किया, तब ओषधिपति सोम ने आपकी उपयोगिता को जानकर क्षय रोग को दूर किया।

४- सूत्रवेष्टन- मन्त्र के साथ कलश में कलावा लपेटें। भावना करें कि पात्रता को अवाञ्छनीयता से जुड़ने का अवसर न देकर उसे आदर्शवादिता के साथ अनुबन्धित कर रहे हैं, ईश अनुशासन में बाँध रहे हैं।

ॐ सुजातो ज्योतिषा सह शर्म वरूथमासदत्स्वः।
वासो अग्ने विश्वरूप * सं व्ययस्व विभावसो॥ -११.४०

अर्थात्- हे अग्निदेव! आप तेजयुक्त ज्वालाओं से विधिवत् प्रज्वलित होकर, श्रेष्ठ सुखप्रद यज्ञ वेदिका को सुशोभित करें। हे कान्तिमान् अग्ने! आप अपनी विशिष्ट आभा से वस्त्रों की भाँति जगत् को भली प्रकार धारण करें अर्थात् पृथिवी का आवरण बनकर उसकी सुरक्षा करें।

५- नारिकेल संस्थापन- मन्त्र के साथ कलश के ऊपर नारियल रखें। भावना करें कि इष्ट के चरणों में समर्पित पात्रता सुख- सौभाग्य की आधार बन रही है। यह दिव्य कलश जहाँ स्थापित हुआ है, वहाँ की जड़- चेतना सारी पात्रता इन्हीं संस्कारों से भर रही है।

ॐ याः फलिनीर्या ऽ अफलाऽ अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः।
बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व * हसः। -१२.८९

अर्थात्- फलों से युक्त, फलों से रहित, पुष्पयुक्त तथा पुष्परहित ऐसी ये सभी ओषधियाँ विशेषज्ञ, वैद्य द्वारा प्रयुक्त होती हुईं हमें रोगों से मुक्ति दिलाएँ। तत्पश्चात् ॐ मनोजूतिर्जुषताम् …( मन्त्र से पेज ४० (दोनों हाथ लगाकर) प्रतिष्ठा करें। बाद में तत्त्वायामि।।।( मन्त्र पेज ३९ से) मन्त्र का प्रयोग करते हुए पञ्चोपचार पूजन करें और कलशस्य मुखे विष्णुः( मन्त्र पेज ४१ से) इत्यादि मन्त्रों से प्रार्थना करें।

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Rituals of Chautha & Tehravin – रसम पगड़ी – Rasam Pagri Ad Sampes of Newspaper

 

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

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नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

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नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

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नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

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नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

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निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

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नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

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नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

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नमूना #2

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Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army
















 

 

रस्म पगड़ी – रस्म पगड़ी उत्तर भारत और पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों की एक सामाजिक रीति है, जिसका पालन हिन्दू, सिख और सभी धार्मिक समुदाय करते हैं। इस रिवाज में किसी परिवार के सब से अधिक उम्र वाले पुरुष की मृत्यु होने पर अगले सब से अधिक आयु वाले जीवित पुरुष के सर पर रस्मी तरीके से पगड़ी (जिसे दस्तार भी कहते हैं) बाँधी जाती है। क्योंकि पगड़ी इस क्षेत्र के समाज में इज़्जत का प्रतीक है, इसलिए इस रस्म से दर्शाया जाता है। परिवार के मान- सम्मान और कल्याण की जिम्मेदारी अब इस पुरुष के कन्धों पर है। साथ ही जो लोग पगड़ी पहनाते हैं, वे आश्वासन देते हैं कि भले ही घर के सबसे मह्त्वपूर्ण व्यक्ति का सहारा घर से छूट गया हो, अब इस घर के दुःख में, आवश्यकता में हम लोग साथ खड़े होंगे। इससे घर के जिम्मेदार व्यक्ति को खोने का शोक कम होता है। रस्म पगड़ी का संस्कार या तो अन्तिम संस्कार के तीसरे, चौथे दिन या फिर तेहरवीं को आयोजित किया जाता है। वैसे समयाभाव के कारण रस्म पगड़ी से पूर्व घर में तर्पण यज्ञादि का क्रम भी पूरा कर लेना चाहिए। पुरातन शास्त्रों में भी तीसरे- चौथे दिन आशौच शुद्धि हो जाती है। आने- जाने वाले परिजनों- परिवारीजनों को भी इस सामाजिक बन्धन से मुक्ति मिल जाती है। समय और परिस्थिति के अनुसार भी यही अनुकूल रहता है।
(यज्ञ- कर्मकाण्ड प्रकरण में दिये गये मन्त्रों का उपयोग करेंं)

मङ्गलाचरण, षट्कर्म, पृथ्वीपूजन, तिलक, कलावा, कलश व दीपपूजन, गुरु- गायत्री का आवाहन एवं स्वस्तिवाचन करें-
यम आवाहन-
ॐ सुगन्नुपन्थां प्रदिशन्नऽएहि ज्योतिष्मध्येह्यजरन्नऽआयुः।
अपैतु मृत्युममृतं मऽआगाद् वैवस्वतो नोऽ अभयं कृणोतु।
ॐ यमाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

पितृ आवाहन- (दिवङ्गत आत्मा का चित्र)
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
पिता महेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः अक्षन्न पितरो मीमदन्तपितरो
तीतृपन्त पितरः पितरः सुन्धध्वम्।
ॐ पितृभ्यो नमः॥

सर्वदेव नमस्कारः, पञ्चोपचार / षोडशोपचारपूजनम्, स्वस्तिवाचनम् के बाद सामूहिक गायत्री मन्त्र का पाठ (१२ या २४ बार) करें।

प्रार्थना
मङ्गल मन्दिर खोलो
मङ्गल मन्दिर खोलो दयामय।
जीवन बीता बड़े वेग से,
द्वार खड़ा शिशु भोलो।
मिटा अँधेरा ज्योति प्रकाशित,
शिशु को गोद में ले लो।
नाम तुम्हारा रटा निरन्तर, बालक से प्रिय बोलो।
दिव्य आश से बालक आया, प्रेम अमिय रस घोलो ।।

परिजनों द्वारा कुल परम्परा के अनुसार तिलक, पगड़ी इत्यादि करें- तत्पश्चात् शान्तिपाठ कर पुष्पांजलि करते हुए सभी लोग परिवारजनों को आश्वस्त करते हुए बाहर होते हैं।


निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

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रस्म पगड़ी – शोक सन्देश

अत्यन्त दुःख के साथ सुचित करना पड़ है कि हमारे पूजनीय पिताजी श्रीनारायण लाल बापलावत (मेंबर) पुत्रस्व. श्री रोडूराम जी का स्वर्गवास दिनांक 20.10.2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक 22.10.2017 रविवार को 1:00 से 3:00 तक सीताराम जी के मंदिर के पास ग्राम गोल्यावास मानसरोवर, जयपुर पर रखी गयी है। शोकाकुल:- रामेश्वरलाल, सूरजमल, लालाराम, भगवान सहाय, गोपाल, बाबू, राजेश, खेमचंद, कमलेश, नरेश (पुत्र), ग्यारसीलाल, प्रकाश, बनवारी, ताराचंद, सुरेश, रोशन, दीपक, सुनील, मनीष, लोकेश, अनुराग, अंशु, आशु (पौत्र), निखिल, प्रियांशु, प्रतीक (प्रपोत्र) एवं समस्त बापलावत परिवार। 9782363819, श्रीराम नर्सरी पत्रकार रोड गोल्यावास।

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूज्यनीय माताजी श्रीमतीशकुन्तला देवी (धर्मप|ीस्व. श्री मोतीलाल जी टोडवाल) का स्वर्गवास शुक्रवार 20 अक्टूबर 2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार 22 अक्टूबर 2017 को सांयकाल 4 से 5 बजे तक बालाजी मेरिज गार्डन सिरसी रोड, भांकरोटा पर होगी। शोकाकुल:- भंवरलाल, राधेश्याम, मोहन, सत्यनारायण, रामबाबू, नरेन्द्र, घनश्याम, नरेन्द्र, रामशरण (देवा), रामस्वरूप, अनिल, विनोद, सन्दीप (पुत्र), गोविन्द, पुरूषोतम (भतीजे) एवं समस्त टोडवाल परिवार। मोबाइल 8890038404, पीहरपक्ष- सूर्यप्रकाश, दीपक कुमार भीलवाड़ा।

मेरी सुपुत्री इन्द्रादेवी प|ीश्री सीताराम जी टोडावाल (चावन्डिया वाले) का आकस्मिक निधन दिनांक 18.10.2017 को हो गया है जिसकी पीहर पक्ष की तीये की बैठक दिनांक 22.10.2017 को आदर्श विद्या मंदिर, मंगेज सिंह पेट्रोल पम्प के पीछे, झोटवाडा़ में सांयकाल 3 से 3.30 बजे तक होगी शोकाकुल- लादूलाल- राजल देवी (माता- पिता), गुलाब देवी (ताईजी) रामनारायण- ममता, गिरिराज- अर्चना, पुरूषोत्तम- अंजना (भाई- भाभी) अनिता- हरिमोहन, शारदा- सत्यनारायण, सन्तोष- ओमप्रकाश, शान्ति- विजय, सुमन- नन्दकिशोर, ममता- विष्णु (बहन -बहनोई) अनामिका, पायल, आर्यन, हनी, तनिष्क (भतिजा- भतीजी) एंव पाटीडिया परिवार (भासू वाले)- 9929383685

हमारे पूजनीय श्रीमोहनदास सबधानी पुत्रस्वर्गीय श्री राधाकिशन सबधानी का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 17 को हो गया। तीये की बैठक 22. 10. 17 को सायं 4.30 बजे झूलेलाल मंदिर सेक्टर 5 हाउसिंग बोर्ड, शास्त्री नगर होगी। शोकाकुल- चन्दा देवी (प|ी), दिलीप-लता, वासदेव- पूनम (पुत्र- पुत्रवधू), ईश्वरलाल- जया, लक्ष्मणदास- मीना (भाई- भाभी), किशोर- रिया, कमलेश- रिद्वी (भतीजा- बहू), जितेश, कपिल (भतीजे), मनोहर- भारती (दामाद- पुत्री), मनीष- रितु (दामाद- भतीजी), भाविका- रवि (पौत्री- दामाद), मनीष, नमन (पौत्र), रेनु, काजल, दिव्यांशी (पौत्री), पदम, लविश, भव्य (दोहिता), खुशबू (दोहिता) एवं समस्त सबधानी परिवार, 9351787644, 9351787645

हमारे बहनोई श्रीलक्ष्मीनारायण जी घीवालों का आकस्मिक निधन 20-10-2017 को हो गया है, ससुराल पक्ष की बैठक दिनांक 22-10-2017 को 1:00 से 1:45 तक झूलेलाल मन्दिर, कंवर नगर पर होगी तत्पश्चात‌ अग्रसेन बगीची जायेगी, शोकाकुल- ताराचन्द, मोहिनी देवी, डॉ0 सीताराम-पुष्पा, राधेश्याम-शांती, सत्यनारायण-संतोष (साले-सालाएली) , शांती डेरेवाला, कान्ता-सतपाल जी (साली-साढू), कृष्ण गोपाल, गोपालकृष्ण, रामअवतार, उमेश, दीपक, देवेन्द्र, सौरभ (चूडीवाला) (भतीजे) एवं समस्त सीपरिया परिवार मोबाईल-9829286797

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरी प|ी श्रीमतीभंवरी देवी कास्वर्गवास 20. 10. 2017 को हो गया। तीये की बैठक 22. 10. 2017 रविवार को 2.00 से 4.00 तक मेरे निवास कालवाड़ (तालामोड़) अचरोल पर होगी। शोकाकुल- रेबड़ मणकस (पति), सेडूराम, भैरूराम, हनुमान सहाय पूर्व सरपंच काट, (जेठ) गज्जूराम, फूलाराम (देवर), मदनलाल, कानाराम, बाबूलाल, शंकरलाल, हरिनारायण (प्रदेश महामंत्री श्री देवनारायण जन- कल्याण संस्थान), रामनारायण, गोपाल, जगदीश, अशोक, कन्हैयालाल, धोलूराम, पायलेट, धारासिंह, अमरसिंह (पुत्र) कैलाश, सीताराम, हेमराज, दीपक, मनीष. इन्द्रराज, आर्मी, संदीप (पौत्र) एवं समस्त मणकस परिवार 7737456807, पिहर- बाबूलालजी चांड, शास्त्री नगर, जयपुर।

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरी धर्मप|ी श्रीमतीगीता कश्यप प|ीश्री एल.के. कश्यप का आकस्मिक स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया जिसकी तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 2017 को सांय 4 से 5 बजे निवास स्थान देव अपार्टमेंट, गौतम मार्ग, जे.एन. मिश्रा अस्पताल के सामने, हनुमान नगर, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- बालकिशन- निर्मल (भ्राता- भ्रातावधु), अमित- गगनदीप (पुत्र- पुत्रवधू), बच्चुसिंह- डिम्पल सिंह, कारेश- सोनिया, विनित- सिम्पल (पुत्री- दामाद), रजनी (पुत्री) एवं समस्त परिवारजन मित्रगण, 9414041594, 9001057100

हमारी पूजनीया श्रीमतीविमला देवी (धर्मप|ीगिरधारी लाल भादरिया( (जांगिड़)तह. अध्यक्ष चौमू मोरीजा का देहावसान 20. 10. 2017 को हो गया। सो तीये की बैठक 22. 10. 2017 को सायं 4 से 5 बजे तक खातियों की पक्की ढाणी, मोरीजा में होगी। शोकाकुल- प्रभूदयाल जी (जेठ), सीताराम, महेश, मुकेश, मिन्टटू जोगिन्द्र पुत्र एवं गोपाललाल, साधुराम, ताराचन्द, तेजपाल, शंकर, लक्ष्मीनारायण, ओमप्रकाश, मूलचन्द, बजरंग, शिवनारायण, सुरेन्द्र, मुरारी एवं समस्त भांदरिया (जांगिड़) परिवार. पक्की ढाणी, मोरीजा 9352946043, 9829624993

हमारी छोटी बहन श्रीमतीरेणु सक्सेना धर्मप|ीस्व. जितेन्द्र कुमार सक्सेना का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार दिनांक 22. 10. 2017 को शाम 4 बजे से 5 बजे तक 101, भृगु नगर, अजमेर रोड, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- प्रांशु (पुत्र), सुरेन्द्र सक्सेना (भ्राता), योगेश सक्सेना (भ्राता), कमलेश सक्सेना (बहन), नीरू सक्सेना (जीजी), रिषिकान्त सक्सेना (जीजाजी), सोनू, बिटिया (भान्जा- भान्जी)

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीय माताजी श्रीमतीनर्बदा देवी प|ीस्व. ठा. जगदीश सिंह शेखावत का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार 22. 10. 2017 को सांय 4.30 से 5.30 बजे तक के.के. पैराडाइज, बाल्टी फैक्ट्री के पास, आगरा रोड, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- ठा. लक्षमण सिंह, कैलाश सिंह, रमेश सिंह, विजय सिंह (पुत्र), जितेन्द्र सिंह, सुल्तान सिंह, अमर सिंह, अजय सिंह, शुभम सिंह, तुषार सिंह (पौत्र) एवं समस्त शेखावत परिवार। 9950557219, 8561045304

मेरे पूजनीय पिताजी श्रीसुमेर सिंह तंवर पुत्रस्व. श्री गोपाल सिंह का स्वर्गवास दिनांक 19.10.17 को हो गया है। तीये की बैठक 22.10.17 रविवार को निवास स्थान 141, श्याम नगर विस्तार नाड़ी का फाटक जयपुर पर सायं 4.30-5.30 बजे तक होगी। शोकाकुल- जोन्टी सिंह (पुत्र), ठा. श्रवण सिंह, देवी सिंह, बाबूसिंह, केसर सिंह, सुरज्ञान सिंह (भाई) एवं समस्त तंवर परिवार, ठिकाना नीम का थाना वाले, 9024363499, 9079051173

हमारे पूजनीय पिताजी श्रीलक्ष्मीनारायण जी अग्रवाल (घीवाले) पुत्र स्वर्गीय श्री नाथूलाल जी अग्रवाल का स्वर्गवास दिनांक 20-10-2017 को हो गया है, तीये की बैठक दिनांक 22-10-2017 रविवार को 1 बजे से 2 बजे तक अग्रसेन बगीची, चांदी की टकसाल, जयपुर पर होगी शोकाकुल श्रीमती पुष्पा देवी (धर्मप|ी), सीता देवी (भाभी), हनुमानप्रसाद, महेन्द्र (भतीजे), धर्मेन्द्र, याेगेन्द्र, मनीष (पुत्र), शान्ति देवी-स्व0 लल्लूनारायणजी (मोरीजा वाले), सुशीला देवी-सीताराम जी (खटाई वाले) (बहन-बहनोई), बबीता- महावीर जी पोद‌दार, रूचिता-विश्वजीत जी (बरखडी वाले) (पुत्री-दामाद), समस्त घी वाला परिवार 9829006685

हमारे पूजनीय जीजाजी श्रीलक्ष्मीनारायण जी (मुन्नाजी) सुपुत्र स्व0 श्री नाथुलाल जी घी वाले का स्वर्गवास दिनांक 20-10-2017 को हो गया है, जिनकी ससुराल पक्ष की तीये की बैठक दिनांक 22-10-2017 को दोपहर 1:00 बजे से 1:45 तक झूलेलाल मंदिर, कंवर नगर जयपुर पर होगी। तत्पश्चात‌ मुख्य बैठक अग्रसेन बगीची मे शामिल होगी शोकाकुल- श्रीमती कौशल्या देवी (सास), निरंजन (बबलू), संजय (साले), मंजू-विशम्भर दयाल, निर्मला-चन्द्रमोहन, सुनीता-मुकेश जी, मनीषा (पिंकी)-मुकेश (साली-साढू),एवम समस्त संघी परिवार मनोहरपुर वाले मोबाईल- 9782940723

हमारे पूजनीय पिताजी श्रीशशिकांत जी बंसल कास्वर्गवास हो गया तीये की बैठक 22-10-2017 को 04:00 से 05:00 अग्रवाल भवन चर्च के पास शिप्रा पथ मानसरोवर जयपुर पर होगी। शोकाकुल:- गीता देवी (धर्मप|ी) रजनीकान्त, मुन्नी देवी (भाई- भाभी), राकेश (सुपुत्र), निलम- विष्णु जी, मधु- मनीष जी, कुसुम- गोविन्द जी (पुत्री- दामाद) 9509676354

श्रीमतीरणजीत मरवाह प|ीस्व. श्री बलबीरसिंह मरवाह का स्वर्गवास दि. 20.10.2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार दि. 22.10.2017 को सांय 4 से 5 बजे तक सामुदायिक भवन सेक्टर-5, SBI के पास गिरधर मार्ग, मालवीय नगर में होगी। शोकाकुल:- महेन्द्र सिंह, नरेन्द्र सिंह, अजीत सिंह मरवाह (पुत्र), आशा मरवाह (क्यूट पार्लर- पुत्रवधु), हरषित सिंह- निकिता, कर्ण सिंह (पौत्र) मीना- रमेश किनरा, दीप्ती- हेमन्त नारंग (पुत्रीयाँ- जवाई) एवं समस्त मरवाह परिवार। 9828125002

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीया माताजी श्रीमतीगीता देवी प|ीश्री बालचंदजी सवेदा ग्राम रूल्याना पट्टी (सीकर) का देवलोकगमन दिनांक 21. 10. 17 शनिवार को हो गया। शोकाकुल- महावीर प्रसाद, बनवारी, बिहारी (पुत्र), मदनलाल, गजानन्द (देवर), कैलाश (देवर पुत्र), पंकज, विवेक, सौरव, तरुण (पौत्र), किंशुक, हिरेन (पड़पौत्र) एवं समस्त सेवदा परिवार, 9829053808, 9414073608

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरे प्रिय पुत्र विकाससाहू पुत्ररामवतार साहू का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है जिसकी तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 2017 रविवार को सांय 3 से 4 बजे निवास स्थान- एफ-8-ए, किरण विहार पर होगी। शोकाकुल- मोतीलाल साहू (दादाजी), कमलेश साहू, किशन गोपाल (ताऊजी), मुकेश, उमाशंकर (चाचा), सत्यनारायण, राजेश, रवि, करण, हनी, कृष (भाई), वैभव, हर्षित (भतीजे) एवं समस्त कोरत्या परिवार। 9001524417, 9351762194

हमारी पूजनीया माताजी श्रीमतीलक्ष्मी देवी सोनी धर्मप|ीस्वर्गीय श्री भागीरथमल जी सोनी का देहावसान दिनांक 19/10/2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक दिना॑क 22/10/2017, रविवार को सायं 4 से 5 बजे तक रामेश्वरम महादेव मंदिर पार्क, जागृति विवाहस्थल के पीछे, श्रीरामनगर विस्तार, झोटवाड़ा जयपुर पर होगी। शोकाकुल: सत्यनारायण (देवर) मुरारीलाल- चन्दा देवी, महावीरप्रसाद- कोशल्या देवी (पुत्र- पुत्रवधु), चतरभुज, मोहनमुरारी, (भतीजे), सुनील कुमार- सुलोचना, अशोक- अरुणा (पौत्र- पौत्रवधु), मनोज, नवर|, सुरेन्द्र (पौत्र) मनीष, कार्तिक, कृष्णा(प्रपौत्र) भवानी (प्रपौत्री) एव॑ समस्त कुकरा परिवार, रामगढ़ शेखावाटी वाले।।मो. 9314836255,9829136255

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूजनीय पिताजी श्रीकिशनलाल सैनी कास्वर्गवास दिनांक 20. 10. 17 को हो गया है। तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 17 को 4.30 से 5.30 बजे हमारे निवास स्थान हसनपुरा-ए पर होगी। शोकाकुल- राजेन्द्र सैनी, बजरंग सैनी, रिंकू सैनी (भाई), करण (भतीजा)।

अत्यन्त दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरे प्रिय पुत्र विकाससक्सेना कास्वर्गवास 20-10-2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक 22-10-2017 रविवार को सांय 04:00 से 05:00 बजे तक हमारे निवास स्थान 92/171, पटेल मार्ग, मानसरोवर, जयपुर पर होगी। शोकाकुल:- कमलेन्द्र सक्सेना- ज्योति (माता- पिता), ममता (प|ी), अक्षित (पुत्र), नरेन्द्र, सुरेश, योगेन्द्र, सतीश (ताऊ), चंद्र प्रकाश (चाचा) एवं समस्त परिवार। 9587958420

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी आदरणीय बहन श्रीमतीसुशीला देवी प|ीश्री गजानन्द जी दुसाद का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक 22. 10. 2017 को सांय 4 से 4.45 तक आदर्श विद्या मंदिर, अम्बाबाड़ी, जयपुर रखी गई है। शोकाकुल- रामोतार (चाचा), कैलाश, शंकरलाल (भाई), विष्णु, विशाल (भतीजा) एवं समस्त कुलवार (बोहरा) परिवार नायला वाले, 8854833419

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि श्रीमतीसुशीला देवी धर्मप|ीगजानन्द दुसाद का स्वर्गवास 20. 10. 2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक 22. 10. 2017 को सांय 4 से 5 बजे तक स्थान आदर्श विद्या मंदिर स्कूल अम्बाबाड़ी, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- रामानन्द, चौथमल, राधाकिशन, रामकिशोर, श्रीनारायण (जेठ), बाबूलाल, मोहनलाल (देवर), गंगाशरण, गौरीशंकर, देवशरण, नीरज, विनय, संजय, शिवम (पुत्र), रेखा- सुनिल, नीतु- प्रवीण (पुत्री- दामाद), महित, भाविन (दोहिते) एवं समस्त दुसाद परिवार (खोरा श्यामदास वाले), 9929712300, 9529379863

हमारी पूजनीय माताजी श्रीमतीगीता देवी प|ीस्व. श्री प्रकाशचन्द नानकानी (सिंधी- पंजाबी) दिनांक 20.10.2017 को स्वर्गवास हो गया है। जिनकी तीये की बैठक दिनांक 22.10.17 रविवार को निवास स्थान 3/625, मालवीया नगर के पास पार्क में सांय 5 बजे रखी गई है। शोकाकुल- धर्मेन्द्र (पुत्र), धर्मेन्द्र- जयकिशन (भतीजे), वर्षा- जय, खुशबु- दीपक, हेमा- हेमन्त, हर्षा- देवा (पुत्री- दामाद), समस्त नानकानी परिवार, 9636989139, 7737708168

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पिताजी डॉ.सुरेश कुमार सक्सैना कानिधन दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 2017 को सांय 4.30 से 5.30 श्री गोपाल नगर, पालीवाल गार्डन, जेडीए पार्क (डॉ. यू.एस. अग्रवास के पास) पर रखी गई है। शोकाकुल- उषा (प|ी), राहुल- निशि, पुनीत- जयिता (पुत्र- पुत्रवधु), अतिष- मंजू (भाई- भाभी), नवीन- लक्ष्मी, अभिषेक- श्वेता, ओजस (भतीजे), सृष्टि, भव्य, वरिष्ठा, पूर्वीषा, लवांश (पौत्र- पौत्री), ननिहाल पक्ष- राजेन्द्र- शगुन, राकेश- स्वर्ण, मुकेश- साधना, दिनेश- राधिका, वंदना, संजय- आराधना (भाई- भाभी), निवास: 84, सुल्तान नगर, गुर्जर की थड़ी, जयपुर। 9829056625, 9314274769, 0141-2290632

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरी धर्मप|ि श्रीमतीइन्द्रा देवी गुप्ता कास्वगर्वास दिनांक 18/10/2017 को हो गया है जिनकी तीये की बैठक दिनांक 22/10/2017 को आदर्श िवद्या मंदिर, बोरिंग चौराहा, पेट्रोल पम्प के पीछे, झोटवाडा पर सांयकाल 3 से 4 बजे तक होगी शोकाकुल- सीताराम गुप्ता (पति) (पूर्व सरपंच चावन्डिया तहसील- मालपुरा, जिला टोंक) रामेश्वर प्रसाद (ससुर) जगदीश प्रसाद (जेठ) राजेश (देवर) नेहा- विकास जी (पुत्री- दामाद) नन्द किशोर, विकास, आशिष, विनोद, जानू (पुत्र) समर्थ (पौत्र) (टोेडारायसिंह वाले) Mobile- 7665333344, 9928482450

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूज्य पिताजी श्रीदिनेश सैन सुपुत्रस्व. श्री कैलाश सैन का निधन 17. 10. 2017 मंगलवार को हो गया। जिनकी बैठक 22. 10. 2017 रविवार को सांय 4 से 5 बजे तक ई-5/3, 36 क्वार्टस राजस्थान यूनिवर्सिटी कैम्पस, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- भगवती देवी (धर्मप|ी), संदीप, रवि, पूजा, सोनाली (पुत्र- पुत्री), राधेश्याम, सुरेश, अशोक (चाचा), सत्यनारायण, विनोद, नरेश, मनीष (भ्राता) एवं समस्त बादशाह परिवार (मण्डावर वाले) 9929236781, 9024640787

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीय माताजी श्रीमतीसोनी देवी धर्मप|ीस्व.श्री दामोदर बाछल का स्वर्गवास दिनांक 20.10.2017 को हो गया है, जिनकी तीये की बैठक दिनांक 22.10.2017 को सांय 4 से 5 बजे हमारे निवास स्थान -110 दीपनगर, दादी का फाटक, झोटवाड़ा, जयपुर पर होगी,शोकाकुल- गिरधारीलाल (देवर), पूरण (भतीजा) अशोक, रमेश (पुत्र) एवं समस्त बाछल (बन्धेवाले)परिवारमो.9929556774, 7877779988

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरी धर्मप|ी श्रीमतीचन्द्रकान्ता पाटोदिया कास्वर्गवास दिनांक 21 अक्टूबर को हो गया है। शवयात्रा दिनांक 22 अक्टूबर को सुबह 9 बजे मेरे निवास स्थान 4, पुष्पा पथ उनियारा गार्डन से आदर्श नगर मोक्षधाम जायेगी शोकाकुल : दामोदर दास पाटोदिया (पति) मदनलाल (भतीजा) उमेश, विकास (पौत्र) एवं समस्त पाटोदिया परिवार, शिवाड वाले

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूज्यनीय पिताजी श्रीश्रीराम गुप्ता कानिधन:17.10.2017 को हो गया है। जिनकी शोक सभा 22.10.2017 को सांय 4 से 5 बजे पिंकसिटी मैरिज गार्डन, आगरा रोड, जयपुर पर रखी है। शाेकाकुल- धापा देवी(धर्मप|ि), लक्ष्मीनारायण, शिम्भूदयाल, खेमराज, मुकेश अग्रवाल (पुत्र),पंकज, संजय, केके(CA), प्रदीप, गौरव, मयंक(पौत्र), वंश(प्रपौत्र) फर्म:- राज स्टील्स, रामा सैनेट्री, राज इलैक्ट्रीकल्स, रामाबुक डिपो। मो.9314407010, 9414200137

अत्यन्त दु:ख के साथ सुचित किया जाता है कि हमारे पूजनीय ठा.सा.श्री विक्रम सिंह जी शेखावत सुपुत्रस्व. श्री मदन सिंह जी शेखावत का स्वर्गवास दिनांक 19.10.2017 को हो गया है। हरि कीर्तन दिनांक 29.10. 2017 द्वादशा, पाग दस्तूर दिनांक 30.10.2017 का है। शोकाकुल- ठा.सा. पन्ने सिंह, भीम सिंह, शंकर सिंह, हनुमत सिंह, नरपत सिंह, शिवराज सिंह, श्योपाल सिंह, किशन सिंह (भ्राता), दीपेन्द्र सिंह (पुत्र), अतुल सिंह, जितेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, अचल सिंह, नरेन्द्र सिंह (भतीजे), निकूम्भ सिंह (पौत्र) एवं समस्त शेखावत परिवार हवेेली बुर्जहाला कोटड़ी मानपुरा माचैडी, जिला जयपुर (राज.) 09828561947

हमारे पूजनीय श्रीभरतलाल दुग्गल कास्वर्गवास 10.10.2017 को हो गया। तेरहवां 22.10.2017 (रविवार) को अखण्ड पाठ भोग प्रसाद, शीशी पूजन तथा पगड़ी रस्म सांय 3 बजे होगी। शोकाकुल : श्रीमती लीलाराणी (प|ी), प्रकाश दुग्गल- गुलशन, गुलशन दुग्गल- किरण, राजेश दुग्गल- उषा, कैलाश दुग्गल- अंजना, वनिता (भ्राता- भ्राताप|ी), नीलमराणी, नरगीस- कुलदीप, किरण (बहन- बहनोई), नरेश- हेमा, कमलेश- सोनिया, सुरेश (पुत्र- पुत्रवधु), वर्षा- नरेश, सीमा- नरेश (पुत्री- दामाद), साहिल, अक्षय, मोहित, महिमा, प्रशंसा (पौत्र- पौत्री) समस्त दुग्गल परिवार कांवट। 8107316611, 8441939700.

हमारे पूजनीय दादाजी श्री नरेन्द्र देव शुक्ला (सेवानिवृत्त उपजिलाधीश, जयपुर) का आकस्मिक निधन दिनांक 21.10.2017 को हो गया है। शवयात्रा सुबह 11:15 बजे हमारे निवास स्थान से चांदपोल मोक्षद्वार जाएगी। शोकाकुल : सरोजनी देवी (प|ी), अशोक, अरुण, विनोद कुमार शुक्ला (पुत्र), ओमप्रकाश, राजकुमार (भतीजे), नीरज, नवनीत, आनन्द, मनु, आशीष, शुभम, शिवम (पौत्र), जितेन्द्र तिवारी-मंजू (दामाद-पुत्री), कपिल दीक्षित-रुचि, राजेश तिवारी-कंचन (पौत्री दामाद-पौत्री) एवं समस्त शुक्ला परिवार। मो. : 9829394664.

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Anil Gupta
Very sad to hear the news of demise of your loving dad. May God rest his soul in peace and provide you and family the strength to bear this irreparable loss. Heartfelt Condolences.
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Mona Bedi
Our heartfelt condolences to all of you ! May his soul rests in peace🙏🏻🙏🏻
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DrRituVishal Gupta
Heartfelt Condolences 🙏🏼 May God grant peace to the departed soul and strength to the family to bear this irreparable loss..
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Deepika Ghai Goel
Irreparable loss…may his soul rest in peace🙏
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Amit Gupta
God gave peace to departed soul and strength to all family members to bear this great lose
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Upasana Handa
Condolences to u and ur family
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Baal Mukundashtakam in Gujarati

Baal-Mukundashtakam-Gujarati-બાલમુકુંદાષ્ટકમ

કરારવિંદેન પદારવિંદં મુખારવિંદે વિનિવેશયંતમ |
વટસ્ય પત્રસ્ય પુટે શયાનં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 1 ||
સંહૃત્ય લોકાન્વટપત્રમધ્યે શયાનમાદ્યંતવિહીનરૂપમ |
સર્વેશ્વરં સર્વહિતાવતારં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 2 ||
ઇંદીવરશ્યામલકોમલાંગમ ઇંદ્રાદિદેવાર્ચિતપાદપદ્મમ |
સંતાનકલ્પદ્રુમમાશ્રિતાનાં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 3 ||
લંબાલકં લંબિતહારયષ્ટિં શૃંગારલીલાંકિતદંતપંક્તિમ |
બિંબાધરં ચારુવિશાલનેત્રં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 4 ||
શિક્યે નિધાયાદ્યપયોદધીનિ બહિર્ગતાયાં વ્રજનાયિકાયામ |
ભુક્ત્વા યથેષ્ટં કપટેન સુપ્તં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 5 ||
કલિંદજાંતસ્થિતકાલિયસ્ય ફણાગ્રરંગેનટનપ્રિયંતમ |
તત્પુચ્છહસ્તં શરદિંદુવક્ત્રં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 6 ||
ઉલૂખલે બદ્ધમુદારશૌર્યમ ઉત્તુંગયુગ્માર્જુન ભંગલીલમ |
ઉત્ફુલ્લપદ્માયત ચારુનેત્રં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 7 ||
આલોક્ય માતુર્મુખમાદરેણ સ્તન્યં પિબંતં સરસીરુહાક્ષમ |
સચ્ચિન્મયં દેવમનંતરૂપં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 8 ||

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 7, 2021 at 6:28 am

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Ram Bhajan Stuti Gujarati Lyrics

Ram-Bhajan-Stuti

શ્રી રામચંદ્ર કૃપાળુ ભજમન હરણ ભવભય દારૂણમ,
નવ કંજ લોચન કંજ મુખ કર, કંજ પદ કંજારૂણમ

કંદર્પ અગણિત અમિત છબી નવ નીલ નીરજ સુંદરમ,
પટ પીત માનહુ તડીત રૂચિસુચિ નવમી જનકસુતાવરમ

ભજ દીન બંધુ દિનેશ દાનવ દૈત્ય વંશ નિકંદનમ,
રઘુનંદ આનંદ કંદ કૌશલ ચંદ્ર દશરથ નંદનમ

શિર મુકુટ કુંડલ તિલક ચારુ ઉદાર અંગ વિભૂષણમ,
આજાન્ ભૂજ શર ચાપ ધર સંગ્રામ જીત ખર દુષણમ

ઈતિ વદતિ તુલસીદાસ શંકર શેષ મુનિજન રંજનમ,
મમ હૃદયકુંજ નિવાસ કુરુ કામાદી ખલ દલ ગંજનમ

 

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નિર્વાણષટ્કમ – Nirvana Shatkam in Gujarati with meaning

Sivohm-Shivohm-Anil Voice-4 -આત્માષ્ટકમ-Aatmshtakam-Stotra-With Gujarati Traslation

 

મનોબુદ્ધયહંકાર ચિત્તાની નાહં,
ન ચ શ્રોત્રજિહ્‌વે ન ચ ઘ્રાણ નેત્રે
ન ચ વ્યોમભૂમિ ન તેજો ન વાયુ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –1
(હું) મન -બુદ્ધિ–અહંકાર–અને ચિત્ત નથી.કર્ણ કે જિભ નથી અને નાક કે કાન નથી,
આકાશ -પૃથ્વી -અગ્નિ –વાયુ (કે જળ )નથી(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું )

ન ચ પ્રાણસંજ્ઞો ન વૈ પંચવાયુ
ર્ન વા સપ્તધાતુર્ન વા પંચકોષાઃ
ન વાક્‌પાણિપાદં ન ચોપસ્થપાયૂ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –2
(હું) પ્રાણ(નામે જે ઓળખાય છે તે) નથી કે પાંચ વાયુ નથી,સાત ધાતુ કે પાંચ કોશ નથી
હાથ ,પગ ,ઉપસ્થ અને પાયુ નથી (કર્મેન્દ્રિયો)(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું )

ન મે દ્વેષરાગૌ ન મે લોભમોહૌ,
મદો નૈવ મે નૈવ માત્સર્યભાવઃ
ન ધર્મો ન ચાર્થો ન કામો ન મોક્ષઃ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –3
(મારે રાગ દ્વેષ નથી, મારે લોભ મોહ નથી,મારા માં મદ નથી અને માત્સર્યભાવ પણ નથી,
મારે માટે ધર્મ ,અર્થ ,કામ અને મોક્ષ્ નથી,(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું )

ન પુણ્યં ન પાપં ન સૌખ્યં ન દુઃખં
ન મંત્રો ન તિર્થં ન વેદા ન યજ્ઞાઃ
અહં ભોજનં નૈવ ભોજયં ન ભોકતા
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –4
(મારે પુણ્ય નથી ,પાપ નથી ,સુખ નથી,દુખ નથી,મંત્ર નથી ,તીર્થ નથી ,વેદ નથી ,યજ્ઞ નથી,
હું ભોજન નથી ,ભોજ્ય નથી અને ભોક્તા પણ નથી,(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું)

ન મે મૃત્યુ શંકા ન મે જાતિભેદઃ
પિતા નૈવ મે નૈવ માતા ન જન્મ
ન બન્ધુર્ન મિત્ર ગુરૂર્ નૈવ શિષ્યઃ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –5
(મને મૃત્યુ નો ભય નથી ,જાતિ ના ભેદ થી હું પર છું,મારે માતા નથી ,મારે પિતા નથી કે જન્મ નથી,
મારે બંધુ નથી,મિત્ર નથી,ગુરુ નથી અને શિષ્ય નથી,(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું )

અહં નિર્વિકલ્પો નિરાકાર રૂપો
વિભુ વ્યાપ્ય સર્વત્ર સર્વેન્દ્રિયાણામ્
સદામે સમત્વં ન મુક્તિ ન બંન્ઘઃ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –6
(હું) વિકલ્પ રહિત છું ,નિરાકાર રૂપ છું,વિભુ છું ,સર્વત્ર સર્વ ઇન્દ્રિયો માં વ્યાપ્ત છું,
મારા માં સદા સમત્વ છે-બંધન કે મુક્તિ ,બંને થી મુક્ત છું,(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું)
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Shivohm-Shivohm-Atmashtakam-In English with Translation

Mano budhyahankara chithaa ninaham,
Na cha srothra jihwe na cha graana nethrer,
Na cha vyoma bhoomir na thejo na vayu,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(Neither am I mind, nor intellect,Nor ego, nor thought,
Nor am I ears or the tongue or the nose or the eyes,
Nor am I earth or sky or air or the light,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Na cha praana sangno na vai pancha vaayuh,
Na vaa saptha dhathur na va pancha kosa,
Na vak pani padam na chopastha payu,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(Neither am I the movement due to life,
Nor am I the five airs, nor am I the seven elements constituting the body (Dhatu),
Nor am I the five sheaths which invest the soul,
Nor am I voice or hands or feet or other organs,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Na me dwesha raghou na me lobha mohou,
Madho naiva me naiva matsarya bhava,
Na dharmo na cha artha na kamo na moksha,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(I am not the state of envy and passion or the emotions of hatred, greed and attachment,
Neither I am intoxication nor I am the emotion of jealousy,
And I am not even the four Purushartha — Dharma, Artha, Kama, and Moksha,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Na punyam na paapam na soukhyam na dukham,
Na manthro na theertham na veda na yagna,
Aham bhojanam naiva bhojyam na bhoktha,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(I am not a good deed(Punya), or a Sinful deed(Paapa), or well-being/comfort(Saukhya), or Grief(Dukha),
Neither I am holy chants (Mantra) or holy Shrine (Teertha) nor I am the Veda or the Sacrifice and Oblation,
I am neither food or the consumer who consumes food,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Na mruthyur na sankha na me jathi bhedha,
Pitha naiva me naiva matha na janma,
Na bhandhur na mithram gurur naiva sishyah,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(I do not have death or doubts or distinction of caste,
I do not have either father or mother or even birth,
And I do not have relations or friends or teacher or students,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Aham nirvi kalpo nirakara roopo,
Vibhuthwascha sarvathra sarvendriyanaam,
Na chaa sangatham naiva mukthir na meyah
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(I am free from changes, and lack all the qualities and form,
I envelope all forms from all sides and am beyond the sense-organs,
I am always in the state of equality — there is no liberation (Mukti) or captivity (Bandha),
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

– Sri Jagadguru Adi Shankaracharya

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Devi Apradh Stotra Gujarati Lyrics

દેવી અપરાધ (દેવ્યાપરાધ) સ્તોત્ર-Devi-Apradh-Stotra-Gujarati

ન મન્ત્રં નો યન્ત્રં તદપિ ચ ન જાને સ્તુતિમહો
ન ચાહ્યાનં ધ્યાનં તદપિ ચ ન જાને સ્તુતિકથાઃ |
ન જાને મુદ્રાસ્તે તદપિ ચ ન જાને વિલપનં
પરં જાને માતસ્ત્વદનુશરણં ક્લેશહરણમ્ ||૧||

વિઘેરજ્ઞાનેન દ્રવિણવિરહેણાલસતયા
વિઘેયાશક્યત્વાતવ ચરણયોર્યા ચ્યુતિરભૂત |
તદેતત્ક્ષન્તવ્યં જનનિ સકલોદ્ધારિણી શિવે
કુપુત્રો જાયેત ક્વચિદપિ કુમાતા ન ભવતિ ||૨||

પૃથિવ્યાં પુત્રાસ્તે જનનિ બહવઃ સન્તિ સરલાઃ
પરં તેષાં મધ્યે વિરલતરલોડહં તવ સુતઃ |
મદીયોડ્યં ત્યાગઃ સમુચિતમિદં નો તવ શિવે
કુપુત્રો જાયેત ક્વચિદપિ કુમાતા ન ભવતિ ||૩||

જગન્માતર્માતસ્તવ ચરણસેવા ન રચિતા
ન વા દતં દેવિ દ્રવિણમપિ ભૂયસ્તવ મયા |
તથાપિ ત્વં સ્નેહં મયિ નિરુપમં યત્પ્રકુરુષે
કુપુત્રો જાયેત ક્વચિદપિ કુમાતા ન ભવતિ ||૪||

પરિત્યક્તાદેવાન્વિવિઘ વિઘસેવા કુલતયા
મયા પણ્ચાશીતેરઘિકમપનીતે તુ વયસિ |
ઈદાનિં ચેન્માતસ્તવ યદિ કૃપા નાપિ ભવિતા
નિરાલમ્બો લમ્બોદરજનનિ કં યામિ શરણમ્ ||૫||

શ્વપાકો જલ્પાકો ભવતિ મધુપાકોપમગિરા
નિરાતણ્કો રંકો વિહરતિ ચિરં કોટિકનકૈઃ |
તવાપર્ણે કર્ણે વિશતિ મનુવર્ણે ફલમિદં
જનઃ કો જાનીતે જનનિ જપનીયં જપવિઘૌ ||૬||

ચિતાભસ્માલેપો ગરલમશનં દિક્પટ્ઘરો
જટાઘારી કણ્ઠે ભુજગપતિહારી પશુપતિઃ |
કપાલી ભૂતેશો ભજતિ જગદીશૈક પદવી
ભવાનિ ત્વત્પાણીગ્રહણપરિપાટી ફલમિદમ્ ||૭||

ન મોક્ષસ્યાકાંક્ષા ભવ વિભવવાચ્છાડપિ ચ ન મે
ન વિજ્ઞાનાપેક્ષા શશિમુખિ સુખેચ્છાડપિ ન પુનઃ|
અતસ્તાવં સંયાચે જનનિ જનનં યાતુ મમ વૈ
મૃડાની રુદ્રાણી શિવ શિવ ભવાનીતિ જપતઃ ||૮||

નારાધિતાડસિ વિઘિના વિવિઘોપચારૈઃ
કિં રુક્ષચિંતનપરૈર્ન કૃતં વચોભિઃ |
શ્યામે ત્વમેવ યદિ કિંચન મય્યનાથે
ધત્સે કૃપામુચિતમમ્બ પરં તવૈવ ||૯||

આપત્સુ મગ્નઃ સ્મરણં ત્વદીયં
કરોમિ દુર્ગે કરુણાર્ણવે શિવે |
નૈતચ્છઠત્વં મમ ભાવયેથા
ક્ષુઘાતૃષાર્તા જનનીં સ્મરન્તિ ||૧૦||

જગદમ્બ વિચિત્રમત્ર કિં પરિપૂર્ણા કરણાડસ્તિચેન્મયિ |
અપરાઘ પરંપરાવૃતં ન હિ માતા સમુપેક્ષતે સુતમ્ ||૧૧||

મત્સમઃ પાતકી નાસ્તિ પાપઘ્નીં ત્વસમા ન હિ |
એવં જ્ઞાત્વા મહાદેવિ યથા યોગ્યં તથા કુરુ ||૧૨||

 

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Govind Damodar Madhaveti Lyrics In Gujarati

Govind Damodar Madhveti-Gujarati-Stotra

બાલ મુકુંદાશ્ટકમ

કરારવિન્દેન પદારવિન્દં મુખારવિન્દે વિનિવેશયન્તમ્ ।
વટસ્ય પત્રસ્ય પુટે શયાનં બાલં મુકુન્દમ્ મનસા સ્મરામિ ॥ ૧ ॥

શ્રી કૃષ્ણ ગોવિંદ હરે મુરારે હે નાથ નારાયણ વાસુદેવ ।
જિહ્વે પિબસ્વામૃતમેતદેવ ગોવિંદ દામોદર માધવેતિ ॥ ૨ ॥

વિક્રેતુકામા કિલ ગોપકન્યા મુરારિપાદાર્પિતચિત્તવૃત્તિ: ।
દધ્યાદિકં મોહવશાદવોચદ્ ગોવિંદ દામોદર માધવેતિ ॥ ૩॥

ગૃહે ગૃહે ગોપવધૂકદમ્બા: સર્વે મિલિત્વા સમવાપ્ય યોગમ્ ।
પુણ્યાનિ નામાનિ પઠન્તિ નિત્યં ગોવિંદ દામોદર માધવેતિ ॥ ૪ ॥

સુખં શયાના નિલયેનિજેऽપિ નામાનિ વિષ્ણો: પ્રવદન્તિ મર્ત્યા: ।
તે નિશ્ચિતં તન્મયતાં વ્રજન્તિ ગોવિંદ દામોદર માધવેતિ ॥ ૫ ॥

જિહ્વે સદૈવ ભજ સુંદરાણિ નામાનિ કૃષ્ણસ્ય મનોહરાણિ ।
સમસ્ત ભક્તાર્તિવિનાશનાનિ ગોવિંદ દામોદર માધવેતિ ॥ ૬ ॥

સુખાવસાને ઈદમેવ સારં દુ:ખાવસાને ઈદમેવ જ્ઞેયમ્ ।
દેહાવસાને ઈદમેવ જાપ્યં ગોવિંદ દામોદર માધવેતિ ॥ ૭ ॥

શ્રીકૃષ્ણરાધાવર ગોકુલેશ ગોપાલ ગોવર્ધનનાથ વિષ્ણો ।

જિહ્વે પિબસ્વામૃતમેતદેવ ગોવિંદ દામોદર માધવેતિ ॥ ૮ ॥

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