Chalisa of All Gods in hindi

List of God Chalisa – Click to open

  1. Shree Surya Chalisa and Surya Dev aarti
  2. Shree Batuk Bhairav Chalisa in Hindi
  3. Shree Bhairav Chalisa or Shri Batuk Bhairav Chalisa in Hindi
  4. Shree Shani Chalisa-2 in Hindi
  5. Shree Shani Chalisa – 1 in Hindi
  6. Shree Shiv Chalisa in Hindi
  7. Shree Vishnu Chalisa in Hindi
  8. Shree Ram Chalisa in Hindi
  9. Shree Krishna Chalisa in Hindi
  10. Shree Gopal Chalisa and Aarti in Hindi
  11. Shree Ganesh Chalisa – Ganesh Chalisa lyrics in Hindi
  12. Shree Brahma Chalisa in Hindi
  13. Shree Gayatri Chalisa in Hindi
  14. Shree Mahalakshmi Chalisa and Ashtakam in Hindi
  15. Shree Lakshmi Chalisa in Hindi
  16. Shree Vindheshwari Chalisa in Hindi
  17. Shree Durga Chalisa in Hindi
  18. Shree Baba Gangaram Chalisa in Hindi
  19. Shree Pitar Chalisa – pitra chalisa in Hindi
  20. Shree Ramdev Chalisa in Hindi
  21. Shree Shyam Khaatu Chalisa in Hindi
  22. Shree Parashuram Chalisa in Hindi
  23. Shree Mahaveer Teerthankar Chalisa in Hindi
  24. Shree Giriraj Chalisa in Hindi
  25. Shree Sai baba Chalisa in Hindi
  26. Shree Balaji Chalisa in Hindi
  27. Shree Pretraj Chalisa in Hindi
  28. Shri Jaharveer Goga Ji Chalisa in Hindi
  29. Shree Gorakh Chalisa in Hindi
  30. Shree Ravidas Chalisa and Aarti in Hindi
  31. Shree Vishwakarma Chalisa in Hindi
  32. Shree Navagrah Chalisa in Hindi
  33. Shree Rani Sati Chalisa in Hindi
  34. Shree Lalita Chalisa in Hindi
  35. Shree Shakambhari Chalisa in Hindi
  36. Shree Sharada Chalisa in Hindi
  37. Shree Narmada Chalisa in Hindi
  38. Shree Ganga Chalisa in Hindi
  39. Shree Bagalaamukhi Chalisa in Hindi
  40. Shree Parvati Chalisa in Hindi
  41. Shree Annapurna Chalisa in Hindi
  42. Shree Santoshi Maa Chalisa
  43. Shree Vaishno Devi Chalisa in Hindi
  44. Shree Tulasi Chalisa in Hindi
  45. Shree Radha Chalisa in Hindi
  46. Shree Shitala Mata Chalisa and Aarti in Hindi
  47. Shree Mahaakaali Chalisa in Hindi
  48. Shree Kali Chalisa in Hindi
  49. Shree Saraswati Chalisa in Hindi
  50. Tamil Hanuman chalisa
  51. Hanuman chalisa in Kannada Text
  52. Hanuman chalisa in telugu text – Hanuman chalisa in telugu lyrics
  53. Hanuman Chalisa in Oriya
  54. Hanuman Chalisa in Malayalam
  55. Hanuman Chalisa in Gujarati
  56. Hanuman Chalisa in Bengali
  57. Sri Hanuman Chalisa in English Text
  58. Hanuman Chalisa in devnagari Hindi Marathi text Lyrics
  59. Sanskrit Hanuman Chalisa 2
  60. Sanskrit Hanuman Chalisa
  61. Saraswati Chalisa in Hindi
  62. Kaila Devi Chalisa in Hindi
  63. Omkar chalisa in hindi
  64. Omkar chalisa in gujarati pdf
  65. Bhagwan Mahavir Swami Chalisa
  66. Shri Shiv Chalisa in Hindi
  67. SHRI VISHNU CHALISA with English Meaning
  68. Shree Pitar Chalisa in Hindi
  69. Gayatri chalisa in Gujarati
  70. Chintpurni Chalisa in Hindi
  71. Shree Jwala Devi Maa Chalisa in Hindi
  72. Shree Chamunda Maa Chalisa in Hindi

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  13. श्री विंध्यवासिनी माता आरती
  14. श्री शाकंभरी देवीची आरती
  15. अंबेची आरती Ambechi Aarti
  16. आरती नर्मदेची
  17. श्री शांतादुर्गेची आरती
  18. श्री मंगेशाची आरती
  19. रामाची कर्पूरआरती
  20. आदीमाता महिषासुरमर्दिनी चण्डिकेची आरती
  21. आरती कशी करावी
  22. नैवेद्य कसा दाखवावा
  23. कोणता नैवेद्य करावा
  24. नैवेद्याचा मंत्र
  25. कर्पूर आरती 
  26. आरतीनंतर म्हणायचे मराठी श्लोक
  27. कर्पुर आरतीचा अर्थ
  28. मंत्रपुष्पांजली अर्थ

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - February 27, 2019 at 1:25 pm

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Navratri folk story : नवरात्रि पर खूब पढ़ी जाती है ऋषि सत्यव्रत और ब्राह्मण की यह लोककथा

Rishi and brahman

नवरात्रि व्रत की लोककथा के अनुसार कौशल देश में सुशील नामक का एक निर्धन ब्राह्मण रहता था। प्रतिदिन मिलने वाली भिक्षा से वह अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके कई बच्चे थे। प्रातःकाल वह भिक्षा लेने घर से निकलता और सायंकाल लौट आता था।

देवताओं, पितरों और अतिथियों की पूजा करने के बाद आश्रितजन को खिलाकर ही वह स्वयं भोजन ग्रहण करता था। इस प्रकार भिक्षा को वह भगवान का प्रसाद समझकर स्वीकार करता था।

इतना दुःखी होने पर भी वह दूसरों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहता था। यद्यपि उसके मन में अपार चिंता रहती थी, तथापि वह सदैव धर्म-कर्म में लगा रहता था। अपनी इन्द्रियों पर उसका पूर्ण नियंत्रण था। वह सदाचारी, धर्मात्मा और सत्यवादी था। उसके हृदय में कभी क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या जैसे तुच्छ विकार उत्पन्न नहीं होते थे।

एक बार उसके घर के निकट सत्यव्रत नामक एक तेजस्वी ऋषि आकर ठहरे। वे एक प्रसिद्ध तपस्वी थे। मंत्रों और विद्याओं का ज्ञाता उनके समान आस-पास दूसरा कोई नहीं था। शीघ्र ही अनेक व्यक्ति उनके दर्शनों को आने लगे। सुशील के हृदय में भी उनसे मिलने की इच्छा जागृत हुई और वह उनकी सेवा में उपस्थित हुआ।

सत्यव्रत को प्रणाम कर वह बोला- “ऋषिवर! आपकी बुद्धि अत्यंत विलक्षण है। आप अनेक शास्त्रों, विद्याओं और मंत्रों के ज्ञाता हैं। मैं एक निर्धन, दरिद्र और असहाय ब्राह्मण हूं। कृपया मुझे बताएं कि मेरी दरिद्रता किस प्रकार समाप्त हो सकती है?”

उसने आगे कहा कि, “मुनिवर! आपसे यह पूछने का केवल इतना ही अभिप्राय है कि मुझ में कुटुंब का भरण-पोषण करने की शक्ति आ जाए। धनाभाव के कारण मैं उन्हें समुचित सुविधाएं और अन्य सुख नहीं दे पा रहा हूं। दयानिधान! तप, दान, व्रत, मंत्र अथवा जप-आप कोई ऐसा उपाय बताने का कष्ट करें, जिससे कि मैं अपने परिवार का यथोचित भरण-पोषण कर सकूं। मुझे केवल इतने ही धन का अभिलाषा है, जिससे कि मेरा परिवार सुखी हो जाए।”

तब सत्यव्रत ऋषि ने सुशील को भगवती दुर्गा की महिमा बताते हुए नवरात्रि व्रत करने का परामर्श दिया। सुशील ने सत्यव्रत को अपना गुरु बनाकर उनसे मायाबीज नामक भुवनेश्वरी मंत्र की दीक्षा ली। तत्पश्चात नवरात्रि व्रत रखकर उस मंत्र का नियमित जप आरंभ कर दिया। उसने भगवती दुर्गा की श्रद्धा और भक्तिपूर्वक आराधना की।

नौ वर्षों तक प्रत्येक नवरात्रि में वह भगवती दुर्गा के मायाबीज मंत्र का निरंतर जप करता रहा। सुशील की भक्ति से प्रसन्न होकर नौवें वर्ष की नवरात्रि में, अष्टमी की आधी रात को देवी भगवती साक्षात प्रकट हुईं और सुशील को उसका अभीष्ट वर प्रदान करते हुए उसे संसार का समस्त वैभव, ऐश्वर्य और मोक्ष प्रदान किया।

इस प्रकार भगवती दुर्गा ने प्रसन्न होकर अपने भक्त सुशील के सभी कष्टों को दूर कर दिया और उसे अतुल धन-संपदा, मान-सम्मान और समृद्धि प्रदान की।

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी कार्य को श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा से करने पर उसका फल सदैव अनुकूल ही प्राप्त होता है।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - October 7, 2019 at 5:02 pm

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8 अक्टूबर 2019 : आपका जन्मदिन

जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ आपका स्वागत है वेबदुनिया की विशेष प्रस्तुति में। यह कॉलम नियमित रूप से उन पाठकों के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में जानकारी देगा जिनका उस दिनांक को जन्मदिन होगा। पेश है दिनांक 10 को जन्मे व्यक्तियों के बारे में जानकारी :

दिनांक 8 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8 होगा। यह ग्रह सूर्यपुत्र शनि से संचालित होता है। इस दिन जन्मे व्यक्ति धीर गंभीर, परोपकारी, कर्मठ होते हैं। आपकी वाणी कठोर तथा स्वर उग्र है। आप भौतिकतावादी है। आप अदभुत शक्तियों के मालिक हैं। आप अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं उसका एक मतलब होता है। आपके मन की थाह पाना मुश्किल है। आपको सफलता अत्यंत संघर्ष के बाद हासिल होती है। कई बार आपके कार्यों का श्रेय दूसरे ले जाते हैं।

शुभ दिनांक : 10 17, 26

शुभ अंक : 8, 17, 26, 35, 44

शुभ वर्ष : 2017, 2024, 2042

ईष्टदेव : हनुमानजी, शनि देवता

शुभ रंग : काला, गहरा नीला, जामुनी

कैसा रहेगा यह वर्ष
सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। जो अभी तक बाधित रहे है वे भी सफल होंगे। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति प्रगति पाएंगे। बेरोजगार प्रयास करें, तो रोजगार पाने में सफल होंगे। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे, स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल ही रहेगा। राजनैतिक व्यक्ति भी समय का सदुपयोग कर लाभान्वित होंगे।
मूलांक 10 के प्रभाव वाले विशेष व्यक्ति

  • गुरु नानक
  • जार्ज बर्नार्ड शॉ
  • राकेश बेदी
  • डिम्पल कपाडि़या
  • जावेद अख्तर
  • धर्मेंद्र

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 4:59 pm

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अपनी आकर्षण शक्ति कैसे बढ़ाएं, जानिए रावण संहिता के 4 उपाय

रावण के 4 तांत्रिक तिलक का रहस्य

महाज्ञानी रावण कई चीजों में पारंगत था। ज्योतिष शास्त्र में भी उसे महारत हासिल थी। तंत्र शास्त्र का भी वह महाज्ञाता था। इसी वजह से जो भी दशानन के संपर्क में आता था वह सहसा ही उससे मोहित हो जाता था।

यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि रावण का प्रभाव उसकी तांत्रिक साधना के बल पर था। रावण कई ऐसे उपाय भी करता था जिससे जो भी सामान्य इंसान उसे देखता था वह आकर्षित हो जाता था। रावण संहिता में कुछ ऐसे ही खास प्रकार के तांत्रिक तिलक की चर्चा की गई है। जो भी व्यक्ति यह तिलक लगाता है सहज ही लोग उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं। यहां जानिए कि कौन-कौन से हैं वह तांत्रिक तिलक…

  1. आप सफेद आंकड़े (अकवन) को छाया में सुखा लें। इसके बाद उसे कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध में मिलाकर उसे पीस लें फिर उसका तिलक लगाएं। ऐसा करने वाले व्यक्ति का समाज में वर्चस्व स्थापित हो जाता है।
  2. अपामार्ग के बीज को बकरी के दूध में मिलाकर उसे पीसकर उसका लेप बनाकर लगाएं। इस लेप को लगाने वाले व्यक्ति का समाज में आकर्षण काफी बढ़ जाता है। उसका कहा सभी लोग मानते हैं।
  3. दुर्वा घास के चमत्कार से तो आप पहले से ही वाकिफ होंगे। शास्त्रों में भी इसके चमत्कार का वर्णन किया गया है। कई प्रकार के उपायों में इसका प्रयोग किया गया है। यदि कोई व्यक्ति सफेद गाय के दूध के साथ सफेद दुर्वा घास का लेप बनाकर उसका तिलक लगाए तो वह किसी भी काम में असफल नहीं होता है।
  4. साथ ही यदि आप घर, समाज या ऑफिस जैसी जगहों पर लोगों को आकर्षित करना चाहते हैं तो बिल्वपत्र तथा बिजौरा नींबू को बकरी के दूध में मिलाकर उसका तिलक लगाएं। ऐसा करने पर आपका आकर्षण बढ़ेगा और आप हर जगह लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने में सफल रहेंगे।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 4:33 pm

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Birth of Ravan : कैसे हुआ रावण का जन्म… यह कथा आपको चौंका सकती है

लोग लंकापति रावण को अनीति, अनाचार, दंभ, काम, क्रोध, लोभ, अधर्म और बुराई का प्रतीक मानते हैं और उससे घृणा करते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यहां यह है कि दशानन रावण में कितना ही राक्षसत्व क्यों न हो उसके गुणों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

रावण में अवगुण की अपेक्षा गुण अधिक थे। रावण एक प्रकांड विद्वान था। वेद-शास्त्रों पर उसकी अच्छी पकड़ थी और वह भगवान भोलेशंकर का अनन्य भक्त था। उसे तंत्र, मंत्र, सिद्धियों तथा कई गूढ़ विद्याओं का ज्ञान था। ज्योतिष विद्या में भी उसे महारथ हासिल थी।

कैसे हुआ रावण का जन्म-

रावण के उदय के विषय में भिन्न-भिन्न ग्रंथों में भिन्न-भिन्न प्रकार के उल्लेख मिलते हैं। वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण महाकाव्य,पद्मपुराण तथा श्रीमद्‍भागवत पुराण के अनुसार हिरण्याक्ष एवं हिरण्यकशिपु दूसरे जन्म में रावण और कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण पुलस्त्य मुनि का पोता था अर्थात् उनके पुत्र विश्वश्रवा का पुत्र था। विश्वश्रवा की वरवर्णिनी और कैकसी नामक दो पत्नियां थी। वरवर्णिनी के कुबेर को जन्म देने पर सौतिया डाह वश कैकसी ने अशुभ समय में गर्भ धारण किया।

इसी कारण से उसके गर्भ से रावण तथा कुंभकर्ण जैसे क्रूर स्वभाव वाले भयंकर राक्षस उत्पन्न हुए। तुलसीदास जी के रामचरितमानस में रावण का जन्म शाप के कारण हुआ है। वे नारद एवं प्रतापभानु की कथाओं को रावण के जन्म का कारण बताते हैं।
पौराणिक कथा-
इसके अनुसार भगवान विष्णु के दर्शन हेतु सनक, सनंदन आदि ऋषि बैकुंठ पधारे परंतु भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय ने उन्हें प्रवेश देने से इंकार कर दिया। ऋषिगण अप्रसन्न हो गए और क्रोध में आकर जय-विजय को शाप दे दिया कि तुम राक्षस हो जाओ। जय-विजय ने प्रार्थना की व अपराध के लिए क्षमा मांगी।

भगवान विष्णु ने भी ऋषियों से क्षमा करने को कहा। तब ऋषियों ने अपने शाप की तीव्रता कम की और कहा कि तीन जन्मों तक तो तुम्हें राक्षस योनि में रहना पड़ेगा और उसके बाद तुम पुनः इस पद पर प्रतिष्ठित हो सकोगे। इसके साथ एक और शर्त थी कि भगवान विष्णु या उनके किसी अवतारी स्वरूप के हाथों तुम्हारा मरना अनिवार्य होगा।
यह शाप राक्षसराज, लंकापति, दशानन रावण के जन्म की आदि गाथा है। भगवान विष्णु के ये द्वारपाल पहले जन्म में हिरण्याक्ष व हिरण्यकशिपु राक्षसों के रूप में जन्मे। हिरण्याक्ष राक्षस बहुत शक्तिशाली था और उसने पृथ्वी को उठाकर पाताललोक में पहुंचा दिया था।

पृथ्वी की पवित्रता बहाल करने के लिए भगवान विष्णु को वराह अवतार धारण करना पड़ा था। फिर विष्णु ने हिरण्याक्ष का वधकर पृथ्वी को मुक्त कराया था।
हिरण्यकशिपु भी ताकतवर राक्षस था और उसने वरदान प्राप्तकर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया था। भगवान विष्णु द्वारा अपने भाई हिरण्याक्ष का वध करने की वजह से हिरण्यकशिपु विष्णु विरोधी था और अपने विष्णुभक्त पुत्र प्रह्लाद को मरवाने के लिए भी उसने कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

फिर भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार धारण कर हिरण्यकशिपु का वध किया था। त्रेतायुग में ये दोनों भाई रावण और कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए और तीसरे जन्म में द्वापर युग में जब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया, तब ये दोनों शिशुपाल व दंतवक्त्र नाम के अनाचारी के रूप में पैदा हुए थे।

क्यों पड़ा रावण का दशानन नाम-

रावण को दशानन कहते हैं। उसका नाम दशानन उसके दशग्रीव नाम पर पड़ा। कहते हैं कि महातपस्वी रावण ने भगवान शंकर को प्रसन्न कर एक-एक कर अपने दस सिर अर्जित किए थे।

उस कठोर तपस्या के बल पर ही उसे दस सिर प्राप्त हुए, जिन्हें लंका युद्ध में भगवान राम ने अपने बाणों से एक-एक कर काटा था।

यदि रावण ने कठोर तपस्या से अर्जित अपने उन दस सिरों की बुद्धि का सार्थक और सही इस्तेमाल किया होता,तो शायद इतिहास में अपनी प्रकांड विद्वता के लिए अमर हो जाता और लोग उससे घृणा नहीं करते, बल्कि उसकी पूजा करते।

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Jay Aadhya Shakti Maa Aarti

Jay Aadya Shakti Maa Aarti

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - October 2, 2019 at 4:07 pm

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Shree Mrutyunjaya Chalisa

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - September 25, 2019 at 3:18 pm

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In the pre-Peshwa period, only Kshatriyas had the right to become kings or did the Brahmins also have such rights? Are there any proofs?

One thing you all know; But too much disobedience!

Brahmins have the highest authority in Hinduism or say in culture. But they rarely used it.

My Kshatriyas and other caste friends should not break me with grace. Maharashtra is famous for intellectualism. We will debate using wisdom.

In fact, everyone had the right to receive education, that is to say. The story of Ganika’s son, Satyakam Jabali, is well known. In the pre-Mahabharata, there was no caste system based on birth. It is the duty of the Brahmins to accept and donate freely; Most Brahmins accepted it. So much so that the hatred of Lakshmi and Saraswati is the best; The Brahmin Puranas who say so praiseworthy are found throughout history. In my childhood, many of you teachers will remember the many teachers who taught you to be smart and obese children free of charge while living in poverty, working in a low-paid school. People will remember the doctor who gave himself free, cheap medicines in normal conditions. It was mostly Brahmins.

Others did not exercise their right to receive education; It is not the fault of the Brahmins that the pursuit of money, power.

Though the Brahmins were not forbidden to do business, they did not have the respect of the scholars. If you mention the names of the four scholars in the Peshwa, you may remember; But say the names of four Brahmin lenders, merchants! Now comes the point.

Bhimarjunani won the Drupada kingdom as Guru Dakshana. Offered to the Guru. Dronacharya became king. Drona said to the defeated Drupada, “Since I am a Brahmin, I can rule as king, but I have deliberately accepted Guru’s profession. I do not want to be king with the disciple-offered kingdom. I give half your kingdom back to you. Now we have come to an equal level. The other half is also the same person as my ruler. I went to the elephants. ” Guru Drona did not return to Drupada’s kingdom again in his lifetime.

Later Drona, Kripa, Ashwatthama all fought in the war as Brahmin generals; No one objected. Therefore, it was the community’s belief that the Brahmins held the position of king, army chief.

The Brahmin girl’s self-depiction is never known; Of course, her deer were also abandoned. But strangely, even the poorer Brahmins were allowed to take part in the Kshatriya, even in the princess’s self. The example is again the drupad itself. Draupadi won by himself but Arjuna from Brahmaneshwas; And a rumor of Kshatriya started. It is an insult to us that a poor Brahmin should take a princess when so many kings are present; Started preparing for war. Then Drupada joined hands and requested the attendees; “The scholar Brahman has this right. Besides, he has proved his arsenal by winning; come to the banquet now.” In the Mahabharata, we find examples of a king, a king’s son-in-law, a commander.

Let’s go back to history.

Emperor Ashoka’s descendant, Brihadarath Maurya, was a lean, timid, cowardly extremist of Buddhist philosophy. Foreigners invaded India and the country was headed for slavery. His commander, Pushyamitra Shung, was also a very skilled, valiant warrior and a good general. The king was not ready to fight the invasion of the nation. Finally, Pushyamitra declared himself king by beheading the king in front of hundreds of people at a ceremony. This Pushyamitra was a Brahmin. He liberated the country by expelling the invaders. For some hundred years after this incident, Kalidas composed the play Malvika Agnimitra. The protagonist of the play is Agnimitra, grandson of Pushyamitra. Neither did Kalidasa know that the Brahmins should become kings of lineage.

Apart from this, there are examples of many Brahmin kings in India.

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - August 24, 2019 at 8:54 am

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What is the easiest way to get a job in the United States?

The following are some of the ways.

  • Enroll in a good university to do an MS and get a job in a big company by studying well
  • Get a job at any American company in India (Apple, Amazon, Microsoft etc) and get visa sponsorship on their behalf in the US.
  • Get an EAD card by marrying someone working in the United States. But don’t count on it.
  • When working in a service company in India, keep the performance so excellent that the company will be required to sponsor your visa.
  • You decide which of these paths is easiest and then follow that.

Best of luck!

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 8:13 am

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‘Near Infrared Light’ Looks Inside Heart Arteries

Now, Chembur hospital doc says goodbye to stents, blood thinners


Mumbai:

When 24-year-old Varun Shinde, a graphic designer, started puking and felt too weak to move, little did he or his parents think he was having a heart attack. But, thanks to a comparatively new technology called ocular coherence tomography (OCT), he did not need major procedures such as cardiac bypass or angioplasty. OCT uses ‘near infrared light’ to visualise the inside of heart arteries.

“Using OCT along with angiography, we could establish that Varun’s heart attack was caused by a blood clot and not due to plaque rupture,’’ said cardiologist Dr V T Shah, who treated Varun at Surana Hospital, Chembur, in January.

Varun is happy that he only needed oral medicines. “The second angiography a month later showed that the clot that caused the heart attack had disappeared,’’ he said.

Heart attacks are the leading cause of deaths among Indians, claiming over 28 lakh lives in 2016. Indians are genetically prone to get heart attacks a decade earlier than Caucasians, say studies. But, heart attacks among people in their 20s is another cause for concern among Indian doctors. But Dr Shah believes newer techniques such as OCT can refine treatment for youngsters and prevent unnecessary stenting.

While all patients of heart attacks are put through an angiography — a procedure that uses X-rays and a special dye to take pictures of the heart and arteries — it only shows hazy lesions in the arteries; there is no clear distinction between a blood clot and a plaque rupture.

OCT helps doctors see lesions closer and clearly as it can measure thickness of up to 10 microns. It thus provides information about the nature of the plaque, extent of narrowing of the coronary artery and helps doctors choose the size and length of the stent better.

Prior to Varun, the Chembur hospital had treated two young patients similarly. A 28-year-old Navi Mumbai municipal corporation employee, Kishore (name changed), suffered a heart attack a month before his wedding in January. “I was told I had a 90% lesion in my main artery. I thought I would have to get a stent, but Dr Shah said he wanted to assess the lesion using another device,’’ said Kishore. He was told the procedure would add up to Rs 1 lakh to his bill. “But I was also told that I wouldn’t need a stent or bypass if the test showed that all I had was a blood clot,’’ said Kishore. He too only needed medical treatment.

A third patient, a 38-year-old woman who suffered a heart attack too needed only medical management after an OCT scan. “We are planning to conduct a research study looking at heart attacks among the young using OCT,’’ said Dr Shah. This could help develop better guidelines to prevent unnecessary stenting among the young.

Dr Prince Surana of Surana Hospital said using OCT makes better economic sense in the longer run. “An OCT image costs Rs80,000 at my hospital, but thanks to it these patients didn’t need stents at such a young age. They also won’t need lifelong supply of blood thinners,’’ he added.

Dr Prafulla Kerkar, who heads the cardiology department of BMC-run KEM Hospital in Parel, said OCT is still relatively new. “Research is needed to understand how well it can contribute to making heart procedures safer,’’ he said, adding that KEM Hospital too has started studies using OCT.

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - March 24, 2019 at 11:31 am

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Rama Bhujanga Stotram with meaning

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - March 23, 2019 at 3:54 pm

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