गुलाब जामुन खाए कौआ, खुश हों शनिदेव

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ या नीच स्थान में बैठा हो और अशुभ फल दे रहा हो, तो शनि की सेवा करना आवश्यक हो जाता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के कई रास्ते शास्त्रों में बताए गये हैं। शनि को खुश करने के कुछ उपाय इतने सरल हैं, जिन्हें करना हर किसी के लिए आसान होता है। मसलन अगर कौओं को शनिवार के दिन गुलाब जामुन खिलाया जाए, तो शनिदेव की कृपा मिल सकती है।

इसी तरह हाथी की सेवा करने से भी शनि देव से सकारात्मक प्रभाव मिल सकता है। हाथी भी काले रंग का होता है, इसलिए उसकी सेवा करना लाभप्रद माना जाता है। वैसे शनिवार को गरीबों को भोजन कराना भी शनि के अशुभ प्रभाव को दूर करने में फायदेमंद होता है। माना जाता है कि शनिवार के दिन अगर काले कुत्ते को सरसों तेल में चुपड़ी रोटी खिलाई जाय तो शनि देव झट से प्रसन्न हो जाते हैं।

हर शनिवार को शनि देव की प्रतिमा को तेल से स्नान कराएं या एक कटोरी में तेल डालकर उसमें अपना चेहरा देखकर उसे दान कर दें, तो इससे भी शनि देव खुश होते। शनि मंदिर में जाकर शनि चालीसा पढ़ने और दिया जलाने से भी शनि देव के प्रकोप से बचाव होता है। ज्योतिषशास्त्री विनोद त्यागी कहते हैं कि शनिवार के दिन ग्यारह बार दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या के अशुभ फलों में कमी आती है।

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मथुरा जनपद मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर नंदगांव के निकट कोकिलावन में शनिदेव का विशाल मंदिर है। कथानकों के अनुसार द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण नंदगांव गए तो सूर्य के प्रकोप से बचने के लिए शनिदेव ने भगवान कृष्ण के यहां त्राहिमाम किया। शनिदेव का पीछा करते हुए सूर्यदेव भी नंदभवन पहुंच गए। दोनों की बहस सुनने के बाद शनिदेव ने ब्रज में श्रीकृष्ण से स्थान मांगा। श्रीकृष्ण ने शनिदेव को आशीर्वाद दिया और ब्रज में बसने के लिए अनुमति इस शर्त पर दी कि ब्रज में आने वाले कृष्ण भक्त पर उनकी छाया का कोप नहीं होगा।
इस पर तय किया गया कि कोकिलावन में स्थित सूर्य कुंड में स्नान के बाद जो कृष्ण भक्त शनिदेव के दर्शन करेंगे उन्हें शनिदेव की छाया का कोप का भाजन नहीं बनना पड़ेगा। उसके काम में विघभन नहीं आएंगे। इसका उल्लेख गर्ग पुराण में मिलता है। तभी से कोकिलावन के सूर्यकुंड में स्नान कर शनिदेव के दर्शन पूजा-अर्चना का क्रम चल रहा है। साथ ही नवग्रहों में सर्वाधिक प्रभावी ग्रह होने के चलते विशेष पूजा होती है।
शनिवार को आठ जून को शनिदेव की जयंती है। पंडित विनोद शास्त्री व नवीन नागर बताते हैं कि इस दिन सर्व सौभाग्य योग बन रहा है। इस दिन शनिदेव की पूजा-अर्चना से अभीष्ट की प्राप्ति होगी।

 

कर्म फल के स्वामी हैं शनि
शनिदेव को कर्म व फल का स्वामी बताया जाता है। मान्यता है कि अच्छे कर्म करने वाले को अच्छा तथा बुरे कर्म करने वाले को इसका दंड देने के लिए शनिदेव सदैव तत्पर रहते हैं। इसका निर्णय भी शनिदेव अन्य सभी देवों से जल्दी व त्वरित गति से करते हैं। यहीं कारण है कि गलत काम करने से लोग शनिदेव से डरते हैं।
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उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की कथा चलन में
शनि के कोप के भाजन बने उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की कथा चलन में है। शनिवार का व्रत करने वाले शनिदेव की पूजा के दौरान शनिकथा में विक्रमादित्य पर शनि के प्रकोप व शनि चालीसा का पाठ करते हैं।