Archive for March, 2016

Pashupati ashtakam hindi

0046 0047

pashupati ashtakam hindi

pashupati ashtakam hindi

 

 

pashupati ashtakam lyrics
pashupati stotra lyrics
pashupati ashtakam hindi
pashupatinath ashtakam
pashupati stotra hindi
pashupati ashtakam mp3 download
pashupati stotra pdf
pashupati stotra audio
pashupati mantra

Be the first to comment - What do you think?
Posted by admin - March 8, 2016 at 1:29 pm

Categories: Stotra   Tags:

Rudrashtakam

 

0044

rudrashtakam

rudrashtakam

rudrashtakamrudrashtakam

rudrashtakam mp3 free download
rudrashtakam in hindi
rudrashtakam lyrics
rudrashtakam pdf
rudrashtakam shiva stuti mp3 download
rudrashtakam download
rudrashtakam lyrics meaning
rudrashtakam by ramesh bhai ojha
rudrashtakam meaning in hindi
rudrashtakam meaning in hindi pdf
rudrashtakam lyrics in hindi with meaning
shiv rudrastakam meaning in hindi
rudrashtakam lyrics
rudrashtakam benefits
shiva rudrastakam meaning in hindi
rudrashtakam path
rudrashtakam in hindi mp3

Be the first to comment - What do you think?
Posted by admin - March 8, 2016 at 1:20 pm

Categories: Stotra   Tags:

Shiv Tandav Stotra meaning in Hindi

शिव तांडव स्तोत्र

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्‌ ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवो शिवम्‌ ॥१॥
जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिंपनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥२॥
धराधरेंद्रनंदिनीविलासबन्धुबन्धुर
स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥

जिन्होंने जटारूपी अटवी (वन) से निकलती हुई गंगा जी के गिरते हुए प्रवाहों से पवित्र किये गये गले में सर्पों की लटकती हुई विशाल मालाको धारण कर , डमरू के डम डम शब्दों से मण्डित प्रचण्ड ताण्डव (नृत्य) किया, वे शिवजी हमारे कल्याण का विस्तार करें ॥१॥

जिनका मस्तक जटारूपी कड़ाहमें वेगसे घूमती हुई गंगा की चंचल तरंग लताओं से सुशोभित हो रहा है, ललाटन्गि धक् धक् जल रही है, सिरपर बाल चंद्रमा विराजमान हैं, उन(भगवान शिव)में मेरा निरंतर अनुराग हो ॥२॥

गिरिराजकिशोरी पार्वती के विलासकालोपयोगी शिरोभूषणसे समस्त दिशाओंके प्रकाशित होते देख जिनका मन आनंदित हो रहा है, जिनकी निरंतर कृपादृष्टिसे कठिन आपत्ति का भी निवारण हो जाता है, ऐसे किसी दिगंबर तत्तवमें मेरा मन विनोद करें ॥३॥

जटाभुजंगपिंगलस्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।
मदांधसिंधुरस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥४॥
सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर
प्रसूनधूलिधोरणीविधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः
श्रियै चिराय जायतां चकोरबंधुशेखरः ॥५॥
ललाटचत्वरज्वलद्धनंजयस्फुलिङ्गभा निपीतपंचसायकंनमन्निलिंपनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालि संपदे शिरो जटालमस्तुनः ॥६॥

जिनके जटाजूटवर्ती भुजङ्गमोंके फणोंकी मणियोंका फैलता हुआ पिङ्गल प्रभापुज्ज दिशारूपिणी अङ्गनाओंके मुशपर कुङ्कुमरागका अनुलेप कर रहा है, मतवाले हाथीके हिलते हुए चमड़ेका उत्तरीय वस्त्र(चादर) घारण करने से स्निग्धवर्ण हुएउन भूतनाथ में मेरा चित्त अद्बुत विनोद करे ॥४॥

जिनकी चरणपादुकाएं इंद्र आदि समस्त देवताओंके [प्रणाम करते समय] मस्तकवर्ती कुसुमोंकी धूलिसे धुसरित हो रही हैं, नागराज (शेष) के हारसे बंधी हुई जटावाले वे भगवान चंद्रशेखर मेरे लिए चिरस्थायिनी सम्पत्तिके साधक हों ॥५॥

जिसने ललाट-वेदीपर प्रज्जवलित हुई अग्नि के स्फुलिङ्गोंके तेज से कामदेव को नष्ट कर डाला था,जिसे इंद्र नमस्कार किया करते हैं,सुधाकर की कला से सुशोभित मुकुटवाला वह [श्रीमहादेवजीका] उन्नत विशाल ललाट वाला जटिल मस्तक हमारी सम्पत्ति का साधक हो ॥६॥

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल
द्धनंजयाहुतीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्रनंदिनीकुचाग्रचित्रपत्रक
प्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचने रतिर्मम ॥७॥
नवीनमेघमंडलीनिरुद्धदुर्धरस्फुर
त्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः ।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥८॥
प्रफुल्लनीलपंकजप्रपंचकालिमप्रभा
वलम्बिकंठकंधलीरुचिप्रबंधकंधरम्‌ ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥९॥

जिन्होंने अपने विकराल भालपट्टपर धक् धक् जलती हुई अग्निमें प्रचण्ड कामदेवको हवन कर दिया था,गिरिराजकिशोरीके स्तनोंपर पत्रभङ्गरंचना करने के एकमात्र कारीगर उन भगवान त्रिलोचन में मेरी धारणा लगी रहें ॥७॥

जिनके कण्ठ में नवीन मेघमाला से घिरी हुई अमावस्या की आधी रात के समय फैलते हुए दुरूह अंधकार के समान श्यामता अंकित है, जो गजचर्म लपेटे हुए हैं, वे संसारभारको धारण करने वाले चंद्रमा [के संपर्क] से मनोहर कांतिवाले भगवान गंगाधर मेरी संपत्ति का विस्तार करें ॥८॥

जिनका कण्ठदेश खिले हुए नील कमलसमूह की श्याम प्रभाका अनुकरण करनेवाली हरिणी की सी छविवाले चिह्न से सुशोभित है तथा जो कामदेव, त्रिपुर, भव(संसार) , दक्ष – यज्ञ, हाथी, अंधकासुर और यमराज का भी उच्छेदन करनेवाले हैं उन्हें मैं भजता हूं ॥९॥

अखर्वसर्वमंगलाकलाकदम्बमंजरी
रसप्रवाहमाधुरीविजृंभणामधुव्रतम्‌ ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥१०॥
जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजंगङ्गमश्वस
द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् ।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदंगतुंगमंगल
ध्वनिक्रमप्रवर्तितप्रचण्डताण्डवः शिवः ॥११॥
दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंगमौक्तिकमस्रजो
र्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समप्रवृत्तिक: कदा सदाशिवं भजाम्यहम ॥१२॥
कदा निलिंपनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌ ।
विलोललोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥१३॥

जो अभिमानरहित पार्वती की कलारूप कदम्बमज्जरी के मकरंदस्त्रोत की बढ़ती हुई माधुरी के पान करनेवाले मधुप हैं तथा कामदेव, त्रिपुर, भव(संसार) , दक्ष – यज्ञ, हाथी, अंधकासुर और यमराज का भी अंत करनेवाले हैं, उन्हें मैं भजता हूं ॥१०॥

जिनके मस्तक पर बड़े वेग के साथ घूमते हुए भुजङ्ग के फुफकारने से ललाट की भयंकर अग्नि क्रमश: धधकती हुई फैल रही है, धिमि – धिमि बजते हुए मृदङ्के गंभीर मंगल घोष के क्रमानुसार जिनका प्रचण्ड ताण्डव हो रहा है, उन भगवान शंकर की जय हो ॥११॥

पत्थर और सुंदर बिछौनों में , सांप और मुक्ता की माला में, बहुमूल्य रत्न तथा मिट्टी के ढेले में, मित्र या शत्रुपक्ष में, तृण अथवा कमललोचना तरूणी में, प्रजा और पृथ्वी के महाराज में समान भाव रखता हुआ मैं कब सदाशिव को भजूंगा ॥१२॥

सुंदर ललाटवाले भगवान चंद्रशेखर में दत्तचित्त हो अपने कुविचारों को त्यागकर गंगा जी के तटवर्ती निकुंज के भीतर रहता हुआ सिर पर हाथ जोड़ डबडबायी हुई आंखो से ‘शिव’ मंत्र का उच्चारण करता हुआ मैं कब सुखी होउंगा ? ॥१३॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌ ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥१४॥
पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
य: शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखी प्रददाती शम्भू: ॥१५॥

जो मनुष्य इस प्रकार से उक्त इस उत्मोत्तम स्तोत्र का नित्य पाठ, स्मरण और वर्णन करता रहता है, वह सदा शुद्ध रहता है और शीघ्र ही सुरगुरू श्रीशंकर जी की अच्छी भक्ति प्राप्त कर लेता है, वह विरूद्धगति को नहीं प्राप्त होता,क्योंकि श्रीशिवजी का अच्छे प्रकार का चिंतन प्राणिवर्ग के मोह का नाश करने वाला है ॥१४॥

स्तोत्र का जो पाठ करता है, भगवान शंकर उस मनुष्य को रथ, हाथी, घोड़ों से युक्त सदा स्थिर रहने वाली अनुकूल संपत्ति देते हैं ॥१५॥

shiv tandav stotra lyrics

shiv tandav stotra lyrics

shiv tandav stotra lyrics

shiv tandav stotra lyrics

shiv tandav stotra lyrics

shiv tandav stotra lyrics

shiv tandav stotra lyrics

shiv tandav stotra lyrics

shiv tandav stotra lyrics

shiv tandav stotra lyrics

shiva tandav stotra meaning
shiva tandava stotram lyrics in english
shiv tandav stotra lyrics
shiv tandav stotram lyrics in english
shiv tandav strotam
shiva tandav stotra mp3
shiva tandav stotra pdf
shiva tandav stotra mp3 free download
shiv tandav stotra meaning in hindi
shiv tandav stotra meaning in hindi pdf
meaning of shiv tandav stotram in hindi
shiv tandav stotra meaning in gujarati
shiv tandav stotra in hindi mp3 free download
shiv tandav stotram meaning in hindi download
shiv tandav stotram lyrics in hindi with meaning pdf
benefits of shiv tandav stotram in hindi
shiv tandav stotra in hindi text
meaning of shiv tandav stotram in hindi pdf
shiv tandav stotram meaning in hindi download
shiv tandav lyrics with meaning in hindi pdf
benefits of shiv tandav stotram in hindi
shiv tandav stotra hindi meaning
shiv tandav stotram mp3
shiv tandav stotram powerful mp3 download
shiv tandav mp3 free download

2 comments - What do you think?
Posted by admin - March 8, 2016 at 12:19 pm

Categories: Stotra   Tags:

12 jyotirlinga darshan

jyotirlinga
jyotirlinga list

12 jyotirlinga map

jyotirlinga in hindi

jyotirlinga photos
jyotirlinga yatra

vaidyanath jyotirlinga

mallikarjun jyotirlinga

jyotirlinga darshan

Be the first to comment - What do you think?
Posted by admin - March 7, 2016 at 10:51 am

Categories: Chalisa   Tags:

Jobs in Mineral Exploration corporation Limited

News Highlights

  • डिप्टी जनरल मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर के पद खाली
  • केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे आवेदन
  • आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मार्च
मिनरल एक्सप्लोरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने डिप्टी जनरल मैनेजर (फाइनेंस), असिस्टेंट मैनेजर (जियोलॉजी/ ड्रिलिंग/ लीगल/ एचआर/ फाइनेंस), अकांउट्स ऑफिसर, फोरमैन (ड्रिलिंग) आदि पदों पर आवेदन आमंत्रित किए हैं।

इन पदों पर आवेदन के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 30/40/50 वर्ष (पदानुसार) निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी गई है। उम्मीदवारों की आयु सीमा की गणना 01 फरवरी, 2016 से की जाएगी।

शैक्षिक योग्यता पदानुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। वेतनमान के तौर पर डिप्टी जनरल मैनेजर (फाइनेंस) को 36,600-62,000 रुपये, असिस्टेंट मैनेजर (जियोलॉजी/ ड्रिलिंग/ लीगल/ एचआर/ फाइनेंस) को 24,900-50,500 रुपये, अकांउट्स ऑफिसर को 16,400-40,500 रुपये एवं फोरमैन को 9,500-24,800 रुपये प्रतिमाह दिए जाने का प्रावधान है।

लिखित परीक्षा से मिलेगी नौकरी

इन पदों पर आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक उम्मीदवार आवेदन पत्र के निर्धारित प्रारूप को डाउनलोड कर उसे पूर्णरूप से भरें। आवेदन शुल्क के तौर पर सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 100 रुपये जमा करने होंगे, जबकि एससी/एसटी/नि:शक्तजन एवं महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन नि:शुल्क है।

इच्छुक उम्मीदवार संबंधित वेबसाइट www.mecl.gov.in पर दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करें। सफल उम्मीदवारों का चयन व्यक्तिगत साक्षात्कार/ लिखित परीक्षा/ कौशल परीक्षा एवं ट्रेड टेस्ट (पदों के अनुसार अलग-अलग निर्धारित) के आधार पर किया जाएगा।

ऑनलाइन आवेदन के लिए पंजीकरण प्रारंभ होने की तारीख 29 फरवरी, 2016 है जबकि आवेदन के लिए पंजीकरण बंद होने की तारीख 31 मार्च, 2016 है। विज्ञप्ति से संबंधित किसी भी अन्य जानकारी के लिए उम्मीदवार उपरोक्त वेबसाइट पर लॉगऑन करें।

Be the first to comment - What do you think?
Posted by admin - March 7, 2016 at 10:47 am

Categories: Articles   Tags:

« Previous Page