Archive for April, 2021

Mool Shanti Puja Vidhi in Hindi

 

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मूल शांति पूजन सामग्री लिस्ट इन हिंदी
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मूल शांति पुस्तक pdf
मूल नक्षत्र 2020
मूल नक्षत्र शान्ति के उपाय
अश्लेषा नक्षत्र पूजा विधि

 

मूल एवं शांति के उपाय
शास्त्रों की मान्यता है कि संधि क्षेत्र हमेशानाजुक और अशुभ होते हैं। जैसे मार्ग संधि (चौराहे-
तिराहे), दिन-रात का संधि काल, ऋतु, लग्न औरग्रह के संधि स्थल आदि को शुभ नहीं मानते हैं। इसीप्रकार गंड-मूल नक्षत्र भी संधि क्षेत्र में आने सेनाजुक और दुष्परिणाम देने वाले होते हैं। शास्त्रों केअनुसार इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले बच्चों केसुखमय भविष्य के लिए इन नक्षत्रों की शांतिजरूरी है। मूल शांति कराने से इनके कारण लगने वाले दोष शांत हो जाते हैं।

क्या हैं गंड मूल नक्षत्र

राशि चक्र में ऎसी तीन स्थितियां होती हैं, जबराशि और नक्षत्र दोनों एक साथ समाप्त होते हैं।
यह स्थिति “गंड नक्षत्र” कहलाती है। इन्हींसमाप्ति स्थल से नई राशि और नक्षत्र की शुरूआत
होती है। लिहाजा इन्हें “मूलनक्षत्र” कहते हैं।

इसतरह तीन नक्षत्र गंड और तीन नक्षत्र मूल कहलाते हैं।
गंड और मूल नक्षत्रों को इस प्रकार देखा जा सकताहै।

कर्क राशि व अश्लेषा नक्षत्र एक साथ समाप्त होतेहैं।
यहीं से मघा नक्षत्र और सिंह राशि का उद्गमहोता है।
लिहाजा अश्लेषा गंड और मघा मूलनक्षत्र है।

वृश्चिक राशि व ज्येष्ठा नक्षत्र एक साथ समाप्तहोते हैं, यहीं से मूल नक्षत्र और धनु राशि की शुरूआतहोने के कारण ज्येष्ठा “गंड” और “मूल” मूल कानक्षत्र होगा।
मीन राशि और रेवती नक्षत्र एक साथ समाप्तहोकर यहीं से मेष राशि व अश्विनी नक्षत्र की
शुरूआत होने से रेवती गंड तथा अश्विनी मूल नक्षत्रकहलाते हैं।

उक्त तीन गंड नक्षत्र अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवतीका स्वामी ग्रह बुध है
तथा तीन मूल नक्षत्र मघा,
मूल व अश्विनी का स्वामी ग्रह केतु है।
27 या 10वेंदिन जब गंड-मूल नक्षत्र दोबारा आए उस दिन
संबंधित नक्षत्र और नक्षत्र स्वामी के मंत्र जप, पूजाव शांति करा लेनी चाहिए। इनमें से जिस नक्षत्र मेंशिशु का जन्म हुआ उस नक्षत्र के निर्धारित संख्यामें जप-हवन करवाने चाहिए।
गंड मूल नक्षत्रों में जन्म का फल
मूल नक्षत्र के प्रथम चरण में उत्पन्न होने वाले शिशु(पुल्लिंग) के पिता को कष्ट, द्वितीय चरण मेंमाता को कष्ट और तृतीय चरण में धन ऎश्वर्य हानिहोती है। चतुर्थ चरण में जन्म हो तो शुभ होता है।

जन्म लेने वाला शिशु (स्त्रीलिंग) हो तो प्रथम चरणमे श्वसुर को, द्वितीय में सास को और तीसरे चरण मेंदोनों कुल के लिए नेष्ट होती है।चतुर्थ चरण में जन्म हो तो शुभ होता है।
अश्लेषाके प्रथम चरण में जन्मे जातक के लिए शुभ, द्वितीय
चरण में धन ऎश्वर्य हानि और तृतीय चरण में माताको कष्ट होता है।
चतुर्थ चरण में जन्म हो तो पिता
को कष्ट होता है। जन्म लेने वाला शिशु स्त्रीलिंगहो तो प्रथम चरण में सुख समृद्धि और अन्य चरणों मेंसास को कष्ट कारक होती है।

मघा के प्रथम चरणमें जन्मे जातक/जातिका की माता को कष्ट,
द्वितीय चरण में पिता को कष्टकारक, तृतीय चरण
में सुख समृद्धि और चतुर्थ चरण में जन्म हो तो धन
लाभ।
ज्येष्ठा के प्रथम चरण में बडे भाई को नेष्ट, द्वितीय
चरण में छोटे भाई को कष्ट, तीसरे में माता को
तथा चतुर्थ चरण में जन्म होने पर स्वयं के लिए
कष्टकारक होता है। स्त्री जातक का जन्म हो तो
प्रथम चरण में जेठ को, द्वितीय में छोटी बहिन/देवर
को तथा तृतीय में सास/माता के लिए कष्ट। चतुर्थ
चरण में जन्म हो तो देवर के लिए श्रेष्ठ। रेवती के
प्रथम तीन चरणों में स्त्री/पुरूष जातक का जन्म हो
तो अत्यन्त शुभ, राज कार्य से लाभ तथा धन ऎश्वर्य
में वृद्धि होती है। लेकिन चतुर्थ चरण में जन्म हो तो
स्वयं के लिए कष्टकारक होता है। अश्विनी के
प्रथम चरण में पिता को कष्ट शेष तीन चरणों में धन-
ऎश्वर्य वृद्धि, राज से लाभ तथा मान सम्मान
मिलता है।

गंड मूल नक्षत्र के शांति उपाय

मूल शांति की सामग्री
———————————
घडा एक, करवा एक, सरवा एक, पांच प्रकार के रंग, नारियल एक,५०सुपारी,दूब, कुशा, बतासे, इन्द्र जौ, भोजपत्र, धूप,कपूर आटा चावल २ गमछे, दो गज लाल कपडा चंदोवे के लिये, मेवा ५० ग्राम, पेडा ५० ग्राम, बूरा ५० ग्राम, केला चार,माला दो, २७ खेडों की लकडी, २७ वृक्षों के अलग अलग पत्ते,२७ कुंओ का पानी, गंगाजल यमुना जल, हरनन्द का जल, समुद्र का जल अथवा समुद्र फ़ेन, आम के पत्ते, पांच रत्न, पंच गव्य
वन्दनवार,हल,२ बांस की टोकरी,१०१ छेद वाला कच्चा घडा,१ घंटी २ टोकरी छायादान के लिये, १ मूल की मूर्ति स्वनिर्मित, बैल गाय २७ सेर सतनजा,७ प्रकार की मिट्टी, हाथी के नीचे की घोडे के नीचे की गाय के नीचे की तालाब की सांप की बांबी की नदी की और राजद्वार की वेदी के लिये पीली मिट्टी।

हवन सामग्री
——————-

चावल एक भाग,घी दो भाग बूरा दो भाग, जौ तीन
भाग, तिल चार भाग,इसके अतिरिक्त मेवा अष्टगंध
इन्द्र जौ,भोजपत्र मधु कपूर आदि। एक लाख मंत्र के
एक सेर हवन सामग्री की जरूरत होती है,यदि कम
मात्रा में जपना हो तो कम मात्रा में प्रयोग करना
चाहिये।

शांति मंत्र

अश्विनी नक्षत्र (स्वामित्व अश्विनी कुमार):

“ॐ
अश्विनातेजसाचक्षु: प्राणेन सरस्वतीवीर्यम।
वाचेन्द्रोबलेनेंद्राय दधुरिन्द्रियम्। ॐ अश्विनी
कुमाराभ्यां नम:।।” (जप संख्या 5,000)।

अश्लेषा (स्वामित्व सर्प):

“ॐ नमोस्तु सप्र्पेभ्यो ये के
च पृथिवी मनु: ये अन्तरिक्षे ये दिवितेभ्य:
सप्र्पेभ्यो नम:।। ॐ सप्र्पेभ्यो नम:।।’ (जप संख्या
10,000)

मघा (स्वामित्व पितर):

“ॐ पितृभ्य: स्वधायिभ्य:
स्वधानम: पितामहेभ्य स्वधायिभ्य: स्वधा नम:।
प्रपितामहेभ्य स्वधायिभ्य: स्वधा नम:
अक्षन्नापित्रोमीमदन्त पितरोùतीतृपन्तपितर:
पितर: शुन्धध्वम्।। ॐ पितृभ्यो नम:/पितराय नम:।।”
(जप संख्या 10,000)

ज्येष्ठा (इन्द्र):

“ॐ त्रातारमिन्द्रमवितारमिन्द्र
हवे हवे सुह्न शूरमिन्द्रम् ह्वयामि शक्रं पुरूहूंतमिन्द्र
स्वस्तिनो मधवा धात्विंद्र:।। ॐ शक्राय नम:।।”
(जप संख्या 5,000)

मूल (राक्षस):

“ॐ मातेव पुत्र पृथिवी पुरीष्यमणि
स्वेयोनावभारूषा। तां विश्वेदेवर्ऋतुभि: संवदान:
प्रजापतिविश्वकर्मा विमुच्चतु।। ॐ निर्ऋतये नम:।।”
(जप संख्या 5,000)

रेवती (पूषा):

“ॐ पूषन् तवव्रते वयं नरिष्येम कदाचन
स्तोतारस्त इहस्मसि।। ॐ पूष्णे नम:।” (जप संख्या 5,000)

गंड नक्षत्र स्वामी बुध के मंत्र-:

“ॐ उदबुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्ठापूर्ते
संसृजेथामयं च अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन्
विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत।।” ( नौ हजार जप
कराएं। दशमांश संख्या में हवन कराएं। हवन में
अपामार्ग (ओंगा) और पीपल की समिधा काम में
लें।)

मूल नक्षत्र स्वामी केतु के मंत्र

“ॐ केतुं कृण्वन्न केतवे पेशो मय्र्याअपेशसे
समुषाभ्दिजायथा:।।” (सत्रह हजार जप कराएं और
इसके दशमांश मंत्रों के साथ दूब और पीपल की
समिधा काम में ले)

मूल शांति के उपाय- ज्येष्ठा के अन्तिम दो चरण तथा मूल के प्रथम दो चरण अभुक्त मूल कहलाते हैं। इन नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक के लिये नीचे लिखे मंत्रों का २८००० जप करवाने चाहिये,और २८वें दिन जब वही नक्षत्र आये तो मूल शान्ति का प्रयोजन करना चाहिये,जिस मन्त्र का जाप किया जावे उसका दशांश हवन करवाना चाहिये,और २८ ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिये,बिना मूल शांति करवाये मूल नक्षत्रों का प्रभाव दूर नही होता है।

मंत्र- मूल नक्षत्र का बडा मंत्र यह है। ऊँ मातवे पुत्र पृथ्वी पुरीत्यमग्नि पूवेतो नावं मासवातां विश्वे र्देवेर ऋतुभिरू सं विद्वान प्रजापति विश्वकर्मा विमन्चतु॥ इसके बाद छोटा मंत्र इस प्रकार से है। ऊँ एष ते निऋते। भागस्तं जुषुस्व। ज्येष्ठा नक्षत्र का मंत्र इस प्रकार से है। ऊँ सं इषहस्तरू सनिषांगिर्भिर्क्वशीस सृष्टा सयुयऽइन्द्रोगणेन। सं सृष्टजित्सोमया शुद्धर्युध धन्वाप्रतिहिताभिरस्ता।

आश्लेषा मंत्र- ऊँ नमोऽर्स्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनु। ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यरू सर्पेभ्यो नमरू॥

मूल शांति की सामग्री- घड़ा एक,करवा चार,सरवा एक,पांच रंग,नारियल एक,11 सुपारी,पान के पत्ते 11,दूर्वा,कुशा,बतासे 500 ग्राम ,इन्द्र जौ, भोजपत्र, धूप, कपूर, आटा चावल, गमछे 2, दो मी लाल कपड़ा , मेवा 250 ग्राम, पेड़ा 250 ग्राम, बूरा 250 ग्राम,माला दो, 27 खेडों की लकडी, 27 वृक्षों के अलग अलग पत्ते,27 कुंओ का पानी,गंगाजल, समुद्र फेन,आम के पत्ते,पंच रत्न,पंच गव्य वन्दनवार,बांस की टोकरी,101 छेद वाला कच्चा घडा,1घंटी 2 टोकरी छायादान के लिये,1 मूल की मूर्ति स्वनिर्मित, 27 किलो सतनजा, सप्तमृतिका, 3 सुवर्ण प्रतिमा, गोले 5, ब्राहमणों हेतु वस्त्र, पीला कपड़ा सवा मी, सफेद कपड़ा सवा मी, फल फूल मिठाई आदि ।

हवन सामग्री- चावल एक भाग,घी दो भाग बूरा दो भाग, जौ तीन भाग, तिल चार भाग,इसके अतिरिक्त मेवा अष्टगंध इन्द्र जौ,भोजपत्र मधु कपूर आदि। जितने जप किए जाँए उतनी मात्रा में हवन सामग्री बनानी चाहिए। पूजन जितना अच्छा होगा उसका प्रभाव भी उतना ही अच्छा होगा।पूजा सामग्री यथाशक्ति लानी चाहिए।

यह त्रिआयामी, त्रिगुणात्मक सृष्टि है। नक्षत्र २७ हैं। इन्हें तीन समान वर्गों में बाँटें, तो
(१) १ से ९,
(२) १० से १८ तथा
(३) १९ से २७

यह वर्ग बनते हैं। इन तीनों वर्गों की सन्धि वाले नक्षत्रों को मूल संज्ञक नक्षत्र माना गया है। वे हैं २७वाँ रेवती एवं प्रथम अश्विनी ९वाँ श्लेषा एवं १०वाँमघा तथा १८वाँ ज्येष्ठा एवं १९वाँ मूल। यह तीन नक्षत्र युग्म ऐसे हैं, जहाँ दो संलग्न नक्षत्र अलग- अलग राशियों में हैं; किन्तु किसी का कोई चरण दूसरी राशि में नहीं जाता। इसलिए इन्हें नक्षत्र चक्र के ‘मूल’ अर्थात् प्रधान नक्षत्र माना गया है। ऐसे महत्त्वपूर्ण नक्षत्रों को अशुभ मानने की परम्परा न जाने कहाँ सं चल पड़ी? वस्तुतः तथ्य यह है कि नक्षत्रों का सम्बन्ध मानवी प्रवृत्तियों से है। नक्षत्र चक्र के तीन मूल बिन्दुओं पर स्थित नक्षत्रों में मानव की ‘मूल’ वृत्तियों को तीव्रता से उछालने की चिशेष क्षमता है। मूल वृत्तियों में शुभ- अशुभ दोनों ही प्रकार की वृत्तियों होती हैं। अस्तु, विचारकों ने सोचा कि हीनवृत्तियाँ विकास पाकर परेशानी का कारण भी बन सकती हैं। उन्हें निरस्त करने वाले, कुछ उपचार पहले ही किए जाएँ तो अच्छा है। इसलिए हीन, पाशविक संस्कारों को निरस्त करने वाले, श्रेष्ठ संस्कारों को उभारने में सहयोग कर सकने वाले कुछ जप- यज्ञादि उपचार किए जायें तो अच्छा है। जिन घरों में गायत्री उपासना, यज्ञ, बलिवैश्व आदि सुसंस्कार जनक क्रम सहज ही होते रहते हैं, वहाँ मूल शान्ति के निमित्त अलग से कुछ करना आवश्यक नहीं। जिन परिजनों में ऐसे कुछ नियमित क्रम नहीं हैं, उनमें मूल शान्ति के नाम पर कुछ उपचारों की लकीर पीटने मात्र से जातक की वृत्तियों पर कुछ उल्लेखनीय प्रभाव पड़ता नहीं है। इसीलिए शास्त्र मत है कि जिन परिवारों में ऋषि प्रणीत चर्चाएँ नियमित रूप से होती हों, उनमें मूलशान्ति की आवश्यकता नहीं पड़ती। मानवोचित गुणों के विकास के लिए जिन परिवारों में योजनाबद्ध प्रयास होते हों, वहाँ मूल युक्त जातक विशेष सौभाग्य के कारण बनते हैं।

नोट – मूल की शान्ति के लिए सुविधानुसार जन्म के ११ वें या २७वें दिन रुद्रार्चन, शिवाभिषेक व महामृत्युञ्जय की विधि सहित जप व गायत्री महामन्त्र का जप, हवन कराने से अभुक्त मूल शान्ति होती है। गायत्री महामन्त्र के २७,००० मन्त्र जप व महामृत्युञ्जय मन्त्र के ११०० मन्त्र जप करना अनिवार्य है।

गण्ड मूल के नक्षत्र व उनका फल

मूलवास- मनुष्य की योनि पाठशाला के छात्र जैसा है। चराचर जगत् पाठ्यपुस्तक है। नाना योनियाँ इस पाठ्यपुस्तक के नाना अध्याय अथवा पाठ्यक्रम है, जिन्हें जीवरूपी छात्र यथा योनि पढ़ता, परीक्षा (इम्तहान )) के लिये मानव योनि में प्रवेश पाता है। मानव योनि पूरक परीक्षा के क्षण हैं। जिस प्रकार परीक्षा स्थल पर परीक्षक ही प्रश्नपत्र तथा उत्तर पुस्तिका छात्र को प्रदान करता है, उसी प्रकार आत्मा रूपी परीक्षक भी परिस्थितियों का प्रश्नपत्र तथा जीवन उत्तरपुस्तिका स्वंय जीवरूपी छात्र को प्रदान करता है। मनुष्य की योनि परीक्षा के क्षण हैं। परीक्षा का समय जन्म से मृत्युपर्यन्त है। जिस प्रकार परीक्षाफल तीन प्रकार का होता है, यथा उत्तीर्ण (पास) होना, अनुत्तीर्ण होना अथवा कुछ थोड़ी कमी के कारण उसे थोड़े समय उपरान्त पुनः परीक्षा में फिर से परीक्षा में आना। इस जीवन परीक्षा में भी जीवरूपी छात्र को इन्हीं अवस्थाओं से होकर गुजरना पड़ेगा। उत्तीर्ण होने पर अनन्त की राह है। उसे अगली कक्षा में प्रवेश मिलेगा, यदि उत्तीर्ण नहीं हो पाया और फेल हो गया तो उसे पुनः सारा पाठ्यक्रम दुहराने के लिये यथा योनियों से गुजरना होगा। इसके उपरान्त ही पुनः परीक्षा के लिये मानव योनि में प्रवेश मिलेगा। अल्प त्रुटियों की अवस्था में उसे लगभग कतिपय योनियों के उपरान्त ही पुनःपरीक्षा हेतु मनुष्य की योनि प्रदान की जायेगी।

इसीलिये जब भी घर में शिशु का जन्म होता है, घर में सूतक (छूत) का वास होता है। मन्दिर,पूजा आदि बन्द कर दिये जाते हैं, बरहा मनाया जाता है इसका पृष्ठ रहस्य यही है कि जन्मने वाला शिशु हमारा ही पूर्वज है अल्प त्रुटियों से रह गया था,फिर अपने घर लौट आया। बरहा पूजन में प्रायश्चित पूजन भी करते है उसी में मूल शान्ति विधि भी पूरी कर लेते हैं। यद्यपि मूल का वास- माघ,आषाढ़,आश्विन, और भाद्रपद माह- आकाश में, कार्तिक, चैत, श्रावण और पौष माह- पृथ्वी में, फाल्गुन, ज्येष्ठ, मार्गशीर्ष और वैशाख माह- पाताल में होता है। ‘भूतले वर्तमाने तु ज्ञेयो दोषोऽन्यथा न हि।’ अर्थात् जब पृथ्वी में मूल का वास हो तभी मूलपूजन का क्रम करना चाहिये अन्यथा सामान्य यज्ञादि से भी बारह (बरहा) पूजन का क्रम पूरा कर लेना चाहिये।

प्रारम्भिक कर्मकाण्ड मंगलाचरण से रक्षाविधान तक पूर्ण करें। तत्पश्चात् संकल्प करें।

॥ सङ्कल्प॥

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य
विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्रीब्रह्मणो
द्वितीये परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे
भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्त्तैकदेशान्तर्गते……….क्षेत्रे……….मासानां मासोत्तमेमासे……….मासे……….पक्षे……….तिथौ……….वासरे
……….गोत्रोत्पन्नः………. नामाऽहं सत्प्रवृत्ति- संवर्द्धनाय,
दुष्प्रवृत्ति- उन्मूलनाय, लोककल्याणाय, आत्मकल्याणाय, वातावरण –
परिष्काराय, उज्ज्वलभविष्यकामनापूर्तये च प्रबलपुरुषार्थं करिष्ये,
अस्मै प्रयोजनाय च कलशादिआवाहितदेवता- पूजनपूर्वकम् गण्डान्त नक्षत्रजनित दोषोपसमानार्थं गण्डदोष मूलशान्ति कर्मसम्पादनार्थं सङ्कल्पं अहं करिष्ये।

पञ्चकलशों में पञ्चद्रव्यों के सहित पूजन करें।

मध्य कलश-
ॐ मही द्यौः पृथिवी च नऽ इमं यज्ञं मिमिक्षताम्।
पिपृतां नो भरिमभिः। -८.३२,१३.३२
पूर्व-
ॐ त्वं नोऽ अग्ने वरुणस्य विद्वान् देवस्य हेडो अव यासिसीष्ठाः।
यजिष्ठो वह्नितमः शोशुचानो विश्वा द्वेषा*सि प्र मुमुग्ध्यस्मत्। -२१.३
दक्षिण-
ॐ स त्वं नो अग्नेवमो भवोती
नेदिष्ठो अस्याऽ उषसो व्युष्टौ।
अव यक्ष्व नो वरुण*रराणो वीहि मृडीक*सुहवो नऽ एधि। -२१.४
उत्तर-
ॐ इमं मे वरुण श्रुधी हवमद्या च मृडय। त्वामवस्युरा चके।- २१.१
पश्चिम-
ॐ या वां कशा मधुमत्यश्विना सूनृतावती। तया यज्ञं मिमिक्षतम्।
उपयामगृहीतोस्यश्विभ्यां त्वैष ते योनिर्माध्वीभ्यां त्वा। -७.११
नमस्कार- दोनों हाथ जोड़ कर नमन- वन्दन करें।
ॐ नमस्ते सुरनाथाय, नमस्तुभ्यं शचीपते।
गृहाणं स्नानं मया दत्तं, गण्डदोषं प्रशान्तये॥

षोडशमातृका पूजन-
गौरी पद्मा शची मेधा, सावित्री विजया जया।
देवसेना स्वधा स्वाहा, मातरो लोकमातरः॥
धृतिः पुष्टिस्तथा तुष्टिः,आत्मनः कुलदेवता।
गणेशेनाधिका ह्येता, वृद्धौ पूज्याश्च षोडश॥
ॐ षोडशमातृकाभ्यो नमः। आ०स्था०,पू०

वास्तुपूजन- अनन्तं पुण्डरीकाक्षं, फणीशत विभूषितम्।
विद्युद्बन्धूक साकारं, कूर्मारूढं प्रपूजयेत्॥
नागपृष्ठं समारूढं, शूलहस्तं महाबलम् ।
पातालनायकम् देवं, वास्तुदेवं नमाम्यहम्॥
ॐ वास्तुपुरुषाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

नागपूजनम्-
ॐ नमोऽस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनु। ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।
वासुक्यादि अष्टकुल नागेभ्यो नमः॥आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

चौंसठयोगिनीपूजनम्-
दिव्यकुण्डलसंकाशा, दिव्यज्वाला त्रिलोचना।
मूर्तिमती ह्यमूर्ता चे,
उग्रा चैवोग्ररूपिणी॥
अनेकभावासंयुक्ता, संसारार्णवतारिणी।
यज्ञे कुर्वन्तु निर्विघ्नं, श्रेयो यच्छन्तु मातरः॥
दिव्ययोगी महायोगी, सिद्धयोगी गणेश्वरी।
प्रेताशी डाकिनी काली, कालरात्री निशाचरी॥
हुङ्कारी सिद्धवेताली, खर्परी भूतगामिनी।
ऊर्ध्वकेशी विरूपाक्षी, शुष्काङ्गी धान्यभोजनी॥
फूत्कारी वीरभद्राक्षी, धूम्राक्षी कलहप्रिया।
रक्ता च घोररक्ताक्षी, विरूपाक्षी भयङ्करी॥
चौरिका मारिका चण्डी, वाराही मुण्डधारिणी।
भैरव चक्रिणी क्रोधा, दुर्मुखी प्रेतवासिनी॥
कालाक्षी मोहिनी चक्री, कङ्काली भुवनेश्वरी।
कुण्डला तालकौमारी, यमूदूती करालिनी॥
कौशिकी यक्षिणी यक्षी, कौमारी यन्त्रवाहिनी।
दुर्घटे विकटे घोरे, कपाले विषलङ्घने॥
चतुष्षष्टि समाख्याता, योगिन्यो हि वरप्रदाः।
त्रैलोक्ये पूजिता नित्यं, देवामानुष्योगिभिः॥ १०॥
ॐ चतुःषष्टियोगिनीभ्यो नमः॥ आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

ब्रह्मापूजनम्-
ॐ ब्रह्म जज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्वि सीमतः सुरुचो वेनऽआवः।
सबुध्न्याऽउपमाअस्य विष्ठाःसतश्च योनिमसतश्च वि वः॥- १३.३
ॐ ब्रह्मणे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि।

विष्णुपूजनम्-
ॐ इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा नि दधे पदम्।
समूढमस्य पा * सुरे स्वाहा॥ ॐ विष्णवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि। -५.१५
शिव पूजनम्-
ॐ नमस्ते रुद्र मन्यवऽ, उतो त ऽ इषवे नमः। बाहुभ्यामुत ते नमः।
ॐ रुद्राय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥- १६.१

नवग्रहपूजनम्-
सूर्य- ॐ जपाकुसुमसंकाशं, काश्यपेयं महाद्युतिम ।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं, प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
ॐ आदित्याय विद्महे, दिवाकराय धीमहि।
तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्। ॐ सूर्याय नमः।

चन्द्र-
ॐ दधिशङ्खतुषाराभं, क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं, शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥
ॐ अत्रिपुत्राय विद्महे, सागरोद्भवाय धीमहि।
तन्नः चन्द्रः प्रचोदयात्। ॐ चन्द्राय नमः।

मङ्गल-
ॐ धरणीगर्भसम्भूतं, विद्युत्कान्तिसमप्रभम्॥
कुमारं शक्तिहस्तं च, मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ क्षितिपुत्राय विद्महे, लोहिताङ्गाय धीमहि।
तन्नो भौमः प्रचोदयात्। ॐ भौमाय नमः।

बुध-
ॐ प्रियङ्गु कलिकाश्यामं, रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं, तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे, रोहिणीप्रियाय धीमहि।
तन्नो बुधः प्रचोदयात्। ॐ बुधाय नमः।

गुरु- ॐ देवानां च ऋषीणां, च गुरुं काञ्चनसन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं, तं नमामि बृहस्पतिम्॥
ॐ अङ्गिरोजाताय विद्महे, वाचस्पतये धीमहि।
तन्नो गुरुः प्रचोदयात्। ॐ बृहस्पतये नमः।

शुक्र-
ॐ हिमकुन्द मृणालाभं, दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं, भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ भृगुवंशजाताय विद्महे,
श्वेतवाहनाय धीमहि।
तन्नः कविः प्रचोदयात्।
ॐ शुक्राय नमः।

शनि- ॐ नीलाञ्जन समाभासं, रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्त्तण्डसम्भूतं, तं नमामि शनैश्चरम्॥
ॐ कृष्णाङ्गाय विद्महे, रविपुत्राय धीमहि।
तन्नः शौरिः प्रचोदयात्। ॐ शनये नमः।

राहु- ॐ अर्धकायं महावीर्यं, चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसम्भूतं, तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ नीलवर्णाय विद्महे, सैंहिकेयाय धीमहि।
तन्नो राहुः प्रचोदयात्।
ॐ राहवे नमः।

केतु- ॐ पलाशपुष्पसङ्काशं, तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं, तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥
ॐ अन्तर्वाताय विद्महे, कपोतवाहनाय धीमहि।
तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
ॐ केतवे नमः।

।। पञ्चगव्यपूजन एवं सवत्सगोपूजनम्।।
गोदुग्धं गोमयक्षीरं, दधि सर्पिः कुशोदकम्।
निर्दिष्टं पञ्चगव्यं, पवित्रं मुनिः पुङ्गवैः॥

॥ नक्षत्र पूजन॥
जातक जिस नक्षत्र में जन्मा हो, उसी नक्षत्र के मन्त्र के साथ नक्षत्र पूजन करें।
1 अश्विनी-
ॐ या वां कशा मधुमत्यश्विना सूनृतावती।
तया यज्ञं मिमिक्षितम्॥ ॐ अश्विनीभ्यां नमः॥- २०.८०
2 आश्लेषा-
ॐ नमोऽस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनुयेऽन्तरिक्षे ये दिवितेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।
ॐ सर्पेभ्यो नमः॥- १३.६
3 मघा-
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधानमः पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। अक्षन् पितरोऽ मीमदन्त पितरोऽतीतृपन्त पितरः पितरः सुन्धध्वम्।
ॐ पितृभ्यो नमः॥- १९.३६

4 ज्येष्ठा-
ॐ सजोषाऽ इन्द्र सगणो मरुद्भिः सोमं पिब वृत्रहा शूर विद्वान्। जहि शत्रूँ२ऽ रप मृधोनुदस्वाथाभयं कृणुहि विश्वतो नः।
ॐ इन्द्राय नमः- ७.३७
5 मूल-
ॐ मातेव पुुत्रं पृथिवी पुरुषमग्नि* स्वे योनावभारुखा। तां विश्वै- र्देवैऋतुभिः संविदानः
प्रजापतिर्विश्वकर्मा वि मुञ्चतु।
ॐ नैऋतये नमः॥- १२.६१

6 रेवती-
ॐ पूषन् तव व्रतेवयंन रिष्येम कदा चन।
स्तोतारस्तऽ इह स्मसि। ॐ पूष्णे नमः॥- ३४.४१

सप्तधान्य पूजन-
ॐ अन्नपतेन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः।
प्रप्र दातारं तारिषऽ ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे। -११.८३
तत्पश्चात् सभी आवाहित देवताओं का षोडशोपचार विधि से पूजन पुरुषसूक्त (पृ० १८६-१९८) से करें।

।। पञ्चकलशों से सिञ्चन।।
पञ्चकलशों को पाँच सम्भ्रान्त व्यक्ति (महिला- पुरुष) ले लें तथा निम्न मंत्र के साथ जातक और उनके माता- पिता का सिञ्चन अभिषेक करें।
ॐ आपो हि ष्ठा मयोभुवः तानऽ ऊर्जे दधातन। महे रणाय चक्षसे।
ॐ यो वः शिवतमो रसः तस्य भाजयतेह नः। उशतीरिव मातरः।
ॐ तस्माऽ अरंगमाम वो यस्यक्षयाय जिन्वथ। आपो जनयथा च नः।

तत्पश्चात् यज्ञ का क्रम पूर्ण करें। गायत्री मन्त्र की २४ आहुतियाँ एवंं महामृत्युञ्जय मन्त्र से ५ आहुति दें, फिर विशेष आहुतियाँ समर्पित करें।

विशेष आहुति
नक्षत्र मन्त्राहुति-
ॐ नमस्ते सुरनाथाय नमस्तुभ्यं शचीपते।
गृहाणामाहुति मया दत्तं गण्डदोषप्रशान्तये, स्वाहा॥
इदं इन्द्राय इदं न मम। (तीन बार)
नवग्रह मन्त्राहुति

१ सूर्य गायत्री-
ॐ आदित्याय विद्महे, दिवाकराय धीमहि।
तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं सूर्याय, इदं न मम।

२ चन्द गायत्री- ॐ अत्रिपुत्राय विद्महे सागरोद्भवाय धीमहि।
तन्नः चन्द्रः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं चन्द्राय, इदं न मम।

३ मङ्गल गायत्री-

ॐ क्षितिपुत्राय विद्महे लोहिताङ्गाय धीमहि।
तन्नो भौमः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं भौमाय, इदं न मम।

४ बुध गायत्री-

ॐ चन्द्रपुत्राय विद्महे रोहिणीप्रियाय धीमहि।
तन्नो बुधः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं बुधाय, इदं न मम।

५ गुरु गायत्री-

ॐ अङ्गिरोजाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि।
तन्नो गुरुः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं बृहस्पतये, इदं न मम।

६ शुक्र गायत्री-

ॐ भृगुवंशजाताय विद्महे श्वेतवाहनाय धीमहि।
तन्नः कविः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं शुक्राय, इदं न मम।

७ शनि गायत्री-
ॐ कृष्णांगाय विद्महे रविपुत्राय धीमहि।
तन्नः शौरिः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं शनये, इदं न मम।

८ राहु गायत्री-
ॐ नीलवर्णाय विद्महे सैंहिकेयाय धीमहि।
तन्नो राहुः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं राहवे, इदं न मम।

९ केतु गायत्री- ॐ अन्तर्वाताय विद्महे
कपोतवाहनाय धीमहि।
तन्नः केतुः प्रचोदयात्, स्वाहा। इदं केतवे, इदं न मम।

तत्पश्चात् यज्ञ का शेष क्रम स्विष्टकृत्, पूर्णाहुति आदि सम्पन्न करें। उपस्थित सभी परिजन अभिषेक मन्त्र के साथ जातक और उनके माता- पिता को आशीर्वाद दें। कार्यक्रम समाप्त।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 11, 2021 at 7:44 am

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Rituals of Chautha & Tehravin – रसम पगड़ी – Rasam Pagri Ad Sampes of Newspaper

 

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

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नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

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नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army

निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

शोक संदेश या श्रद्धांजलि मैसेज का नमूना (Condolence message in hindi)
मित्र के माता-पिता के निधन पर शोक सन्देश
आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश
दोस्त के पति-पत्नी के मृत्यु पर शोक सन्देश
श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए

मित्र के माता के निधन पर शोक सन्देश (Condolence message for friend’s mother death)
नमूना #1

भाई राज,

मेरी भगवान से यही प्रार्थना हैं कि आंटी जी की आत्मा को शांति और पूरे परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति मिले।

मैं इस असहनीय दुःख की घड़ी में तुम्हारे साथ हूँ। अगर तुम्हें मेरी किसी भी मदद की आवश्यकता हो तो बिना किसी संकोच के मुझे बताना।

आंतरिक शोक के साथ,

condolence message in hindi

नमूना #2

आपकी माता जी कि मृत्यु का समाचार सुन कर बेहद दुःख हुआ। उनकी मृत्यु असहनीय है और उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता।

लेकिन भगवान की मर्ज़ी के बिना कुछ भी संभव नहीं है और भगवान को यही मंज़ूर था। लेकिन, आप अपने आपको अकेला न समझें। मैं आपके साथ हूँ और जल्द ही आपसे मिलने आ रहा हूँ।

इस मुश्किल की घड़ी में हिम्मत रखें। मेरी संवेदनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ॐ शांति।

नमूना #3

आपके पिता की मृत्यु की दुखद खबर को अभी तक मैं अपने दिल से निकाल नहीं पा रहा हूँ। आपको हुए इस नुकसान के लिए मुझे खेद है।

आपके पिता जी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो हमसे अलग नहीं हुए हैं बल्कि हमारे दिल और दिमाग में हमेशा जिंदा रहेंगे। इस कष्टकारी समय में ईश्वर आपको इस गम से लड़ने की ताकत और हौसला दे।

ईश्वर की कृपा आपके परिवार पर बनी रहे और आपके पिता जी की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

आकस्मिक निधन पर शोक सन्देश (Condolence message on accidental death)
नमूना #1

राहुल जी,

आपके बड़े भाई की अकस्मात हुई मृत्यु के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ।
उनकी उम्र अभी इस दुनिया से जाने की नहीं थी, लेकिन मृत्यु पर किसी का वश नहीं चला हैं।

विपत्ति के इस समय में मेरी सहानुभूति आपके साथ है। भगवान आपको इन्हे सहन करने की शक्ति दे।

शोकाकुल,
अविनाश त्रिपाठी,

shradhanjali images

नमूना #2

आपके मित्र के निधन के बारे में सुन कर गहरा दुःख हुआ। उनका स्थान जीवन में और कोई नहीं ले सकता। लेकिन, मृत्यु ही इस जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।

इसे बदला नहीं जा सकता। इस दुःख के समय में आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। आपको इस कष्ट को सहने का बल मिले।

सहेली के पति के मृत्यु पर शोक सन्देश (Condolence message for friend husband death)
नमूना #1

प्रिय आंचल,

तुम्हारे पति की अचानक मृत्यु की खबर सुन कर मैं अचंभित हूँ। वो बेहद भद्र और हंसमुख पुरुष थे। उनके अच्छे स्वभाव के कारण उन्हें हर कोई पसंद करता था।

जो बीत चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता। तुम्हारे जीवन में तुम्हारे पति की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। किंतु प्रिय सखी, अब बच्चे तुम पर आश्रित हैं और उनका ख्याल अब तुम्हें ही रखना है।

मेरी हार्दिक सहानुभूति तुम्हारे साथ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

आंतरिक शोक के साथ,

तुम्हारी सहेली,
रजनी सिंह

नमूना #2

शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना। एक बेहतरीन व्यक्ति के चले जाने से दुखी हूँ।

भगवान उनकी आत्मा को शांति दे!

श्रद्धांजलि मैसेज भारतीय सेना के लिए (Condolence message for Indian army)
नमूना #1

मौसम बदले, दुश्मन भी बदले,
लेकिन हमारे जावानों की जिम्मेदारियां कभी नहीं बदली।

शत शत नमन।

condolence message in hindi for indian army

नमूना #2

जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम भारत के वीरों का होगा।

Shradhanjali message for indian army
















 

 

रस्म पगड़ी – रस्म पगड़ी उत्तर भारत और पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों की एक सामाजिक रीति है, जिसका पालन हिन्दू, सिख और सभी धार्मिक समुदाय करते हैं। इस रिवाज में किसी परिवार के सब से अधिक उम्र वाले पुरुष की मृत्यु होने पर अगले सब से अधिक आयु वाले जीवित पुरुष के सर पर रस्मी तरीके से पगड़ी (जिसे दस्तार भी कहते हैं) बाँधी जाती है। क्योंकि पगड़ी इस क्षेत्र के समाज में इज़्जत का प्रतीक है, इसलिए इस रस्म से दर्शाया जाता है। परिवार के मान- सम्मान और कल्याण की जिम्मेदारी अब इस पुरुष के कन्धों पर है। साथ ही जो लोग पगड़ी पहनाते हैं, वे आश्वासन देते हैं कि भले ही घर के सबसे मह्त्वपूर्ण व्यक्ति का सहारा घर से छूट गया हो, अब इस घर के दुःख में, आवश्यकता में हम लोग साथ खड़े होंगे। इससे घर के जिम्मेदार व्यक्ति को खोने का शोक कम होता है। रस्म पगड़ी का संस्कार या तो अन्तिम संस्कार के तीसरे, चौथे दिन या फिर तेहरवीं को आयोजित किया जाता है। वैसे समयाभाव के कारण रस्म पगड़ी से पूर्व घर में तर्पण यज्ञादि का क्रम भी पूरा कर लेना चाहिए। पुरातन शास्त्रों में भी तीसरे- चौथे दिन आशौच शुद्धि हो जाती है। आने- जाने वाले परिजनों- परिवारीजनों को भी इस सामाजिक बन्धन से मुक्ति मिल जाती है। समय और परिस्थिति के अनुसार भी यही अनुकूल रहता है।
(यज्ञ- कर्मकाण्ड प्रकरण में दिये गये मन्त्रों का उपयोग करेंं)

मङ्गलाचरण, षट्कर्म, पृथ्वीपूजन, तिलक, कलावा, कलश व दीपपूजन, गुरु- गायत्री का आवाहन एवं स्वस्तिवाचन करें-
यम आवाहन-
ॐ सुगन्नुपन्थां प्रदिशन्नऽएहि ज्योतिष्मध्येह्यजरन्नऽआयुः।
अपैतु मृत्युममृतं मऽआगाद् वैवस्वतो नोऽ अभयं कृणोतु।
ॐ यमाय नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि॥

पितृ आवाहन- (दिवङ्गत आत्मा का चित्र)
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
पिता महेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः अक्षन्न पितरो मीमदन्तपितरो
तीतृपन्त पितरः पितरः सुन्धध्वम्।
ॐ पितृभ्यो नमः॥

सर्वदेव नमस्कारः, पञ्चोपचार / षोडशोपचारपूजनम्, स्वस्तिवाचनम् के बाद सामूहिक गायत्री मन्त्र का पाठ (१२ या २४ बार) करें।

प्रार्थना
मङ्गल मन्दिर खोलो
मङ्गल मन्दिर खोलो दयामय।
जीवन बीता बड़े वेग से,
द्वार खड़ा शिशु भोलो।
मिटा अँधेरा ज्योति प्रकाशित,
शिशु को गोद में ले लो।
नाम तुम्हारा रटा निरन्तर, बालक से प्रिय बोलो।
दिव्य आश से बालक आया, प्रेम अमिय रस घोलो ।।

परिजनों द्वारा कुल परम्परा के अनुसार तिलक, पगड़ी इत्यादि करें- तत्पश्चात् शान्तिपाठ कर पुष्पांजलि करते हुए सभी लोग परिवारजनों को आश्वस्त करते हुए बाहर होते हैं।


निधन पर शोक और श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए मैसेज का नमूना (Condolence RIP message sample images)

बेहतरीन शोक संदेश और गहरे श्रद्धांजलि मैसेज (Shradhanjali message) का उदाहरण – कुछ चीज़ें मनुष्य के हाथ में नहीं होती, उन्ही में से एक है किसी की मृत्यु। किसी क़रीबी के निधन का दुःख असहनीय होता है। ऐसे में आप अपनी सहानुभूति प्रकट करते हुये ‘शोक सन्देश’ भेज कर उनके दुःख को कुछ हद तक कम कर सकते हैं जिन्होंने अपने किसी खास को खोया है।

अच्छे कार्य करने वालो के निधन पर लोगों के समूहों द्वारा यथोचित श्रद्धांजलि भी दिया जाता है और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जाती है।

इससे आप उन्हें यह अहसास भी दिला सकते हैं कि इस कष्ट के लम्हों में आप उनके साथ हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में, कोई संदेश देने या लेने के लिये WhatsApp/SMS बहुत लोकप्रिय हो चुके है क्योंकि यह संचार का सबसे अच्छा साधन है। निचे यहाँ पर कुछ व्हाट्सऐप शोक संदेश (RIP message) शब्द और फोटो सहित दिया गया है।

किसी के निधन पर शोक कैसे व्यक्त करना है और उन्हें शोक या श्रद्धांजलि संदेश लिखते हुए आपको किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए:

निधन पर शोक संदेश कैसे लिखना चाहिए?
जिस भी व्यक्ति को आप यह शोक संदेश भेज रहे हों, उन्हें सामान्य रूप से सम्बोधित करें जैसे अगर वो बड़े हैं तो उन्हें श्री मान जी और छोटे हैं तो डिअर या प्रिय आदि लिखें।
आपको उस व्यक्ति के निधन का कितना दुःख हुआ है इस बात को शब्दों का रूप देने की कोशिश करें साथ ही उन्हें बताएं कि यह खबर आपको कहा से मिली।
अगर जिनका निधन हुआ है वो आपके क़रीबी है तो आप उनके साथ बिताये समय और यादों का जिक्र इस संदेश में कर सकतें है।
जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, उनको यह अहसास दिलाएं कि इस स्थिति में आप उनके साथ हैं साथ ही मदद का प्रस्ताव भी दे।

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रस्म पगड़ी – शोक सन्देश

अत्यन्त दुःख के साथ सुचित करना पड़ है कि हमारे पूजनीय पिताजी श्रीनारायण लाल बापलावत (मेंबर) पुत्रस्व. श्री रोडूराम जी का स्वर्गवास दिनांक 20.10.2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक 22.10.2017 रविवार को 1:00 से 3:00 तक सीताराम जी के मंदिर के पास ग्राम गोल्यावास मानसरोवर, जयपुर पर रखी गयी है। शोकाकुल:- रामेश्वरलाल, सूरजमल, लालाराम, भगवान सहाय, गोपाल, बाबू, राजेश, खेमचंद, कमलेश, नरेश (पुत्र), ग्यारसीलाल, प्रकाश, बनवारी, ताराचंद, सुरेश, रोशन, दीपक, सुनील, मनीष, लोकेश, अनुराग, अंशु, आशु (पौत्र), निखिल, प्रियांशु, प्रतीक (प्रपोत्र) एवं समस्त बापलावत परिवार। 9782363819, श्रीराम नर्सरी पत्रकार रोड गोल्यावास।

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूज्यनीय माताजी श्रीमतीशकुन्तला देवी (धर्मप|ीस्व. श्री मोतीलाल जी टोडवाल) का स्वर्गवास शुक्रवार 20 अक्टूबर 2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार 22 अक्टूबर 2017 को सांयकाल 4 से 5 बजे तक बालाजी मेरिज गार्डन सिरसी रोड, भांकरोटा पर होगी। शोकाकुल:- भंवरलाल, राधेश्याम, मोहन, सत्यनारायण, रामबाबू, नरेन्द्र, घनश्याम, नरेन्द्र, रामशरण (देवा), रामस्वरूप, अनिल, विनोद, सन्दीप (पुत्र), गोविन्द, पुरूषोतम (भतीजे) एवं समस्त टोडवाल परिवार। मोबाइल 8890038404, पीहरपक्ष- सूर्यप्रकाश, दीपक कुमार भीलवाड़ा।

मेरी सुपुत्री इन्द्रादेवी प|ीश्री सीताराम जी टोडावाल (चावन्डिया वाले) का आकस्मिक निधन दिनांक 18.10.2017 को हो गया है जिसकी पीहर पक्ष की तीये की बैठक दिनांक 22.10.2017 को आदर्श विद्या मंदिर, मंगेज सिंह पेट्रोल पम्प के पीछे, झोटवाडा़ में सांयकाल 3 से 3.30 बजे तक होगी शोकाकुल- लादूलाल- राजल देवी (माता- पिता), गुलाब देवी (ताईजी) रामनारायण- ममता, गिरिराज- अर्चना, पुरूषोत्तम- अंजना (भाई- भाभी) अनिता- हरिमोहन, शारदा- सत्यनारायण, सन्तोष- ओमप्रकाश, शान्ति- विजय, सुमन- नन्दकिशोर, ममता- विष्णु (बहन -बहनोई) अनामिका, पायल, आर्यन, हनी, तनिष्क (भतिजा- भतीजी) एंव पाटीडिया परिवार (भासू वाले)- 9929383685

हमारे पूजनीय श्रीमोहनदास सबधानी पुत्रस्वर्गीय श्री राधाकिशन सबधानी का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 17 को हो गया। तीये की बैठक 22. 10. 17 को सायं 4.30 बजे झूलेलाल मंदिर सेक्टर 5 हाउसिंग बोर्ड, शास्त्री नगर होगी। शोकाकुल- चन्दा देवी (प|ी), दिलीप-लता, वासदेव- पूनम (पुत्र- पुत्रवधू), ईश्वरलाल- जया, लक्ष्मणदास- मीना (भाई- भाभी), किशोर- रिया, कमलेश- रिद्वी (भतीजा- बहू), जितेश, कपिल (भतीजे), मनोहर- भारती (दामाद- पुत्री), मनीष- रितु (दामाद- भतीजी), भाविका- रवि (पौत्री- दामाद), मनीष, नमन (पौत्र), रेनु, काजल, दिव्यांशी (पौत्री), पदम, लविश, भव्य (दोहिता), खुशबू (दोहिता) एवं समस्त सबधानी परिवार, 9351787644, 9351787645

हमारे बहनोई श्रीलक्ष्मीनारायण जी घीवालों का आकस्मिक निधन 20-10-2017 को हो गया है, ससुराल पक्ष की बैठक दिनांक 22-10-2017 को 1:00 से 1:45 तक झूलेलाल मन्दिर, कंवर नगर पर होगी तत्पश्चात‌ अग्रसेन बगीची जायेगी, शोकाकुल- ताराचन्द, मोहिनी देवी, डॉ0 सीताराम-पुष्पा, राधेश्याम-शांती, सत्यनारायण-संतोष (साले-सालाएली) , शांती डेरेवाला, कान्ता-सतपाल जी (साली-साढू), कृष्ण गोपाल, गोपालकृष्ण, रामअवतार, उमेश, दीपक, देवेन्द्र, सौरभ (चूडीवाला) (भतीजे) एवं समस्त सीपरिया परिवार मोबाईल-9829286797

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरी प|ी श्रीमतीभंवरी देवी कास्वर्गवास 20. 10. 2017 को हो गया। तीये की बैठक 22. 10. 2017 रविवार को 2.00 से 4.00 तक मेरे निवास कालवाड़ (तालामोड़) अचरोल पर होगी। शोकाकुल- रेबड़ मणकस (पति), सेडूराम, भैरूराम, हनुमान सहाय पूर्व सरपंच काट, (जेठ) गज्जूराम, फूलाराम (देवर), मदनलाल, कानाराम, बाबूलाल, शंकरलाल, हरिनारायण (प्रदेश महामंत्री श्री देवनारायण जन- कल्याण संस्थान), रामनारायण, गोपाल, जगदीश, अशोक, कन्हैयालाल, धोलूराम, पायलेट, धारासिंह, अमरसिंह (पुत्र) कैलाश, सीताराम, हेमराज, दीपक, मनीष. इन्द्रराज, आर्मी, संदीप (पौत्र) एवं समस्त मणकस परिवार 7737456807, पिहर- बाबूलालजी चांड, शास्त्री नगर, जयपुर।

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरी धर्मप|ी श्रीमतीगीता कश्यप प|ीश्री एल.के. कश्यप का आकस्मिक स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया जिसकी तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 2017 को सांय 4 से 5 बजे निवास स्थान देव अपार्टमेंट, गौतम मार्ग, जे.एन. मिश्रा अस्पताल के सामने, हनुमान नगर, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- बालकिशन- निर्मल (भ्राता- भ्रातावधु), अमित- गगनदीप (पुत्र- पुत्रवधू), बच्चुसिंह- डिम्पल सिंह, कारेश- सोनिया, विनित- सिम्पल (पुत्री- दामाद), रजनी (पुत्री) एवं समस्त परिवारजन मित्रगण, 9414041594, 9001057100

हमारी पूजनीया श्रीमतीविमला देवी (धर्मप|ीगिरधारी लाल भादरिया( (जांगिड़)तह. अध्यक्ष चौमू मोरीजा का देहावसान 20. 10. 2017 को हो गया। सो तीये की बैठक 22. 10. 2017 को सायं 4 से 5 बजे तक खातियों की पक्की ढाणी, मोरीजा में होगी। शोकाकुल- प्रभूदयाल जी (जेठ), सीताराम, महेश, मुकेश, मिन्टटू जोगिन्द्र पुत्र एवं गोपाललाल, साधुराम, ताराचन्द, तेजपाल, शंकर, लक्ष्मीनारायण, ओमप्रकाश, मूलचन्द, बजरंग, शिवनारायण, सुरेन्द्र, मुरारी एवं समस्त भांदरिया (जांगिड़) परिवार. पक्की ढाणी, मोरीजा 9352946043, 9829624993

हमारी छोटी बहन श्रीमतीरेणु सक्सेना धर्मप|ीस्व. जितेन्द्र कुमार सक्सेना का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार दिनांक 22. 10. 2017 को शाम 4 बजे से 5 बजे तक 101, भृगु नगर, अजमेर रोड, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- प्रांशु (पुत्र), सुरेन्द्र सक्सेना (भ्राता), योगेश सक्सेना (भ्राता), कमलेश सक्सेना (बहन), नीरू सक्सेना (जीजी), रिषिकान्त सक्सेना (जीजाजी), सोनू, बिटिया (भान्जा- भान्जी)

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीय माताजी श्रीमतीनर्बदा देवी प|ीस्व. ठा. जगदीश सिंह शेखावत का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार 22. 10. 2017 को सांय 4.30 से 5.30 बजे तक के.के. पैराडाइज, बाल्टी फैक्ट्री के पास, आगरा रोड, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- ठा. लक्षमण सिंह, कैलाश सिंह, रमेश सिंह, विजय सिंह (पुत्र), जितेन्द्र सिंह, सुल्तान सिंह, अमर सिंह, अजय सिंह, शुभम सिंह, तुषार सिंह (पौत्र) एवं समस्त शेखावत परिवार। 9950557219, 8561045304

मेरे पूजनीय पिताजी श्रीसुमेर सिंह तंवर पुत्रस्व. श्री गोपाल सिंह का स्वर्गवास दिनांक 19.10.17 को हो गया है। तीये की बैठक 22.10.17 रविवार को निवास स्थान 141, श्याम नगर विस्तार नाड़ी का फाटक जयपुर पर सायं 4.30-5.30 बजे तक होगी। शोकाकुल- जोन्टी सिंह (पुत्र), ठा. श्रवण सिंह, देवी सिंह, बाबूसिंह, केसर सिंह, सुरज्ञान सिंह (भाई) एवं समस्त तंवर परिवार, ठिकाना नीम का थाना वाले, 9024363499, 9079051173

हमारे पूजनीय पिताजी श्रीलक्ष्मीनारायण जी अग्रवाल (घीवाले) पुत्र स्वर्गीय श्री नाथूलाल जी अग्रवाल का स्वर्गवास दिनांक 20-10-2017 को हो गया है, तीये की बैठक दिनांक 22-10-2017 रविवार को 1 बजे से 2 बजे तक अग्रसेन बगीची, चांदी की टकसाल, जयपुर पर होगी शोकाकुल श्रीमती पुष्पा देवी (धर्मप|ी), सीता देवी (भाभी), हनुमानप्रसाद, महेन्द्र (भतीजे), धर्मेन्द्र, याेगेन्द्र, मनीष (पुत्र), शान्ति देवी-स्व0 लल्लूनारायणजी (मोरीजा वाले), सुशीला देवी-सीताराम जी (खटाई वाले) (बहन-बहनोई), बबीता- महावीर जी पोद‌दार, रूचिता-विश्वजीत जी (बरखडी वाले) (पुत्री-दामाद), समस्त घी वाला परिवार 9829006685

हमारे पूजनीय जीजाजी श्रीलक्ष्मीनारायण जी (मुन्नाजी) सुपुत्र स्व0 श्री नाथुलाल जी घी वाले का स्वर्गवास दिनांक 20-10-2017 को हो गया है, जिनकी ससुराल पक्ष की तीये की बैठक दिनांक 22-10-2017 को दोपहर 1:00 बजे से 1:45 तक झूलेलाल मंदिर, कंवर नगर जयपुर पर होगी। तत्पश्चात‌ मुख्य बैठक अग्रसेन बगीची मे शामिल होगी शोकाकुल- श्रीमती कौशल्या देवी (सास), निरंजन (बबलू), संजय (साले), मंजू-विशम्भर दयाल, निर्मला-चन्द्रमोहन, सुनीता-मुकेश जी, मनीषा (पिंकी)-मुकेश (साली-साढू),एवम समस्त संघी परिवार मनोहरपुर वाले मोबाईल- 9782940723

हमारे पूजनीय पिताजी श्रीशशिकांत जी बंसल कास्वर्गवास हो गया तीये की बैठक 22-10-2017 को 04:00 से 05:00 अग्रवाल भवन चर्च के पास शिप्रा पथ मानसरोवर जयपुर पर होगी। शोकाकुल:- गीता देवी (धर्मप|ी) रजनीकान्त, मुन्नी देवी (भाई- भाभी), राकेश (सुपुत्र), निलम- विष्णु जी, मधु- मनीष जी, कुसुम- गोविन्द जी (पुत्री- दामाद) 9509676354

श्रीमतीरणजीत मरवाह प|ीस्व. श्री बलबीरसिंह मरवाह का स्वर्गवास दि. 20.10.2017 को हो गया है। तीये की बैठक रविवार दि. 22.10.2017 को सांय 4 से 5 बजे तक सामुदायिक भवन सेक्टर-5, SBI के पास गिरधर मार्ग, मालवीय नगर में होगी। शोकाकुल:- महेन्द्र सिंह, नरेन्द्र सिंह, अजीत सिंह मरवाह (पुत्र), आशा मरवाह (क्यूट पार्लर- पुत्रवधु), हरषित सिंह- निकिता, कर्ण सिंह (पौत्र) मीना- रमेश किनरा, दीप्ती- हेमन्त नारंग (पुत्रीयाँ- जवाई) एवं समस्त मरवाह परिवार। 9828125002

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीया माताजी श्रीमतीगीता देवी प|ीश्री बालचंदजी सवेदा ग्राम रूल्याना पट्टी (सीकर) का देवलोकगमन दिनांक 21. 10. 17 शनिवार को हो गया। शोकाकुल- महावीर प्रसाद, बनवारी, बिहारी (पुत्र), मदनलाल, गजानन्द (देवर), कैलाश (देवर पुत्र), पंकज, विवेक, सौरव, तरुण (पौत्र), किंशुक, हिरेन (पड़पौत्र) एवं समस्त सेवदा परिवार, 9829053808, 9414073608

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरे प्रिय पुत्र विकाससाहू पुत्ररामवतार साहू का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है जिसकी तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 2017 रविवार को सांय 3 से 4 बजे निवास स्थान- एफ-8-ए, किरण विहार पर होगी। शोकाकुल- मोतीलाल साहू (दादाजी), कमलेश साहू, किशन गोपाल (ताऊजी), मुकेश, उमाशंकर (चाचा), सत्यनारायण, राजेश, रवि, करण, हनी, कृष (भाई), वैभव, हर्षित (भतीजे) एवं समस्त कोरत्या परिवार। 9001524417, 9351762194

हमारी पूजनीया माताजी श्रीमतीलक्ष्मी देवी सोनी धर्मप|ीस्वर्गीय श्री भागीरथमल जी सोनी का देहावसान दिनांक 19/10/2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक दिना॑क 22/10/2017, रविवार को सायं 4 से 5 बजे तक रामेश्वरम महादेव मंदिर पार्क, जागृति विवाहस्थल के पीछे, श्रीरामनगर विस्तार, झोटवाड़ा जयपुर पर होगी। शोकाकुल: सत्यनारायण (देवर) मुरारीलाल- चन्दा देवी, महावीरप्रसाद- कोशल्या देवी (पुत्र- पुत्रवधु), चतरभुज, मोहनमुरारी, (भतीजे), सुनील कुमार- सुलोचना, अशोक- अरुणा (पौत्र- पौत्रवधु), मनोज, नवर|, सुरेन्द्र (पौत्र) मनीष, कार्तिक, कृष्णा(प्रपौत्र) भवानी (प्रपौत्री) एव॑ समस्त कुकरा परिवार, रामगढ़ शेखावाटी वाले।।मो. 9314836255,9829136255

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूजनीय पिताजी श्रीकिशनलाल सैनी कास्वर्गवास दिनांक 20. 10. 17 को हो गया है। तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 17 को 4.30 से 5.30 बजे हमारे निवास स्थान हसनपुरा-ए पर होगी। शोकाकुल- राजेन्द्र सैनी, बजरंग सैनी, रिंकू सैनी (भाई), करण (भतीजा)।

अत्यन्त दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरे प्रिय पुत्र विकाससक्सेना कास्वर्गवास 20-10-2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक 22-10-2017 रविवार को सांय 04:00 से 05:00 बजे तक हमारे निवास स्थान 92/171, पटेल मार्ग, मानसरोवर, जयपुर पर होगी। शोकाकुल:- कमलेन्द्र सक्सेना- ज्योति (माता- पिता), ममता (प|ी), अक्षित (पुत्र), नरेन्द्र, सुरेश, योगेन्द्र, सतीश (ताऊ), चंद्र प्रकाश (चाचा) एवं समस्त परिवार। 9587958420

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी आदरणीय बहन श्रीमतीसुशीला देवी प|ीश्री गजानन्द जी दुसाद का स्वर्गवास दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक 22. 10. 2017 को सांय 4 से 4.45 तक आदर्श विद्या मंदिर, अम्बाबाड़ी, जयपुर रखी गई है। शोकाकुल- रामोतार (चाचा), कैलाश, शंकरलाल (भाई), विष्णु, विशाल (भतीजा) एवं समस्त कुलवार (बोहरा) परिवार नायला वाले, 8854833419

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि श्रीमतीसुशीला देवी धर्मप|ीगजानन्द दुसाद का स्वर्गवास 20. 10. 2017 को हो गया है। जिनकी तीये की बैठक 22. 10. 2017 को सांय 4 से 5 बजे तक स्थान आदर्श विद्या मंदिर स्कूल अम्बाबाड़ी, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- रामानन्द, चौथमल, राधाकिशन, रामकिशोर, श्रीनारायण (जेठ), बाबूलाल, मोहनलाल (देवर), गंगाशरण, गौरीशंकर, देवशरण, नीरज, विनय, संजय, शिवम (पुत्र), रेखा- सुनिल, नीतु- प्रवीण (पुत्री- दामाद), महित, भाविन (दोहिते) एवं समस्त दुसाद परिवार (खोरा श्यामदास वाले), 9929712300, 9529379863

हमारी पूजनीय माताजी श्रीमतीगीता देवी प|ीस्व. श्री प्रकाशचन्द नानकानी (सिंधी- पंजाबी) दिनांक 20.10.2017 को स्वर्गवास हो गया है। जिनकी तीये की बैठक दिनांक 22.10.17 रविवार को निवास स्थान 3/625, मालवीया नगर के पास पार्क में सांय 5 बजे रखी गई है। शोकाकुल- धर्मेन्द्र (पुत्र), धर्मेन्द्र- जयकिशन (भतीजे), वर्षा- जय, खुशबु- दीपक, हेमा- हेमन्त, हर्षा- देवा (पुत्री- दामाद), समस्त नानकानी परिवार, 9636989139, 7737708168

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पिताजी डॉ.सुरेश कुमार सक्सैना कानिधन दिनांक 20. 10. 2017 को हो गया है। तीये की बैठक दिनांक 22. 10. 2017 को सांय 4.30 से 5.30 श्री गोपाल नगर, पालीवाल गार्डन, जेडीए पार्क (डॉ. यू.एस. अग्रवास के पास) पर रखी गई है। शोकाकुल- उषा (प|ी), राहुल- निशि, पुनीत- जयिता (पुत्र- पुत्रवधु), अतिष- मंजू (भाई- भाभी), नवीन- लक्ष्मी, अभिषेक- श्वेता, ओजस (भतीजे), सृष्टि, भव्य, वरिष्ठा, पूर्वीषा, लवांश (पौत्र- पौत्री), ननिहाल पक्ष- राजेन्द्र- शगुन, राकेश- स्वर्ण, मुकेश- साधना, दिनेश- राधिका, वंदना, संजय- आराधना (भाई- भाभी), निवास: 84, सुल्तान नगर, गुर्जर की थड़ी, जयपुर। 9829056625, 9314274769, 0141-2290632

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरी धर्मप|ि श्रीमतीइन्द्रा देवी गुप्ता कास्वगर्वास दिनांक 18/10/2017 को हो गया है जिनकी तीये की बैठक दिनांक 22/10/2017 को आदर्श िवद्या मंदिर, बोरिंग चौराहा, पेट्रोल पम्प के पीछे, झोटवाडा पर सांयकाल 3 से 4 बजे तक होगी शोकाकुल- सीताराम गुप्ता (पति) (पूर्व सरपंच चावन्डिया तहसील- मालपुरा, जिला टोंक) रामेश्वर प्रसाद (ससुर) जगदीश प्रसाद (जेठ) राजेश (देवर) नेहा- विकास जी (पुत्री- दामाद) नन्द किशोर, विकास, आशिष, विनोद, जानू (पुत्र) समर्थ (पौत्र) (टोेडारायसिंह वाले) Mobile- 7665333344, 9928482450

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूज्य पिताजी श्रीदिनेश सैन सुपुत्रस्व. श्री कैलाश सैन का निधन 17. 10. 2017 मंगलवार को हो गया। जिनकी बैठक 22. 10. 2017 रविवार को सांय 4 से 5 बजे तक ई-5/3, 36 क्वार्टस राजस्थान यूनिवर्सिटी कैम्पस, जयपुर पर होगी। शोकाकुल- भगवती देवी (धर्मप|ी), संदीप, रवि, पूजा, सोनाली (पुत्र- पुत्री), राधेश्याम, सुरेश, अशोक (चाचा), सत्यनारायण, विनोद, नरेश, मनीष (भ्राता) एवं समस्त बादशाह परिवार (मण्डावर वाले) 9929236781, 9024640787

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीय माताजी श्रीमतीसोनी देवी धर्मप|ीस्व.श्री दामोदर बाछल का स्वर्गवास दिनांक 20.10.2017 को हो गया है, जिनकी तीये की बैठक दिनांक 22.10.2017 को सांय 4 से 5 बजे हमारे निवास स्थान -110 दीपनगर, दादी का फाटक, झोटवाड़ा, जयपुर पर होगी,शोकाकुल- गिरधारीलाल (देवर), पूरण (भतीजा) अशोक, रमेश (पुत्र) एवं समस्त बाछल (बन्धेवाले)परिवारमो.9929556774, 7877779988

अत्यन्त दुख के साथ सूचित किया जाता है कि मेरी धर्मप|ी श्रीमतीचन्द्रकान्ता पाटोदिया कास्वर्गवास दिनांक 21 अक्टूबर को हो गया है। शवयात्रा दिनांक 22 अक्टूबर को सुबह 9 बजे मेरे निवास स्थान 4, पुष्पा पथ उनियारा गार्डन से आदर्श नगर मोक्षधाम जायेगी शोकाकुल : दामोदर दास पाटोदिया (पति) मदनलाल (भतीजा) उमेश, विकास (पौत्र) एवं समस्त पाटोदिया परिवार, शिवाड वाले

अत्यन्त दु:ख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूज्यनीय पिताजी श्रीश्रीराम गुप्ता कानिधन:17.10.2017 को हो गया है। जिनकी शोक सभा 22.10.2017 को सांय 4 से 5 बजे पिंकसिटी मैरिज गार्डन, आगरा रोड, जयपुर पर रखी है। शाेकाकुल- धापा देवी(धर्मप|ि), लक्ष्मीनारायण, शिम्भूदयाल, खेमराज, मुकेश अग्रवाल (पुत्र),पंकज, संजय, केके(CA), प्रदीप, गौरव, मयंक(पौत्र), वंश(प्रपौत्र) फर्म:- राज स्टील्स, रामा सैनेट्री, राज इलैक्ट्रीकल्स, रामाबुक डिपो। मो.9314407010, 9414200137

अत्यन्त दु:ख के साथ सुचित किया जाता है कि हमारे पूजनीय ठा.सा.श्री विक्रम सिंह जी शेखावत सुपुत्रस्व. श्री मदन सिंह जी शेखावत का स्वर्गवास दिनांक 19.10.2017 को हो गया है। हरि कीर्तन दिनांक 29.10. 2017 द्वादशा, पाग दस्तूर दिनांक 30.10.2017 का है। शोकाकुल- ठा.सा. पन्ने सिंह, भीम सिंह, शंकर सिंह, हनुमत सिंह, नरपत सिंह, शिवराज सिंह, श्योपाल सिंह, किशन सिंह (भ्राता), दीपेन्द्र सिंह (पुत्र), अतुल सिंह, जितेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, अचल सिंह, नरेन्द्र सिंह (भतीजे), निकूम्भ सिंह (पौत्र) एवं समस्त शेखावत परिवार हवेेली बुर्जहाला कोटड़ी मानपुरा माचैडी, जिला जयपुर (राज.) 09828561947

हमारे पूजनीय श्रीभरतलाल दुग्गल कास्वर्गवास 10.10.2017 को हो गया। तेरहवां 22.10.2017 (रविवार) को अखण्ड पाठ भोग प्रसाद, शीशी पूजन तथा पगड़ी रस्म सांय 3 बजे होगी। शोकाकुल : श्रीमती लीलाराणी (प|ी), प्रकाश दुग्गल- गुलशन, गुलशन दुग्गल- किरण, राजेश दुग्गल- उषा, कैलाश दुग्गल- अंजना, वनिता (भ्राता- भ्राताप|ी), नीलमराणी, नरगीस- कुलदीप, किरण (बहन- बहनोई), नरेश- हेमा, कमलेश- सोनिया, सुरेश (पुत्र- पुत्रवधु), वर्षा- नरेश, सीमा- नरेश (पुत्री- दामाद), साहिल, अक्षय, मोहित, महिमा, प्रशंसा (पौत्र- पौत्री) समस्त दुग्गल परिवार कांवट। 8107316611, 8441939700.

हमारे पूजनीय दादाजी श्री नरेन्द्र देव शुक्ला (सेवानिवृत्त उपजिलाधीश, जयपुर) का आकस्मिक निधन दिनांक 21.10.2017 को हो गया है। शवयात्रा सुबह 11:15 बजे हमारे निवास स्थान से चांदपोल मोक्षद्वार जाएगी। शोकाकुल : सरोजनी देवी (प|ी), अशोक, अरुण, विनोद कुमार शुक्ला (पुत्र), ओमप्रकाश, राजकुमार (भतीजे), नीरज, नवनीत, आनन्द, मनु, आशीष, शुभम, शिवम (पौत्र), जितेन्द्र तिवारी-मंजू (दामाद-पुत्री), कपिल दीक्षित-रुचि, राजेश तिवारी-कंचन (पौत्री दामाद-पौत्री) एवं समस्त शुक्ला परिवार। मो. : 9829394664.

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Anil Gupta
Very sad to hear the news of demise of your loving dad. May God rest his soul in peace and provide you and family the strength to bear this irreparable loss. Heartfelt Condolences.
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Mona Bedi
Our heartfelt condolences to all of you ! May his soul rests in peace🙏🏻🙏🏻
· 4w
DrRituVishal Gupta
Heartfelt Condolences 🙏🏼 May God grant peace to the departed soul and strength to the family to bear this irreparable loss..
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Deepika Ghai Goel
Irreparable loss…may his soul rest in peace🙏
· 4w
Amit Gupta
God gave peace to departed soul and strength to all family members to bear this great lose
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Upasana Handa
Condolences to u and ur family
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Uvasaggaharam Stotra with English and Hindi Meaning

‘उपसग्गहर स्तोत्र’ – अर्थ सहित ✿ Uvasaggaharam Stotra

Uvasaggaharam Stotra, composed by Acharya Bhadrabahu, is believed to eliminate obstacles, hardships, and miseries, if chanted with complete faith. This is the prayer to the 23rd Tirthankar Lord Parshwanath. This Stotra should be chanted while sitting in Padmasan facing either east or north direction. One can recite it everyday.

Uvasaggaharam Päsam, Päsam Vandämi Kamma-ghan-mukkam;
Visahar-vis– ninnäsam, Mangal Kallän Äväsam (1)

Translation: I bow to Lord Parshwanath, who is attended by the distress removing Parshwa deity, who is free from all types of Karma, who is the destroyer of the poisonous defilements and who is the abode of bliss and well being.

Visahar-fuling Manatam, Kanthe Dharei Jo Sayä Manuo;
Tassa Gah Rog Märi, Duttha-Jarä Janti Uvasämam. (2)

Translation: If one always holds in his neck the charm of Visaharfulling, his evil planetary effects, disease, epidemics and acute fever are calmed down. There is an 18 letter Visaharfulling Mantra associated with the name of Pärshwanäth, which is considered effective against all types of pain and affliction. The Mantra is: Namiuna Päsa Visahara Vasaha Jina Fullinga.

Chitthau Dure Manto, Tujza Panamo Vi Bahu-falo Hoi;
Naratiriesu Vi Jivä, Pävanti Na Dukkha-Dogachcham (3)

Translation: Let aside that charm, obeisance to you also would be highly fruitful; (thereby) humans and animals too would not get misery or evil state. The darkness disappears with the rise of the sun. But prior to sunrise there is the twilight of the morning, which removes the darkness of the night. Similarly, the above said Mantra would, no doubt, remove the pain and distress, but even the obeisance to the Lord can avert such affliction.

Tuha Sammatte Laddhe, Chintämani Kappa-Päyavabbhahie;
Pävanti Avigghenam, Jivä Ayaramaram Thänam. (4)

Translation: By gaining the right perception laid by you, which is superior to the desire yielding jewel and the desire yielding tree, souls easily attain the unaging, immortal state.

Ea Santhuo Mahäyas, Bhatti-bbhar-nibbharen Hiyaenam;
Tä Dev Dijza Bohim, Bhave Bhave Päs Jinachanda (5)

Translation: Oh. Highly esteemable Lord, I have thus prayed to you with the heart flowing with devotion; hence Omniscient Parshwa Lord, bestow the wisdom to me in every life.

 

उवसग्गहरं- पासं, पासं वंदामि कम्म-घण मुक्कं ।
विसहर विस निन्नासं, मंगल कल्लाण आवासं ।।१।।

अर्थ : प्रगाढ़ कर्म – समूह से सर्वथा मुक्त, विषधरो के विष को नाश करने वाले, मंगल और कल्याण के आवास तथा उपसर्गों को हरने वाले भगवन पार्शवनाथ के में वंदना करता हूँ !

विसहर फुलिंग मंतं, कंठे धारेइ जो सया मणुओ ।
तस्स गह रोग मारी, दुट्ठ जरा जंति उवसामं ।।२।।

अर्थ : विष को हरने वाले इस मन्त्ररुपी- स्फुलिंग को जो मनुष्य सदेव अपने कंठ में धारण करता है, उस व्यक्ति के दुश ग्रह, रोग बीमारी, दुष्ट, शत्रु एवं बुढापे के दुःख शांत हो जाते है !

चिट्ठउ दुरे मंतो, तुज्झ पणामो वि बहु फलो होइ ।
नरतिरिएसु- वि जीवा, पावंति न दुक्ख-दोगच- चं।।३।।

अर- थ : हे भगवान्! आपके इस विषहर मन्त्र की बात तो दूर रहे, मात्र आपको प्रणाम करना भी बहुत फल देने वाला होता है ! उससे मनुष्य और तिर्यंच गतियों में रहने वाले जीव भी दुःख और दुर्गति को प्राप्त नहीं करते है !

तुह सम्मत्ते लद्धे, चिंतामणि कप्पपाय वब्भहिए ।
पावंति अविग्घेणं, जीवा अयरामरं ठाणं ।।४।।

अर्थ : वे व्यक्ति आपको भलीभांति प्राप्त करने पर, मानो चिंतामणि और कल्पवृक्ष को पा लेते हैं, और वे जीव बिना किसी विघ्न के अजर, अमर पद मोक्ष को प्राप्त करते है!

इअ संथुओ महायस, भत्तिब्भर निब्भरेण हिअएण ।
ता देव दिज्ज बोहिं, भवे भवे पास जिणचंद ।।५।।

अर्थ : हे महान यशस्वी ! मैं इस लोक में भक्ति से भरे हुए हृदय से आपकी स्तुति करता हूँ! हे देव! जिन चन्द्र पार्शवनाथ ! आप मुझे प्रत्येक भाव में बोधि (रत्नत्रय) प्रदान करे!

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Uvasagharam Stotra Ke Fayde

उवसग्गहरं स्तोत्र का विस्तार से वर्णन

उवसग्गहरं स्तोत्र अलग अलग गाथा में प्रचलित है.
इस स्तोत्र की रचना प्राकृत भाषा के “गाहा” छंद में हुई है.

(जैन श्रुत ज्ञान में “गाहा” छंद का उपयोग खूब हुआ है).

१. ज्यादा प्रचलित : ५ गाथा वाला स्तोत्र
२. कम प्रचलित : ९, १३, १७ और २१ गाथा वाला स्तोत्र
३. अति प्रभावशाली पर कम प्रचलित : २७ गाथा वाला (बीजाक्षर सहित) स्तोत्र

इस स्तोत्र की महिमा शब्दों में बताना असंभव जैसा है.

 

कौनसा स्तोत्र गिनें :

वो इस बात पर निर्भर करता है कि हम स्तोत्र क्यों गिनना चाह रहे है.
यदि आप बाधाओं में घिरे हुए हैं- तो छोटा स्तोत्र गिने.
यदि आप विशिष्ट कार्य करना चाहते हैं – तो बड़ा स्तोत्र गिने.

चूँकि सभी लोग “बीजाक्षर” का उच्चारण शुद्ध नहीं कर पाते,
इसलिए किसी आचार्य ने ५ गाथा वाले “उवसग्गहरं” स्तोत्र को ही
२७ बार गिनने का विधान बनाया है.

२७ बार उवसग्गहरं स्तोत्र क्यों गिना जाता है,
वो मैंने
“उवसग्गहरं महाप्रभाविक स्तोत्र” वाली अन्य
पोस्ट में बताया है.

 

विशेष : उवसग्गहरं स्तोत्र गुणने की विधि
पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर में

उवसग्गहरं स्तोत्र ३ बार पढ़ने

(होंठ हिलाते हुए बस इतना आवाज निकालें की सिर्फ स्वयं को सुनाई दे).
और
“नमिउण पास विसहर वसह जिण फुलिंग”
मंत्र की एक माला फेरने से
आपको वो मिलता है, जो आप चाहते है.
और वो भी मिलता है, जो आप अभी “सोच” भी नहीं सकते.

=====================

 

भगवान पार्श्वनाथ को प्रसन्न करने वाला उवसग्गहरं स्तोत्र >

उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्म-घण मुक्कं ।
विसहर विस निन्नासं, मंगल कल्लाण आवासं ।।1।।

अर्थ : प्रगाढ़ कर्म- समूह से सर्वथा मुक्त, विषधरों के विष को नाश करने वाले, मंगल और कल्याण के आवास तथा उपसर्गों को हरने वाले भगवान पार्श्वनाथ को मैं वंदना करता हूं !

विसहर फुलिंग मंतं, कंठे धारेइ जो सया मणुओ ।
तस्स गह रोग मारी, दुट्ठ जरा जंति उवसामं ।।2।।

अर्थ : विष को हरने वाले इस मंत्ररूपी स्फुलिंग को जो मनुष्य सदैव अपने कंठ में धारण करता है, उस व्यक्ति के दुश ग्रह, रोग बीमारी, दुष्ट, शत्रु एवं बुढापे के दुःख शांत हो जाते है !

चिट्ठउ दुरे मंतो, तुज्झ पणामो वि बहु फलो होइ ।
नरतिरिएसु वि जीवा, पावंति न दुक्ख-दोगच्चं।।3।।
अर्थ :
हे भगवान ! आपके इस विषहर मंत्र की बात तो दूर रहे, मात्र आपको प्रणाम करना भी बहुत फल देने वाला होता है ! उससे मनुष्य और तिर्यंच गतियों में रहने वाले जीव भी दुःख और दुर्गति को प्राप्त नहीं करते है!

तुह सम्मत्ते लद्धे, चिंतामणि कप्पपाय वब्भहिए ।
पावंति अविग्घेणं, जीवा अयरामरं ठाणं ।।4।।
अर्थ :
वे व्यक्ति आपको भलीभांति प्राप्त करने पर, मानो चिंतामणि और कल्पवृक्ष को पा लेते हैं और वे जीव बिना किसी विघ्न के अजर, अमर पद मोक्ष को प्राप्त करते है!

इअ संथुओ महायस, भत्तिब्भर निब्भरेण हिअएण ।
ता देव दिज्ज बोहिं, भवे भवे पास जिणचंद ।।5।।
अर्थ :
हे महान यशस्वी ! मैं इस लोक में भक्ति से भरे हुए हृदय से आपकी स्तुति करता हूं! हे देव! जिन चंद्र पार्श्वनाथ ! आप मुझे प्रत्येक भाव में बोधि (रत्नत्रय) प्रदान करें !

 

उवसग्गहरं महाप्रभाविक स्तोत्र रहस्य

“उवसग्गहरं” स्तोत्र

 

कुछ लोग रोज इसे 27 बार गिनते हैं.

फिर भी “समस्याओं” का

वो समाधान नहीं मिलता जो मिलना चाहिए.

इसका मतलब “मूल” में ही कहीं “भूल” है.

1. रोज 27 उवसग्गहरं गिनने वाले (“गुणनेवाले” नहीँ )
ज्यादातर श्रावक मात्र “संख्या” पूरी करते हैं.

2. उच्चारण में अनेक अशुद्धियाँ भी एक बड़ा कारण है.

 

3. वर्षों से स्तोत्र पूरा पढ़ते हैं पर स्तोत्र पढ़ते समय
कभी पार्श्वनाथ भगवान की छवि चित्त में नहीं आती.

इसे ऐसा ही समझें कि “बच्चा रटकर”
परीक्षा में “मार्क्स” (संख्या पूरी करने जैसा) हर साल ला रहा है,
पर उसे पढ़ने में “मजा” कुछ नहीं आ रहा.

ज्यादा मार्क्स डर, शर्म और हीन भावना ना आये, इसलिए ला रहा है.

तो फिर “प्राप्त” क्या हुआ?

कुछ नहीं. बस एक “संतोष” है कि अच्छे “मार्क्स” मिल गए.

ज्यादातर मंत्र जप करनेवालों की भी यही स्थिति है.

अधिकतर उपसर्ग (दूसरे के कारण उत्पन्न बाधाये )

पूर्व जन्म के कर्म/बैर के कारण आते हैं.

उपसर्ग उदय में आते समय बड़ी “फ़ोर्स” से आता है.
उस समय बुद्धि काम नहीं करती.

 

कुछ महत्त्वपूर्ण बातें

जिससे निर्णय होगा कि वर्तमान परिस्थिति उपसर्ग है
या कुछ और:

१. अचानक से तबियत का बहुत ज्यादा बिगड़ना-उपसर्ग है.

(उम्र ज्यादा होने के कारण सामान्य रूप से मेडिकल टेस्ट करवाने गए
और रिपोर्ट में कैंसर आया तो वो उपसर्ग नहीं है-वो अशुभ कर्म का उदय है

-ज्यादा उम्र के कारण मृत्यु नज़दीक ही होती है).

२. अचानक से बहुत बड़ा नुक्सान होना, जिसकी कोई आशंका नहीं थी.

(ये उपसर्ग है)

३. सब कुछ अच्छा था, पर धीरे धीरे सब बिगड़ रहा हो.
(जैसे धंधे में उन्नति नहीं होकर, नफे का दिन-ब-दिन कम होना-

ये उपसर्ग नहीं है- ये “पुण्य क्षय” होने के लक्षण हैं).

“उवसग्गहरं” स्तोत्र 27 बार गिनने के पीछे क्या रहस्य है?

 

एक महीने में 27 नक्षत्र होते हैं.

पूरा महीना अच्छा जाए,
इसके लिए 27 उवसग्गहरं “गुणने” की परंपरा है.

(गुणना किसे कहते हैं, इसके लिए मेरी आने वाली पोस्ट पढ़ें)

क्या दिन में मात्र 3 बार गुणने से ज्यादा लाभ मिल सकता है?
उत्तर है : हाँ

सिर्फ 3 उवसग्गहरं ही रोज गिनें,
पर

1. बड़ी श्रद्धा के साथ,
2. शान्ति से,

3. पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर में,

या

घर में पार्श्वनाथ भगवान की फोटो के सामने बड़ी प्रसन्नता से !

 

भगवान की श्रेष्ठ पूजा मंदिर में ही होती है –

क्योंकि वहां वातावरण शुद्ध होता है-

चन्दन, केसर, बराश (कपूर), दूध, घी, सुगन्धित अगरबत्ती, दीपक
इत्यादि के कारण अधिष्ठायक देव आकर्षित होते हैं.

(और शुभ भी – जरा प्रतिमाजी के पीछे मंदिर की दीवारों को गौर से देखें….

आपको सोने चांदी का काम किया हुआ मिलेगा).

जिस प्रकार व्यक्ति अपना धंधा स्वयं करता है,

उसी प्रकार पूजन अर्चन भी स्वयं करना चाहिए.

(पंडित से नहीं)
तभी विशेष लाभ मिलता है.

इस पोस्ट को ३-४ बार पढ़ें तो और अच्छी तरह समझ में आएगा कि
उवसग्गहरं महास्तोत्र का रहस्य क्या है.

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चन्द्रचूडाला अष्टकम – Chandrachudala Ashtakam

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 7, 2021 at 6:40 am

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Maha Kailasha Ashtottara Shata Namavali

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Baal Mukundashtakam in Gujarati

Baal-Mukundashtakam-Gujarati-બાલમુકુંદાષ્ટકમ

કરારવિંદેન પદારવિંદં મુખારવિંદે વિનિવેશયંતમ |
વટસ્ય પત્રસ્ય પુટે શયાનં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 1 ||
સંહૃત્ય લોકાન્વટપત્રમધ્યે શયાનમાદ્યંતવિહીનરૂપમ |
સર્વેશ્વરં સર્વહિતાવતારં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 2 ||
ઇંદીવરશ્યામલકોમલાંગમ ઇંદ્રાદિદેવાર્ચિતપાદપદ્મમ |
સંતાનકલ્પદ્રુમમાશ્રિતાનાં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 3 ||
લંબાલકં લંબિતહારયષ્ટિં શૃંગારલીલાંકિતદંતપંક્તિમ |
બિંબાધરં ચારુવિશાલનેત્રં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 4 ||
શિક્યે નિધાયાદ્યપયોદધીનિ બહિર્ગતાયાં વ્રજનાયિકાયામ |
ભુક્ત્વા યથેષ્ટં કપટેન સુપ્તં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 5 ||
કલિંદજાંતસ્થિતકાલિયસ્ય ફણાગ્રરંગેનટનપ્રિયંતમ |
તત્પુચ્છહસ્તં શરદિંદુવક્ત્રં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 6 ||
ઉલૂખલે બદ્ધમુદારશૌર્યમ ઉત્તુંગયુગ્માર્જુન ભંગલીલમ |
ઉત્ફુલ્લપદ્માયત ચારુનેત્રં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 7 ||
આલોક્ય માતુર્મુખમાદરેણ સ્તન્યં પિબંતં સરસીરુહાક્ષમ |
સચ્ચિન્મયં દેવમનંતરૂપં બાલં મુકુંદં મનસા સ્મરામિ || 8 ||

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Ram Bhajan Stuti Gujarati Lyrics

Ram-Bhajan-Stuti

શ્રી રામચંદ્ર કૃપાળુ ભજમન હરણ ભવભય દારૂણમ,
નવ કંજ લોચન કંજ મુખ કર, કંજ પદ કંજારૂણમ

કંદર્પ અગણિત અમિત છબી નવ નીલ નીરજ સુંદરમ,
પટ પીત માનહુ તડીત રૂચિસુચિ નવમી જનકસુતાવરમ

ભજ દીન બંધુ દિનેશ દાનવ દૈત્ય વંશ નિકંદનમ,
રઘુનંદ આનંદ કંદ કૌશલ ચંદ્ર દશરથ નંદનમ

શિર મુકુટ કુંડલ તિલક ચારુ ઉદાર અંગ વિભૂષણમ,
આજાન્ ભૂજ શર ચાપ ધર સંગ્રામ જીત ખર દુષણમ

ઈતિ વદતિ તુલસીદાસ શંકર શેષ મુનિજન રંજનમ,
મમ હૃદયકુંજ નિવાસ કુરુ કામાદી ખલ દલ ગંજનમ

 

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Vishnu Sahasra Namavali In Gujarati Lyrics

શ્રી વિષ્ણુ સહસ્ત્રનામ સ્તોત્ર-Vishnu-Sahastra-Naam-Stotra-Gujarati

 

શ્રી વિષ્ણુ ભગવાન નું ધ્યાન (શરૂઆતમાં ભગવાન વિષ્ણુ નું ધ્યાન કરવા માટે નો આ શ્લોક છે)

શાંતાકારમ ભુજગ શયનમ પદ્મ નાભમ સુરેશમ
વિશ્વાધારમ ગગન સદ્રશમ મેઘ વરણમ શુભાંગમ,
લક્ષ્મીકાન્તમ કમલ નયનમ યોગીર્ભિધ્યા નગમ્યમ
વંદે વિષ્ણુમ ભવભય હરમ સર્વલોકઈકનાથમ

શ્રી પરમાત્મને નમઃ
અથઃ શ્રી વિષ્ણુ સહસ્ત્ર નામમ

(નોંધ-આ આગળ ના ૧૫-શ્લોક એ -વિષ્ણુ સહસ્ત્રનામ નો પૂર્વ-ભાગ છે.કે જેમાં ભીષ્મ અને યુધિષ્ઠિર સંવાદ છે)
શ્રી વિષ્ણુ ના સહસ્ત્રનામ ના શ્લોકો એ આ પંદર શ્લોક પછી ચાલુ થાય છે.
ઘણા લોકો ત્યાંથી પણ વિષ્ણુ સહસ્ત્રનામ નો પાઠ – ૧૦૮-શ્લોક-ચાલુ કરે છે)

યસ્ય સ્મરણમાત્રેણ જન્મસંસારબંધનાત્‌.
વિમુચ્યતે નમસ્તસ્મૈ વિષ્ણવે પ્રભવિષ્ણવે—1

નમઃ સમસ્તભૂતાનામાદિભૂતાય ભૂભૃતે.
અનેકરૂપરૂપાય વિષ્ણવે પ્રભવિષ્ણવે——–2

વૈશમ્પાયન ઉવાચ

શ્રુત્વા ધર્માનશેષેણ પાવનાનિ ચ સર્વશઃ.
યુધિષ્ઠિરઃ શાંતનવં પુનરેવાભ્યભાષત—–3

યુધિષ્ઠિર ઉવાચ

કિમેકં દૈવતં લોકે કિં વાપ્યેકં પરાયણમ્‌.
સ્તુવન્તઃ કં કમર્ચન્તઃ પ્રાપ્રુયુર્માનવાઃ શુભમ્‌ –4

કો ધર્મઃ સર્વધર્માણાં ભવતઃ પરમો મતઃ.
કિં જપન્‌ મુચ્યતે જન્તુર્જન્મસંસારબન્ધનાત્‌ –5

ભીષ્મ ઉવાચ

જગત્પ્રભું દેવદેવમનન્તં પુરુષોત્તમમ્‌.
સ્તુવન્‌ નામસહસ્રેણ પુરુષઃ સતતોત્થિતઃ –6

તમેવ ચાર્ચયન્‌ નિત્યં ભક્ત્યા પુરુષમવ્યયમ્‌.
ધ્યાયન્‌ સ્તુવન્‌ ન મસ્યંશ્ચ યજમાનસ્તમેવ ચ –7

અનાદિનિધનં વિષ્ણું સર્વલોકમહેશ્વરમ્‌.
લોકાધ્યક્ષં સ્તુવન્‌ નિત્યં સર્વદુઃખાતિગો ભવેત્‌ –8

બ્રહ્મણ્યં સર્વધર્મજ્ઞં લોકાનાં કીર્તિવર્ધનમ્‌.
લોગનાથં મહદ્ભૂતં સર્વભૂતભવોદ્ભવમ્‌ ——9
એષ મે સર્વધર્માણાં ધર્મોઽધિકતમો મતઃ.
યદ્ભક્ત્યા પુણ્ડરીકાક્ષં સ્તવૈરર્ચેન્નરઃ સદા –10

પરમં યો મહત્તેજઃ પરમં યો મહત્તપઃ.
પરમં યો મહદ્બ્રહ્મ પરમં યઃ પરાયણમ્‌ —-11

પવિત્રાણાં પવિત્રં યો મંગલાનાં ચ મંગલમ્‌.
દૈવતં દેવતાનાં ચ ભૂતાનાં યોઽવ્યયઃ પિતા –12

યતઃ સર્વાણિ ભૂતાનિ ભવન્ત્યાદિયુગાગમે.
યસ્મિંશ્ચ પ્રલયં યાન્તિ પુનરેવ યુગક્ષયે —13

તસ્ય લોકપ્રધાનસ્ય જગન્નાત્રસ્ય ભૂપતે.
વિષ્ણોર્નામસહસ્રં મે શ્રૃૃણુ પાપભયાપહમ્‌ —14

યાનિ નામાનિ ગૌણાનિ વિખ્યાતાનિ મહાત્મનઃ.
ઋષિભિઃ પરિગીતાનિ તાનિ વક્ષ્યામિ ભૂતયે —15

(વિષ્ણુ ના “સહસ્ત્ર નામ” અહીંથી શરુ થાય છે-ઘણા પાઠ અહીંથી પણ ચાલુ કરે છે)

ૐ વિશ્વં વિષ્ણુર્વષટ્કારો ભૂતભવ્યભવત્પ્રભુઃ.
ભૂતકૃદ્ ભૂતભૃદ્ ભાવો ભૂતાત્મા ભૂતભાવનઃ ….૧

પૂતાત્મા પરમાત્મા ચ મુક્તાનાં પરમા ગતિઃ.
અવ્યયઃ પુરુષઃ સાક્ષી ક્ષેત્રજ્ઞોઽક્ષર એવ ચ ….૨

યોગો યોગવિદાં નેતા પ્રધાનપુરુષેશ્વરઃ.
નારસિંહવપુઃ શ્રીમાન્‌ કેશવઃ પુરુષોત્તમઃ….૩

સર્વઃ શર્વઃ શિવઃ સ્થાણુર્ભૂતાદિર્નિધિરવ્યયઃ.
સમ્ભવો ભાવનો ભર્તા પ્રભવઃ પ્રભુરીશ્વરઃ …૪

સ્વયમ્ભૂઃ શમ્ભુરાદિત્યઃ પુષ્કરાક્ષો મહાસ્વનઃ.
અનાદિનિધનો ધાતા વિધાવા ધાતુરુત્તમઃ ….૫

અપ્રમેયો હૃષીકેશઃ પદ્મનાભોઽમરપ્રભુઃ.
વિશ્વકર્મા મનુસ્ત્વષ્ટા સ્થવિષ્ઠઃ સ્થવિરો ધ્રુવઃ ….૬

અગ્રાહ્યઃ શાશ્વતઃ કૃષ્ણો લોહિતાક્ષઃ પ્રતર્દનઃ.
પ્રભૂતસ્ત્રિકકુબ્ધામ પવિત્રં મંગલં પરમ્‌ ……૭

ઈશાનઃ પ્રાણદઃ પ્રાણો જ્યેષ્ઠઃ શ્રેષ્ઠઃ પ્રજાપતિઃ.
હિરણ્યગર્ભો ભૂગર્ભો માધવો મધુસૂદનઃ ………૮

ઈશ્વરો વિક્રમી ધન્વી મેધાવી વિક્રમઃ ક્રમઃ.
અનુત્તમો દુરાધર્ષઃ કૃતજ્ઞઃ કૃતિરાત્મવાન્‌……૯

સુરેશઃ શરણં શર્મ વિશ્વરેતાઃ પ્રજાભવઃ.
અહઃ સંવત્સરો વ્યાલઃ પ્રત્યયઃ સર્વદર્શનઃ …..૧૦

અજઃ સર્વેશ્વરઃ સિદ્ધઃ સિદ્ધિઃ સર્વાદિરચ્યુતઃ.
વૃષાકપિરમેયાત્મા સર્વયોગવિનિઃસૃતઃ ….૧૧

વસુર્વસુમનાઃ સત્યઃ સમાત્મા સમ્મિતઃ સમઃ.
અમોઘઃ પુણ્ડરીકાક્ષો વૃષકર્મા વૃષાકૃતિઃ …..૧૨

રુદ્રો બહુશિરા બભ્રુર્વિશ્વયોનિઃ શુચિશ્રવાઃ.
અમૃતઃ શાશ્વતઃ સ્થાણુર્વરારોહો મહાતપાઃ ……૧૩

સર્વગઃ સર્વવિદ્ભાનુર્વિષ્વક્સેનો જનાર્દનઃ.
વેદો વેદવિદવ્યંગો વેદાંગો વેદવિત્‌ કવિઃ …..૧૪

લોકાધ્યક્ષઃ સુરાધ્યક્ષો ધર્માધ્યક્ષઃ કૃતાકૃતઃ.
ચતુરાત્મા ચતુર્વ્યૂહશ્ચતુર્દંષ્ટ્રશ્ચતુર્ભુજઃ ……….૧૫

ભ્રાજિષ્ણુર્ભોજનં ભોક્તા સહિષ્ણુર્જગદાદિજઃ.
અનગો વિજયો જેતા વિશ્વયોનિઃ પુનર્વસુઃ ……૧૬

ઉપેન્દ્રો વામનઃ પ્રાંશુરમોઘઃ શુચિરૂર્જિતઃ.
અતીન્દ્રઃ સંગ્રહઃ સર્ગો ધૃતાત્મા નિયમો યમઃ …..૧૭

વેદ્યો વૈદ્યઃ સદાયોગી વીરહા માધવો મધુઃ.
અતીન્દ્રિયો મહામાયો મહોત્સાહો મહાબલઃ……૧૮

મહાબુદ્ધિર્મહાવીર્યો મહાશક્તિર્મહાદ્યુતિઃ.
અનિર્દેશ્યવપુઃ શ્રીમાનમેયાત્મા મહાદ્રિધૃક્‌ ….૧૯

મહેષ્વાસો મહીભર્તા શ્રીનિવાસઃ સતાં ગતિઃ.
અનિરુદ્ધઃ સુરાનન્દો ગોવિન્દો ગોવિદાં પતિઃ …..૨૦

મરીચિર્દમનો હંસઃ સુપર્ણો ભુજગોત્તમઃ.
હિરણ્યનાભઃ સુતપાઃ પદ્મનાભઃ પ્રજાપતિઃ …..૨૧

અમૃત્યુઃ સર્વદૃક્‌ સિંહઃ સંધાતા સન્ધિમાન્‌ સ્થિરઃ.
અજો દુર્ભર્ષણઃ શાસ્તા વિશ્રુતાત્મા સુરારિહા ……૨૨

ગુરુર્ગુરુતમો ધામ સત્યઃ સત્યપરાક્રમઃ.
નિમિષોઽનિમિષઃ સ્રગ્વી વાચસ્પતિરુદારધીઃ …..૨૩

અગ્રણીર્ગ્રામણીઃ શ્રીમાન્‌ ન્યાયો નેતા સમીરણઃ.
સહસ્રમૂર્ધા વિશ્વાત્મા સહસ્રાક્ષઃ સહસ્રપાત્‌ ……..૨૪

આવર્તનો નિવૃત્તાત્મા સંવૃતઃ સમ્પ્રમર્દનઃ.
અહઃ સંવર્તકો વહ્નિરનિલો ધરણીધરઃ ……..૨૫

સુપ્રસાદઃ પ્રસન્નાત્મા વિશ્વધૃગ્‌ વિશ્વભુગ્‌ વિભુઃ.
સત્કર્તા સત્કૃતઃ સાધુર્જહ્નુર્નારાયણો નરઃ ……૨૬

અસંખ્યેયોઽપ્રમેયાત્મા વિશિષ્ટઃ શિષ્ટકૃચ્છુચિઃ.
સિદ્ધાર્થઃ સિદ્ધસંકલ્પઃ સિદ્ધિદઃ સિદ્ધિસાધનઃ ……૨૭

વૃષાહી વૃષભો વિષ્ણુર્વૃષપર્વા વૃષોદરઃ.
વર્ધનો વર્ધમાનશ્ચ વિવિક્તઃ શ્રુતિસાગરઃ …..૨૮

સુભુજો દુર્ધરો વાગ્મી મહેન્દ્રો વસુદો વસુઃ.
નૈકરૂપો બૃહદ્રૂપઃ શિપિવિષ્ટઃ પ્રકાશનઃ …….૨૯

ઓજસ્તેજોદ્યુતિધરઃ પ્રકાશાત્મા પ્રતાપનઃ.
ઋદ્ધઃ સ્પષ્ટાક્ષરો મન્ત્રશ્ચન્દ્રાંશુર્ભાસ્કરદ્યુતિઃ …..૩૦

અમૃતાંશૂદ્ભવો ભાનુઃ શશબિન્દુઃ સુરેશ્વરઃ.
ઔષધં જગતઃ સેતુઃ સત્યધર્મપરાક્રમઃ …..૩૧

ભૂતભવ્યભવન્નાથઃ પવનઃ પાવનોઽનલઃ.
કામહા કામકૃત્‌ કાન્તઃ કામઃ કામપ્રદઃ પ્રભુઃ ….૩૨

યુગાદિકૃદ્ યુગાવર્તો નૈકમાયો મહાશનઃ.
અદૃશ્યોઽવ્યક્તરૂપશ્ચ સહસ્રજિદનન્તજિત્‌ ….૩૩

ઇષ્ટોઽવિશિષ્ટઃ શિષ્ટેષ્ટઃ શિખણ્ડી નહુષો વૃષઃ.
ક્રોધહા ક્રોધકૃત્કર્તા વિશ્વબાહુર્મહીધરઃ ………..૩૪

અચ્યુતઃ પ્રથિતઃ પ્રાણઃ પ્રાણદો વાસવાનુજઃ.
અપાં નિધિરધિષ્ઠાનમપ્રમત્તઃ પ્રતિષ્ઠિતઃ …..૩૫

સ્કન્દઃ સ્કન્દધરો ધુર્યો વરદો વાયુવાહનઃ.
વાસુદેવો બૃહદ્ભાનુરાદિદેવઃ પુરન્દરઃ ……૩૬

અશોકસ્તારણસ્તારઃ શૂરઃ શૌરિર્જનેશ્વરઃ.
અનુકૂલઃ શતાવર્તઃ પદ્મી પદ્મનિભેક્ષણઃ ….૩૭

પદ્મનાભોઽરવિન્દાક્ષઃ પદ્મગર્ભઃ શરીરભૃત્‌.
મહર્દ્ધિર્ઋદ્ધો વૃદ્ધાત્મા મહાક્ષો ગરુડધ્વજઃ …..૩૮

અતુલઃ શરભો ભીમઃ સમયજ્ઞો હવિર્હરિઃ.
સર્વલક્ષણલક્ષણ્યો લક્ષ્મીવાન્‌ સમિતિઞ્જયઃ ….૩૯

વિક્ષરો રોહિતો માર્ગો હેતુર્દામોદરઃ સહઃ.
મહીધરો મહાભાગો વેગવાનમિતાશનઃ …..૪૦

ઉદ્ભવઃ ક્ષોભણો દેવઃ શ્રીગર્ભઃ પરમેશ્વરઃ.
કરણં કારણં કર્તા વિકર્તા ગહનો ગુહઃ …..૪૧

વ્યવસાયો વ્યવસ્થાનઃ સંસ્થાનઃ સ્થાનદો ધ્રુવઃ.
પરર્દ્ધિઃ પરમસ્પષ્ટસ્તુષ્ટઃ પુષ્ટઃ શુભેક્ષણઃ …..૪૨

રામો વિરામો વિરજો માર્ગો નેયો નયોઽનયઃ.
વીરઃ શક્તિમતાં શ્રેષ્ઠો ધર્મો ધર્મવિદુત્તમઃ …..૪૩

વૈકુણ્ઠઃ પુરુષઃ પ્રાણઃ પ્રાણદઃ પ્રણવઃ પૃથુઃ.
હિરણ્યગર્ભઃ શત્રુઘ્નો વ્યાપ્તો વાયુરધોક્ષજઃ ….૪૪

ઋતુઃ સુદર્શનઃ કાલઃ પરમેષ્ઠી પરિગ્રહઃ.
ઉગ્ર સંવત્સરો દક્ષો વિશ્રામો વિશ્વદક્ષિણઃ …..૪૫

વિસ્તારઃ સ્થાવરસ્થાણુઃ પ્રમાણં બીજમવ્યયમ્‌.
અર્થોઽનર્થો મહાકોશો મહાભોગો મહાધનઃ …..૪૬

અનિર્વિણ્ણઃ સ્થવિષ્ઠોઽભૂર્ધર્મયૂપો મહામખઃ.
નક્ષત્રનેમિર્નક્ષત્રી ક્ષમઃ ક્ષામઃ સમીહનઃ ……૪૭

યજ્ઞ ઇજ્યો મહેજ્યશ્ચ ક્રતુઃ સત્રં સતાં ગતિઃ.
સર્વદર્શી વિમુક્તાત્મા સર્વજ્ઞો જ્ઞાનમુત્તમમ્‌ ….૪૮

સુવ્રતઃ સુમુખઃ સૂક્ષ્મઃ સુઘોષઃ સુખદઃ સુહૃત્‌.
મનોહરો જિતક્રોધો વીરબાહુર્વિદારણઃ …..૪૯

સ્વાપનઃ સ્વવશો વ્યાપી નૈકાત્મા નૈકકર્મકૃત્‌.
વત્સરો વત્સલો વત્સી રત્નગર્ભો ધનેશ્વરઃ …..૫૦

ધર્મગુબ્‌ ધર્મકૃદ્ ધર્મી સદસત્ક્ષરમક્ષરમ્‌.
અવિજ્ઞાતા સહસ્રાંશુર્વિધાતા કૃતલક્ષણઃ ……૫૧

ગભસ્તિનેમિઃ સત્ત્વસ્થઃ સિંહો ભૂતમહેશ્વરઃ.
આદિદેવો મહાદેવો દેવેશો દેવભૃદ્ગુરુઃ …….૫૨

ઉત્તરો ગોપતિર્ગોપ્તા જ્ઞાનગમ્યઃ પુરાતન.
શરીરભૂતભૃદ્ ભોક્તા કપીન્દ્રો ભૂરિદક્ષિણઃ …..૫૩

સોમપોઽમૃતપઃ સોમઃ પુરુજિત્‌ પુરુસત્તમઃ.
વિનયો જયઃ સત્યસંધો દાશાર્હઃ સાત્વતાં પતિઃ ….૫૪

જીવો વિનયિતા સાક્ષી મુકુન્દોઽમિતવિક્રમઃ.
અમ્ભોનિધિરનન્તાત્મા મહોદધિશયોઽન્તકઃ ….૫૫

અજો મહાર્હઃ સ્વાભાવ્યો જિતામિત્રઃ પ્રમોદનઃ.
આનન્દો નન્દનો નન્દઃ સત્યધર્મા ત્રિવિક્રમઃ ….૫૬

મહર્ષિઃ કપિલાચાર્યઃ કૃતજ્ઞો મેદિનીપતિઃ.
ત્રિપદસ્ત્રિદશાધ્યક્ષો મહાશ્રૃંઙઃ કૃતાન્તકૃત્‌ ……૫૭

મહાવરાહો ગોવિન્દઃ સુષેણઃ કનકાઙદી.
ગુહ્યો ગભીરો ગહનો ગુપ્તશ્ચક્રગદાધરઃ ……૫૮

વેધાઃ સ્વાઙોઽજિતઃ કૃષ્ણો દૃઢઃ સંકર્ષણોઽચ્યુતઃ.
વરુણો વારુણો વૃક્ષઃ પુષ્કરાક્ષો મહામનાઃ ……૫૯

ભગવાન્‌ ભગહાનન્દી વનમાલી હલાયુધઃ.
આદિત્યો જ્યોતિરાદિત્યઃ સહિષ્ણુર્ગતિસત્તમઃ …..૬૦

સુધન્વા ખણ્ડપરશુર્દારુણો દ્રવિણપ્રદઃ.
દિવિસ્પૃક્‌ સર્વદૃગ્‌ વ્યાસો વાચસ્પતિરયોનિજઃ …..૬૧

ત્રિસામા સામગઃ સામ નિર્વાણં ભેષજં ભિષક્‌.
સંન્યાસકૃચ્છમઃ શાન્તો નિષ્ઠા શાંતિઃ પરાયણમ્‌ ….૬૨

શુભાઙઃ શાન્તિદઃ સ્રષ્ટા કુમુદઃ કુવલેશયઃ.
ગોહિતો ગોપતિર્ગોપ્તા વૃષભાક્ષો વૃષપ્રિયઃ …૬૩

અનિવર્તી નિવૃત્તાત્મા સંક્ષેપ્તા ક્ષેમકૃચ્છિવઃ.
શ્રીવત્સવક્ષાઃ શ્રીવાસઃ શ્રીપતિઃ શ્રીમતાં વરઃ …..૬૪

શ્રીદઃ શ્રીશઃ શ્રીનિવાસઃ શ્રીનિધિઃ શ્રીવિભાવનઃ.
શ્રીધરઃ શ્રીકરઃ શ્રેયઃ શ્રીમાઁલ્લોકત્રયાશ્રયઃ ……..૬૫

સ્વક્ષઃ સ્વઙ શતાનન્દો નન્દિર્જ્યોતિર્ગણેશ્વરઃ.
વિજિતાત્મા વિધેયાત્મા સત્કીર્તિશ્છિન્નસંશયઃ ….૬૬

ઉદીર્ણઃ સર્વતશ્ચક્ષુરનીશઃ શાશ્વતસ્થિરઃ.
ભૂશયો ભૂષણો ભૂતિર્વિશોકઃ શોકનાશનઃ ….૬૭

અર્ચિષ્માનર્ચિતઃ કુમ્ભો વિશુદ્ધાત્મા વિશોધનઃ.
અનિરુદ્ધોઽપ્રતિરથઃ પ્રદ્યુમ્નોઽમિતવિક્રમઃ ……૬૮

કાલનેમિનિહા વીરઃ શૌરિઃ શૂરજનેશ્વરઃ.
ત્રિલોકાત્મા ત્રિલોકેશઃ કેશવઃ કેશિહા હરિઃ …..૬૯

કામદેવઃ કામપાલઃ કામી કાન્તઃ કૃતાગમઃ.
અનિર્દેશ્યવપુર્વિષ્ણુર્વીરોઽનન્તો ધનંજયઃ ……૭૦

બ્રહ્મણ્યો બ્રહ્મકૃદ્ બ્રહ્મા બ્રહ્મ બ્રહ્મવિવર્ધનઃ.
બ્રહ્મવિદ્ બ્રાહ્મણો બ્રહ્મી બ્રહ્મજ્ઞો બ્રાહ્મણપ્રિયઃ …..૭૧

મહાક્રમો મહાકર્મા મહાતેજા મહોરગઃ.
મહાક્રતુર્મહાયજ્વા મહાયજ્ઞો મહાહવિઃ …..૭૨

સ્તવ્યઃ સ્તવપ્રિયઃ સ્તોત્રં સ્તુતિઃ સ્તોતા રણપ્રિયઃ.
પૂર્ણઃ પૂરયિતા પુણ્યઃ પુણ્યકીર્તિરનામયઃ …..૭૩

મનોજવસ્તીર્થકરો વસુરેતા વસુપ્રદઃ.
વસુપ્રદો વાસુદેવો વસુર્વસુમના હવિઃ …..૭૪

સદ્ગતિઃ સત્કૃતિઃ સત્તા સદ્ભૂતિઃ સત્પરાયણઃ.
શૂરસેનો યદુશ્રેષ્ઠઃ સન્નિવાસઃ સુયામુનઃ ……૭૫

ભૂતાવાસો વાસુદેવઃ સર્વાસુનિલયોઽનલઃ.
દર્પહા દર્પદો દૃપ્તો દુર્ધરોઽથાપરાજિતઃ ……૭૬

વિશ્વમૂર્તિર્મહામૂર્તિર્દીપ્તમૂર્તિરમૂર્તિમાન્‌.
અનેકમૂર્તિરવ્યક્તઃ શતમૂર્તિઃ શતાનનઃ ….૭૭

એકો નૈકઃ સવઃ કઃ કિં યત્‌ તત્‌ પદમનુત્તમમ્‌.
લોકબન્ધુર્લોકનાથો માધવો ભક્તવત્સલઃ ….૭૮

સુવર્ણવર્ણો હેમાઙો વરાઙશ્ચન્દનાઙદી.
વીરહા વિષમઃ શૂન્યો ઘૃતાશીરચલશ્ચલઃ …..૭૯

અમાની માનદો માન્યો લોકસ્વામી ત્રિલોકધૃક્‌.
સુમેધા મેધજો ધન્યઃ સત્યમેધા ધરાધરઃ …….૮૦

તેજોવૃષો દ્યુતિધરઃ સર્વશસ્ત્રભૃતાં વરઃ.
પ્રગ્રહો નિગ્રહો વ્યગ્રો નૈકશ્રૃઙો ગદાગ્રજઃ …૮૧

ચતુર્મૂર્તિશ્ચતુર્બાહુશ્ચતુર્વ્યૂહશ્ચતુર્ગતિઃ.
ચતુરાત્મા ચતુર્ભાવશ્ચર્વેદવિદેકપાત્‌ …..૮૨

સમાવર્તોઽનિવૃત્તાત્મા દુર્જયો દુરતિક્રમઃ.
દુર્લભો દુર્ગમો દુર્ગો દુરાવાસો દુરારિહા ……૮૩

શુભાઙો લોકસારઙઃ સુતન્તુસ્તન્તુવર્ધનઃ.
ઇન્દ્રકર્મા મહાકર્મા કૃતકર્મા કૃતાગમઃ …..૮૪

ઉદ્ભવઃ સુન્દરઃ સુન્દો રત્નનાભઃ સુલોચનઃ.
અર્કો વાજસનઃ શ્રૃઙી જયન્તઃ સર્વવિજ્જયી ….૮૫

સુવર્ણબિન્દુરક્ષોભ્યઃ સર્વવાગીશ્વરેશ્વરઃ.
મહાહ્રદો મહાગર્તો મહાભૂતો મહાનિધિઃ …..૮૬

કુમુદઃ કુન્દરઃ કુન્દઃ પર્જન્યઃ પાવનોઽનિલઃ.
અમૃતાશોઽમૃતવપુઃ સર્વજ્ઞઃ સર્વતોમુખઃ ….૮૭

સુલભઃ સુવ્રતઃ સિદ્ધઃ શત્રુજિચ્છત્રુતાપનઃ.
ન્યગ્રોધોદુમ્બરોઽશ્વત્થશ્ચાણૂરાન્ધ્રનિષૂદનઃ ….૮૮

સહસ્રાર્ચિઃ સપ્તજિહ્વઃ સપ્તૈધાઃ સપ્તવાહનઃ.
અમૂર્તિરનઘોઽચિન્ત્યો ભયકૃદ્ ભયનાશનઃ …..૮૯

અણુર્બૃહત્કૃશઃ સ્થૂલો ગુણભૃન્નિર્ગુણો મહાન્‌.
અધૃતઃ સ્વધૃતઃ સ્વાસ્યઃ પ્રાગ્વંશો વંશવર્ધનઃ ….૯૦

ભારભૃત્‌ કથિતો યોગી યોગીશઃ સર્વકામદઃ.
આશ્રમઃ શ્રમણઃ ક્ષામઃ સુપર્ણો વાયુવાહનઃ …..૯૧

ધનુર્ધરો ધનુર્વેદો દણ્ડો દમયિતા દમઃ.
અપરાજિતઃ સર્વસહો નિયન્તા નિયમો યમઃ ….૯૨

સત્ત્વવાન્‌ સાત્ત્િવકઃ સત્યઃ સત્યધર્મપરાયણઃ.
અભિપ્રાયઃ પ્રિયાર્હોઽર્હઃ પ્રિયકૃત્‌ પ્રીતિવર્ધનઃ …..૯૩

વિહાયસગતિર્જ્યોતિઃ સુરુચિર્હુતભુગ્‌ વિભુઃ.
રવિર્વિરોચનઃ સૂર્યઃ સવિતા રવિલોચનઃ …..૯૪

અનન્તો હુતભુગ્‌ ભોક્તા સુખદો નૈકજોઽગ્રજઃ.
અનિર્વિણ્ણઃ સદામર્ષી લોકાધિષ્ઠાનમદ્ભુતઃ …..૯૫

સનાત્‌ સનાતનતમઃ કપિલઃ કપિરપ્યયઃ સ્વસ્તિદઃ.
સ્વસ્તિકૃત્‌ સ્વસ્તિ સ્વસ્તિભુક્‌ સ્વસ્તિદક્ષિણઃ …..૯૬

અરૌદ્રઃ કુણ્ડલી ચક્રી વિક્રમ્યૂર્જિતશાસનઃ.
શબ્દાતિગઃ શબ્દસહઃ શિશિરઃ શર્વરીકરઃ …….૯૭

અક્રૂરઃ પેશલો દક્ષો દક્ષિણઃ ક્ષમિણાં વરઃ.
વિદ્વત્તમો વીતભયઃ પુણ્યશ્રવણકીર્તનઃ ……૯૮

ઉત્તરણો દુષ્કૃતિહા પુણ્યો દુઃસ્વપ્રનાશનઃ.
વીરહા રક્ષણઃ સન્તો જીવનઃ પર્યવસ્થિતઃ ….૯૯

અનન્તરૂપોઽનન્તશ્રીર્જિતમન્યુર્ભયાપહઃ.
ચતુરસ્રો ગભીરાત્મા વિદિશો વ્યાદિશો દિશઃ …૧૦૦

અનાદિર્ભૂર્ભુવો લક્ષ્મીઃ સુવીરો રુચિરાઙદઃ.
જનનો જનજન્માદિર્ભીમો ભીમપરાક્રમઃ …..૧૦૧

આધારનિલયોઽધાતા પુષ્પહાસઃ પ્રજાગરઃ.
ઊર્ધ્વગઃ સત્પથાચારઃ પ્રાણાદઃ પ્રણવઃ પણઃ …..૧૦૨

પ્રમાણં પ્રાણનિલયઃ પ્રાણભૃત્‌ પ્રાણીજીવનઃ.
તત્ત્વં તત્ત્વવિદેકાત્મા જન્મમૃત્યુજરાતિગઃ …..૧૦૩

ભૂર્ભુવઃસ્વસ્તરુસ્તારઃ સવિતા પ્રપિતામહઃ.
યજ્ઞો યજ્ઞપતિર્યજ્વા યજ્ઞાઙો યજ્ઞવાહનઃ ….૧૦૪

યજ્ઞભૃદ્ યજ્ઞકૃદ્ યજ્ઞી યજ્ઞભુગ્‌ યજ્ઞસાધનઃ.
યજ્ઞાન્તકૃદ્ યજ્ઞગુહ્યમન્નમન્નાદ એવ ચ ……૧૦૫

આત્મયોનિઃ સ્વયંજાતો વૈખાનઃ સામગાયનઃ.
દેવકીનંદનઃ સૃષ્ટા ક્ષિતીશઃ પાપનાશનઃ …..૧૦૬

શઙ્ખભૃન્નન્દકી ચક્રી શાર્ઙધન્વા ગદાધરઃ.
રથાઙપાણિરક્ષોભ્યઃ સર્વપ્રહરણાયુધઃ ….૧૦૭

સર્વપ્રહરણાયુધ ૐ નમ ઇતિ……૧૦૮

(અહીં વિષ્ણુ ના “સહસ્ત્રનામ” પુરા થાય છે)

ફળશ્રુતિ

ઇતીદં કીર્તનીયસ્ય કેશવસ્ય મહાત્મનઃ.
નામ્નાં સહસ્રં દિવ્યાનામશેષેણ પ્રકીર્તિતમ્‌ ….૧

ય ઇદં શ્રૃૃણુયાન્નિત્યં યશ્ચાપિ પરિકીર્તયેત્‌.
નાશુભં પ્રાપ્નુયાત્‌ કિંશ્ચિત્‌ સોઽમુત્રેહ ચ માનવઃ ….૨

વેદાંતગો બ્રાહ્મણઃ સ્યાત્‌ ક્ષત્રિયો વિજયી ભવેત્‌.
વૈશ્યો ધનસમૃદ્ધઃ સ્યાચ્છૂદ્રઃ સુખમવાપ્રુયાત્‌ …..૩

ધર્માર્થી પ્રાપ્નુયાદ્ ધર્મમર્થાર્થી ચાર્થમાપ્નુયાત્‌.
કામાનવાપ્નુયાત્‌ કામી પ્રજાર્થી પ્રાપ્નુયાત્‌ પ્રજામ્‌ ….૪

ભક્તિમાન્‌ યઃ સદોત્થાય શુચિસ્તદગ્તમાનસઃ.
સહસ્રં વાસુદેવસ્ય નામ્નામેતત્‌ પ્રકીર્તયેત્‌ …..૫

યશઃ પ્રાપ્નોતિ વિપુલં જ્ઞાતિપ્રાધાન્યમેવ ચ.
અચલાં શ્રિયમાપ્નોતિ શ્રેયઃ પ્રાપ્નોત્યનુત્તમમ્‌ ….૬

ન ભયં કચિદાપ્નોતિ વીર્યં તેજશ્ચ વિંદતિ.
ભવત્યરોગો દ્યુતિમાન્‌ બલરૂપગુણાન્વિતઃ …..૭

રોગાર્તો મુચ્યતે રોગાદ્ બદ્ધો મુચ્યેત બન્ધનાત્‌.
ભયાન્મુચ્યેત ભીતસ્તુ મુચ્યેતાપન્ન આપદઃ ……૮

દુર્ગાણ્યતિતરત્યાશુ પુરુષઃ પુરુષોત્તમમ્‌.
સ્તુવન્‌ નામસહસ્રેણ નિત્યં ભક્તિસમન્વિતઃ …..૯

વાસુદેવાશ્રયો મર્ત્યો વાસુદેવપરાયણઃ.
સર્વપાપવિશુદ્ધાત્મા યાતિ બ્રહ્મ સનાતનમ્‌ ….૧૦

ન વાસુદેવભક્તાનામશુભં વિદ્યતે ક્વચિત્‌.
જન્મમૃત્યુજરાવ્યાધિભયં નૈવોપજાયતે …..૧૧

ઇમં સ્તવમધીયાનઃ શ્રદ્ધાભક્તિસમન્વિતઃ.
યુજ્યેતાત્મસુખક્ષાન્તિશ્રીધૃતિસ્મૃતિકીર્તિભિઃ ….૧૨

ન ક્રોધો ન ચ માત્સર્યં ન લોભો નાશુભા મતિઃ.
ભવન્તિ કૃતપુણ્યાનાં ભક્તાનાં પુરુષોત્તમે ……૧૩

દ્યૌઃ સચન્દ્રાર્કનક્ષત્રા ખં દિશો ભૂર્મહોદધિઃ.
વાસુદેવસ્ય વીર્યેણ વિધૃતાનિ મહાત્મનઃ ……૧૪

સસુરાસુરગન્ધર્વં સયક્ષોરગરાક્ષસમ્‌.
જગદ્ વશે વર્તતેદં કૃષ્ણસ્ય સચરાચરમ્‌ …..૧૫

ઇન્દ્રિયાણિ મનો બુદ્ધિઃ સત્ત્વં તેજો બલં ધૃતિઃ.
વાસુદેવાત્મકાન્યાહુઃ ક્ષેત્રં ક્ષેત્રજ્ઞ એવ ચ ……૧૬

સર્વાગમાનામાચારઃ પ્રથમં પરિકલ્પતે.
આચારપ્રભવો ધર્મો ધર્મસ્ય પ્રભુરચ્યુતઃ …..૧૭

ઋષયઃ પિતરો દેવા મહાભૂતાનિ ધાતવઃ.
જઙમાજઙમં ચેદં જગન્નારાયણોદ્ભવમ્‌ …….૧૮

યોગો જ્ઞાનં તથા સાંખ્યં વિદ્યાઃ શિલ્પાદિ કર્મ ચ.
વેદાઃ શાસ્ત્રાણિ વિજ્ઞાનમેતત્‌ સર્વં જનાર્દનાત્‌ …..૧૯

એકો વિષ્ણુર્મહદ્ભૂતં પૃથગ્ભૂતાન્યનેકશઃ.
ર્ત્રીલ્લોકાન્‌ વ્યાપ્ય ભૂતાત્મા ભુઙ્ક્તે વિશ્વભુગવ્યયઃ …૨૦

ઇમં સ્તવં ભગવતો વિષ્ણોર્વ્યાસેન કીર્તિતમ્‌.
પઠેદ્ ય ઇચ્છેત્‌ પુરુષઃ શ્રેયઃ પ્રાપ્તું સુખાનિ ચ ….૨૧

વિશ્વેશ્વરમજં દેવં જગતઃ પ્રભવાપ્યયમ્‌.
ભજન્તિ યે પુષ્કરાક્ષં ન તે યાન્તિ પરાભવમ્‌ ……૨૨

(નોંધ-કોઈ જગ્યાએ બીજા ૧૫ શ્લોકો ઉમેરેલા છે-કે જેમાં અર્જુન-શ્રીકૃષ્ણ નો સંવાદ વ્યાસજી એ મહાભારત માં લખેલ છે-તે શ્લોકો છે -કે જે વિષ્ણુ સસ્ત્ર નામ ના ફળ નું વર્ણન કરે છે)

ઇતિ શ્રી વિષ્ણુ સહસ્રનામ સ્તોત્રમ્‌ સંપૂર્ણમ્

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નિર્વાણષટ્કમ – Nirvana Shatkam in Gujarati with meaning

Sivohm-Shivohm-Anil Voice-4 -આત્માષ્ટકમ-Aatmshtakam-Stotra-With Gujarati Traslation

 

મનોબુદ્ધયહંકાર ચિત્તાની નાહં,
ન ચ શ્રોત્રજિહ્‌વે ન ચ ઘ્રાણ નેત્રે
ન ચ વ્યોમભૂમિ ન તેજો ન વાયુ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –1
(હું) મન -બુદ્ધિ–અહંકાર–અને ચિત્ત નથી.કર્ણ કે જિભ નથી અને નાક કે કાન નથી,
આકાશ -પૃથ્વી -અગ્નિ –વાયુ (કે જળ )નથી(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું )

ન ચ પ્રાણસંજ્ઞો ન વૈ પંચવાયુ
ર્ન વા સપ્તધાતુર્ન વા પંચકોષાઃ
ન વાક્‌પાણિપાદં ન ચોપસ્થપાયૂ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –2
(હું) પ્રાણ(નામે જે ઓળખાય છે તે) નથી કે પાંચ વાયુ નથી,સાત ધાતુ કે પાંચ કોશ નથી
હાથ ,પગ ,ઉપસ્થ અને પાયુ નથી (કર્મેન્દ્રિયો)(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું )

ન મે દ્વેષરાગૌ ન મે લોભમોહૌ,
મદો નૈવ મે નૈવ માત્સર્યભાવઃ
ન ધર્મો ન ચાર્થો ન કામો ન મોક્ષઃ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –3
(મારે રાગ દ્વેષ નથી, મારે લોભ મોહ નથી,મારા માં મદ નથી અને માત્સર્યભાવ પણ નથી,
મારે માટે ધર્મ ,અર્થ ,કામ અને મોક્ષ્ નથી,(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું )

ન પુણ્યં ન પાપં ન સૌખ્યં ન દુઃખં
ન મંત્રો ન તિર્થં ન વેદા ન યજ્ઞાઃ
અહં ભોજનં નૈવ ભોજયં ન ભોકતા
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –4
(મારે પુણ્ય નથી ,પાપ નથી ,સુખ નથી,દુખ નથી,મંત્ર નથી ,તીર્થ નથી ,વેદ નથી ,યજ્ઞ નથી,
હું ભોજન નથી ,ભોજ્ય નથી અને ભોક્તા પણ નથી,(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું)

ન મે મૃત્યુ શંકા ન મે જાતિભેદઃ
પિતા નૈવ મે નૈવ માતા ન જન્મ
ન બન્ધુર્ન મિત્ર ગુરૂર્ નૈવ શિષ્યઃ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –5
(મને મૃત્યુ નો ભય નથી ,જાતિ ના ભેદ થી હું પર છું,મારે માતા નથી ,મારે પિતા નથી કે જન્મ નથી,
મારે બંધુ નથી,મિત્ર નથી,ગુરુ નથી અને શિષ્ય નથી,(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું )

અહં નિર્વિકલ્પો નિરાકાર રૂપો
વિભુ વ્યાપ્ય સર્વત્ર સર્વેન્દ્રિયાણામ્
સદામે સમત્વં ન મુક્તિ ન બંન્ઘઃ
ચિદાનંદ રૂપ: શિવોSહં શિવોSહમ્ –6
(હું) વિકલ્પ રહિત છું ,નિરાકાર રૂપ છું,વિભુ છું ,સર્વત્ર સર્વ ઇન્દ્રિયો માં વ્યાપ્ત છું,
મારા માં સદા સમત્વ છે-બંધન કે મુક્તિ ,બંને થી મુક્ત છું,(હું) ચિત્ આનંદ (સ્વ)રૂપ શિવ છું-હું શિવ છું)
——————————————————–
Shivohm-Shivohm-Atmashtakam-In English with Translation

Mano budhyahankara chithaa ninaham,
Na cha srothra jihwe na cha graana nethrer,
Na cha vyoma bhoomir na thejo na vayu,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(Neither am I mind, nor intellect,Nor ego, nor thought,
Nor am I ears or the tongue or the nose or the eyes,
Nor am I earth or sky or air or the light,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Na cha praana sangno na vai pancha vaayuh,
Na vaa saptha dhathur na va pancha kosa,
Na vak pani padam na chopastha payu,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(Neither am I the movement due to life,
Nor am I the five airs, nor am I the seven elements constituting the body (Dhatu),
Nor am I the five sheaths which invest the soul,
Nor am I voice or hands or feet or other organs,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Na me dwesha raghou na me lobha mohou,
Madho naiva me naiva matsarya bhava,
Na dharmo na cha artha na kamo na moksha,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(I am not the state of envy and passion or the emotions of hatred, greed and attachment,
Neither I am intoxication nor I am the emotion of jealousy,
And I am not even the four Purushartha — Dharma, Artha, Kama, and Moksha,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Na punyam na paapam na soukhyam na dukham,
Na manthro na theertham na veda na yagna,
Aham bhojanam naiva bhojyam na bhoktha,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(I am not a good deed(Punya), or a Sinful deed(Paapa), or well-being/comfort(Saukhya), or Grief(Dukha),
Neither I am holy chants (Mantra) or holy Shrine (Teertha) nor I am the Veda or the Sacrifice and Oblation,
I am neither food or the consumer who consumes food,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Na mruthyur na sankha na me jathi bhedha,
Pitha naiva me naiva matha na janma,
Na bhandhur na mithram gurur naiva sishyah,
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(I do not have death or doubts or distinction of caste,
I do not have either father or mother or even birth,
And I do not have relations or friends or teacher or students,
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

Aham nirvi kalpo nirakara roopo,
Vibhuthwascha sarvathra sarvendriyanaam,
Na chaa sangatham naiva mukthir na meyah
Chidananada Roopa Shivoham, Shivoham.

(I am free from changes, and lack all the qualities and form,
I envelope all forms from all sides and am beyond the sense-organs,
I am always in the state of equality — there is no liberation (Mukti) or captivity (Bandha),
I am Shiva, I am Shiva, the nature of Bliss.)

– Sri Jagadguru Adi Shankaracharya

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